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गुजरात में नई ई-व्हीकल पॉलिसी का एलान, राज्य में आएगा पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का युग

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गुजरात सरकार ने अपनी नई ई-व्हीकल पॉलिसी की घोषणा की है। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने आज, 22 जून को ‘गुजरात इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2021’ की घोषणा है। मुख्यमंत्री रूपाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश के ऑटोमोबाइल हब के रूप में प्रसिद्ध गुजरात अब आने वाले वर्षों में पर्यावरण के अनुकूल परिवहन हब भी बनेगा। मुख्यमंत्री ने इस पॉलिसी के बारे में कहा कि इस पॉलिसी के माध्यम से ई-व्हीकल की नई टेक्नोलोजी को प्रोत्साहन मिलेगा और ई-व्हीकल के ड्राइविंग, बिक्री, लोन, सर्विसिंग और चार्जिंग वगैरह क्षेत्रों में रोजगारी के अवसरों में बढ़ोतरी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सावधानी पूर्वक विचार-विमर्श करके, इलेक्ट्रिक व्हीकल क्षेत्र के विभिन्न विशेषज्ञों से चर्चा करके और टेक्नोलोजी, उत्पादन प्रक्रिया और ई-व्हीकल संबंधित फैक्टर्स और भारत सरकार की नीतियों को ध्यान में रखकर गुजरात की नई ई-व्हीकल पॉलिसी का गठन किया गया है।

उन्होंने कहा कि गुजरात इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी में प्रमुख रूप से चार बातों पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें पहला है, राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल के उपयोग में बढ़ोतरी करना। दूसरा, गुजरात को ई-व्हीकल और उसके सहायक उपकरण का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना। तीसरा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में युवा स्टार्ट-अप और निवेशकों को प्रोत्साहित करना और चौथा वाहनो के धुएं से होने वाले वायु-ध्वनि प्रदूषण को घटाकर पर्यावरण की सुरक्षा करना है।

मुख्यमंत्री रूपाणी ने आगे बताया कि हमनें अनुमान लगाया है कि हमारी इस पॉलिसी के लागू होने के बाद आने वाले 4 वर्षों में दो लाख इलेक्ट्रिक वाहन राज्य की सड़कों पर चलेंगे। इन 4 लाख इलेक्ट्रिक वहनों में लगभग 1 लाख 10 हजार टू व्हीलर्स, 70 हजार थ्री व्हीलर्स और 20 हजार फोर व्हीलर्स के होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे वाहनों की प्रति किलोमीटर खपत लागत अन्य् वाहनों की तुलना में औसतन 30 से 50 प्रतिशत कम होती है और साथ ही वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आती है। साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया है कि अगले 4 वर्षों में जब 2 लाख इलेक्ट्रिक वाहन गुजरात की सड़कों पर यातायात के लिए आयेंगे तब कम से कम लगभग पांच करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी और लगभग 6 लाख टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा।

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि आम जन मानस में यह धारणा है कि इलेक्ट्रिक वाहन मंहगे होते हैं लेकिन इस पॉलिसी के लागू होने के बाद लोगों के मन में से ये धारणा दूर हो जाएगी। राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए प्रति वाहन प्रति किलोवोट के हिसाब से 10 हजार रुपये की सब्सिड़ी देगी। मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि पूरे देश में इस प्रकार प्रति किलोवोट सब्सिड़ी देने में गुजरात अग्रसर राज्य है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के अन्य राज्य प्रति किलोवॉट अधिकतम 5 हजार रुपये की सब्सिड़ी देते हैं, जबकि गुजरात उससे दुगुनी यानि की 10 हजार रुपये प्रति किलोवोट की सब्सिड़ी देगा। इसके परिणामस्वरूप चार वर्षों में राज्य सरकार 870 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ वहन करेगी।

