आओ रानी, हम ढोएँगे पालकी,
यही हुई है राय जवाहरलाल की।
मशहूर जनकवि बाबा नागार्जुन इस व्यंग्य कविता के माध्यम से तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार द्वारा ब्रिटिश राजशाही (महारानी एलिजाबेथ) के भव्य और चाटुकारितापूर्ण स्वागत पर कही थी। अब अपने परिवार की उसी जी-हुजूरी की परंपरा को आगे करते हुए कांग्रेस से ‘युवराज’ ने अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क का इसी अंदाज में स्वागत किया है…मानो वह अमेरिका के ‘राजा’ को बुला रहे हों! राहुल गांधी और कांग्रेस का इससे बढ़कर देशविरोधी रवैया और क्या हो सकता है कि जो मस्क हमारे देश के प्रधानमंत्री पर तंज करते हुए अंबानी की भारत का बॉस बता रहा है, अंबानी को प्रधानमंत्री के समकक्ष रखकर तंज कर रहा है, उसके ट्वीट का राहुल गांधी स्वागत कर देशविरोधी रुख अपना रहे हैं। वह भी एलन मस्क के उस स्टारलिंक के लिए जो देश के नियम-कायदों को ताक पर रखकर भारत आना चाहता है। राहुल गांधी को भारतीय इंटरनेट कंपनियों की तो जरा भी परवाह नहीं हैं, लेकिन देश की सुरक्षा से खिलवा करने वाली स्टारलिंक और उसके सर्वेसर्वा एलन मस्क की चिंता है। यह कोई पहली बार नहीं जब राहुल गांधी या कांग्रेस ने देश विरोधी रवैया अपनाया हो। इससे पहले भी देश में यहां तक विदेशी सरजमीं पर भी भारत विरोधी रवैया अपना चुके हैं।
स्टारलिंक से राष्ट्रीय सुरक्षा की क्या चुनौतियां हो सकती हैं?
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा भारत के दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ा सकती है, लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर सुरक्षा संबंधी सवालों पर ध्यान देना भी जरूरी है। यदि किसी नेटवर्क के उपकरणों या सेवाओं का इस्तेमाल संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में अनधिकृत गतिविधियों के लिए किया जाए, या साइबर सुरक्षा में खामी का फायदा उठाया जाए, तो बहुत जोखिम पैदा हो सकता है। इसी तरह संकट या युद्ध की स्थिति में किसी विदेशी कंपनी के नियंत्रण वाले संचार नेटवर्क पर निर्भरता रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती है। असल चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी कंपनी भारतीय कानूनों, डेटा सुरक्षा मानकों, लाइसेंस की शर्तों और सरकारी सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह पालन करे। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के नियमों के अनुसार, उपग्रह इंटरनेट कंपनियों को भारत में स्थापित गेटवे, भारतीय ट्रैफिक की रूटिंग, कानूनी निगरानी और सुरक्षा संबंधी शर्तों का पालन करना होता है।
गंभीर सुरक्षा चुनौतियों में राहुल की हल्की और गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी
मस्क ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी भारत में स्टारलिंक के प्रवेश को रोककर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने मुकेश अंबानी को संबोधित करते हुए व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा कि क्या भारत के असली बॉस अंबानी हैं। राहुल गांधी ने जवाब दिया, “भारत में आपका स्वागत है, एलन। अभी आप दूसरे व्यक्ति से मिलिएगा।” इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई। ऐसी गंभीर सुरक्षा चुनौतियों में राहुल गांधी का जवाब केवल एक कारोबारी विवाद पर टिप्पणी नहीं रह जाता। विपक्ष के नेता के रूप में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर स्पष्ट करें, न कि किसी विदेशी कारोबारी के दावों को राजनीतिक कटाक्ष के जरिए आगे बढ़ाएं। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने मस्क के भेदभाव संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उपग्रह संचार सेवाओं के लिए नियामकीय ढांचा निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है।
Starlink is licensed in over 165 countries and has spent five years complying with every single law and requirement of the government of India, so why still no license?
Is Ambani the real boss of India?
— Elon Musk (@elonmusk) October 8, 2026
राहुल बताएं कि स्टारलिंक का समर्थन उसी की शर्तों पर करेंगे!
