7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ से लेकर वर्ष 2026 तक निरंतर 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की विकास नीति का सबसे युगांतरकारी खाका तैयार किया है। पूर्ववर्ती दशकों में जहां आधी आबादी को महज चुनावी वोट-बैंक और लोकलुभावन नारों तक सीमित रखा जाता था, वहीं नरेंद्र मोदी के विजन ने भारत को ‘महिला कल्याण’ की पुरानी अवधारणा से बाहर निकालकर ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ (Women-Led Development) के युग में स्थापित कर दिया। गुजरात के तपते गांवों में नन्हीं बालिकाओं की उंगली पकड़कर स्कूल पहुंचाने के जन-आंदोलन से प्रारंभ हुई यह यात्रा आज संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करने वाले ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए नीति-निर्माण के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच चुकी है।
गुजरात में 100% शाला प्रवेश और शून्य ड्रॉप-आउट का सामाजिक मॉडल
अक्टूबर 2001 में गुजरात की बागडोर संभालते ही नरेंद्र मोदी ने बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षित मातृत्व को प्रशासन की प्राथमिक कसौटी बनाया। भीषण ग्रीष्मकाल में स्वयं मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गांव-गांव जाकर उन्होंने ‘कन्या केळवणी’ और ‘शाला प्रवेशोत्सव’ के माध्यम से बच्चियों के शत-प्रतिशत दाखिले का अभियान छेड़ा। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि राज्य में प्राथमिक स्तर पर बालिकाओं का ड्रॉप-आउट दर घटकर न्यूनतम स्तर पर आ गया। इसी दौर में पीपीपी मॉडल पर शुरू की गई ‘चिरंजीवी योजना’ ने निजी अस्पतालों को जोड़कर संस्थागत प्रसव को व्यापक विस्तार दिया, जिससे गुजरात में मातृ और शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई।
2006 में PM @narendramodi की तरफ से शुरू किए गए शाला प्रवेशोत्सव-कन्या केळवणी महोत्सव के तहत स्कूल में प्रवेश लेने वाली खुशालीबेन अब 27 जून 2025 को उसी कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाएंगी, एक प्रेरणादायक सफर को पूरा करते हुए। https://t.co/LprkiYmeAj
— NewG (@newGindia) June 28, 2025
समरस ग्राम से 21 राज्यों में 50% पंचायत आरक्षण और 14.5 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि
जमीनी लोकतंत्र में महिलाओं की नीतिगत भागीदारी की आधारशिला नरेंद्र मोदी ने गुजरात में ‘समरस ग्राम योजना’ के जरिए रखी थी, जिसके तहत निर्विरोध चुनी जाने वाली महिला पंचायतों को विशेष वित्तीय अनुदान दिए जाते थे। इसी विजन को राष्ट्रीय स्तर पर गति देते हुए पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के 50 प्रतिशत आरक्षण का दायरा बढ़ाया गया। आज देश के 21 राज्यों में पंचायतों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण पूरी तरह प्रभावी है और 14.5 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि (EWRs) ग्रामीण विकास, स्वच्छता, प्राथमिक शिक्षा और बजट प्रबंधन का सीधा नेतृत्व कर रही हैं।
एक संकल्प, जो इतिहास बन गया…
एक संकल्प, जो 25 वर्षों का विश्वास बन गया! 🇮🇳गुजरात के मुख्यमंत्री से भारत के प्रधानमंत्री तक… मोदी जी की 25 वर्षों की अनवरत सेवा, समर्पण और राष्ट्र-निर्माण की यात्रा, सेवा, सुशासन और जनकल्याण के अटूट संकल्प की कहानी है।
गुजरात में ज्योति ग्राम योजना और वाइब्रेंट गुजरात से शुरू हुआ यह सफर आज जनधन, पीएम आवास, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, गरीब कल्याण अन्न, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और देश की सुरक्षा तक, विकास को नई गति दे रहा है।
देखिए 25 वर्षों की यह अनवरत सेवा यात्रा, करोड़ों भारतीयों के विश्वास और #NaMoSevaAnkahiKahaniyan है… ⬇️
#SevaSankalpAbhiyan
— BJP (@BJP4India) September 20, 2026
स्टांप ड्यूटी छूट और पैतृक संपत्ति में बेटियों का बराबर कानूनी हक
महिलाओं को अचल संपत्ति का कानूनी स्वामी बनाने के लिए गुजरात में नरेंद्र मोदी ने संपत्ति पंजीकरण में महिलाओं को स्टांप ड्यूटी में सीधी छूट देने का ऐतिहासिक नीतिगत प्रयोग किया था। इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक स्वीकृति मिली, जिससे देश भर में मकान, फ्लैट और कृषि भूमि महिलाओं के नाम अथवा संयुक्त नाम से पंजीकृत कराने की सामाजिक प्रवृत्ति में भारी उछाल आया। इसके साथ ही पैतृक संपत्तियों में बेटियों के जन्मसिद्ध सह-दायिकी अधिकार (कोपार्सनरी राइट्स) के कानूनी संरक्षण और डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स के आधुनिकीकरण ने यह सुनिश्चित किया कि बेटियों को पारिवारिक संपत्तियों में बराबरी का कानूनी व सामाजिक मान-सम्मान मिले।
राशन कार्ड पर 18 वर्ष से अधिक आयु की महिला को घर की कानूनी मुखिया का दर्जा
पारंपरिक पारिवारिक ढांचे में महिलाओं के अदृश्य श्रम और पोषण प्रबंधन को सर्वोच्च कानूनी मान्यता देते हुए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत ऐतिहासिक व्यवस्था लागू की गई। देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए राशन कार्ड जारी करने में परिवार की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला को आधिकारिक तौर पर ‘परिवार की मुखिया’ (Head of the Family) बनाया गया। इस नीति ने गरीब परिवारों में खाद्यान्न सुरक्षा, अनाज वितरण और पोषण निर्णयों का सीधा अधिकार माताओं और बहनों के हाथ में सौंप दिया।
4.17 लाख स्कूल शौचालयों का निर्माण और एनईपी 2020 का जेंडर इंक्लूजन फंड
