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डिजिटल प्रतिभाओं के लिए भारत बना सबसे बड़ा केंद्र

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एक सर्वे में कहा गया है कि विश्व की 56 प्रतिशत औसत की तुलना में भारत में 76 प्रतिशत के साथ डिजिटल प्रतिभाएं उपलब्ध हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत, ब्रिटेन और जर्मनी में सबसे ज्यादा डिजिटल प्रतिभा की उपलब्धता है। कैपेगिनिनी और लिंक्डइन सर्वेक्षण के मुताबिक, “डिजिटल प्रतिभा का परिदृश्य भारत में 76% पर डिजिटल प्रतिभा के अनुपात में सबसे अधिक है” भारत के बाद इटली में 66 प्रतिशत, स्पेन में 65 प्रतिशत, ब्रिटेन में 62 प्रतिशत, नीदरलैंड 61 प्रतिशत और अमेरिका में 55 प्रतिशत डिजिटल प्रतिभा की उपलब्धता है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत से 47 प्रतिशत प्रतिभाएं अमेरिका, 14 प्रतिशत ब्रिटेन, 6 प्रतिशत संयुक्त अरब अमीरात में पलायन कर रही हैं।

डिजिटल इंडिया में कौशल विकास
डिजिटल इंडिया की योजना से युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर पैदा हुए हैं। देश में पहली बार मोदी सरकार ने ही स्किल डेवलपमेंट यानी कौशल विकास को लेकर एक समग्र और राष्ट्रीय नीति तैयार की। इसके लिए 21 मंत्रालयों और 50 विभागों में फैले कौशल विकास के कार्य को विशेष तौर पर गठित हुए कौशल विकास मंत्रालय के अधीन लाया गया। 12,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू हुई प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चार साल में एक करोड़ युवकों को प्रशिक्षित करना है। कौशल विकास के तहत अब तक 56 लाख से ज्यादा युवा प्रशिक्षित किये जा चुके हैं जिनमें से करीब 24 लाख अपने हुनर से जुड़े क्षेत्र में रोजगार पा चुके हैं।

डिजिटल वर्ल्ड में डिजिटल इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब डिजिटल इंडिया कंसेप्ट सबके सामने रखा तो अधिकतर लोगों ने इसे असंभव बताया, लेकिन पूरा विश्व जहां डिजिटल क्रांति की तरफ बढ़ रहा है तो भारत इसमें पीछे न रह जाए इसे देखते हुए प्रधानमंत्री ने इसे पूरा करने को ठाना। दरअसल मोदी सरकार की मंशा है कि डिजिटल इंडिया के माध्यम से लोगों को दिन-प्रतिदिन के कार्यों में सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसके तहत सरकार का पहला लक्ष्य है घर-घर तक ब्रॉडबैंड हाइवे के जरिये इंटरनेट पहुंचाना। दूसरा लक्ष्य है हर हाथ को फोन देना, सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। पीसीओ के तर्ज पर पब्लिक इंटरनेट एक्सेस प्वाइंट पंचायतों में बनाया जाना इसका तीसरा लक्ष्य है और इसपर भी कार्य शुरू है।

ढाई लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने का लक्ष्य
केंद्र सरकार देश के सभी ग्राम पंचायतों को इंटरनेट सेवा से जोड़ने जा रही है। इसके लिए भारत नेट योजना के तहत सभी ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इस योजना के तहत देश के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को अगले साल 2018 के मध्य तक ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ देने का लक्ष्य है। जुलाई 2017 तक इस योजना के तहत एक लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले तीन वर्षों में 210,000 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर का जाल फैल चुका है। डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम के तहत आनेवाले तीन वर्षों में देश के छह करोड़ परिवारों को डिजिटल साक्षरता में सक्षम बनाया जायेगा

डिजिटल पेमेंट
भ्रष्टाचार से निपटने, पारदर्शी और प्रभावी शासन उपलब्ध कराने और गरीब-अमीर के बीच खाई को पाटने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया का कंसेप्ट सामने रखा है। डिजिटल पेमेंट को प्रचलन में लाना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म जेफरीज ने एक रिपोर्ट में कहा है कि बैंक उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल पेमेंट बढ़ा है।

40 प्रतिशत बढ़े NEFT
जेफरीज के अनुसार नोटबंदी के बाद बैंक उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल पेमेंट बढ़ा है। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (NEFT) में 30 प्रतिशत की बढ़त हुई है। प्रति लेनेदेन के हिसाब से भी NEFT में 10 प्रतिशत की बढ़त हुई है। इस तरह कुल मिलाकर NEFT में 40 प्रतिशत की बढ़त हुई है।