ऐसे में राहुल गांधी को भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे स्टारलिंक के प्रवेश का समर्थन भारतीय कानूनों के पालन की शर्त पर करते हैं या मस्क के आरोपों को ही पर्याप्त मानते हैं। भारत दुनिया की बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विदेशी निवेश, नई तकनीक और वैश्विक कंपनियों की भागीदारी इस विकास में योगदान दे रही है। लेकिन किसी भी कंपनी को बाजार में प्रवेश देने का फैसला केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि वह कितने देशों में कारोबार करती है या उसने कितना निवेश किया है। भारत में काम करने वाली हर कंपनी को देश के कानूनों, डेटा सुरक्षा के प्रावधानों और नियामकीय व्यवस्था का पालन करना होगा। स्टारलिंक को भी यही करना चाहिए। यदि उसे आवश्यक मंजूरियां मिलती हैं, तो वह भारतीय उपभोक्ताओं को एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकती है।
Welcome to India, Elon.
Wait till you discover the other guy.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 8, 2026
राहुल गांधी हर विवाद को सिर्फ मोदी विरोध के चश्मे से देखते हैं
राहुल गांधी की राजनीति पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते समय वे हर विवाद को उसी चश्मे से देखते हैं? यदि सरकार के किसी फैसले में खामी हो तो विपक्ष को तथ्य और प्रमाण के साथ उसे उजागर करना चाहिए। यदि भारतीय कंपनियों को अनुचित लाभ दिया जा रहा है, तो उसकी जांच की मांग होनी चाहिए। लेकिन जब कोई विदेशी उद्योगपति भारत की नीतियों पर आरोप लगाता है, तो विपक्ष का काम उन आरोपों की स्वतंत्र पड़ताल करना भी है। केवल इसलिए किसी दावे को सही नहीं मान लिया जा सकता कि उससे प्रधानमंत्री या उनकी सरकार पर निशाना साधने का अवसर मिल रहा है। राहुल गांधी के जवाब में राजनीतिक व्यंग्य तो था, लेकिन नियामकीय प्रक्रिया, सुरक्षा संबंधी शर्तों और भारतीय दूरसंचार उद्योग के हितों पर स्पष्ट बात नहीं थी। यही वह कमी है, जिसके लिए राहुल गांधी और कांग्रेस की सर्वत्र आलोचना हो रही है।
स्टारलिंक का मामला सिर्फ इंटरनेट सेवा का नहीं
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक उपग्रहों के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराती है। दूरदराज के गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और उन स्थानों के लिए जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड पहुंचाना कठिन है, ऐसी तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। भारत जैसे विशाल देश में इसके संभावित लाभों को नकारा नहीं जा सकता। लेकिन किसी तकनीक के उपयोगी होने का अर्थ यह नहीं कि उसे देश के नियमों से छूट मिल जानी चाहिए। उपग्रह संचार नेटवर्क का संचालन, डेटा का प्रबंधन, नेटवर्क पर नियंत्रण और आपात परिस्थितियों में सेवाओं का नियमन ऐसे विषय हैं, जिनका राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा संबंध हो सकता है। इसलिए स्टारलिंक को भी वही शर्तें पूरी करनी होंगी, जो भारत सरकार ने निर्धारित की हैं। सवाल मस्क के भारत आने का विरोध करने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि भारत में कारोबार करने वाली हर कंपनी भारतीय कानूनों और सुरक्षा व्यवस्था के प्रति जवाबदेह रहे।

आइए, अब एक नजर डालते हैं कांग्रेसी नेताओं की देश विरोधी मानसिकता पर…
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाते रहे है सवाल
