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केरल-राजस्थान सरकार के शर्मनाक चेहरे: केरल में NEET परीक्षा में लड़कियों के इनरवियर उतरवाए, नाबालिगों ने दी बिना इनरवियर परीक्षा, राजस्थान में तुष्टीकरण की इंतेहा, HIJAB की दी अनुमति

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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट ने एक बार फिर सरकारों की तुष्टिकरण की नीति और कुत्सित मानसिकता की पोल खोलकर रख दी। राजस्थान और केरल की सरकारें अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने के लिए अबोध छात्राओं तक को मोहरा बना रही हैं। देशभर में हिजाब विवाद के सुर्खियों में रहने के बावजूद गहलोत सरकार ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कोटा में छात्राओं को हिजाब में परीक्षा देने की अनुमति दे दी। जबकि ड्रेस कोड में इसका कोई प्रावधान नहीं है। दूसरी ओर केरल सरकार ने तो अमानवीयता की हदें पार करते हुई नीट परीक्षा देने गई कई छात्राओं के इनरवियर तक उतरवा लिए। इससे विवाद इतना बड़ा कि 17 साल की एक लड़की के पिता को इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवानी पड़ी।

बगैर इनरवियर के लड़कियों की नीट परीक्षा लेने से केरल के अभिभावकों में फैला रोष
केरल की वामपंथी सरकार वैसे ही हिंदुओं की विरोधी है। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की तरह हिंदुओं की खिलाफत करने का कोई मौका वह अपने हाथ से नहीं जाने देती। अब केरल में NEET एंट्रेंस एग्जाम सेंटर पर जांच के नाम पर कुछ लड़कियों के इनरवियर उतरवाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। नीट परीक्षा देने पहुंची कई लड़कियों के नियमों के विपरीत जाकर इनरवियर तक उतरवाए गए। बताते हैं कि इनमें से ज्यादातर लड़कियां हिंदू थीं। परीक्षा के बाद जब कुछ लड़कियों ने अभिभावकों को इस करतूत की जानकारी दी तो उनका आक्रोशित होना स्वाभाविक ही था।

महिला आयोग का केरल पुलिस को नोटिस, मानवाधिकार आयोग के जांच के आदेश
इस दौरान कोल्लम जिले के मार्तोमा इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MIIT) में लड़कियों के इनरवियर उतरवाने की जानकारी मिलने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले को लेकर NEET कराने वाली NTA और केरल पुलिस को नोटिस जारी किया है। वहीं केरल स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। केरल के कई युवा संगठनों ने घटना के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किए हैं। केरल में NEET देने गई लड़कियों की जांच के दौरान इनरवियर उतारने के विवाद को लेकर FIR दर्ज कराने वाली लड़की के पिता का कहना है कि उनकी बेटी ने बताया कि करीब 90% फीमेल कैंडिडेट्स के इनरवियर उतरवाए गए थे और उन्हें एक स्टोर रूम में रखा गया था।

बेटी को बिना इनवियर के तीन घंटे लंबी परीक्षा में बैठना पड़ा, पुलिस में केस दर्ज
ये मामला परीक्षा के 18 जुलाई को तब सामने आया, जब 17 साल की एक लड़की के पिता ने मीडिया से कहा कि अपना पहला NEET एग्जाम दे रही उनकी बेटी को परीक्षा से पहले जांच के दौरान इनरवियर उतारने को मजबूर किया गया। इससे उनकी बेटी को 3 घंटे लंबी परीक्षा में बिना इनरवियर के बैठना पड़ा। यह उसके जीवन का सबसे भयानक अनुभव था। उसकी तरह कई और लड़कियों को भी इनरवियर उतरवाने के कारण शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।

जांच के दौरान कई लड़कियों को इनरवियर उतारने के लिए मजबूर किया गया
नीट परीक्षा दे चुकी लड़की के पिता ने मीडिया से कहा कि उनकी बेटी ने NEET बुलेटिन में बताए गए ड्रेस कोड के अनुसार कपड़े पहने थे, जिसमें इनरवियर के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इस मामले में एक लड़की के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कोल्लम के SP केबी रवि ने लड़की के पेरेंट्स द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने की पुष्टि की है। अपनी शिकायत में लड़की के पेरेंट्स ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान कई लड़कियों को इनरवियर उतारने के लिए मजबूर किया गया और इन इनरवियर को एक स्टोररूम में फेंक दिया गया था।

