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कांग्रेस विधायक भरत सिंह की CM Gehlot को चिट्ठी- ‘सबसे बड़े खनन माफिया तो खनिज मंत्री प्रमोद जैन भाया, इनको तत्काल बर्खास्त करें’…सबसे ज्यादा अवैध खनन, पर CM की आंखें बंद

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भरतपुर में अवैध खनन के खिलाफ साधु विजयदास बाबा की आत्मदाह के बाद मौत तो नजीर मात्र है। राजस्थान में अवैध खनन सुर्खियों में रहने, सुप्रीम कोर्ट के द्वारा भी खनन पर टिप्पणी करने के बावजूद गहलोत सरकार की आंखें इस ओर से बिल्कुल बंद हैं। दरअसल, बात अकेले भरतपुर के डीग में हो रहे अवैध खनन की नहीं है। प्रदेशभर में ऐसा खनन धड़ल्ले से हो रहा है। इसमें खुद खान मंत्री प्रमोद जैन भाया का इलाका नंबर वन है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कांग्रेस विधायक भरत सिंह कई बार खनन मंत्री पर ही गंभीर आरोप लगा चुके हैं। यहां तक हाईवे पर खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया के खिलाफ लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स (खाया रे खाया भाया ने खाया) की तस्वीरें भी फिर से वायरल हो रही हैं। इसके बावजूद भाया के खिलाफ कार्रवाई की सीएम गहलोत हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

खनन के नाम पर आस्था के केंद्रों पर बुलडोजर चलवा रही गहलोत सरकार
अवैध खनन के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाने वाले बाबा विजयदास की मौत के बाद भले ही भरतपुर में अवैध खनन के खिलाफ 551 दिन चला साधु संतों का आंदोलन तो समाप्त हो गया हो, लेकिन अब एक बार फिर गहलोत सरकार, उसके खान मंत्री, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कठघरे में आ गए हैं। बीजेपी बाबा विजयदास के मौत के लिए सीधे-सीधे गहलोत सरकार को दोषी ठहरा रही है। बीजेपी नेताओं के तर्क हैं कि सवा साल से भी ज्यादा समय से साधु-संत अवैध खनन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए गहलोत सरकार उनकी आस्था के केंद्रों पर गहलोत सरकार बुलडोजर चलवा रही है।

कांग्रेस विधायक ने भरतपुर की घटना पर मुख्यमंत्री गहलोत को खरी-खरी सुनाई
विपक्ष ही नहीं अवैध खनन को लेकर कांग्रेस विधायक तक अपनी सरकार के खिलाफ आ गए हैं। कांग्रेस विधायक भरत सिंह ने सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखकर सूबे के खनिज मंत्री प्रमोद जैन भाया पर निशाना साधा है। यही नहीं उन्होंने भरतपुर की घटना पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने पत्र में लिखा, ‘प्रदेश का सबसे बड़ा खनन माफिया तो खनिज मंत्री हैं। अगर खनन माफिया पर नियंत्रण करना चाहते हैं तो तत्काल उन्हें बर्खास्त करें।’

राजस्थान में खनिज मंत्री के क्षेत्र बारां में बहती है अवैध खनन के भ्रष्टाचार की नदी
हाड़ौती के कांग्रेस विधायक भरत सिंह के इस पत्र के सामने आते ही फिर चर्चा शुरू हो गई कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी के विधायक ब्यूरोक्रेसी से ही नहीं, मंत्रियों के रवैये से भी नाराज दिख रहे हैं। यही नहीं वो मुख्यमंत्री से भी खफा हैं। भरत सिंह पूर्व में खनिज मंत्री के लिए कह चुके हैं कि राजस्थान में कहीं अवैध खनन के भ्रष्टाचार की नदी बहती है तो वो बारां है। उनका आरोप है कि सरकार, माफिया और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के गठजोड़ और लेन-देन के बिना अवैध खनन संभव नहीं है।यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के गृह जिले कोटा में नदियों किनारे होता है अवैध खनन
खनिज मंत्री प्रमोद जैन भाया के गृह जिले बारां में अवैध खनन पत्थर, मिट्टी, रेत का कालीसिंध नदी पार्वती नदी परवन नदी और इन नदियों के आसपास के वनक्षेत्र में होता हैं। ऐसे ही यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के गृह जिले कोटा में घड़ियाल सेंचुरी चंबल नदी, परवन, कालीसिंध, पार्वती नदी व पठारी वन क्षेत्र में बड़ी मात्रा में अवैध खनन होता है। पूर्व मंत्री व कांग्रेस विधायक भरत सिंह के निशाने पर प्रदेश के खनिज मंत्री प्रमोद जैन भाया है।खनन मंत्री के इलाके में ही सर्वाधिक अवैध खनन, टॉप-10 जिलों में सबसे ऊपर
प्रदेश में होने वाला अवैध खनन के सर्वाधिक मामले हाड़ौती में दर्ज हैं। प्रदेश के टॉप-10 अवैध खनन वाले जिलों में सबसे ऊपर बारां और कोटा जिले हैं। खनन मंत्री भी बारां जिले से ही नाता रखते हैं। वहीं दूसरे नंबर रहे कोटा जिले से सरकार के यूडीएच मंत्री आते हैं। अवैध खनन को लेकर बारां जिले में 493 और कोटा जिले में 456 मामले दर्ज हुए। यह मामले खान विभाग और वन विभाग की ओर से दर्ज किए गए हैं।