कांग्रेस जब भी कोई चुनाव हारती है तो हार का ठीकरा ईवीएम मशीन पर लगा देती है और जीतने पर चुप्पी साध लेती है। सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस ने हर हार के लिए ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप लगाए, लेकिन जब चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को साबित करने की चुनौती दी तो राहुल गांधी समेत कोई भी कांग्रेसी नेता पहुंचा ही नहीं। कांग्रेस ने पक्षपात के आरोप लगाए, हालांकि वह कभी साबित नहीं कर पाई। पिछले छह साल में कई वाकये ऐसे आए जब कांग्रेस ने हारने के बाद चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ दिया,लेकिन जीत पर चुप्पी साध ली। सत्ता से दूर रहने की हताशा में कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर ही प्रश्नचिह्न लगाती रही है। आइये एक नजर डालते हैं कि कांग्रेस ने कब-कब संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्न खड़े किए।
जस्टिस लोया मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सवाल
जस्टिस लोया मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय सुनाते हुए सख्त टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ”याचिकाकर्ताओं के वकील दुष्यंत दवे, इंदिरा जयसिंह और प्रशांत भूषण ने न्यायपालिका पर एक फौजदारी हमला शुरू कर दिया और एससी के तीन न्यायिक अधिकारियों को अविश्वसनीय बताया, जो लोया के साथ नागपुर गए थे, उनके साथ एक गेस्ट हाउस में रहे और कहा गया कि लोया दिल का दौरा पड़ने से मर गए। तर्कों के दौरान वकीलों ने एससी के न्यायाधीशों की ओर संस्थागत सभ्यता नहीं बनाए रखा और गलत आरोप लगाया। ऐसे मामलों में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करना आदर्श होगा, जहां न्यायपालिका को बदनाम करने के लिए एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अदालत में लाई जाती है।” जाहिर है देश की सुप्रीम अदालत इस बात से आहत है कि उसे राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
मक्का ब्लास्ट मामले में हाई कोर्ट के निर्णय पर सवाल
हिन्दू आतंकवाद का शब्द गढ़कर समूचे हिन्दू धर्म को बदनाम करने वाली कांग्रेस ने मक्का ब्लास्ट पर भी हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठा दिए। कांग्रेस ने इस तथ्य को छिपाने की कोशिश की कि उसके द्वारा ‘क्रिएटेड’ गवाह ही अपने बयानों से मुकर गए।
रिजर्व बैंक पर सवाल उठाए
वर्ष 2016 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और वित्त मंत्रालय के तालमेल से देश में डिमोनिटाइजेशन का निर्णय लिया गया। देश में भ्रष्टाचार पर प्रहार के लिए लिया गया निर्णय कांग्रेस को रास नहीं आया और इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पर ही सवाल खड़ा कर दिया, जबकि ये एक संवैधानिक संस्था है, जो स्वायत्त है। आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन का कार्यकाल खत्म हुआ तो भी कांग्रेस ने उनकी सेवा को बरकरार रखने के लिए सरकार पर अनैतिक दबाव बनाने का भी काम किया।

सीएजी को कठघरे में खड़ा किया
2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला और कोयला घोटाला का जब से खुलासा हुआ तब से ही कांग्रेस ने संवैधानिक संस्था सीएजी पर ही हमला करना शुरू कर दिया। हालांकि जब जांच के दायरे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कांग्रेस के कई सांसद और मंत्री आ गए तो कांग्रेस की बोलती बंद हो गई। दरअसल कांग्रेस ने सीएजी पर तब ये आरोप लगाए थे, जब केंद्र की सत्ता में खुद कांग्रेस की सरकार थी।
कांग्रेस ने सेना को भी नहीं बख्शा
कांग्रेस ने एक ओर जहां तत्कालीन आर्मी चीफ बिपिन रावत को ‘सड़क का गुंडा’ कहा तो वहीं दूसरी ओर सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाकर सेना का मनोबल तोड़ने की कोशिश की। इसी तरह जब सेना के मेजर गोगोई ने पत्थरबाज को जीप पर बांधकर सेना के दर्जनों जवानों की जान बचाई तो कांग्रेस ने इस पर भी राजनीति की। कांग्रेस ने अपनी ही सरकार के दौरान तत्कालीन आर्मी चीफ वीके सिंह की उम्र को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की। यहां तक कि उनपर देश में आर्मी रूल लगाए जाने की साजिश रचने तक के आरोप लगा दिए।