सिक्योरिटी जांच के दौरान लड़कियों के इनरवियर उतरवाकर बक्से में फेंक दिए
पिता ने बताया कि सिक्योरिटी जांच के बाद मेरी बेटी से कहा गया कि उसके इनरवियर के हुक को मेटल डिटेक्टर में डिटेक्ट किया गया है, इसलिए उसे इनरवियर को उतारकर ही परीक्षा देने जाना होगा। पुलिस को दी अपनी शिकायत में लड़की के पिता ने कहा है कि उनकी बेटी ने सुरक्षा जांच के बाद अन्य लड़कियों से उतरवाए गए इनरवियर से भरा एक बॉक्स देखा था। जो एक कमरे में फेंका हुआ था। कई लड़कियां रो रही थीं और मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रही थीं। पुलिस ने IPC की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग) और धारा 509 (शब्द, हावभाव या कार्य जिसका उद्देश्य किसी महिला की लज्जा का अपमान करना है) के तहत केस दर्ज कर लिया है।

राजस्थान में मुस्लिम तुष्टिकरण की इंतेहा, हिंदू-मुस्लिम परीक्षार्थियों के साथ भेदभाव
दूसरी ओर इसी परीक्षा के दौरान राजस्थान के कोटा में मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति अपनाई गई। कर्नाटक का हिजाब विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि गहलोत सरकार ने कोचिंग हब सिटी कोटा से इसे फिर से सुलगा दिया। कोटा में नीट परीक्षा में ड्र्रेस कोड का उल्लंघन कर छात्राओं को हिजाब की अनुमति दे दी गई। जबकि हिंदू लड़कियों के कान की बालियां, नाक की नथ और चूड़ियां तक उतरवा ली गईं। कोटा में नीट परीक्षा के दौरान चार छात्राएं हिजाब पहनकर परीक्षा देने की जिद पर अड़ गईं। इससे वहां हंगामा हो गया। कॉलेज प्रशासन और पुलिस के समझाने के बावजूद ये अभ्यर्थी अपनी जिद पर अड़ी रहीं।

ड्रेस कोड में न होने के बावजूद चार लड़कियां हिजाब से साथ परीक्षा देने पर अड़ीं
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के दौरान कोचिंग सिटी कोटा में यूनिफॉर्म गाइडलाइन को लेकर कुछ परीक्षार्थियों की कॉलेज प्रबंधन से बहस हो गई। यहां एक एग्जाम सेंटर पर चार मुस्लिम परीक्षार्थी हिजाब पहनकर सेंटर के अंदर जाने की बात पर अड़ गई इससे वहां हंगामा हो गया। कॉलेज प्रबंधन और पुलिसकर्मियों ने यूनिफार्म गाइडलाइन का हवाला तो दिया, लेकिन हंगामे के हालात को देखकर सेंटर प्रभारी ने युवतियों से लेटर लिखवाया कि परीक्षा को लेकर किसी भी प्रकार के निर्णय की जिम्मेदारी स्वयं स्टूडेंट की होगी। उसके युवतियों ने हिजाब पहनकर ही सेंटर में प्रवेश किया।

हिंदू लड़कियों की फुल आस्तीन को आधा किया, मुस्लिम को हिजाब के साथ प्रवेश
जानकारी के अनुसार यह पूरा हंगामा कोटा में दादाबाड़ी के एक कॉलेज में हुआ। वहां गेट पर कॉलेज स्टाफ यूनिफॉर्म गाइडलाइन की पालना कराते हुए अभ्यर्थियों अंदर प्रवेश दे रहा था। इस दौरान चार युवतियां हिजाब पहनकर प्रवेश करने लगी। कॉलेज स्टाफ ने उनको रोका लेकिन वे नहीं मानी और स्टाफ से बहस करने लग गई। इस पर वहां मौजूद पुलिस मामले में हस्तक्षेप करने पहुंची। युवतियों ने उनकी बात भी नहीं मानी तो पुलिस कर्मियों ने ऊपर के अधिकारियों से बात की। ऊपर से परमीशन मिलने पर पुलिस और सेंटर प्रभारी ने उनको ड्रेस कोड में न होने के बावजूद हिजाब के साथ परीक्षा देने की इजाजत दे दी। जबकि जिन हिंदू लड़कियों ने फुल आस्तीन के कपड़े पहने हुए थे, उनकी आस्तीन काटकर ही कालेज में प्रवेश दिया गया।

(नोट-सभी फोटो प्रतीकात्मक हैं।  सोर्स-सोशल मीडिया)

 

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