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जीएसटी ने हासिल किए नए मुकाम, ‘वन नेशन, वन टैक्स’ के 5 साल पूरे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मई 2014 में केंद्र में सत्ता संभालने के बाद कई बड़े सुधार किए हैं। इन सुधारों में नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली यानी माल एवं सेवा कर (Goods And Service Tax) को महत्वपूर्ण सुधारों में गिना जाता है। जीएसटी को 5 साल पहले 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। इसने अप्रत्यक्ष कर की कई जटिलताओं को दूर किया और लोगों को 17 प्रकार के विभिन्न करों से राहत मिली जिससे कारोबार करना आसान हुआ है। जीएसटी तंत्र ने पांच साल में कई नए मुकाम हासिल किए हैं।

इस तरह लागू हुआ जीएसटी

जीएसटी लागू करने के फैसले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था लेकिन पीएम मोदी ने देश हित में दृढता के साथ दुनिया के सबसे बड़े टैक्स रिफार्म को अमली जामा पहनाया। विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इसे लागू करने का जोरदार विरोध किया था जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने इसे लागू करने की घोषणा की थी। हालांकि पीएम मोदी को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का साथ मिला था। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि जीएसटी एक ऐतिहासिक कदम है और जीएसटी दर्शाता है कि हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि देश में अब स्वस्थ स्पर्धा जारी होगी जो निश्चित तौर पर आर्थिक विकास को गति देने में सहायक होगा।

जीएसटी लागू करने की प्रक्रिया एनडीए की सरकार के दौरान 2003 में इस पर ऐतिहासिक रिपोर्ट के साथ हुई थी। जिसके बाद 2006 के बजट में यूपीए सरकार ने घोषणा की थी कि 2010 में इसे लागू किया जाएगा। उस दौरान वित्तमंत्री ने इसे सबके सामने रखा था और संविधान में संशोधन हुआ था। अंततः मोदी सरकार ने 2017 में इसे लागू किया।

सरकार के खजाने और आम आदमी की जेब पर सकारात्‍मक प्रभाव

जीएसटी लागू होने का सरकार के खजाने और आम आदमी की जेब पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ा है। इससे एक ओर जहां सरकार की आमदनी में भारी इजाफा हुआ है वहीं आम उपभोक्‍ता को भी रोजमर्रा की बहुत सी चीजें सस्‍ती मिलने लगी हैं। टैक्‍स व्‍यवस्‍था के सरलीकरण से छोटे दुकानदार से लेकर बड़ी कंपनियों तक को व्‍यापार करने में आसानी हुई है।

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच का परिणाम है कि जीएसटी के लागू होने से पूरे देश में टैक्स की समान दरें हो गईं। 17 बड़े टैक्स एवं 13 उपकर से लोगों को राहत मिली। कर व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चत हुई और सरल पंजीकरण एवं फास्ट रिफंड भी लोगों को मिलने लगा। इसके लागू होने से ग्राहक खर्च में कमी और बचत में वृद्धि हुई है। उपभोक्ता उत्पादों पर टैक्स का बोझ कम हुआ है। दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं पर टैक्स की दरों में कमी हुई है एवं मासिक घरेलू खर्च पर 4 प्रतिशत की बचत दर्ज की गई है।

नई कर व्यवस्था के उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। जीएसटी का टैक्स बेस दोगुना हुआ है एवं वस्तुओं की आवाजाही में तेजी आई है। अब रिफंड जल्द मिलता है और कुल मिलाकर टैक्स में कमी से उपभोक्ताओं को राहत मिली है। सरलीकरण एवं टैक्स की कम दर के कारण करदाताओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। 1 जुलाई 2017 को जहां करदाताओं की संख्या 66 लाख थी वहीं 1 जून 2022 को 112 प्रतिशत वृद्धि के साथ यह 1.4 करोड़ हो गया।

जीएसटी संग्रह ने पिछले रिकार्ड तोड़े

नई टैक्स प्रणाली से आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिला है और राजस्व में वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 17-18 में जहां 82,294 करोड़ रुपये राजस्व का संग्रह हुआ वहीं वित्त वर्ष 22-23 में 1.55 लाख करोड़ रुपये राजस्व का संग्रह दर्ज किया गया। पिछले सभी रिकार्ड को तोड़ते हुए अप्रैल 2022 में रिकार्ड जीएसटी संग्रह हुआ। अप्रैल 2022 में प्रति घंटा रिकार्ड 8,000 करोड़ रुपये, दैनिक रिकार्ड 57,847 करोड़ रुपये एवं मासिक रिकार्ड 1.68 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

ई-वे बिल सिस्टम से अंतर्राज्यीय व्यापारिक बाधाओं को दूर किया गया और माल की तेज एवं निर्बाध आवाजाही सुनिश्चत हुई। एनएचएआई के फास्टैग सिस्टम के साथ एकीकरण किया गया है जिससे हर महीने 7.81 करोड़ से अधिक ई-वे बिल जारी होते हैं। अब तक 41.53 लाख करदाताओं, 67 हजार ट्रांसपोर्टरों ने ई-वे बिल पोर्टल पर नामांकन कराया है। जीएसटी लागू होने के बाद 90 प्रतिशत उद्यमियों ने माना कि बाधाएं कम हुई हैं और व्यवसाय करना आसान हुआ है एवं माल तथा सेवाओं की लागत में कमी आई है। इससे कंपनियों को आपूर्ति प्रणाली को सुव्यवस्थित करने में भी मदद मिली है।

प्रधानमंत्री मोदी की जीएसटी लागू करने की सटीक योजना और दृढ़ निश्चय का परिणाम रहा कि जीएसटी के रूप में सरकार को मिलने वाले राजस्व में लगातार बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2017-18 (अगस्त-मार्च) में 7.18 लाख करोड़ रुपये जीएसटी संग्रह हुआ। 2018-19 में 11.17 लाख करोड़ रुपये, 2019-20 12.22 लाख करोड़ रुपये, 2020-21 में 11.37 लाख करोड़ रुपये और 2021-2022 में 14.83 लाख करोड़ रुपये सरकारी खजाने में आए। जीएसटी लागू होने से टैक्स चोरी पर भी लगाम लगी है। पिछले 18 महीने में करीब 50,000 करोड़ रुपये का जीएसटी फ्रॉड पकड़ा गया है।

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