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Big SCAM : गहलोत सरकार ने देश के इतिहास में किया ‘कमाल’, तीन महीने में 80 एकड़ में बना दी ‘फर्जी’ गुरुकुल यूनिवर्सिटी, विधानसभा में बिल वापस लेने से सरकार की हुई किरकिरी

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राजस्थान में भ्रष्ट अफसर कितने बेखौफ हो गए हैं और गहलोत सरकार इस ओर से किस कदर आंखें मूंदे हुए है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब फर्जी रिपोर्ट के आधार पर विधानसभा में कानून भी आने लगे हैं। हालांकि सीकर की ‘फर्जी’ गुरुकुल यूनिवर्सिटी का विधेयक बीजेपी के स्टिंग ऑपरेशन के कारण विधानसभा में पारित नहीं हो सका। हैरानी की बात तो यह है कि जिस यूनिवर्सिटी का 80 एकड़ का कैंपस बताया जा रहा है, वहां जमीन पर एक ईंट भी नहीं लगी। गहलोत सरकार में सरकारी धांधली पर धांधली का खेल ऐसा चला कि 3 महीने में 80 एकड़ में कागजों में यूनिवर्सिटी खड़ी कर दी। इसे जुलाई में अनुमति मिली और अक्टूबर में 62 हॉल, 38 लैब का वैरिफिकेशन भी हो गया…कहीं भी, किसी को भी शक करने की कोई गुंजाइश ही नहीं दिखी। हैरानी इस पर भी है कि इतना बड़ा फर्जीवाड़ा होने के बावजूद सरकार की गाज किसी बड़े अधिकारी पर नहीं गिरी है।

सरकार की वैरिफिकेशन टीम को कालेज दिखाकर यूनिवर्सिटी कैंपस बताया
शेखावाटी की गुरुकुल यूनिवर्सिटी स्कैम में सामने आए नए तथ्यों से वैरिफिकेशन करने वाली कमेटी शुरू से ही सवालों के घेरे में है। सरकार की ओर से अनुमति मिलने के 90 दिन में ही 80 एकड़ कैंपस में यूनिवर्सिटी तैयार हो गई। यूनिवर्सिटी के लिए आवेदन करने वालों ने वैरिफिकेशन टीम को कालेज दिखाकर उसे ही यूनिवर्सिटी कैंपस बता दिया, लेकिन कमेटी ने कोई सवालिया निशान नहीं लगाए। कमेटी के सदस्यों ने यह जानने की कोशिश भी नहीं की कि महज 3 महीने में 80 एकड़ कैंपस में 38 लैब और 62 हॉल कैसे बन सकते हैं? इस पूरे स्कैम का खुलासा हाल ही में सामने आए कमेटी की सिफारिश के दस्तावेज से हुआ है। इसमें जून 2021 को यूनिवर्सिटी खोलने के लिए संस्थान को लैटर ऑफ इंटेंट जारी करने की सिफारिश की गई थी। सिफारिश के महज तीन माह बाद ही वैरिफिकेशन कमेटी जांच के लिए गई और यूनिवर्सिटी को हरी झंडी दे दी।

जमीन का कंवर्जन हुए बिना ही कमेटी ने यूनिवर्सिटी को दे दी हरी झंडी
वैरिफिकेशन कमेटी ने 3 अक्टूबर को दी अपनी रिपोर्ट में लिख दिया कि संबंधित जमीन को शिक्षा के प्रयोजन के लिए कंवर्ट करवा लिया गया है, जबकि इस जमीन के कंवर्जन का आदेश सीकर कलेक्टर कार्यालय से 25 नवंबर को जारी हुआ। ऐसे में बड़ा सवाल यह भी उठता है कि बिना कंवर्जन का आदेश देखे कमेटी ने कैसे लिख दिया कि जमीन का कंवर्जन हो गया है? कमेटी सदस्यों के मुताबिक हमें संस्थान के कागजात और प्रेजेंटेशन के आधार पर निर्णय लेना था। ऐसे में हमने प्रेजेंटेशन देखा और उसमें सबकुछ सही था इसलिए स्वीकृति जारी करने की सिफारिश सरकार को कर दी।