वर्ष 2014 में लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई घोषणा के बाद ‘स्वच्छ विद्यालय अभियान’ के तहत मात्र एक वर्ष में सरकारी स्कूलों में 4.17 लाख से अधिक अलग-अलग शौचालयों का निर्माण पूरा कराया गया। बालिकाओं के लिए सुरक्षित शौचालय न होने से पैदा होने वाले ड्रॉप-आउट संकट पर इस कदम ने पूर्ण विराम लगा दिया। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) में विशेष ‘जेंडर इंक्लूजन फंड’ स्थापित किया गया और देश के पिछड़े ब्लॉकों में संचालित 5,000 से अधिक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) का विस्तार सीधे कक्षा 12 तक कर दिया गया, जिससे वंचित वर्ग की बेटियों को 12वीं तक सुरक्षित हॉस्टल और मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का कवच मिला।
शौचालयों का निर्माण राष्ट्र की प्राथमिकता
-2015 तक, मात्र एक वर्ष में स्कूलों में 4.17 लाख शौचालय बनाये गए
#10YearsOfSwachhBharat https://t.co/rXNHfQ79Iz
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) October 2, 2024
देश के सभी 33 सैनिक स्कूलों में बालिकाओं का शत-प्रतिशत प्रवेश
सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं के प्रवेश का आधार किशोरावस्था से तैयार करने के लिए मोदी सरकार ने सैनिक स्कूलों के नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किया। मिजोरम के सैनिक स्कूल में सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद देश के सभी 33 सैनिक स्कूलों के दरवाजे बालिकाओं के लिए पूरी तरह खोल दिए गए। आज सैकड़ों बेटियां कक्षा 6 से ही सैनिक स्कूलों में कठोर शारीरिक ड्रिल, अनुशासन, साहसिक गतिविधियों और नेतृत्व कौशल का औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, जिससे वे भविष्य में राष्ट्रीय रक्षा की अग्रिम पंक्ति बनने की दिशा में अग्रसर हैं।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से जन्म के समय लिंगानुपात 918 से सुधरकर 933 पार
हरियाणा के पानीपत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ‘ अभियान ने देश में कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध निर्णायक सामाजिक क्रांति खड़ी की। सख्त पीसीपीएनडीटी निगरानी, संस्थागत प्रसव और राष्ट्रव्यापी जनजागरण का परिणाम रहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth) 918 से सुधरकर 933 के पार पहुंच गया। इस योजना ने न केवल बालिकाओं के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि समाज की गहरी पितृसत्तात्मक सोच को बदलकर बेटियों के जन्म को उत्सव में तब्दील कर दिया।
12 करोड़ शौचालय और 10.33 करोड़ उज्ज्वला कनेक्शन से गरिमा की गारंटी
वर्ष 2014 के बाद देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के दैनिक स्वास्थ्य और स्वाभिमान को राष्ट्रीय नीति का केंद्र बनाया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों का निर्माण कराकर करोड़ों महिलाओं को खुले में शौच के शारीरिक कष्ट और सुरक्षा जोखिम से मुक्ति दिलाई गई। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.33 करोड़ से अधिक गरीब माताओं-बहनों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देकर चूल्हे के दमघोंटू धुएं और लकड़ी बीनने की कठिन दिनचर्या से स्थायी सुरक्षा दी गई।
पीएम उज्ज्वला योजना से महिलाओं को मिली चूल्हे के धुएं से मुक्ति।
इस योजना के माध्यम से देशभर में 10.33 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। https://t.co/huLMTxINCA
— BJP (@BJP4India) January 13, 2025
सुकन्या समृद्धि और महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र से वित्तीय स्वायत्तता
बालिकाओं के भविष्य को आर्थिक मजबूती देने के लिए शुरू की गई ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के तहत 4 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिसे छोटी बचत योजनाओं में सर्वाधिक 8.2 प्रतिशत ब्याज दर का संरक्षण प्राप्त है। इसी के साथ कामकाजी और मध्यम वर्ग की महिलाओं के लिए शुरू की गई ‘महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र’ (MSSC) योजना ने 7.5 प्रतिशत की निश्चित ब्याज दर और सुरक्षित रिटर्न के साथ महिलाओं को स्वतंत्र वित्तीय निर्णय लेने और अपनी बचत को सीधे मुख्यधारा के बैंकिंग तंत्र में निवेश करने का अधिकार दिया।
जन धन में 55% खाते, मुद्रा में 70% ऋण और 3.46 करोड़ लखपति दीदी
मोदी सरकार की वित्तीय समावेशन नीति ने देश की महिलाओं को बैंकिंग की मुख्यधारा में स्थापित किया। प्रधानमंत्री जन धन योजना के 53 करोड़ से अधिक खातों में 55 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है, जिससे डीबीटी का पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे उनके खातों में पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के स्वीकृत 52 करोड़ से अधिक ऋणों में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी महिला उद्यमियों की रही है। वहीं दीनदयाल अंत्योदय योजना-एनआरएलएम से 10 करोड़ महिलाओं को जोड़कर 3.46 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ (सालाना 1 लाख रुपये से अधिक की स्थायी आय) के स्तर पर पहुंचाया जा चुका है।
आज देश की महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उद्यमिता, मेहनत और कौशल के बल पर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।
3 करोड़ महिला “लखपति दीदी” बन गई हैं। यह आंकड़ा भारत की नारी शक्ति के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की पहचान है। https://t.co/I0rlTQUngI— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) March 8, 2026
स्टैंड अप इंडिया में 80% ऋण और नीति आयोग के WEP से बड़े उद्यमों की कमान
महिलाओं को सूक्ष्म ऋणों से आगे निकालकर बड़े विनिर्माण और सेवा उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘स्टैंड अप इंडिया’ योजना में कुल वितरित ऋणों में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी महिला उद्यमियों की रही, जिसके तहत 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी सीधे महिला-नेतृत्व वाले ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स को दी गई। इसके साथ ही नीति आयोग के ‘विमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म’ (WEP) ने टियर-2 और टियर-3 शहरों की नवोन्मेषी महिलाओं को कॉरपोरेट मेंटरशिप, तकनीकी सहयोग और वेंचर कैपिटल फंडिंग से जोड़कर नए भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत किया है।