नीति आयोग के गठन पर भी उठाए सवाल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब योजना आयोग की जगह नीति आयोग बनाने का निर्णय लिया तो कांग्रेस ने इसका पुरजोर विरोध किया। हालांकि बदलते वक्त के साथ देश को नीति आयोग जैसी संस्था की जरूरत है, क्योंकि देश में ‘कांपिटिटिव कॉपरेटिव फेडरलिज्म’ के सिस्टम को अमल में लाया गया है। इसमें राज्यों की सहभागिता बढ़ी है और योजनाओं के निर्माण और उसके बजट में भी राज्य सरकारों का सीधा संबंध स्थापित हो सका है।

राहुल ने ट्वीट में जम्मू-कश्मीर को दिखाया पाकिस्तान का हिस्सा
आजादी के बाद से ज्यादातर समय सत्ता-सुख भोगने वाली कांग्रेस के नेता देश विरोधी कार्य से पीछे नहीं हट रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में एक ट्वीट में जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से को पाकिस्तान के हिस्से के तौर पर दिखा दिया। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करॉना वायरस को लेकर किए गए ट्वीट में जम्मू-कश्मीर को पाक का हिस्सा दिखाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें लताड़ लगानी शुरू कर दी, जिसके बाद उन्होंने वह ट्वीट डिलीट कर दिया।
राहुल गांधी के बयान को पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में बनाया था हथियार
पाकिस्तान ने 27 अगस्त, 2019 को कश्मीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र (UN) में दिए अपने प्रस्ताव में राहुल गांधी के बयान का जिक्र किया। पाकिस्तान ने कश्मीर मामले में संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखकर भारत की शिकायत की। इस चिठ्ठी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों का हवाला दिया। इस चिट्ठी में भारत पर कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन और हिंसा को बढ़ाने का आरोप लगाया। इमरान खान सरकार में मंत्री डॉ शिरीन मजारी ने यूएन को लिखी अपनी आठ पेज की चिट्ठी में पेज छह और आठ पर राहुल गांधी का जिक्र किया।


My detailed letter to 18 UN Special Procedures mandate-holders on violations of international human rights law by the Government of India in IOK. pic.twitter.com/kWyuop6pS1
— Shireen Mazari (@ShireenMazari1) August 27, 2019
— Shireen Mazari (@ShireenMazari1) August 27, 2019
पाकिस्तान ने इसमें लिखा कि भारत में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी माना है कि ‘कश्मीर में लोग मर रहे हैं’ और वहां हालात सामान्य नहीं हैं। इस चिट्ठी में जहां पाकिस्तान ने राहुल गांधी के ट्वीट का जिक्र करते हुए कश्मीर में आम नागरिकों पर हिंसा की बात कही, वहीं महबूबा मुफ्ती के ट्वीट को भी शामिल किया।
Pak writes to @UN again on #Kashmir Quotes @RahulGandhi ‘violence acknowledged by Rahul Gandhi who has noted people dying there’, also includes Tweets by @MehboobaMufti @ABPNews pic.twitter.com/EIXogdVXjo
— Ashish/Aashu (ABP News) (@AshishSinghLIVE) August 27, 2019
हाल ही में कश्मीर दौरे से लौटाए गए राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा था कि उन्हें उस बर्बरता का अहसास हुआ जिसको कश्मीरी झेल रहे हैं। राहुल के इस बयान का पाकिस्तान ने इस्तेमाल भी करने लगा। उनके ट्वीट को वहां की न्यूज वेबसाइट प्रमुखता से दिखा रहे थे।
It’s been 20 days since the people of Jammu & Kashmir had their freedom & civil liberties curtailed. Leaders of the Opposition & the Press got a taste of the draconian administration & brute force unleashed on the people of J&K when we tried to visit Srinagar yesterday. pic.twitter.com/PLwakJM5W5
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 25, 2019
National integration isn’t furthered by unilaterally tearing apart J&K, imprisoning elected representatives and violating our Constitution. This nation is made by its people, not plots of land.