साधु की मौत से कांग्रेस विधायक व्यथित, अपने खनन मंत्री पर निशाना
कांग्रेस विधायक भरत सिंह ने सीएम को लिखे पत्र में कई गंभीर सवाल खनन मंत्री पर उठाए हैं। उन्होंने भरतपुर इलाके में अवैध खनन को रोकने के लिए 551 दिनों से आंदोलित साधु के आत्मदाह करने की घटना का भी जिक्र किया है। साधु के मामले में कांग्रेस के सांगोद विधायक भरत सिंह काफी व्यथित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अवैध खनन पर लगाम के लिए और भरतपुर की घटना को लेकर कार्रवाई की मांग की है।

आदिबद्री और कनकांचल पर्वत को लेकर साधु-संतों और लोगों में क्यों है इतनी आस्था?
नंद बाबा और यशोदा मां ने जताई थी तीर्थ की इच्छा बाबा सुनील दास ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान कृष्ण के माता-पिता नंद बाबा और मां यशोदा मैया जब बूढ़े हुए तो उन्होंने बेटे से चार धाम की तीर्थ यात्रा करने की इच्छा जाहिर की। तब भगवान कृष्ण ने बुजुर्ग माता-पिता की दशा देखते हुए चारों धाम और सभी तीर्थ से आह्वान किया कि वे ब्रज की धरती पर आ जाएं। भगवान के आह्वान पर सभी तीर्थ ब्रज मंडल में आ गए। माता यशोदा और नंद बाबा ने चौरासी कोस की यात्रा कर सभी धामों की तीर्थ यात्रा का पुण्य पा लिया। तब से ब्रज मंडल के चौरासी कोस की परिक्रमा की जाती है।

प्रियंका गांधी और अशोक गहलोत से गुहार के बाद भी नहीं रुका अवैध खनन
काबिले गौर है कि राजस्थान की ब्रज 84 कोस परिक्रमा मार्ग में आदिबद्री और कनकाचल पर्वतों में हो रहे अवैध खनन की जानकारी के बावजूद गहलोत सरकार 551 दिन तक सोती रही। अवैध खनन को रुकवाने के लिए यूपी के चुनाव के दौरान साधु-संत कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी से मिले थे। गहलोत-प्रियंका से गुहार लगाने के सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले, लेकिन अवैध खनन नहीं रुका। न ही कनकाचल और आदि बद्री क्षेत्र को वन क्षेत्र में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। आखिरकार 551 दिन से धरना दे रहे साधु-संतों के सब्र का बांध टूट गया। पशुपति नाथ मंदिर के महंत विजयदास बाबा (60) ने विरोध-स्वरूप खुद को आग लगा ली। वे राधे-राधे कहते हुए दौड़ने लगे। पुलिस ने जब तक आग बुझाई, तब तक बाबा 80% झुलस गए और बाद में उनकी इलाज के दौरान दिल्ली में मौत हो गई।
बाबा के आत्मदाह के बाद राजस्थान के खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया बैकफुट पर आए

 

वैसे देखा जाए तो सही मायने में अवैध खनन की यह पूरी आग खान विभाग की लगाई हुई है। खननकर्ताओ और अफसरों का गठजोड़ इतना प्रभावी है कि खनन रुकवाने के लिए साधु संत 551 दिन से आंदोलनरत हैं। पहले कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और बाद में खुद सीएम अशोक गहलोत से भी मिले। लेकिन यहां न खनन रुका न इसे वन क्षेत्र घोषित किया गया। बाबा के आत्मदाह के बाद राजस्थान के खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया बैकफुट पर आ गए। मंत्री ने कहा कि संत जिन खानों को बंद करने की मांग कर रहे हैं, वे लीगल हैं। फिर भी उनकी लीज शिफ्ट करने पर विचार किया जाएगा। बाबा के आत्मदाह से दबाव में आए पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने 15 दिन में कनकांचल व आदिबद्री को वनक्षेत्र घोषित करने व दो महीने में इन क्षेत्रों में सभी लीज को शिफ्ट करने का आश्वासन देना पड़ा। इसके बाद पसोपा में मान मंदिर सेवा संस्थान बरसाना के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने धरना खत्म करने का ऐलान किया।

 

 

 

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