महिला आविष्कारक और स्टार्टअप्स के लिए पेटेंट फाइलिंग शुल्क में 80% छूट
देश की बेटियों को बौद्धिक संपदा और उच्च अनुसंधान का अगुआ बनाने के लिए डीपीआईआईटी (DPIIT) ने पेटेंट नियमों में ऐतिहासिक सुधार किए। महिला उद्यमियों और महिला संस्थापकों वाले स्टार्टअप्स के लिए पेटेंट फाइलिंग और ट्रेडमार्क शुल्क में 80 प्रतिशत की भारी कटौती की गई और उनके आवेदनों के लिए फास्ट-ट्रैक एग्जामिनेशन लागू किया गया। इसके परिणामस्वरूप देश में महिला वैज्ञानिकों और अन्वेषकों द्वारा पेटेंट पंजीकरण में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
पीएम आवास योजना में 75% संपत्तियों पर नारी का सीधा अधिकार
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण व शहरी) ने देश में संपत्ति के मालिकाना हक की परिभाषा को बदल दिया है। स्वीकृत करोड़ों पक्के मकानों में 75 प्रतिशत से अधिक संपत्तियों की रजिस्ट्री परिवार की महिला के नाम अथवा पति-पत्नी के संयुक्त नाम से की गई है। इस नीतिगत व्यवस्था ने पीढ़ियों से चली आ रही आर्थिक असमानता को समाप्त कर महिलाओं को घर की चारदीवारी से निकालकर स्थायी अचल संपत्ति का कानूनी स्वामी बना दिया है।
1.4 लाख बैंक सखी और डिजी-सखी से ग्रामीण वित्तीय तंत्र का संचालन
डिजिटल बैंकिंग को अंतिम छोर तक पहुंचाने में ग्रामीण महिलाओं ने अद्भुत क्रांति की है। देश भर के सुदूर गांवों में 1.4 लाख से अधिक ‘बैंक सखी’ और ‘बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट सखी’ सक्रिय हैं, जो माइक्रो-एटीएम और आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) के जरिए घर-घर जाकर पेंशन, छात्रवृत्ति और डीबीटी राशि वितरित कर रही हैं। इसने न केवल ग्रामीण माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया, बल्कि पूरे ग्रामीण वित्तीय तंत्र का नेतृत्व नारी शक्ति के हाथ में सौंप दिया।
70,000 कृषि सखी और नमो ड्रोन दीदी से स्मार्ट खेती का कायाकल्प
कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को संस्थागत पहचान देने के लिए 70,000 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को ‘कृषि सखी’ के रूप में प्रशिक्षित और प्रमाणित किया गया है, जो प्राकृतिक खेती, मृदा परीक्षण और उन्नत बीज प्रबंधन में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दे रही हैं। वहीं ‘नमो ड्रोन दीदी’ पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ड्रोन उड़ाने और उनके रखरखाव का आधुनिक प्रशिक्षण देकर खेतों में नैनो-यूरिया व कीटनाशकों के छिड़काव की कमान सौंपी गई है, जिससे वे ग्रामीण भारत में आधुनिक कृषि तकनीक की अगुआ बन चुकी हैं।
पीएम सूर्य घर योजना से ‘सोलर सखी’ और ग्रीन जॉब्स में भागीदारी
स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में महिलाओं को तकनीकी रोजगार देने के लिए ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ‘सोलर सखी’ और ‘ऊर्जा सखी’ के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। रूफटॉप सोलर सर्वेक्षण, नेट-मीटरिंग समन्वय, बुनियादी रखरखाव और उपभोक्ता संपर्क जैसे कार्यों का नेतृत्व ग्रामीण महिलाओं को सौंपकर सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और हरित अर्थव्यवस्था की कमान नारी शक्ति के हाथों में रखी है।
पीएम विश्वकर्मा में 50% से अधिक महिला दस्तकार और पारंपरिक शिल्पों का पुनरुद्धार
पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों के उत्थान के लिए लागू पीएम विश्वकर्मा योजना में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी महिला शिल्पकारों की है। दर्जी, टोकरी बुनकर, खिलौना निर्माता, चटाई बुनकर और मिट्टी के बर्तन बनाने जैसे 18 पारंपरिक शिल्पों में कार्यरत महिलाओं को आधुनिक टूलकिट प्रोत्साहन, उन्नत कौशल प्रशिक्षण और बिना गारंटी का सस्ता बैंक ऋण उपलब्ध कराकर ‘लोकल फॉर वोकल’ को वास्तविक धरातल पर उतारा गया है।
🛠️ पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक हुनर, अब नई पहचान और नए अवसरों की ओर।
पीएम विश्वकर्मा देश के कारीगरों के हुनर को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है।
#PMVishwakarma #ViksitBharat
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@minmsme https://t.co/TphMmAW34C
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) September 17, 2026
पूर्वोत्तर की 10 लाख से अधिक महिला बुनकरों को ई-कॉमर्स और ग्लोबल मार्केट से जुड़ाव
अष्टलक्ष्मी कहे जाने वाले पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट कपड़ा विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए विशेष हथकरघा क्लस्टर योजनाएं लागू की गईं। असम के मूगा व एरी सिल्क से लेकर मणिपुर और नगालैंड की पारंपरिक बुनाई से जुड़ी 10 लाख से अधिक जनजातीय महिला बुनकरों को आधुनिक लूम, कच्चा माल सब्सिडी और ई-कॉमर्स पोर्टल्स से जोड़ा गया, जिससे पूर्वोत्तर की बहनों के उत्पादों को वैश्विक मंच और बिचौलिया-मुक्त लाभ मिला।
15.89 करोड़ परिवारों को नल से जल और पानी समितियों में 50% महिलाओं की अनिवार्यता
दशकों तक सिर पर मटके रखकर पानी ढोने की मजबूरी को खत्म करते हुए ‘जल जीवन मिशन’ के तहत देश के 15.89 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के घरों में नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाया गया। इस मिशन की विशेषता यह रही कि ग्राम स्तर की ‘पानी समितियों’ में 50 प्रतिशत महिलाओं की सदस्यता कानूनी रूप से अनिवार्य की गई। इसके अतिरिक्त 24 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को ‘जल सखी’ के रूप में फील्ड टेस्ट किट (FTK) से पानी की शुद्धता जांचने का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे गांव के जल प्रबंधन की सीधी कमान महिलाओं के हाथों में आ गई।
