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मोदी सरकार के खिलाफ फुल ऑन प्रोपेगेंडा! फेक दावों और फर्जी अफवाहों की सुनामी!

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सोशल मीडिया के दौर में मोदी सरकार की योजनाओं, सरकारी आदेशों, सेना और देश से जुड़े बड़े मुद्दों को लेकर फर्जी दावों और भ्रामक कंटेंट की बाढ़ आ गई है। कोई दिन ऐसा नहीं गुजरता जब सोशल मीडिया पर ऐसा कोई नया दावा सामने न आए। इनका मकसद लोगों को भ्रमित करना और सरकारी पहलों को लेकर गलत धारणा पैदा करना है। सितंबर में भी ऐसे दावों की लंबी फेहरिस्त सामने आई। कहीं सरकारी योजना के नाम पर लोगों को हजारों रुपये मिलने का झांसा दिया गया, कहीं फर्जी सरकारी दस्तावेज वायरल किए गए तो कहीं AI से तैयार वीडियो और बदले हुए कंटेंट के जरिए झूठ को सच की तरह पेश करने की कोशिश हुई।

इन फर्जी दावों का निशाना सिर्फ आम लोग नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं और संस्थाओं पर जनता का भरोसा भी है। भ्रामक कंटेंट को बार-बार वायरल कर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जाती है, जिसमें झूठी जानकारी वास्तविक सरकारी फैसले या आधिकारिक सूचना जैसी दिखाई देने लगे। खासकर AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है।

सितंबर में हुए Fact Check से ऐसे कई वायरल दावों की हकीकत सामने आई और उन्हें पूरी तरह गलत पाया गया। ये पड़ताल साफ संकेत देती है कि सोशल मीडिया पर वायरल हर दावे को सच मान लेना खतरनाक हो सकता है। सरकारी योजनाओं, आदेशों और देशहित से जुड़ी किसी भी सनसनीखेज खबर पर भरोसा करने और उसे शेयर करने से पहले उसकी पूरी पड़ताल बहुत जरूरी है।  

15 पश्चिम बंगाल के Anti-Goonda Bill को राष्ट्रपति द्वारा लौटाने का दावा भ्रामक

मीडिया और सोशल मीडिया में दावा किया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल के Anti-Goonda Bill को राज्य सरकार के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है।

PIB Fact Check ने इसे भ्रामक और गलत बताया। गृह मंत्रालय के स्पष्टीकरण के अनुसार बिल अभी जांच के अधीन है और राष्ट्रपति ने इसे राज्य सरकार को वापस नहीं किया है।

14 पीएम मोदी के नाम पर पुराने नोट-सिक्कों की खरीद का फर्जी दावा वायरल

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुराने नोट और सिक्के खरीदने की घोषणा किए जाने का दावा किया जा रहा है। PIB Fact Check ने इन दावों को फर्जी बताया है। PIB के मुताबिक, ये वीडियो AI तकनीक (डीपफेक) की मदद से बनाए गए हैं और प्रधानमंत्री ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। PIB ने लोगों से ऐसे भ्रामक वीडियो या संदिग्ध लिंक को शेयर या फॉरवर्ड नहीं करने की अपील की है। सरकारी योजनाओं की सही जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाने की सलाह दी गई है।

13 बेटियों के जन्म पर ₹1-2 लाख देने का दावा फर्जी

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि सरकार एक बेटी के जन्म पर ₹1 लाख और दो बेटियों के जन्म पर ₹2 लाख की आर्थिक सहायता दे रही है। यह दावा Facebook पेज ‘Extra Yojana’ के जरिए वायरल किया गया।

PIB Fact Check ने इस दावे को फर्जी बताया है। PIB के मुताबिक, वायरल वीडियो डीपफेक तकनीक से तैयार किया गया है और केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।

PIB ने लोगों को ऐसे भ्रामक वीडियो और दावों से सावधान रहने तथा बिना पुष्टि किए उन्हें शेयर या फॉरवर्ड नहीं करने की सलाह दी है।

12 UPI शुल्क से पहले ATM में ज्यादा कैश भरने का दावा फर्जी

एक अखबार की कथित क्लिपिंग सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें दावा था कि UPI शुल्क लागू होने से पहले बैंकों को ATM में अतिरिक्त नकदी भरने के निर्देश दिए गए हैं।

PIB Fact Check ने इस दावे को फर्जी बताया और कहा कि RBI या वित्त मंत्रालय ने बैंकों को ऐसे कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं।

11 ‘National Student Laptop Scheme 2026’ का दावा फिर फर्जी

मुफ्त लैपटॉप के नाम से एक और संदेश WhatsApp और सोशल मीडिया पर तेजी से फैला। इसमें ‘National Student Laptop Scheme 2026’ के तहत आवेदन मांगे जाने का दावा किया गया।

PIB Fact Check ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने इस नाम की कोई योजना शुरू नहीं की है और न ही छात्रों से ऐसे किसी आवेदन की मांग की गई है।

10 ‘Dak Seva Gifts’ के नाम पर ₹10,000 जीतने का झांसा

India Post के नाम से ‘Dak Seva Gifts’ संदेश वायरल हुआ। इसमें लोगों से प्रश्नावली भरने और ₹10,000 तक का इनाम जीतने का दावा किया गया।

PIB Fact Check ने इसे फर्जी बताया और स्पष्ट किया कि India Post का ऐसी किसी gift, reward या lucky draw योजना से कोई संबंध नहीं है। लोगों को संदिग्ध लिंक और वेबसाइट से बचने की सलाह दी गई।

09 भारतीय राजदूत का AI-एडिटेड वीडियो

भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरिश पर्वतनेनी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्हें कथित तौर पर इजरायल को भारत के रक्षा निर्यात पर बयान देते हुए दिखाया गया।

