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मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत में आए थे भाड़े के किसान, “CAA-NRC-NPR” को बताया तीन काले कृषि कानून, कहा- भाड़ में जाए किसान आंदोलन, हमें तो बीजेपी को हटाना है

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केंद्र सरकार के 3 नए कृषि कानूनों के विरोध में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में रविवार (5 सितंबर, 2021) को संयुक्त किसान मोर्चे ने किसान महापंचायत की। यहां भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत जमकर गरजे। वहीं इस महापंचायत में पहुंचे किसान प्रदर्शनकारियों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाए और केंद्र सरकार का विरोध किया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महापंचायत में भाड़े की भीड़ जुटाई गई थी। इनमें कुछ भाड़े के किसान भी थे, जिन्हें कृषि कानूनों के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। 

एक ऑनलाइन समाचार चैनल हिन्दुस्तान 9 ने महापंचायत की एक ग्राउंड रिपोर्ट अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर की है। इसमें भाड़े के किसान खुद अपनी पोल खोलते नजर आ रहे हैं। हिन्दुस्तान 9 के पत्रकार रोहित शर्मा ने महापंचायत में शामिल किसान प्रदर्शनकारियों से कुछ सवाल पूछे। मोहम्मद दानिश नाम के एक शख्स ने बताया कि वह पास के एक गांव के किसानों के समूह के साथ प्रदर्शन स्थल पर आया है।

दानिश ने कहा, “हम भारत सरकार द्वारा लाए गए तीन काले कानूनों का विरोध करने के उद्देश्य से यहां आए हैं। राकेश और नरेश टिकैत के नेतृत्व में गाजीपुर बॉर्डर पर हम पिछले नौ महीने से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सरकार को इन काले कानूनों को निरस्त करना होगा, जो किसानों के हित में नहीं हैं।”

जब रोहित ने भाड़े के किसानों से तीन कृषि कानूनों के बारे में पूछा तो, उनका जवाब काफी दिलचस्प था। किसान दानिश ने कहा, “हां, मुझे पता है। एक है एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर), एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) और एक और है, जिसे मैं भूल गया हूं।” रोहित ने पूछा कि क्या आप सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के बारे में बात कर रहे हैं, जिस पर दानिश ने कहा, “हां, हां! वही वाला।” रोहित ने पूछा, “तो आप इन तीन कानूनों के खिलाफ महापंचायत में भाग ले रहे हैं?” इस पर दानिश ने हां में जवाब दिया। वहीं मौजूद दूसरे भाड़े के किसान ने कहा कि भाड़ में जाए किसान आंदोलन, हम तो बीजेपी को हटाने के लिए आए हैं। बीजेपी को साफ करने के लिए ही किसान आंदोलन हो रहा है।

दानिश की बातों और “अल्लाह-हू-अकबर” के नारे ने किसान आंदोलन के पीछे चल रही साजिशों और उनके पीछे की ताकतों को बेनकाब कर दिया है। दरअसल यह पूरी तरह से किसानों के नाम पर चल रही सियासी नौटंकी है, जिसके मुख्य किरदार संयुक्त किसान मोर्चा के तथाकथित किसान नेता निभा रहे हैं, लेकिन इनकी डोर कांग्रेस, सपा, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के हाथों में हैं। राकेश टिकैत इस आंदोलन की आड़ में अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस और अन्य सियासी दोलों का मकसद किसानों को भड़का कर किसी भी तरह से 2022 में उत्तर प्रदेश में सत्ता पर काबिज होना और 2024 में दिल्ली पर अपनी दावेदारी मजबूत करना है।

 

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