7 दशक बीत गए, लेकिन हर घर तक नल से जल नहीं पहुंच पाया था। 🚰
फिर बदली रफ्तार, बदला संकल्प… और सिर्फ 12 वर्षों में 16 करोड़ घरों तक नल से जल पहुंचा। जब सेवा संकल्प बन जाए, तो बदलाव जन-जन तक पहुंचता है।
इस बदलाव की यात्रा से जुड़िए। 17 सितंबर से शुरू हो रहे #SevaSankalpAbhiyan का हिस्सा बनिए। 🇮🇳
— BJP (@BJP4India) September 14, 2026
पोषण ट्रैकर से 10 करोड़ से अधिक माताओं-बच्चों की रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग
कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ तकनीकी युद्ध छेड़ते हुए मोदी सरकार ने ‘पोषण अभियान’ के तहत अत्याधुनिक ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप लागू किया। देश के 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 10 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य, वजन और पोषण स्तर की रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग सुनिश्चित की गई। इसने टेक-होम राशन और गर्म पके भोजन के वितरण को शत-प्रतिशत पारदर्शी बनाकर मातृ-शिशु कुपोषण पर निर्णायक चोट की।
एमएमआर 130 से घटकर 87 पर और लक्ष्य कार्यक्रम से लेबर रूम्स का कायाकल्प
मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) जो वर्ष 2014 से पहले प्रति लाख जीवित जन्म पर 130 था, वह मोदी सरकार के निरंतर प्रयासों से घटकर 87 प्रति लाख पर आ गया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) को तय समय सीमा से काफी पहले ही हासिल कर लिया। सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) योजना के साथ-साथ ‘लक्ष्य’ (LaQshya) कार्यक्रम के तहत देश के 2,800 से अधिक लेबर रूम और मैटरनिटी ऑपरेशन थिएटरों को एनक्यूएएस मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया गया, जिससे महिलाओं को गरिमापूर्ण, सुरक्षित और संक्रमण-मुक्त प्रसव सेवाएं सुनिश्चित हुईं।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की नवीनतम जानकारी
▶️2016 में इसकी शुरुआत से लेकर अब तक 7.91 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल सेवाएं प्राप्त हुईं और 1.24 करोड़ से अधिक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान की गई
▶️नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के अनुसार भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2014-16 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 130 से घटकर 2022-24 में 87 हो गया, अर्थात 43 अंकों की कमी दर्ज की गई
▶️एनएफएचएस-4 (2015-16) के 58.6 प्रतिशत की तुलना में एनएफएचएस-6 (2023-24 ) प्रथम तिमाही के दौरान प्रसवपूर्व पंजीकरण बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो गया
विवरण: https://t.co/ckWZsDuwbO
@MoHFW_INDIA
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) August 1, 2026
9 से 14 वर्ष की बालिकाओं के लिए स्वदेशी एचपीवी वैक्सीन से सर्वाइकल कैंसर पर प्रहार
महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के सबसे बड़े कारणों में शामिल गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर को समाप्त करने के लिए मोदी सरकार ने निर्णायक स्वास्थ्य पहल की। 9 से 14 वर्ष की बालिकाओं के लिए भारत में विकसित स्वदेशी एचपीवी (HPV) वैक्सीन के राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान को जन-स्वास्थ्य कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया, जिससे देश की भावी पीढ़ी को इस गंभीर बीमारी से समय रहते जीवन-सुरक्षा कवच प्रदान किया गया।
एमटीपी कानून में संशोधन: 24 सप्ताह की सीमा और अविवाहित महिलाओं को प्रजनन अधिकार
महिलाओं के शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन स्वास्थ्य का सम्मान करते हुए ‘गर्भ का चिकित्सीय समापन’ (MTP) संशोधन अधिनियम पारित किया गया। इसके तहत कानूनी गर्भपात की समय सीमा को 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह किया गया। इसके साथ ही कानून में वैवाहिक स्थिति की अनिवार्यता को समाप्त कर अविवाहित महिलाओं को भी सुरक्षित और कानूनी गर्भपात का पूर्ण अधिकार दिया गया, जिसने असुरक्षित गर्भपात के कारण होने वाली मातृ मौतों पर कानूनी रोक लगाई।
3.75 करोड़ माताओं को पीएमएमवीवाई सहायता और 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश
जीवन-चक्र आधारित मातृत्व सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ (PMMVY) के तहत 3.75 करोड़ से अधिक गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को डीबीटी के माध्यम से सीधे नकद वित्तीय पोषण सहायता दी गई, जिसमें दूसरी संतान बेटी होने पर विशेष आर्थिक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया। इसके अलावा मातृत्व लाभ अधिनियम में संशोधन कर कामकाजी महिलाओं के लिए सवैतनिक मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया, जो दुनिया के विकसित देशों के मानकों के समकक्ष है। जन औषधि केंद्रों पर मात्र 1 रुपये में सुविधा सैनिटरी पैड उपलब्ध कराकर मासिक धर्म स्वच्छता को बुनियादी अधिकार बनाया गया।
23 लाख से अधिक आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 5 लाख का मुफ्त आयुष्मान कवच
देश के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की अग्रिम रीढ़ कही जाने वाली आशा और आंगनवाड़ी बहनों के योगदान को ऐतिहासिक मान्यता देते हुए उन्हें ‘आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) के दायरे में शामिल किया गया। देश की 23 लाख से अधिक आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान कर उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों के आर्थिक संकट से पूर्ण सुरक्षा दी गई।
