Home समाचार हेमंत सोरेन सरकार का मुस्लिम तुष्टिकरण, झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों में...

हेमंत सोरेन सरकार का मुस्लिम तुष्टिकरण, झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों में शिक्षा विभाग की जानकारी में उड़ीं नियमोंं की धज्जियां, स्कूलों में रविवार के बजाय शुक्रवार को छुट्टी

394
SHARE

झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन की सरकार आने के बाद मुस्लिम तुष्टिकरण चरम पर पहुंच गया है। संविधान और धर्मनिरपेक्षता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। झारखंड में एक राज्य और दो विधान लगू हो गया है। यानि राज्य में आबादी के मुताबिक कानून लागू किया गया है। मुस्लिम बहुल इलाके में शरिया और हिन्दू बहुल इलाके में आम कानून लागू किया गया है। राज्य के पांच जिलों गढ़वा, पलामू, जामताड़ा, गुमला और रांची में ही ऐसे 70 स्कूल हैं, जो सामान्य से उर्दू स्कूल में तब्दील कर दिए गए हैं। इनमें से 43 अकेले जामताड़ा के हैं। इलाके में मुस्लिम आबादी बढ़ते ही इन स्कूलों में साप्ताहिक अवकाश रविवार से बदलकर शुक्रवार कर दिया गया। स्कूल की दीवार पर भी शुक्रवार को जुमा लिख दिया गया।

जुमा के दिन छुट्टी,स्कूलों के नाम के आगे उर्दू शब्द

झारखंड में हालात ये हो गए हैं कि जिस गांव में मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है, वहां भारत का संविधान लागू नहीं हो रहा है। दबाव डालकर शरिया कानून को लागू किया जा रहा है। इलाके के स्कूलों में छुट्टी का दिन जुमा तय कर दिया गया है। इतना ही नहीं स्कूलों के नाम के आगे उर्दू शब्द को लिखा गया है। जामताड़ा डीएसई द्वारा जारी पत्र के मुताबिक करमाटांड प्रखंड का उत्क्रमित मध्य विद्यालय अलगचुआं उर्दू विद्यालय नहीं है, लेकिन स्कूल के नाम के आगे उर्दू शब्द जुड़ा हुआ है। यहां के अलीमुद्दीन अंसारी ने कहा- स्कूल से उर्दू शब्द नहीं हटाने देंगे। जामताड़ा उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज से जब सवाल किया गया तब उन्होंने शिक्षा विभाग पर पल्ला झाड़ते हुए बयान देने से मना कर दिया। 

मुस्लिम बहुल आबादी का स्कूलों में बढ़ता दखल

जिन स्कूलों में शुक्रवार के दिन अवकाश घोषित किया गया है, वो न तो उर्दू विद्यालय हैं और ना ही शुक्रवार को बंद रखने का निर्देश लिया गया है, फिर भी दबाव में ऐसा किया जा रहा है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया कि स्कूलों में जुमे की छुट्टी कब से की रही है। सरकारी आंकडे के अनुसार, जिले में करीब 1084 सरकारी स्कूल हैं। जिन स्कूलों में जुमा के दिन यानि शुक्रवार को छुट्टी दी जा रही है, वे ज्यादातर नारायणपुर, करमाटांड और जामताड़ा प्रखंड में स्थित हैं।

कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने किया समर्थन

उधर जामताड़ा से विधायक इरफान अंसारी ने शुक्रवार को अवकाश दिए जाने का समर्थन किया है। उन्होंने शुक्रवार को अवकाश का बचाव करते हुए दलील दी कि जहां पर पूरी तरह से अल्पसंख्यक बच्चे हैं वहां यह नियम पहले से चला आ रहा है। उर्दू स्कूलों में आज भी शुक्रवार को छुट्टी होती है। वहीं इसके बदले रविवार को पढ़ाई होती है। यह तो पहले से होता है तो इसमें मनमानी किस बात की है।