गहलोत सरकार की चार सदस्यों की कमेटी ने बनाई थी ‘फर्जी’ रिपोर्ट
गुरुकुल शिक्षण संस्थान ने गुरुकुल विश्वविद्यालय सीकर के नाम से यूनिवर्सिटी के लिए आवेदन किया था। राज्य सरकार ने निजी विश्वविद्यालय एक्ट 2005 के तहत चार सदस्यों की कमेटी का गठन कर यूनिवर्सिटी के इंस्पेक्शन के लिए भेजा था। कमेटी में मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति प्रोफेसर अमेरिका सिंह, सुखाडिया विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय अध्यक्ष एवं सांख्यिकी विषय के प्रोफेसर घनश्यम सिंह राठौड़, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर में सांख्यिकी विषय के सह आचार्य डॉ जयंत सिंह एवं विधि महाविद्यालय अलवर में सह आचार्य डॉ विजय बेनीवाल को शामिल किया गया। कमेटी ने गुरुकुल यूनिवर्सिटी का इंस्पेक्शन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजी थी।

इतिहास में पहली बार, 80 एकड़ में बनी यूनिवर्सिटी रातोंरात हो गई गायब
देश के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ होगा। रातोंरात 80 एकड़ में बनी यूनिवर्सिटी गायब हो गई, जिसमें 38 लैब और 62 हॉल थे। आपको ये बात भले ही अटपटी लगे, लेकिन गुरुकुल यूनिवर्सिटी का फिजिकल वेरिफिकेशन करने गई 4 सदस्यों की टीम का यही तर्क है। टीम का कहना है कि हमारे पास वेरिफिकेशन का वीडियो भी है। जो सच सामने आया वो वेरिफिकेशन करने गई टीम के तर्कों से कोसों दूर है। हकीकत ये है कि यूनिवर्सिटी के लिए आवेदन करने वाली संस्था ने 10 एकड़ में बने कॉलेज कैंपस को ही यूनिवर्सिटी बता दिया, जिसमें पहले से 5 इंस्टीट्यूट चल रहे हैं। वेरिफिकेशन टीम ने आंख बंद करके विश्वास भी कर लिया और कॉलेज कैंपस को ही यूनिवर्सिटी मान लिया।

 

उपनेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा तो स्पीकर ने फैक्चुअल रिपोर्ट मंगवाई
राजस्थान की विधानसभा में अपनी तरह का ऐसा पहला मामला सामने आया। गुरुकुल यूनिवर्सिटी के कर्ताधर्ताओं ने जिस 80 एकड़ जमीन पर कैंपस बताया था, वहां कोई भी निर्माण नहीं है। मौके पर खाली जमीन पड़ी है। इस फर्जीवाड़े के बारे में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और विपक्ष के नेताओं ने विधानसभा में सवाल उठाए। पूरे हालात स्पीकर को बताए। सीकर कलेक्टर से फैक्चुअल रिपोर्ट मंगवाई गई। उसमें भी यही बताया गया कि मौके पर कोई निर्माण नहीं है। विधानसभा में यह पहला मामला है, जब किसी निजी यूनिवर्सिटी ने इस तरह फर्जीवाड़ा करते हुए गलत रिपोर्ट तैयार करवा दी। इसमें सरकारी अफसरों ने भी खूब साथ दिया। उन्होंने भी सरकार को गलत रिपोर्ट सौंप दी। उसी आधार पर बिल लाकर सरकार की खूब फजीहत हुई।