जेंडर बजट 5 लाख करोड़ के पार: महिला नीतियों को रिकॉर्ड वित्तीय आवंटन
सिर्फ सैद्धांतिक घोषणाओं के बजाय मोदी सरकार ने बजट आवंटन में महिला-केंद्रित नीतियों को अभूतपूर्व प्राथमिकता दी। केंद्रीय बजट में जेंडर बजट (Gender Budget) का आकार वर्ष 2014 की तुलना में तीन गुना से अधिक बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया। इस व्यवस्था ने सरकार के सभी प्रमुख मंत्रालयों में महिला कल्याण और विकास योजनाओं के लिए धन का पूर्व-आवंटन सुनिश्चित किया।
महिलाओं के लिए बढ़ा जेंडर बजट, लैंगिक समानता को मिलेगा और बल
✅ 62 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में जेंडर बजट सेल स्थापित
✅ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय लैंगिक बजट प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है
💰 वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में महिलाओं और बालिकाओं के लिए ₹5.01 लाख करोड़ का प्रावधान, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.55% अधिक है।
#GenderBudget #WomenEmpowerment @MinistryWCD
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) August 7, 2026
स्वाधार गृह और उज्ज्वला पुनर्वास योजना से संकटग्रस्त बहनों को संस्थागत सुरक्षा
पारिवारिक परित्याग, बेसहारा स्थिति और मानव तस्करी से बचाई गई पीड़ित महिलाओं के समग्र पुनर्वास के लिए मोदी सरकार ने ‘स्वाधार गृह’ और ‘उज्ज्वला पुनर्वास योजना’ को सुदृढ़ किया। इस संस्थागत व्यवस्था के अंतर्गत संकटग्रस्त महिलाओं को सुरक्षित आश्रय, पौष्टिक भोजन, वस्त्र, मुफ्त कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में सम्मानपूर्वक दोबारा स्थापित हो सकें।
व्यावसायिक सरोगेसी पर रोक और सरोगेट माताओं को 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा
आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के शोषण को रोकने के लिए सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम और सहायक प्रजनन तकनीक (ART) अधिनियम पारित किए गए। इस कानून के तहत व्यावसायिक सरोगेसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर केवल परोपकारी सरोगेसी को अनुमति दी गई। कानून में सरोगेट माताओं के लिए 36 महीने का अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा और स्पष्ट सहमति के कड़े नियम बनाकर महिलाओं के शारीरिक और मातृत्व अधिकारों की संपूर्ण कानूनी गारंटी तय की गई।
कारा के डिजिटल सुधार और मिशन वात्सल्य से अनाथ बेटियों को पारदर्शी संरक्षण
अनाथ और बेसहारा बालिकाओं के संरक्षण के लिए ‘मिशन वात्सल्य’ और केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (CARA) की प्रक्रियाओं का व्यापक डिजिटलीकरण किया गया। गोद लेने की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी ऑनलाइन मंच पर लाकर अदालती विलंब को समाप्त किया गया और जिलाधिकारियों को सीधे अधिकार सौंपे गए। बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाली बच्चियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्तीय सुरक्षा की सीधी निगरानी सुनिश्चित की गई।
पासपोर्ट नियमों का सरलीकरण: पिता या पति के नाम की बाध्यता समाप्त
दशकों पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट नियमों में ऐतिहासिक सुधार किया गया। आवेदन पत्र में पिता या पति का नाम लिखना अनिवार्य नहीं रहा। सिंगल मदर्स, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को यह अधिकार दिया गया कि वे बिना किसी पूर्व पति के अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के केवल अपने नाम पर अपने बच्चों का पासपोर्ट बनवा सकती हैं, जिसने महिलाओं की व्यक्तिगत स्वायत्तता और आत्मसम्मान को कानूनी मान्यता दी।
भारतीय न्याय संहिता में महिला अपराधों पर प्राथमिकता और धारा 69 के तहत कड़ा कानून
पुराने औपनिवेशिक कानूनों को हटाकर लागू की गई भारतीय न्याय संहिता (BNS) में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संहिता के आरंभिक अध्याय 5 में स्थान दिया गया। इसके साथ ही शादी का झूठा वादा करके या पहचान छुपाकर महिलाओं का यौन शोषण करने को धारा 69 के तहत एक अलग और गंभीर दंडनीय अपराध बनाया गया, जिसमें 10 वर्ष तक के कठोर कारावास का प्रावधान किया गया है।
ग्राम स्तर पर नारी अदालत से वैकल्पिक विवाद समाधान और त्वरित न्याय
अदालती खर्च और समय से ग्रामीण महिलाओं को बचाने के लिए ‘मिशन शक्ति’ के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर ‘नारी अदालत’ की शुरुआत की गई। स्थानीय महिलाओं और सामाजिक सखियों के संचालन में चलने वाली ये अनौपचारिक पंचायतें पारिवारिक विवादों और सामाजिक उत्पीड़न के मामलों को आपसी समझ और सुलह-सफाई से हल करती हैं, जिससे ग्रामीण बहनों को गांव के स्तर पर ही त्वरित और गरिमापूर्ण न्याय मिल रहा है।
तीन तलाक का अंत और 12 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं से दुष्कर्म पर फांसी का कानून
मुस्लिम महिलाओं को सदियों पुरानी ‘तीन तलाक’ की कुप्रथा से मुक्ति दिलाकर मोदी सरकार ने ऐतिहासिक सामाजिक न्याय दिया और इसे दंडनीय अपराध घोषित किया। इसके साथ ही बालिकाओं के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराधों पर कड़ा प्रहार करते हुए पॉक्सो (POCSO) कानून में संशोधन किया गया, जिसके तहत 12 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के साथ दुष्कर्म पर मृत्युदंड का कड़ा प्रावधान जोड़ा गया और त्वरित न्याय के लिए देश भर में फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स स्थापित किए गए।
तीन तलाक कानून से मुस्लिम महिलाओं को मिला अधिकार, सम्मान और सुरक्षा!
30 जुलाई 2019 को संसद ने तीन तलाक विधेयक पारित कर ऐतिहासिक कदम उठाया। तीन तलाक को गैर-कानूनी बनाकर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की गई।
नारी सम्मान, समान अधिकार और न्याय… यही है सशक्त भारत की पहचान!
