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सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए जिन्ना ‘महान’ और देश के साधु-संत ‘चिल्लमजीवी’

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समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव चुनाव के दौरान जिन्ना का इतिहास पढ़ रहे हैं। इसलिए ‘जिन्ना प्रेम’ में इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें देश के साधु-संत ‘चिल्लमजीवी’ दिखाई दे रहे हैं। बुधवार (17 नवंबर, 2021) को यूपी के गाजीपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर अपनी ‘विजय यात्रा’ के चौथे चरण के दौरान अखिलेश यादव ने संतों को ‘चिल्लमजीवी’ और ‘एक रंग वाले’ कहकर संबोधित किया था। इस विवादित बयान को लेकर देश के संतों ने नाराजगी जतायी है। अखिल भारतीय संत समिति ने अखिलेश यादव से माफी मांगने को कहा है। समिति के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अखिलेश यादव से कहा कि या तो वो संतों से माफी मांगे या संतों के गुस्से का सामना करने के लिए तैयार रहें।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि बीजेपी और उसके नेतृत्व को निशाना बनाने के लिए सपा अध्यक्ष ने भगवाधारी संतों और उनकी बिरादरी का अपमान किया है। स्वामी ने अखिलेश यादव की टिप्पणी के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी बचाव किया। उन्होंने ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सनातन धर्म के एक गोरक्ष पीठ के प्रमुख हैं, जिसकी प्राचीन काल से पूजा और सम्मान किया जाता है। किसी को भी राजनीति के लिए उन्हें निशाना बनाने का अधिकार नहीं है। वो भी सिर्फ इसलिए कि वो मुख्यमंत्री बन गए हैं। अखिलेश यादव को छोटे चुनावी लाभ के लिए साधुओं को राजनीतिक युद्ध के मैदान में घसीटने से बचना चाहिए।

इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बीते 31 अक्टूबर को अपनी विजय रथ यात्रा लेकर हरदोई में थे। इस दिन लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती थी। सपा अध्यक्ष ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए सरदार पटेल को याद किया लेकिन बखान भारत विभाजन के मुख्य सूत्रधार और पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का कर बैठे। अखिलेश ने भारत की आजादी में जिन्ना की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें महात्मा गांधी और सरदार पटेल के बराबर का महापुरुष बता डाला।

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ। बीजेपी, कांग्रेस से लेकर असदुद्दीन ओवैसी और तमाम मुस्लिम धर्मगुरुओं ने अखिलेश यादव की तीखी आलोचना की। लेकिन वह अपने बयान पर कायम हैं। शनिवार को लखनऊ सपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि वह मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर दिए अपने बयान पर अडिग हैं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि जो उनके बयान की आलोचना कर रहे उन्हें इतिहास का ज्ञान नहीं। उन्होंने जिन्ना को लेकर कही गई बात को समझने के लिए इतिहास पढ़ने की सलाह दी। 

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