अफसरों की गलत रिपोर्ट के आधार पर बिल लाना सदन की अवमानना-जोशी
विधानसभा स्पीकर सीपी जेाशी ने गुरुकुल यूनिवर्सिटी फर्जीवाड़े पर कहा- यह गंभीर सवाल है। इस यूनिवर्सिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्ट पर जो बातें आई हैं, वह चिंतनीय हैं। सरकार ऐसा मैकेनिज्म विकसित करे कि इस तरह की कोई गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी का बिल लाने से पहले सभी तरह के फैक्ट्स जांच लिए जाएं। यह जिम्मेदारी उन अफसरों की होगी जिनकी झूठी रिपोर्ट के आधार पर सरकार बिल लाती है तो पूरे सदन की अवमानना होती है। सरकार निजी यूनिवर्सिटी को बढ़ावा दे रह है तो उसके स्टैंडर्ड, इंफ्रास्ट्रक्चर को जांचकर सब कुछ पुख्ता करके ही बिल लाए। उम्मीद है कि सरकार इस पर गंभीरता से चिंतन करेगी और उचित कार्रवाई करेगी।

40 साल के राजनीतिक कैरियर में इस तरह का फर्जीवाड़ा नहीं देखा-कटारिया
नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने सदन में कहा कि गुरुकुल यूनिवर्सिटी का मामला साधारण नहीं है। बिल में जो लिखा गया है, उसमें एक फीसदी भी सच्चाई नहीं हो और मामला यहां तक पहुंच जाए। आज गहराई से इसे नहीं देखा जाता, इतना विचार नहीं होता तो यह पास भी करवा लेते। यह तो हमने आपको समय से पहले बता दिया और यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। कटारिया ने कहा- सारे प्रोसीजर से निकलकर यहां तक पहुंच जाना कलंक है। मेरे 40 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने ऐसा मामला कभी नहीं देखा। दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन होना चाहिए। पैसे के लेनदेन के अलावा कोई आधार नहीं हो सकता। आखिर जो कमेटी-अफसर जांचने गए थे, उन्होंने क्या किया। झूठी रिपोर्ट कैसे दे दी।

मौके पर दूरबीन से देखा फिर भी यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग दिखाई नहीं दी-राठौड़
उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा में गुरुकुल यूनिवर्सिटी के अपने स्टिंग की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि यह तस्वीर सदन को दिखाना चाहता हूं। जिस गुरुकुल यूनिवर्सिटी ने दावा किया, वहां कुछ नहीं मिला। होली के दूसरे दिन मैं इस यूनिवर्सिटी को देखने निकला। जो खसरा नंबर दिए गए हैं, उसे खोजते हुए मैं सीकर जयपुर रोड से 14 किलोमीटर अंदर जीणमाता आरआई सर्किल पहुंचा। वहां पटवारी को बुलाकर भी उससे जगह के बारे में पूछा। मैंने दूरबीन निकालकर देखा। सोचा कि कई बार चीजें अंर्तध्यान हो जाती होंगी। जिस जगह 24 हजार वर्गमीटर पर यूनिवर्सिटी बिल्डिंग बनाने की रिपोर्ट दी और बिल में जिक्र किया, वहां कुछ नहीं मिला। केवल खाली जमीन थी। यह रिपोर्ट आपको जिसने दी, उसने किस आधार पर दी, उस पूरे कमेटी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यह साधारण मामला नहीं है।

विधानसभा में बिल वापस होने से गहलोत सरकार की खूब हुई फजीहत
विधानसभा में कई बार विवादों के कारण चर्चा में रहने वाले सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के कुलपति की कमेटी ने ही कागजों में बनी यूनिवर्सिटी का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार निजी यूनिवर्सिटी खोलने के लिए विधानसभा में बिल तक ले आई। मामले का खुलासा होने के बाद बिल वापस ले लिया गया। इधर, पोल खुलने के बाद यूनिवर्सिटी के लिए आवेदन करने वाली संस्था ने लीपापोती के लिए रातों रात युद्ध स्तर पर निर्माण शुरू करा दिया। एक दर्जन से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रक और 60 से ज्यादा मजदूर रात-दिन कंस्ट्रक्शन में जुट गए। इस पूरे यूनिवर्सिटी स्कैम में कदम-कदम पर धांधलियों का खेल हुआ। आइये देखते हैं कहां हुईं धांधली….