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#SevaSankalpAbhiyan
#25YearsOfSeva— BJP (@BJP4India) October 7, 2026
विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु 21 वर्ष करने का ऐतिहासिक विधायी विजन
बालिकाओं को उच्च शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और करियर निर्माण के समान अवसर दिलाने के लिए मोदी सरकार ने संसद में बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक पेश कर बेटियों के विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु को लड़कों के समान 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का साहसिक विधायी कदम उठाया। यह विजन दर्शाता है कि सरकार देश की बेटियों को केवल पारिवारिक दायित्वों तक सीमित न रखकर उन्हें आत्मनिर्भर नागरिक बनाने के प्रति संकल्पित है।
372 जिलों में नशा मुक्त भारत अभियान से 4 करोड़ महिलाओं का सामाजिक नेतृत्व
नशे के दुष्प्रभावों से सर्वाधिक प्रभावित होने वाली महिलाओं को ढाल बनाते हुए मोदी सरकार ने ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ में नारी शक्ति को केंद्रीय भूमिका दी। देश के 372 संवेदनशील जिलों में 4 करोड़ से अधिक महिलाओं ने नशा-विरोधी अभियानों, सामुदायिक निगरानी और जागरूकता रैलियों का नेतृत्व किया, जिससे घरेलू हिंसा के मूल कारणों पर प्रहार हुआ और परिवारों में आर्थिक स्थिरता लौटी।
कंपनी बोर्ड्स में अनिवार्य महिला निदेशक से कॉरपोरेट में ग्लास सीलिंग का अंत
कॉरपोरेट जगत के शीर्ष नीतिगत निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कंपनी अधिनियम के तहत सूचीबद्ध कंपनियों के निदेशक मंडल (Board of Directors) में कम से कम एक महिला निदेशक की नियुक्ति को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया गया। इस सुधार ने कॉरपोरेट जगत में लंबे समय से चली आ रही ग्लास सीलिंग को तोड़कर देश की शीर्ष कंपनियों में रणनीतिक और वित्तीय प्रबंधन के स्तर पर महिलाओं की उपस्थिति को मजबूती दी।
पुलिस बलों में 33% भर्ती नीति, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्प डेस्क
सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की सुरक्षा के लिए केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस भर्तियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया और राज्यों को भी प्रेरित किया गया, जिससे पुलिस बलों में महिलाओं की संख्या में 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं देश के 700 से अधिक जिलों में ‘सखी – वन स्टॉप सेंटर’ (OSC) संचालित हैं, जहां पीड़ित महिलाओं को कानूनी, चिकित्सीय और पुलिस सहायता एक ही छत के नीचे मिलती है। साथ ही देश के 13,000 से अधिक पुलिस थानों में समर्पित ‘महिला हेल्प डेस्क’ स्थापित किए गए हैं।
10,000 करोड़ का निर्भया फंड और शहरों में एआई आधारित सेफ सिटी प्रोजेक्ट्स
महिलाओं की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के कोष के साथ निर्भया फंड को पूरी तरह सक्रिय किया गया। इसके तहत प्रमुख महानगरों में ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ लागू किए गए, जिनमें एआई-आधारित सीसीटीवी सर्विलांस, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR), पैनिक बटन और स्मार्ट पोल लगाए गए। सार्वजनिक परिवहन की बसों में जीपीएस ट्रैकिंग और सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता ने महिलाओं के सार्वजनिक आवागमन को सुरक्षित बनाया है।
श्रम सुधारों से 24×7 काम की कानूनी स्वतंत्रता और भूमिगत खनन में अवसर
आर्थिक विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नए लेबर कोड्स के तहत महिलाओं को उनकी लिखित सहमति से रात्रि पाली (Night Shift) में काम करने की कानूनी स्वतंत्रता दी गई, जिसमें नियोक्ताओं के लिए सुरक्षा और परिवहन के कड़े नियम तय किए गए। इसके अलावा भूमिगत खदानों और भारी उद्योगों में महिलाओं के रोजगार पर लगे पुराने प्रतिबंधों को हटाकर औद्योगिक क्षेत्र के सभी दरवाजे बेटियों के लिए खोल दिए गए।
1.4 लाख स्टार्टअप्स में 47% महिला नेतृत्व और जेम पर 1.5 लाख ‘वमनिया’ उद्यमी
‘स्टार्टअप इंडिया’ के तहत मान्यता प्राप्त 1.4 लाख से अधिक स्टार्टअप्स में से लगभग 47 प्रतिशत स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या सह-संस्थापक शामिल हैं। फिनटेक, एआई, बायोटेक और ई-कॉमर्स में महिलाएं नए यूनिकॉर्न का नेतृत्व कर रही हैं। वहीं गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर ‘Womaniya’ पहल के जरिए 1.5 लाख से अधिक महिला सूक्ष्म उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को सीधे सरकारी विभागों को अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला, जिससे सरकारी खरीद में महिला उत्पादकों की सीधी पहुंच बनी।
स्टार्टअप इंडिया से नए भारत के सपनों को मिली नई उड़ान!
देशभर में आज 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जिनमें से लगभग आधे का नेतृत्व महिलाओं के हाथों में है। यही स्टार्टअप्स मिलकर 21 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के नए अवसर दे रहे हैं। 👨💻
#GharGharSwadeshi
— BJP (@BJP4India) December 19, 2025
बिना मेहरम 5,000 से अधिक मुस्लिम महिलाओं की स्वतंत्र हज यात्रा
अल्पसंख्यक महिलाओं के सम्मान और स्वायत्तता को बढ़ाते हुए दशकों पुरानी उस नीति को समाप्त कर दिया गया, जिसके तहत महिलाओं का बिना ‘मेहरम’ (पुरुष अभिभावक) के हज यात्रा पर जाना प्रतिबंधित था। इस ऐतिहासिक सुधार के बाद 5,000 से अधिक भारतीय मुस्लिम महिलाओं ने बिना किसी पुरुष रिश्तेदार के स्वतंत्र रूप से हज यात्रा पूरी की, जिससे महिलाओं के आत्मसम्मान को नई पहचान मिली।
अग्निवीर योजना से तीनों सेनाओं में गैर-अधिकारी कैडर और युद्धपोतों पर बेटियों की तैनाती
सशस्त्र सेनाओं में दशकों पुराने प्रतिबंधों को तोड़ते हुए ‘अग्निवीर’ योजना के माध्यम से नौसेना और वायुसेना में पहले ही बैच से महिला नाविकों और अग्निवीरों की भर्ती शुरू की गई, जिन्हें फ्रंटलाइन युद्धपोतों पर तैनात किया गया। थल सेना की मिलिट्री पुलिस कोर में भी महिला जवानों की भर्ती का विस्तार हुआ। अधिकारी कैडर से आगे बढ़कर सामान्य सैनिक रैंकों में बेटियों को हथियार उठाने और देश की रक्षा करने का अवसर देकर सेना के हर स्तर पर समानता सुनिश्चित की गई।
भारतीय नौसेना के युद्धपोत की कमान पहली महिला कमांडिंग ऑफिसर के हाथ
