कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आज सिर्फ एक शपथग्रहण समारोह नहीं हो रहा था, बल्कि राजनीति के मंच पर इतिहास, विचारधारा और सम्मान का एक दुर्लभ दृश्य भी देखने को मिला। मौका था शुभेंदु अधिकारी के शपथग्रहण समारोह का। मैदान में हजारों लोगों की भीड़ थी, मंच पर बड़े-बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन अचानक सबकी नजर एक तस्वीर पर जाकर टिक गई।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंच से आगे बढ़ते हैं। सामने एक 98 साल का बुजुर्ग बैठा होता है। पीएम मोदी उन्हें शॉल ओढ़ाते हैं, फिर झुककर उनके पैर छूते हैं और गले लगा लेते हैं। कुछ पल के लिए पूरा माहौल भावुक हो जाता है। कैमरे लगातार उस दृश्य को कैद कर रहे थे और सोशल मीडिया पर लोगों का एक ही सवाल था- आखिर ये बुजुर्ग कौन हैं, जिनके सामने प्रधानमंत्री ने अपना सिर झुका दिया?

इनका नाम है माखनलाल सरकार। पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सबसे पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं में से एक। उम्र 98 साल, लेकिन पहचान सिर्फ उम्र से नहीं, बल्कि उस संघर्ष से है जो उन्होंने राष्ट्रवाद और संगठन के लिए जिया।
#WATCH | Kolkata | PM Modi felicitates and takes blessings of Makhanlal Sarkar, one of the most senior workers of the BJP in West Bengal.
In 1952, Makhanlal Sarkar was arrested in Kashmir while accompanying Syama Prasad Mukherjee during the movement to hoist the Indian… pic.twitter.com/gpmLISKYZ5
— ANI (@ANI) May 9, 2026
माखनलाल सरकार उन लोगों में रहे हैं जिन्होंने राजनीति को सिर्फ सत्ता तक पहुंचने का रास्ता नहीं माना, बल्कि उसे एक विचार और आंदोलन के रूप में जिया। आज जब बीजेपी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन चुकी है, तब शायद नई पीढ़ी को यह अंदाजा भी नहीं होगा कि कभी इस पार्टी और उसकी विचारधारा के लिए जमीन पर काम करना कितना कठिन था। माखनलाल सरकार उसी दौर के सिपाही रहे हैं।

उनका नाम उस समय चर्चा में आया था जब 1952 में कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। उस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी। उस दौर में जम्मू-कश्मीर को लेकर अलग राजनीतिक परिस्थितियां थीं और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोग वहां एक देश, एक निशान की मांग कर रहे थे।

माखनलाल सरकार सिर्फ उस आंदोलन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बेहद करीबी सहयोगियों में भी माने जाते थे। कहा जाता है कि मुखर्जी की अंतिम यात्रा में भी वह शामिल रहे। उस समय राजनीति में विचारधारा के लिए जेल जाना आम बात नहीं थी, लेकिन माखनलाल सरकार उन लोगों में थे जो पीछे हटना जानते ही नहीं थे।

दिल्ली में भी उन्हें राष्ट्रवादी गीत गाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय कांग्रेस की सरकार थी और राष्ट्रवाद को लेकर राजनीतिक टकराव अपने चरम पर था। अदालत में उनसे माफी मांगने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने अदालत में भी वही गीत दोबारा गाया।
𝐓𝐡𝐢𝐬 𝐢𝐬 𝐡𝐨𝐰 𝐭𝐡𝐞 𝐁𝐉𝐏 𝐡𝐨𝐧𝐨𝐮𝐫𝐬 𝐢𝐭𝐬 𝐬𝐞𝐧𝐢𝐨𝐫 𝐤𝐚𝐫𝐲𝐚𝐤𝐚𝐫𝐭𝐚𝐬. 🙏🪷
On stage, during the swearing-in ceremony of new Chief Minister of Bengal, Prime Minister Shri Narendra Modi sought the blessings of Makhanlal Sarkar, one of the BJP’s oldest and… pic.twitter.com/WzPA93Rjnp
— BJP (@BJP4India) May 9, 2026
कहा जाता है कि उनकी साफ नीयत और निडरता से जज भी प्रभावित हो गया। अदालत ने उन्हें न सिर्फ सम्मान के साथ रिहा किया, बल्कि घर लौटने के लिए प्रथम श्रेणी का टिकट और यात्रा खर्च के लिए 100 रुपये भी दिए। यह घटना आज भी उनके समर्थकों और पुराने कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय रहती है।
आज की राजनीति में जहां अक्सर नेता पद और प्रचार के लिए चर्चा में रहते हैं, वहीं माखनलाल सरकार का जीवन बिल्कुल अलग कहानी कहता है। उन्होंने दशकों तक संगठन के लिए काम किया, लेकिन कभी व्यक्तिगत पहचान या पद की राजनीति नहीं की। यही वजह है कि बीजेपी के भीतर उन्हें एक विचारधारात्मक योद्धा की तरह देखा जाता है।
How BJP respects its seniors and karyakartas…
On the stage, the Prime Minister took the blessings of Shri Makhanlal Sarkar, one of the BJP’s most senior workers in West Bengal.
At the age of 98, Shri Makhanlal Sarkar remains one of the earliest grassroots figures associated… pic.twitter.com/TmtslxD4wQ
— Amit Malviya (@amitmalviya) May 9, 2026
1980 में जब भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ, तब पश्चिम बंगाल में पार्टी की स्थिति बेहद कमजोर थी। उस समय संगठन खड़ा करना आसान नहीं था। लेकिन माखनलाल सरकार ने पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में संगठनात्मक समन्वयक के रूप में काम संभाला।
सिर्फ एक साल के भीतर उन्होंने लगभग 10 हजार लोगों को पार्टी से जोड़ने में भूमिका निभाई। उस समय यह संख्या बहुत बड़ी मानी जाती थी। गांव-गांव जाकर लोगों को जोड़ना, विचारधारा समझाना और संगठन को मजबूत करना उनका रोज का काम था।
At Suvendu Adhikari’s oath taking, PM Modi greets & take blessings from 98 year old Makhanlal Sarkar.
Makhanlal was arrested in Kashmir in 1952 while accompanying Syama Prasad Mukherjee, founder of Bharatiya Jana Sangh, during the movement to hoist the Indian tricolour there. https://t.co/O7EKOqHs0F pic.twitter.com/UzDwMDFc8v
— Sidhant Sibal (@sidhant) May 9, 2026
1981 से लगातार सात वर्षों तक उन्होंने जिला अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। उस दौर में बीजेपी में किसी एक पद पर लंबे समय तक बने रहना आसान नहीं माना जाता था। लेकिन संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और मेहनत के कारण उन्हें लगातार जिम्मेदारियां मिलती रहीं।