This abuse of executive power has grave implications for our national security.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 6, 2019
कश्मीर पर पाकिस्तान का समर्थन करने वाले देश तुर्की में खोला दफ्तर
देश में सिमट रही कांग्रेस ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देने वाले देश तुर्की में अपना दफ्तर खोला। अनादोलू एजेंसी की खबर के अनुसार तुर्की में यह दफ्तर को इस्ताम्बुल में खोला गया है। मोहम्मद युसूफ खान को इस दफ्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मोहम्मद युसुफ खान तुर्की में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे।
तुर्की ने यूएन में ना सिर्फ कश्मीर मुद्दा उठाकर भारत के आंतरिक मामले में दखल दिया था बल्कि कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की बात भी कही थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तुर्की को कूटनीतिक मात देने के लिए उसके प्रतिद्वंदी ग्रीस, साइप्रस और अर्मेनिया के राष्ट्रप्रमुखों से मुलाकात की और इन देशों के साथ संबंध मजबूत बनाने पर जोर दिया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपना प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया और तुर्की की कंपनी के साथ दो अरब डॉलर से ज्यादा की डील पर रोक लगा दी गई। इकनॉनिक टाइम्स के अनुसार हाल ही में विदेश मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों को तुर्की न जाने की सलाह दी और वहां की यात्रा करने वाले को सावधानी बरतने की सलाह दी।
ऐसे में जबकि भारत तुर्की को पाकिस्तान की तरह अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग करने में जुटा हुआ है, कांग्रेस वहां इंडियन ओवरसीज कांग्रेस का दफ्तर खोलकर देश में क्या संदेश देना चाहती है। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस इसके पहले भी कश्मीर मुद्दे पर ब्रिटेन की लेबर पार्टी के साथ चर्चा करके राष्ट्रीय हितों का नुकसान पहुंचा चुकी है।
कश्मीर पर कांग्रेस नेताओं के विवादित बोल
आजादी के बाद से ज्यादातर समय सत्ता-सुख भोगने वाली कांग्रेस भाषावाद, क्षेत्रवाद, प्रांतवाद, जातिवाद और संप्रदायवाद जैसे हथियार तो आजमाती ही रही है। देश के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर पर भी देश विरोधी रुख अपना रही है। आर्टिकल 370 पर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम, मणिशंकर अय्यर और दिग्विजय सिंह ने विवादित बयान दिए। इन कांग्रेसी नेताओं के बयान पाकिस्तान चैनल पर प्रमुखता से चलाए गए।
प्रियंका भी पीछे नहीं
राहुल गांधी के साथ उनकी बहन प्रियंका वाड्रा ने भी कश्मीर के माहौल पर एक विडियो के साथ ट्वीट किया था, ‘कब तक यह चलता रहेगा? यह लाखों लोगों में एक हैं, जिन्हें चुप करा दिया गया और राष्ट्रवाद के नाम पर कुचल दिया गया।’
How long is this going to continue?This is one out of millions of people who are being silenced and crushed in the name of “Nationalism”.
For those who accuse the opposition of ‘politicising’ this issue: https://t.co/IMLmnTtbLb
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) August 25, 2019
प्रियंका गांधी ने कहा, ‘विपक्ष पर जो लोग इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रहे हैं, कश्मीर में लोकतांत्रिक अधिकारों को ताक पर रखने से ज्यादा कुछ भी राजनीतिक या राष्ट्रदोह नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘यह हम सबका कर्तव्य है कि हम इसके खिलाफ आवाज उठाएं । हम ऐसा करने से नहीं रुकेंगे।’
there is NOTHING more ‘political’ and ‘anti national’ than the shutting down of all democratic rights that is taking place in Kashmir. It is the duty of every one of us to raise our voices against it, we will not stop doing so.
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) August 25, 2019
मुस्लिम बहुल है इसलिए हटाया 370- चिदंबरम
पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने एक विवादित बयान देकर कश्मीर मामले को धार्मिक रंग देने की कोशिश की। साल 2014 में सत्ता से बाहर होने के बाद से ही कांग्रेसी नेता बौखलाए रहते हैं और हर बात को तुष्टिकरण की दृष्टि से देखते हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील मामले पर गैरजिम्मेदाराना बयान देते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त करके हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेला है। यदि जम्मू-कश्मीर हिंदू बहुल राज्य होता तो भाजपा इस राज्य का विशेष दर्जा नहीं छीनती। ऐसा केवल इसलिए किया क्योंकि यह मुस्लिम बहुल है।
मोदी-शाह ने कश्मीर को बना दिया फिलीस्तीन- अय्यर