भारतीय सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए पहली बार किसी फ्रंटलाइन युद्धपोत की संपूर्ण कमान एक महिला नौसेना अधिकारी को सौंपी गई। लेफ्टिनेंट कमांडर प्रेरणा देवस्थली को भारतीय नौसेना के फास्ट अटैक क्राफ्ट युद्धपोत (आईएनएस तरमुगली) का कमांडिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया। समुद्र की लहरों पर देश के संप्रभु युद्धपोत और नौसैनिक दल का संचालन यह सिद्ध करता है कि नए भारत के रक्षा बलों में बेटियां सर्वोच्च कमान भूमिकाओं में देश का मान बढ़ा रही हैं।
सियाचिन ग्लेशियर और सीमा सड़क संगठन में महिला सैन्य अधिकारियों को फ्रंटलाइन कमान
दुनिया के सबसे ऊंचे और शून्य से 40 डिग्री नीचे तापमान वाले युद्धक्षेत्र ‘सियाचिन ग्लेशियर’ पर पहली बार भारतीय सेना की महिला अधिकारी की ऑपरेशनल तैनाती की गई। इसके साथ ही सीमा सड़क संगठन (BRO) में पहली बार महिला सैन्य अधिकारियों को कमांडिंग ऑफिसर बनाकर भारत-चीन सीमा पर रणनीतिक सड़कों, पुलों और अग्रिम सैन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण की कमान सौंपी गई। इसने साबित कर दिया कि दुर्गम सीमाओं की रक्षा और निर्माण में बेटियों का हौसला अडिग है।
नाविका सागर परिक्रमा और वीर नारियों के सम्मान का राष्ट्रीय कवच
आईएनएसवी तारिणी के माध्यम से केवल महिला अधिकारियों के दल द्वारा विश्व की संपूर्ण समुद्री परिक्रमा (नाविका सागर परिक्रमा) का सफल संचालन नए भारत के नारी सामर्थ्य का वैश्विक प्रतीक बना। इसके साथ ही देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की पत्नियों (वीर नारियों) के सम्मान और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए विशेष वित्तीय सहायता, पेंशन प्रक्रियाओं का सरलीकरण और पेट्रोल पंप व गैस एजेंसियों के आवंटन में प्राथमिकता देकर उनके आर्थिक स्वावलंबन को पुख्ता किया गया।
अगर मैं आपसे ये सवाल करूं, क्या आप समंदर में लगातार 8 महीने रह सकते हैं! क्या आप समंदर में पतवार वाली नाव यानि हवा के वेग से आगे बढ़ने वाली नाव से 50 हजार किलोमीटर की यात्रा कर सकते हैं, और वो भी तब, जब, समंदर में मौसम कभी भी बिगड़ जाता है!
ऐसा करने से पहले आप हजार बार सोचेंगे, लेकिन भारतीय नौसेना की दो बहादुर ऑफिसर्स ने नाविका सागर परिक्रमा के दौरान ऐसा कर दिखाया है। उन्होंने दिखाया है कि साहस और दृढ़ संकल्प होता क्या है।
– पीएम @narendramodi
#MannKiBaat
— MyGov Hindi (@MyGovHindi) September 28, 2025
टॉप्स और खेलो इंडिया से अंतरराष्ट्रीय पोडियम पर बेटियों का परचम
‘खेलो इंडिया’ और ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) के जरिए ग्रामीण और छोटे कस्बों की बेटियों को आधुनिक कोचिंग, खेल उपकरण और वित्तीय सहायता दी गई। इसका परिणाम रहा कि ओलंपिक, पैरालंपिक, राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेलों में देश की बेटियों ने निशानेबाजी, मुक्केबाजी, भारोत्तोलन और एथलेटिक्स में ऐतिहासिक पदक जीतकर तिरंगे का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया।
उच्च शिक्षा में 28.4% जीईआर, प्रगति स्कॉलरशिप और एसटीईएम में 43% बेटियां
उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (AISHE) के अनुसार, उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) बढ़कर 28.4 प्रतिशत हो गया, जो पुरुषों के 27.3 प्रतिशत से अधिक है। एआईसीटीई की ‘प्रगति’ योजना के तहत प्रतिवर्ष 10,000 तकनीकी छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जा रही है। भारत में उच्च शिक्षा के तहत एसटीईएम (Science, Technology, Engineering and Maths) में छात्राओं का नामांकन 43 प्रतिशत है, जो दुनिया के कई विकसित देशों से अधिक है। इसरो के चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 जैसे अभियानों में महिला वैज्ञानिकों ने प्रोजेक्ट व मिशन डायरेक्टर के रूप में ऐतिहासिक नेतृत्व दिया।
विश्व में सर्वाधिक 15% महिला कमर्शियल पायलट और वंदे भारत का संचालन
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के अनुसार, भारत में 15 प्रतिशत कमर्शियल पायलट महिलाएं हैं, जो कि 5 प्रतिशत के वैश्विक औसत से तीन गुना अधिक और दुनिया में सबसे बड़ा अनुपात है। वहीं भारतीय रेलवे में देश की सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन ‘वंदे भारत’ का संचालन महिला लोको पायलटों द्वारा कुशलतापूर्वक किया जा रहा है और देश के विभिन्न शहरों के मेट्रो नेटवर्क्स में ट्रेन संचालन और कंट्रोल रूम की कमान बेटियां संभाल रही हैं।
पिंक मोबिलिटी मॉडल और पीएमजीदिशा से 3 करोड़ ग्रामीण महिलाएं डिजिटल साक्षर
शहरी कामकाजी महिलाओं की सुविधा के लिए 20 से अधिक शहरों में ‘पिंक मोबिलिटी’ मॉडल के तहत आरक्षित कोच, पिंक ऑटो और इलेक्ट्रिक बसों में सुरक्षा कैमरे व पैनिक बटन लगाए गए हैं। वहीं ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान’ (PMGDISHA) के तहत 3 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाया गया, जिससे स्मार्टफोन संचालन, यूपीआई से डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं का उपयोग ग्रामीण बहनों की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
एनडीआरएफ महिला बटालियन और 24,000 करोड़ के पीएम-जनमन से जनजातीय उत्थान
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) में पहली बार महिला आपदा कर्मियों की पूर्ण बटालियन तैनात की गई, जिन्होंने देश में बाढ़-चक्रवात और तुर्किये में ‘ऑपरेशन दोस्त’ के दौरान साहसिक रेस्क्यू अभियानों का नेतृत्व किया। सामाजिक समावेशन के शीर्ष पर देश ने ओडिशा के जनजातीय समाज से आने वाली श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद पर आसीन होते देखा। वहीं 24,000 करोड़ रुपये के ‘पीएम-जनमन’ महा-अभियान से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) की लाखों वनवासी महिलाओं को पक्के मकान, स्वच्छ जल और वन-उपज का उचित मूल्य देकर सशक्त किया गया।
पीपल्स पद्म: लुटियंस की परिधि तोड़कर आम नारी शक्ति का सर्वोच्च सम्मान
पद्म पुरस्कारों को लुटियंस की परिधि से निकालकर ‘पीपल्स पद्म’ बनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के जंगलों में हजारों पौधे लगाने वाली तुलसी गौड़ा और सालूमरदा थिमक्का जैसी साधारण माताओं से लेकर जैविक खेती करने वाली पप्पम्मल तक, सैकड़ों गुमनाम ग्रामीण महिलाओं को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया। इस बदलाव ने राष्ट्र निर्माण में मूक योगदान देने वाली आम भारतीय नारी के स्वाभिमान को राष्ट्रीय गौरव बना दिया।
𝐍𝐂𝐄𝐑𝐓 𝐩𝐫𝐞𝐬𝐞𝐧𝐭𝐬 𝐫𝐚𝐝𝐢𝐨 𝐩𝐫𝐨𝐠𝐫𝐚𝐦 “𝐔𝐦𝐚𝐧𝐠”!