PIB Fact Check ने वीडियो को वास्तविक नहीं माना। मूल वीडियो और उसके आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट की जांच में कथित बयान नहीं मिला। वीडियो में AI/डिजिटल हेरफेर के संकेत भी पाए गए।

08 पूर्व CDS अनिल चौहान की गिरफ्तारी का फर्जी दावा

सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान को उनके आवास से 51.5 किलोग्राम ड्रग्स बरामद होने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। PIB Fact Check ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया।

पड़ताल में पाया गया कि वायरल वीडियो का जनरल अनिल चौहान से कोई संबंध नहीं था। वह दिसंबर 2021 में जम्मू-कश्मीर में हुए एक आतंकी हमले की पुरानी फुटेज थी।

07 MiG-29 क्रैश का वीडियो निकला वीडियो गेम का फुटेज

सोशल मीडिया पर एक वीडियो को भारतीय वायुसेना के MiG-29 लड़ाकू विमान के क्रैश का बताकर शेयर किया गया। दावा था कि लैंडिंग के दौरान पायलट की गलती से विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। PIB Fact Check ने इसे फर्जी बताया। जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो असल में War Thunder नाम के वीडियो गेम का फुटेज था, जिसे वास्तविक दुर्घटना के रूप में पेश किया जा रहा था।

06 प्रधानमंत्री द्वारा चीनी राष्ट्रपति को अपना चित्र देने का दावा

BRICS Summit से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपना चित्र भेंट किया।

PIB की पड़ताल में वीडियो के दावे को गलत बताया गया। वायरल वीडियो में पुरानी घटना के दृश्यों को मौजूदा BRICS Summit के संदर्भ में पेश किया गया था।

05 सरकारी बैंकों के विलय का फर्जी ‘Gazette’

सितंबर के चर्चित फेक दस्तावेजों में एक कथित सरकारी Gazette भी शामिल रहा। इसमें दावा किया गया कि Indian Bank, Bank of Maharashtra और Central Bank of India को SBI में, Union Bank, Bank of India और Punjab & Sind Bank को PNB में तथा Canara Bank, Indian Overseas Bank और UCO Bank को Bank of Baroda में मिलाया जाएगा।

PIB Fact Check ने इस दस्तावेज को फर्जी बताया और स्पष्ट किया कि इसे वित्त मंत्रालय ने जारी नहीं किया है। दस्तावेज को आधिकारिक Gazette जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी।

04 राशन कार्ड धारकों को मुफ्त ट्रैक्टर देने का दावा

एक वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री की आवाज और वीडियो के जरिए दावा किया गया कि सभी राशन कार्ड धारकों को मुफ्त ट्रैक्टर दिए जाएंगे।

PIB Fact Check ने इस दावे को फर्जी बताया और स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।

03 दिल्ली यूनिवर्सिटी के हॉस्टल के नाम पर भ्रामक दावा

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस का हॉस्टल ढह गया।

PIB Fact Check ने इसे भ्रामक बताया। उसके अनुसार हादसे में गिरी इमारत दिल्ली यूनिवर्सिटी का हॉस्टल नहीं, बल्कि दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में स्थित एक निजी PG आवास था।

02 तीन महीने के मुफ्त मोबाइल रिचार्ज का दावा भी फर्जी

सोशल मीडिया पर यह दावा प्रसारित हुआ कि सरकार सभी भारतीय मोबाइल यूजर्स को तीन महीने का मुफ्त रिचार्ज दे रही है।

PIB Fact Check ने इसे फर्जी बताया और लोगों को ऐसे लिंक पर निजी जानकारी साझा करने से सावधान किया।

01 श्रमिकों को ₹7,000 देने का दावा फर्जी

सितंबर की शुरुआत में सोशल मीडिया पर दावा वायरल हुआ कि श्रमिक पंजीकरण कराने पर सरकार की ओर से ₹7,000 दिए जा रहे हैं।

PIB Fact Check ने इस दावे को फर्जी बताया। ऐसे संदेशों के जरिए लोगों को आकर्षक सरकारी लाभ का झांसा देकर व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।

सितंबर के इन मामलों ने एक बार फिर दिखा दिया कि फेक न्यूज सिर्फ एक झूठा दावा नहीं, बल्कि देश को कमजोर करने वाला डिजिटल हथियार बन सकती है। कभी सरकारी योजना के नाम पर लालच, कभी फर्जी दस्तावेज, कभी पुराने वीडियो और कभी AI-डीपफेक के जरिए लोगों के सामने झूठ को आधिकारिक सच की तरह पेश करने की कोशिश की गई। ऐसे कंटेंट का असर सिर्फ एक व्यक्ति के भ्रमित होने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे सरकारी संस्थाओं, योजनाओं और देश से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी अनावश्यक भ्रम पैदा होता है।

सितंबर के इन फर्जी दावों की पड़ताल ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। वायरल होना किसी खबर के सच होने की गारंटी नहीं है और आकर्षक सरकारी लाभ, सनसनीखेज वीडियो या दिखने में असली दस्तावेज उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं हैं। खासकर AI के दौर में आंखों देखी और कानों सुनी बात पर भी तुरंत भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।

इसलिए जरूरत सिर्फ फेक दावों का पर्दाफाश करने की नहीं, बल्कि हर नागरिक को डिजिटल रूप से सतर्क बनाने की है। कोई भी सरकारी घोषणा, योजना, आदेश या देश से जुड़ी बड़ी खबर सामने आए तो उसे आगे बढ़ाने से पहले आधिकारिक स्रोत से जांचना जरूरी है। एक क्लिक से अफवाह फैल सकती है, लेकिन एक मिनट की पड़ताल उस अफवाह को वहीं रोक सकती है।

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