कांग्रेस के एक और नेता मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान समर्थित बयान देकर फिर विवादों में हैं। मणिशंकर अय्यर ने एक आलेख में लिखा है कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने देश के उत्तरी बॉर्डर पर एक फिलीस्तीन बना दिया है। मोदी-शाह ने ये पढ़ाई अपने गुरु बेंजामिन नेतान्याहू और यहूदियों से ली है। मोदी और शाह ने इनसे सीखा है कि कश्मीरियों की आजादी, गरिमा और आत्मसम्मान को कैसे रौंदना है? उन्होंने लिखा है कि अच्छे दिन की बजाय, संसद ने जो तय किया है वह घाटी में एक लंबी और अंधेरी रात है, और शायद देश के बाकी हिस्सों में भी ऐसा होगा।
पाकिस्तानी मीडिया में कांग्रेसी नेताओं की चर्चा
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेसी सांसदों के भाषण पाकिस्तानी मीडिया में छाए रहे। पाकिस्तानी न्यूज चैनल डिबेट में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, गुलाम नबी आजाद और पी चिदंबरम के भाषणों पर चर्चा होती रही। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने चर्चा के दौरान कहा कि जम्मू-कश्मीर के मसले पर यूएन निगरानी कर रहा है, ऐसे में ये आंतरिक मामला कैसे हो सकता है।



इसके अलावा भी कई और ऐसी घटनाएं हैं, जिनसे साबित होता है कि कांग्रेस पार्टी की मानसिकता राष्ट्रविरोधी रही है-
पुलवामा और मुंबई हमले पर किया पाकिस्तान का बचाव
कांग्रेसी और उसके सहयोगी नेता आतंकियों और संदिग्ध संगठनों से साठगांठ और सहानुभूति रखने के लिए हमेशा से ही चर्चित रहे हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद राहुल गांधी के करीबी और इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने बालाकोट हवाई हमले पर सवाल खड़े कर दिए। पित्रोदा ने पुलवामा हमले के साथ मुंबई हमले पर पाकिस्तान का बचाव करते हुए कहा कि इसके लिए आप पूरे देश को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं।
राहुल ने आतंकी सरगना मसूद अजहर को कहा ‘जी’
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पुलवामा अटैक की जिम्मेदारी लेने वाले पाक समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को आदर के साथ जी कहकर संबोधित किया। दिल्ली में कांग्रेस के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में राहुल गांधी ने आतंकी सरगना अजहर को जी कहकर संबोधित किया। इससे पहले कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन को ओसामा जी कह चुके हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी जैश ए मोहम्मद के एरिया कमांडर अफजल गुरु को जी कह कर संबोधित किया था।
राहुल गांधी का देशद्रोही बयान!, कहा भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान पर आक्रमण किया
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उड़ीसा की एक जनसभा में ऐसा बयान दिया, जिसे देशद्रोह की श्रेणी में ही रखा जा सकता है। उड़ीसा के कारोपुट में जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पिछले दिनों भारत की वायुसेना ने पाकिस्तान पर आक्रमण किया था और इसमें हमारे लोग शहीद हुए थे। राहुल गांधी के बयान से साफ है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह साबित करने पर तुले हुए हैं कि भारत की सरकार ने पाकिस्तान पर हमला किया था और वो अनुचित था। कांग्रेस के नेता बी के हरिप्रसाद तो यहां तक कह चुके हैं कि पुलवामा आतंकी अटैक पीएम मोदी और पाक पीएम इमरान की सांठगांठ का नतीजा था। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पुलवामा अटैक को दुर्घटना करार दिया था और सरकार से बालाकोट हमले के सुबूत मांगे थे।
पाकिस्तान से अय्यर ने कहा – हमें ले आइए, मोदी को हटाइए
साल 2014 पहली बार मोदी सरकार बनने के कुछ ही महीने बाद कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में एक मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान जाकर पीएम मोदी को हटाने के लिए उसकी मदद मांगी थी। एक पाकिस्तानी चैनल के सामने उन्होंने इसके लिए लगभग पाकिस्तानी शासकों से गुहार तक लगाई थी।
पूर्व पीएम मनमोहन ने पाकिस्तान उच्चायुक्त से की गुप्त मंत्रणा
कांग्रेसा नेता मणिशंकर अय्यर ने जिस दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘नीच आदमी’ कहा। उसके एक दिन पहले मणिशंकर अय्यर के घर पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पाकिस्तान उच्चायुक्त के हाई कमिश्नर ने हाई लेवल की गुप्त बैठकें कीं। इस गुप्त मंत्रणा के अगले ही दिन मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को गाली दे दी। इस पूरे वाकये में मनमोहन सिंह ने प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा दीं। 
सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध
28-29 सितंबर, 2016 की रात पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सेना द्वारा किया गया सर्जिकल स्ट्राइक देश के लिए गौरव का विषय था, लेकिन देशद्रोह पर उतर आई कांग्रेसी नेताओं ने इस पर भी सवाल खड़े कर दिए।कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सेना और प्रधानमंत्री पर सवाल खड़े करते हैं प्रधानमंत्री मोदी पर ‘खून की दलाली’ करने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे। दिग्विजय सिंह ने भी सेना की इस घोषणा पर सवाल खड़े किए। संजय निरूपम ने तो भारतीय सेना की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई को फर्जी बता दिया था।
डोकलाम मामले पर सरकार के स्टैंड का विरोध
भारत-चीन के बीच 73 दिनों तक सिक्किम से सटे डोकलाम क्षेत्र जबरदस्त तनातनी का माहौल रहा। इस कूटनीतिक और सैन्य तनाव पर दुनिया भर की नजरें गड़ी थीं। ऐसे में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी चोरी-छिपे भारत में मौजूद चीन के राजदूत लिओ झाओहुई से मिलने पहुंच गए। राहुल गांधी ने भारत की सेना या प्रधानमंत्री पर विश्वास करने की जगह चीनी राजदूत पर भरोसा किया।
राष्ट्रगान का विरोध और JNU में राहुल ने दिया देशद्रोहियों का साथ
पिछले साल आजादी के 70वीं वर्षगांठ में जब यूपी सरकार ने सरकार से अनुदानित सभी संस्थाओं में राष्ट्रगान को अनिवार्य किया, तो कांग्रेस ने इसका विरोध किया। कांग्रेस से विधायक रहे माविया अली ने कहा हम पहले हम मुसलमान हैं, भारतीय बाद में है। कांग्रेस की राजनीति तो कोर्ट के उस आदेश पर भी निकल कर आई जिसमें सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान अनिवार्य कर दिया गया था। दूसरी ओर दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU में भारत विरोधी नारे और देश को तोड़ने वाले नारे लगाते हुए पूरे देश ने देखा था, लेकिन देशविरोधी इन ताकतों की आलोचना करने के बजाए राहुल गांधी इनका समर्थन करने JNU पहुंच गए थे।
पत्थरबाजों और अफजल-याकूब का समर्थन करती है कांग्रेस
जब सेना के मेजर गोगोई ने पत्थरबाज को जीप पर बांधकर सेना के दर्जनों जवानों की जान बचाई तो कांग्रेस ने इस पर भी राजनीति की। जिस आतंकी बुरहान वानी को भारतीय सेना ने एनकाउंटर कर ढेर कर दिया उसे कांग्रेस पार्टी जिंदा रखने की बात कहती है। कश्मीर में पार्टी के नेता सैफुद्दीन सोज ने कहा कि उनका बस चलता तो वह आतंकी बुरहान वानी को जिंदा रखते। संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरु की फांसी पर भी कांग्रेस ने पॉलटिक्स की थी। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा था कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देना गलत था और उसे गलत तरीके से दिया गया। कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने अफजल गुरु को अफजल गुरुजी कहकर पुकारा था। इतना ही नहीं यही कांग्रेस है जिनके नेताओं ने याकूब मेनन की फांसी पर भी आपत्ति जताई थी। काग्रेस नेताओं के समर्थन पर ही प्रशांत भूषण ने रात में भी सुप्रीम कोर्ट खुलवा दिया था।
कश्मीर के अलगावादियों से कांग्रेस के हैं रिश्ते
कश्मीर में बिगड़ते माहौल के पीछे काफी हद तक अलगाववादी नेताओं का ही हाथ रहा है। अलगाववादी नेताओं को लगातार उनके पाकिस्तानी आकाओं से मदद मिलती रही है और वह यहां कश्मीरी लड़कों को भड़काते हैं। NIA की की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2005 से लेकर 2011 के बीच अलगाववादियों को ISI की ओर से लगातार मदद मिल रही थी। 2011 में NIA की दायर चार्जशीट के अनुसार हिज्बुल के फंड मैनेजर इस्लाबाद निवासी मोहम्मद मकबूल पंडित लगातार अलगाववादियों को पैसा पहुंचा रहा था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इस पर कोई कठोर निर्णय नहीं लिया था।
रोहिंग्या मुसलमान पर विरोध
रोहिंग्या मुसलमान पूरी दुनिया के लिए समस्या हैं। म्यांमार इन्हें आतंकवादी बताकर अपने देश में रखने को तैयार नहीं है। बांग्लादेश भी रखने से इनकार कर चुका है, लेकिन जहां कांग्रेस कश्मीर के हिन्दू पंडितों को उसका अधिकार देने के लिए तैयार नहीं हुई, वहीं इन आतंकवादियों को भारत में रखने पर अड़ी हुई है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता तरुण गोगोई ने कहा कि धर्म के आधार पर शरणार्थियों के साथ भेदभाव हो रहा है और यह वह लोग हैं जिन पर अत्याचार हो रहा है। गोगोई ने कहा कि उनके देश में उनके मानवाधिकार का हनन हो रहा है तो वह डर के वहां से भाग कर भारत आ रहे हैं।
कांग्रेसी नेताओं का ‘जहरीले’ जाकिर नाइक से नाता
इस्लामी कट्टरपंथी धर्म प्रचारक जाकिर नाइक से कांग्रेसी नेताओं के ताल्लुकात रहे हैं। जाकिर नाइक ने कई देशविरोधी कार्य किए, कई देशविरोधी भाषण दिए। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने 15 जुलाई, 2016 को कहा कि वह इस्लाम का सही अर्थ और उद्देश्य का प्रचार कर रहे हैं जबकि भाजपा इस्लाम को आतंकवाद से जोड़कर पेश कर रही है। नाइक के साथ दिग्विजय सिंह 2012 में मंच साझा कर चुके हैं। इस इवेंट में दिग्विजय को जाकिर नाइक की तारीफों के पुल बांधते हुए सुना जा सकता है।
प्रणब की किताब The Coalition Years- हिंदू विरोधी हैं सोनिया गांधी!