कार्यक्रम का नाम — तुलसी गौड़ा – जंगल की इनसाइक्लोपीडिया –
इस कार्यक्रम में महान पर्यावरण जनजातीय कार्यकर्त्री तुलसी गौड़ा के जीवन और पर्यावरण संरक्षण में उनकी अहम् भूमिका के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है.
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Programs aired respectively from 132 stations of All India across the country and 257 stations of Community Radio as well as NCERT Internet Radio.
𝐍𝐨𝐭𝐞: 𝐓𝐡𝐞 𝐛𝐫𝐨𝐚𝐝𝐜𝐚𝐬𝐭 𝐭𝐢𝐦𝐢𝐧𝐠𝐬 𝐨𝐟 𝐀𝐥𝐥 𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐑𝐚𝐝𝐢𝐨 𝐛𝐫𝐨𝐚𝐝𝐜𝐚𝐬𝐭 𝐝𝐨 𝐝𝐢𝐟𝐟𝐞𝐫 𝐢𝐧 𝐚𝐜𝐜𝐨𝐫𝐝𝐚𝐧𝐜𝐞 𝐰𝐢𝐭𝐡 𝐭𝐡𝐞 𝐚𝐫𝐞𝐚 𝐚𝐧𝐝 𝐫𝐞𝐠𝐢𝐨𝐧 𝐚𝐬 𝐩𝐞𝐫 𝐭𝐡𝐞𝐢𝐫 𝐜𝐨𝐧𝐯𝐞𝐧𝐢𝐞𝐧𝐜𝐞𝐬.
#ncert #radio #audioprogram #ciet #digitaleducation— NCERT (@ncert) August 27, 2026
जी-20 में सर्वसम्मति से स्थापित हुआ वुमेन-लेड डेवलपमेंट और यूएन में ऑल-वुमेन प्लाटून
भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र में पारंपरिक ‘महिला कल्याण’ की जगह औपचारिक रूप से ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ (Women-Led Development) को वैश्विक नीति के रूप में स्वीकार कराया गया और इस पर एक स्थायी कार्य समूह गठित हुआ। वहीं संयुक्त राष्ट्र (UN) शांति अभियानों में भारत ने सूडान सीमा पर अबेई जैसे अशांत क्षेत्र में अपनी सबसे बड़ी ऑल-वुमेन प्लाटून तैनात कर वैश्विक शांति मिशनों में भारतीय नारी के सामर्थ्य का परचम लहराया।
एनडीए में प्रवेश, सेना में परमानेंट कमीशन और तोपखाना रेजिमेंट की कमान
लैंगिक सीमाओं को समाप्त करते हुए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के द्वार बेटियों के लिए खोले गए। तीनों सेनाओं में महिलाओं को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) दिया गया, लड़ाकू विमानों की कॉकपिट में महिला फाइटर पायलटों की तैनाती हुई और भारतीय सेना की आर्टिलरी (तोपखाना) रेजिमेंट की कमान महिला अधिकारियों को सौंपी गई। बीएसएफ और आईटीबीपी की महिला जवान देश की सबसे दुर्गम बर्फीली चोटियों और तपते रेगिस्तानों में अग्रिम सीमाओं पर देश की सुरक्षा कर रही हैं।
संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण सुनिश्चित करता ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’
तीन दशकों के राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संसद के दोनों सदनों द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वां संविधान संशोधन) पारित कराया गया। इस कानून ने देश के सर्वोच्च नीति-निर्माण सदनों यानी लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित कर दी हैं। यह अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का वह निर्णायक मोड़ है, जिसने महिलाओं को मात्र मतदाता की भूमिका से आगे बढ़ाकर देश की सर्वोच्च कानून-निर्माता के रूप में स्थापित कर दिया है।
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की संसद में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की मजबूत पहल है…”
भारत की पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया और इस पहल को भारत की दिशा और सोच दोनों को बदलने वाला बताया।
#NariShaktiVandan
— BJP (@BJP4India) April 14, 2026
2047 के विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव बनी नारी शक्ति
विपक्षी दलों ने दशकों तक महिलाओं को केवल वादों और चुनावी घोषणाओं में उलझाए रखा, जबकि मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवाकाल ने यह सिद्ध कर दिखाया कि जब देश की नारी सशक्त और आत्मनिर्भर होती है, तभी राष्ट्र वास्तविक उन्नति करता है। ‘कन्या केळवणी’ से प्रारंभ होकर ‘नारी शक्ति वंदन’ तक का यह सफर सिर्फ सरकारी योजनाओं का संकलन नहीं, बल्कि भारतीय समाज की अंतरात्मा को जागृत करने वाला स्वर्णिम कालखंड है। आज जब भारत वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प की ओर अग्रसर है, तब देश की नारी शक्ति उस विकास यात्रा की सबसे मजबूत प्रेरणा और आधारशिला बन चुकी है।