धांधली 1 : आवेदन करने वाली संस्था ने जो कहा, उसे ही सच मान लिया
यूनिवर्सिटी के लिए आवेदन करने वाली संस्था गुरुकुल शिक्षण संस्थान का सीकर में एक इंस्ट्यूशन चल रहा है। जहां 10 एकड़ में बनी बिल्डिंग में 5 इंस्टीट्यूट चल रहे हैं। यूनिवर्सिटी की जांच करने आई कमेटी को यही बिल्डिंग दिखाई गई। 10 एकड़ में फैले इस इंस्टीट्यूट को 80 एकड़ में बनी यूनिवर्सिटी का हेडक्वार्टर बताया गया। इसके लिए कमेटी ने इसी बिल्डिंग के फोटो और वीडियो बनाकर उसे रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी बताया। जबकि चार सदस्य कमेटी को यूनिवर्सिटी का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करनी थी। इसके लिए फिजिकल और ह्यूमन रिसॉर्स का वैरिफिकेशन करना था।

धांधली 2 : कमेटी ने गुरुकुल यूनिवर्सिटी की जमीन देखी ही नहीं
यूनिवर्सिटी की जमीन सीकर से करीब 30 किलोमीटर दूर कोछोर गांव के पास है। जमीन खसरा नंबर 47,181,182, 2607/182, 189, 2609/189, 282/2755, 287, 307, 308, 309, 310/2757, 555, 819/559, 799/560, 801/ 798 पर स्थित है। टीम ने मौके पर जाकर खसरा संख्या के अनुसार जमीन का फिजिकल वेरिफिकेशन किया ही नहीं। वे संस्था के बताए अनुसार सीकर शहर में स्थित कॉलेज में गए और उसे ही यूनिवर्सिटी मानकर रिपोर्ट पेश कर दी।

धांधली 3 : गुरूकुल यूनिवर्सिटी की जमीन का माप नहीं किया
निजी यूनिवर्सिटी एक्ट 2005 के अनुसार यूनिवर्सिटी के लिए कम से कम 30 एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। संस्था ने बताया कि वे 80 एकड़ में यूनिवर्सिटी बना रहे हैं, जबकि कमेटी संस्था की ओर से बताए गए जिस इंस्टीट्यूट में गई, वो भी 10 एकड़ में ही बना है। कमेटी के किसी सदस्य को 10 एकड़ और 80 एकड़ का फर्क समझ में नहीं आया और न ही उन्होंने जमीन का नाप लिया।

धांधली 4 : महज तीन महीने में आवंटन, कंवर्जन और निर्माण कैसे हो गया
सरकार ने जुलाई में यूनिवर्सिटी की स्वीकृति जारी की। अक्टूबर के पहले सप्ताह में टीम ने वैरिफिकेशन कर लिया। किसी ने सवाल नहीं उठाया कि महज 3 महीने के समय में जमीन का आवंटन और कंवर्जन और उस पर यूनिवर्सिटी के इतने बड़े ढांचे का निर्माण कैसे हो गया? वैरिफिकेशन कमेटी के अध्यक्ष अमेरिका सिंह का तर्क है कि वे वैरिफिकेशन के लिए गए तब वहां 62 हॉल और 38 लैब थे। सवाल है कि 3 महीने में सामान्य 2 मंजिला मकान तक तैयार नहीं होता तो इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी तैयार कैसे हो गई?

धांधली 5 : सिर्फ प्रेजेंटेशन के आधार पर यूनिवर्सिटी की स्वीकृति की सिफारिश कैसे की
लैटर ऑफ इंटेंट की सिफारिश करने वाली कमेटी ने गुरुकुल संस्थान के सदस्यों को उदयपुर बुलावाया, जो गुरुकुल यूनिवर्सिटी से लगभग 450 किमी दूर है, जबकि कमेटी के बाकी दो सदस्य शीतल प्रसाद मीणा और बीएस बैरवा जयपुर से हैं। कमेटी ने सिर्फ प्रेजेंटेशन के आधार पर सरकार को यूनिवर्सिटी को स्वीकृति देने की सिफारिश कर दी।

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