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IMPS में 100 प्रतिशत की वृद्धि
जेफरीज के रिपोर्ट के अनुसार IMPS में भी बढ़त देखने को मिली है। इसके तहत 24X7 के लेनेदेन की उपलब्धता और आकर्षक पेमेंट्स सिस्टम की वजह से इसमें अभी भी 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के बाद प्वाइंट ऑफ सेल (POS) मशीनों पर भुगतान तीन गुना बढ़ा है।

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कार्ड स्वाइप भुगतान में बढ़ोतरी
08 नवंबर, 2016 को डिमोनिटाइजेशन के बाद कार्ड स्वाइप कर भुगतान करने में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) और सरकार की तरफ से लाए गए BHIM मोबाइल ऐप का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। वहीं क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में भी 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई है।

कैशलेस ट्रांजेक्शन और मोदी के लिए चित्र परिणाम

Rupay का इस्तेमाल बढ़ा
जेफरीज के अनुसार ई-कॉमर्स के लिए Rupay का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके साथ ही ई-कॉमर्स पर किए जाने वाला खर्च भी दोगुना से अधिक बढ़ा है। गौरतलब है कि Rupay वीजा और मास्टरकार्ड की ही तरह घरेलू कार्ड पेमेंट सिस्टम है। प्रधानमंत्री द्वारा डिजिटल सोसाइटी बनाने के आह्वान का देश के लोगों पर असर हो रहा है अब इसके प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आ रहे हैं।

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23 गुना बढ़ गए डिजिटल ट्रांजेक्शन
नीति आयोग के मुताबिक मार्च 2017 में 63,80,000 डिजिटल ट्रांजेक्शन्स हुए जिनमें 2,425 करोड़ रुपयों का लेनदेन हुआ। नवंबर 2016 से अगर इसकी तुलना की जाए तो उस वक्त 2,80,000 डिजिटल लेनदेन हो रहे थे जिनमें 101 करोड़ रुपयों का लेनदेन हुआ था। यानि इसमें 23 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जाहिर है पांच महीने में बढ़ोतरी दर्शाता है कि लोग डिजिटल ट्रांजेक्शन्स के साथ सहज होते जा रहे हैं।

लेस कैश व्यवस्था बनाना उद्देश्य
रिजर्व बैंक के अनुसार 4 अगस्त तक लोगों के पास 14,75,400 करोड़ रुपये की करेंसी सर्कुलेशन में थे। जो वार्षिक आधार पर 1,89,200 करोड़ रुपये की कमी दिखाती है। जबकि वार्षिक आधार पर पिछले साल 2,37,850 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई थी। इस प्रकार, बिना किसी प्रतिबंध के, नोटबंदी के बाद कैश का प्रचलन कम हो रहा है।

मोबाइल वॉलेट लेन-देन में भी बढ़ोतरी
एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक यह रफ्तार आनेवाले दिनों में और तेज होगी। कंसल्टेंसी कंपनी डिलॉयट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सालाना 126 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए मूल्य के हिसाब से मोबाइल वॉलेट से लेनदेन 2022 तक 32,000 अरब रुपये पर पहुंच जाएगा। मोबाइल वॉलेट से लेनदेन की संख्या में हर साल 94 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है।

मोबाइल वॉलेट के लिए चित्र परिणाम

एक अरब+एक अरब+एक अरब विजन
जनधन, आधार और मोबाइल यानि JAM की ‘त्रिमूर्ति’ से सामाजिक क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार की निगाह अब एक अरब-एक अरब-एक अरब पर है। यानि एक अरब आधार नंबर जो एक अरब बैंक खातों और एक अरब मोबाइल फोन से जुड़े हों। इससे सभी भारतीय साझा वित्तीय, आर्थिक और डिजिटल क्षेत्र में आ चुके हैं। यह कुछ उसी तरीके से है जिससे वस्तु एवं सेवा कर (GST) से एकीकृत बाजार बना है।

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73 करोड़ अकाउंट JAM योजना से जुड़े
जनधन, आधार और मोबाइल यानि (JAM)ने देश में फाइनेंशियल, इकोनॉमिक और डिजिटल क्रांति लाने का काम किया है। अभी तक 52.4 करोड़ आधार, 73.62 करोड़ अकाउंट्स से जोड़े जा चुके हैं। यह संख्या अब जल्दी ही एक अरब तक पहुंच जाएगी। यानी एक अरब आधार, मोबाइल और अकाउंट्स से जुड़ जाएंगे। जाहिर है मात्र इस कदम से देश के लोग स्वत: फाइनेंशियल और डिजिटल मुख्यधारा का हिस्सा बन जाएंगे।

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