यही वजह है कि जब पीएम मोदी ने उन्हें मंच पर देखा तो उन्होंने सिर्फ एक वरिष्ठ कार्यकर्ता का सम्मान नहीं किया, बल्कि उस पूरी पीढ़ी को नमन किया जिसने बिना किसी लालच के पार्टी और विचारधारा के लिए अपना जीवन खपा दिया।
This is what makes the BJP far far different from any other political parties in India 🔥
This video will give goosebumps to every Indian who knows about Indian politics!
PM Modi felicitated and took blessings of Makhanlal Sarkar by touching his feet.
Makhanlal Sarkar is one… pic.twitter.com/l3ZepC5WCi
— Chota Don (@choga_don) May 9, 2026
प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने भाषणों में संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं का जिक्र करते रहे हैं। लेकिन कोलकाता के मंच पर जो तस्वीर दिखी, वह शब्दों से कहीं ज्यादा बड़ी थी। राजनीति में ऐसे दृश्य कम ही देखने को मिलते हैं, जब देश का प्रधानमंत्री सार्वजनिक मंच से किसी कार्यकर्ता के पैर छूकर आशीर्वाद ले।

इस घटना का राजनीतिक संदेश भी काफी बड़ा माना जा रहा है। बीजेपी लगातार यह दिखाने की कोशिश करती रही है कि पार्टी सिर्फ नेताओं की नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की ताकत से बनी है। माखनलाल सरकार जैसे चेहरे उसी संदेश को मजबूत करते हैं।
What a journey Shri Makhanlal Sarkar ji has had……
1953 – Arrested along with Dr. Mookerjee while agitating against Article 370
2019 – Witnessed abrogation of Article 370
2026 – Honoured PM Modi for his lifelong commitment even as FIRST BJP Govt in West Bengal is formed pic.twitter.com/rFWJ48aCw1
— Akhilesh Mishra (@amishra77) May 9, 2026
सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीर तेजी से वायरल हुई। कई लोगों ने इसे भारतीय राजनीतिक संस्कृति का दुर्लभ क्षण बताया। कुछ लोगों ने लिखा कि राजनीति में विचारधारा और समर्पण की जो परंपरा पहले दिखाई देती थी, उसकी झलक इस तस्वीर में फिर नजर आई।

बंगाल की राजनीति लंबे समय से वैचारिक संघर्ष का केंद्र रही है। ऐसे में माखनलाल सरकार जैसे पुराने कार्यकर्ता बीजेपी के लिए सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक प्रतीक हैं। वह उस दौर के गवाह हैं जब पार्टी का झंडा उठाना आसान नहीं था।

प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वह लगातार अपनी राजनीति में संगठन और संस्कार को जोड़ने की कोशिश करते हैं। मंच पर माखनलाल सरकार को गले लगाना सिर्फ सम्मान नहीं था, बल्कि एक संदेश था कि राजनीति में संघर्ष करने वालों को कभी भुलाया नहीं जाता।
That’s what being part of the BJP family means- bonds which are cherished forever.
Today, Adarniya @narendramodi ji on the historic occasion of swearing in of BJP’s first Govt in Bengal, felicitated and touched the feet of Shri Makhanlal Sarkar, a close aide of Shyama Prasad… pic.twitter.com/m0ofdCQXzy
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) May 9, 2026
आज जब राजनीति में चेहरे तेजी से बदलते हैं, विचारधाराएं कमजोर पड़ती दिखती हैं और कार्यकर्ताओं की जगह प्रचार हावी हो जाता है, तब माखनलाल सरकार जैसे लोग याद दिलाते हैं कि किसी भी बड़े राजनीतिक आंदोलन की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता ही होते हैं।
भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं को परिवार मानने वाली संस्कृति है।
98 वर्षीय वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री माखनलाल सरकार जी से आशीर्वाद लेकर प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने इसी सम्मान और कृतज्ञता की परंपरा को पुनः प्रणाम किया। pic.twitter.com/uH9bxDxwpE
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) May 9, 2026
कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में उस दिन हजारों लोग मौजूद थे, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा किसी भाषण की नहीं हुई। चर्चा उस एक तस्वीर की हुई, जिसमें देश का प्रधानमंत्री एक 98 साल के बुजुर्ग कार्यकर्ता के सामने सिर झुकाकर खड़ा था। वही तस्वीर शायद आने वाले समय में बीजेपी की राजनीतिक संस्कृति और संगठनात्मक विरासत की सबसे मजबूत पहचान बनकर याद की जाएगी।