मुख्यमंत्री रूपाणी ने बताया कि राज्य में इलेक्ट्रिक टू व्हीलर खरीदने वाले व्यक्ति को 20 हजार रुपये तक की सब्सिड़ी मिलेगी। इसी तरह थ्री व्हीलर के लिए 50 हजार रुपये तक और फोर व्हीलर के लिए 1.50 लाख रुपये तक की सब्सिड़ी दी जायेगी। इस सब्सिड़ी का लाभ 1.50 लाख रुपये तक की कीमत के टू व्हीलर्स, 5 लाख रुपये तक की कीमत के थ्री व्हीलर्स और 15 लाख रुपये तक की कीमत के फोर व्हीलर्स के लिए दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वाहन प्राइवेट है या कमर्शियल इस बात ध्यान दिए बिना सभी को यह सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही, गुजरात के आरटीओ द्वारा पास किये गये वाहनों को मोटर रजिस्ट्रेशन फीस में से 100 प्रतिशत की छूट भी दी जायेगी। भारत सरकार इलेक्ट्रिकल व्हीकल प्रोत्साहन योजना (फ्रेम-2) के तहत वाहन खरीदने वालों को अलग-अलग प्रोत्साहन देती है। गुजरात सरकार द्वारा जो सब्सिड़ी दी जायेगी, वह भारत सरकार की इस योजना से अतिरिक्त दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ऐसे इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी चार्जिंग के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधी सुविधाओं को विकसित करने की बात भी इस पॉलिसी में जोड़ी गई है। भारत सरकार की इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोत्साहन योजना (फ्रेम-2) के अंतर्गत राज्य में लगभग 278 चार्जिंग स्टेशन मंज़ूर किये गये हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार 250 चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 10 लाख रुपए तक की सीमा में 25 प्रतिशत की कैपिटल सब्सिडी देगी। और इस तरह, आने वाले वर्षों में पूरे राज्य में लगभग 528 चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क बनेगा।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार अलग-अलग टेक्नोलोजी और विभिन्न बिज़नेस मॉडल के माध्यम से चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्रोत्साहित करेगी। इससे निजी, बिजली का वितरण करने वाली कंपनीयों और निवेशकर्ताओं के स्वामित्व वाले चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और बैटरी के स्वैपिंग स्टेशनों को प्रोत्साहन मिलेगा। इतना ही नहीं, हाउसिंग और कमर्शियल कन्स्ट्रक्शन्स में भी चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था की जा सके ऐसा प्रावधान भी इस पॉलिसी में किया गया है। पेट्रोल पंप्स को भी चार्जिंग स्टेशन्स के लिए अनुमति दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इस पॉलिसी के लागू होने के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी गुजरात अग्रसर रहकर पूरे देश में उदाहरण बनेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादकों को गुजरात इन्डस्ट्रियल पॉलिसी 2020 और अन्य पॉलिसियों के अंतर्गत इन्सेन्टिव्स भी मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्लान के साथ इस पॉलिसी को सुसंगत बनाया गया है। राज्य सरकार ने ई-व्हीकल के बारे में गहराई से विचार किया है। यह एक नई टेक्नोलोजी है, और उसका स्वागत करने के लिए गुजरात सरकार ने संपूर्ण तैयारी की है। ई-व्हीकल का उपयोग बढ़ने के साथ-साथ उसमें बिक्री, लोन, सर्विसिंग, चार्जिंग, ड्राइविंग, ट्रेनिंग वगैरह क्षेत्रों में रोजगार के नये अवसर प्राप्त होंगे।

मुख्यमंत्री रूपाणी ने कहा कि इस क्षेत्र में नये स्टार्ट-अप और निवेशों को राज्य में प्रोत्साहित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि, इस पॉलिसी को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए इसके लिए एक रणनीति भी बनाई गई है। इसके अनुसार इस पॉलिसी के आयोजन, अमल और समीक्षा की जिम्मेदारी बंदरगाह और परिवहन विभाग को दी गई है। उन्होंने कहा कि, राज्य सरकार इस पॉलिसी की केवल घोषणा करके ही संतोष नहीं करने वाली बल्कि इसके अमलीकरण की समीक्षा भी समय-समय पर की जाएगी। इस पॉलिसी के लक्ष्यों को तय समय पर हासिल किया जाए, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ऐसा विश्वास जताया कि निकट भविष्य में दो लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल का राज्य में रजिस्ट्रेशन होगा और जिस प्रकार गुजरात का विकास मॉडल प्रसिद्ध हुआ है, उसी प्रकार गुजरात इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल भी पूरे देश के लिए उदाहरण बनेगा।

इस अवसर पर परिवहन मंत्री आरसी फलदु, ऊर्जा मंत्री सौरभभाई पटेल और बंदरगाह-परिवहन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी एवं मुख्यमंत्री के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी एमके दास उपस्थित थे।

गुजरात इलेक्ट्रिकल व्हीकल पॉलिसी 2021 की खास बातें- 
• आने वाले 4 वर्षों में ई-व्हीकल के उपयोग में बढ़ोतरी करना
• गुजरात को ई-व्हीकल्स और उसके सहायक उपकरणों का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना
• इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में युवा स्टार्ट-अप और निवेशकों को प्रोत्साहित करना
• वाहनों के धुएँ से होने वाले वायु प्रदूषण को रोककर पर्यावरण की सुरक्षा को सुनिश्चित करना
• ई-व्हीकल्स की बैटरी चार्जिंग के लिए राज्य में वर्तमान 278 से अतिरिक्त नए 250 चार्जिंग स्टेशन के साथ कुल 528 चार्जिंग स्टेशन्स का इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना
• पेट्रोल पंप्स को भी चार्जिंक स्टेशन के लिए अनुमति दी जाएगी
• हाउसिंग और कॉमर्शियल कन्स्ट्रक्शन्स में चार्जिंग की व्यवस्था की जाएगी
• गुजरात के आरटीओ द्वारा पास किए गए ई-व्हीकल्स को रजिस्ट्रेशन फीस में से 100 प्रतिशत छूट
• 4 वर्षों में कम से कम लगभग पांच करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी
• कम से कम 6 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा
• इलेक्ट्रिक टू व्हीलर के लिए 20 हजार रुपये तक, थ्री व्हीलर के लिए 50 हजार रुपये तक और फोर व्हीलर के लिए 1.50 लाख तक की सब्सिड़ी-प्रोत्साहन के रूप में दिए जाएंगे जो DBT के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा किए जाएंगे
• देश के अन्य किसी भी राज्य के मुकाबले गुजरात में ई-व्हीकल के लिए प्रति किलोवोट दुगुनी सब्सिड़ी दी जायेगी
• वाहन प्राइवेट है या कॉमर्शियल, इस बात को में ध्यान न रखते हुए सभी को सब्सिडी दी जाएगी
• भारत सरकार की इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोत्साहन योजना फ्रेम-2 के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों के अलावा, राज्य सरकार ई-व्हीकल खरीदने वालों को अतिरिक्त सब्सिड़ी भी प्रोत्साहन स्वरूप देगी

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