स्कूल में हाथ जोड़कर प्रार्थना करने पर पाबंदी

गैरतलब है कि पिछले दिनों झारखंड के गढ़वा में कोरवाडीह स्थित उत्क्रमित विद्यालय में हाथ जोड़कर प्रार्थना नहीं करने का मामला सामने आया था। यहां भी मुस्लिम आबादी ज्यादा होने के कारण प्रार्थना का नियम बदला गया था। प्रधानाध्यापक का आरोप है कि स्थानीय लोगों के दबाव के आगे वे मजबूर हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से भी इसकी शिकायत की। मामला जब राज्य के शिक्षा मंत्री के पास पहुंचा तो उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को जांच का आदेश दिया। इसके बाद प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद पहले की तरह स्कूल में प्रार्थना होने लगी।

75 प्रतिशत मुस्लिम आबादी का हवाला देकर बनाया दबाव

गढ़वा मध्य विद्यालय में आलम ये हो गया था कि मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रधानाध्यापक को स्कूल में प्रार्थना को बदलने के लिए विवश कर दिया था। यहां दया कर दान विद्या का… प्रार्थना को बंद करवाकर तू ही राम है, तू रहीम है…प्रार्थना शुरू करा दी गई गई थी। प्रधानाध्यापक का कहना था स्कूल के संचालन में मुस्लिम समुदाय के लोग हस्तक्षेप करते हैं। 75 प्रतिशत आबादी का हवाला देकर स्कूल के नियमों में बदलाव का दबाव बनाते हैं। इस तरह आबादी का हवाला देकर बनाया गया दबाव भविष्य में खतरे का संकेत दे रहा हैं। 

दुमका और रामगढ़ में हाथ बांधकर प्रार्थना

दुमका जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय छैलापाथर में भी नाम के आगे उर्दू शब्द जुड़ा हुआ है। दुमका डीएसई कार्यालय के अनुरास यह उर्दू स्कूल नहीं है। लेकिन फिर भी यहां शुक्रवार को छुट्टी होती है। हाथ बांधकर प्रार्थना हो रही है। उधर रामगढ़ जिला के दुलमी प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय जरियो (उर्दू) के बच्चे सरकारी गाइडलाइन का उल्लंघन करते हैं। बच्चे हाथ जोड़कर नहीं हाथ बांधकर प्रार्थना करते हैं। इस संबंध में प्रधानाध्यापक राज कुमार किशोरिया ने बताया कि 2019 में इस विद्यालय का पदभार लिया हूं। तब से लेकर आज तक हाथ बांधकर और बदला हुआ प्रार्थना गाया जा रहा है। हमने आजतक कभी भी प्रार्थना में बदलाव नहीं किया है।

खुलेआम उड़ाई जा रही हैं नियमों की धज्जियां

इस तरह नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। इसकी जानकारी सिर्फ जिले के शिक्षा पदाधिकारी और उपायुक्त को ही नहीं, पूरे शिक्षा विभाग को भी थी। सबसे बड़ा प्रमाण यू-डायस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) और ई-विद्या वाहिनी पोर्टल है। इससे प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों का लेखा-जोखा शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के पास वर्षों से पहुंच रहा था। शुक्रवार को शिक्षकों की अनुपस्थिति की जानकारी भी भेजी जा रही थी। हर महीने ऐसे शिक्षकों का पूरा वेतन बन रहा था।

शिक्षा विभाग की जानकारी में है साप्ताहिक अवकाश का मामला

शिक्षा विभाग के अधिकारी पल्ला नहीं झाड़ सकते कि उनकी जानकारी में यह मामला नहीं था। अहम बात यह है कि डीईओ से लेकर कई अन्य अधिकारियों ने शुक्रवार को अवकाश के कारण रविवार को खुले कई स्कूलों का दौरा भी किया। रजिस्टर में हस्ताक्षर किए। जबरन उर्दू स्कूल की तर्ज पर चलाए जा रहे स्कूलों के शिक्षकों ने साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार दिखाया, रविवार को उपस्थिति दर्ज की, बावजूद किसी ने रोका नहीं। हर माह बायोमीट्रिक अटेंडेंस शीट के साथ अनुपस्थिति की जानकारी व्ययन पदाधिकरी के पास लिखित में दी जाती रही है। ई-विद्या वाहिनी पर कोई भी अधिकारी किसी भी शिक्षक की उपस्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। बायोमीट्रिक अटेंडेंस की हर गतिविधि तो विभाग के सर्वर से ही जुड़ी है। निगरानी से पता चलता है कि किस स्कूल में साप्ताहिक अवकाश किस दिन है।

 

 

Leave a Reply