प्रणब दा ने खुलासा किया है कि किस तरह सोनिया गांधी के नेतृत्व में हिंदुओं को टारगेट कर फंसाया गया है। बिना सोनिया गांधी का नाम लिए बताया गया है कि किस प्रकार साधु-महात्माओं की गिरफ्तारी की गई। जबकि उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी राज्य की पुलिस किसी मुस्लिम मौलवी को ईद के मौके पर गिरफ्तार करने की हिम्मत दिखा सकती है?” प्रणब मुखर्जी पर पूरा लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें।
अहमद पटेल पर भी आतंकियों से रिश्तों के आरोप
गुजरात कांग्रेस के सबसे बड़े नेता और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल के तार भी आईएसआईएस आतंकियों से जुड़े होने के आरोप लग चुके हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने खुद कहा था कि जांच एजेंसियों के हत्थे चढ़ा आईएसआईएस का एक संदिग्ध आतंकी मोहम्मद कासिम अहमद पटेल से जुड़ी एक संस्था के लिए काम करता था।
कुख्यात आतंकियों के लिए आंसू और सम्मान
कांग्रेस के नेता कभी ओसामा बिन लादेन को ओसामा जी कहते रहे हैं, तो कभी हाफिज सईद को हाफिज जी और अफजल गुरु को अफजल गुरु जी कहकर पुकारा है। दिग्विजय सिंह ने ओसामा बिन लादेन और हाफिज सईद को जी कहा तो रणदीप सुरजेवाला ने अफजल गुरु को जी कहा। बाटला हाउस एनकाउंटर में जब आतंकियों को मार गिराया गया तो कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया ने कथित रूप से आंसू तक बहाया।
आतंकी इशरत जहां के नाम पर भी कांग्रेस ने की राजनीति
15 जून 2004 को अहमदाबाद में एक मुठभेड़ में आतंकी इशरत जहां और उसके तीन साथी जावेद शेख, अमजद अली और जीशान जौहर मारे गए। गुजरात पुलिस के मुताबिक उनके निशाने पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी थे। लेकिन केंद्र की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार को इसमें भी सियासत दिखी। सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जाने लगी। लेकिन गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने कांग्रेस की साजिशों की परतें खोल दीं। उन्होंने साफ कहा कि इशरत और उसके साथियों को आतंकी ना बताने का उन पर दबाव डाला गया था। इससे पहले मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और कुछ दिनों के लिए इशरत जहां एनकाउंटर पर बनी एसआइटी की टीम मुखिया सत्यपाल सिंह ने भी कहा कि उन्हें इशरत जहां के एनकाउंटर झूठा साबित करने के लिए ही एसआइटी की कमान सौंपी गई थी। इतना ही नहीं उन्हें इस एनकाउंटर के तार नरेंद्र मोदी तक पहुंचने को कहा गया था।
आप भी देखिए पहलगाम हमले पर राहुल गांधी के करीबी कांग्रेसी नेताओं के देश विरोध बयान-
भावनात्मक लाभ के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ – पृथ्वीराज चव्हाण
कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि मोदी सरकार ने भावनात्मक लाभ के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम चुना है। उन्होंने कहा कि युद्ध बम, बंदूक और विमानों से लड़ा जाता है, न कि प्रतीकात्मकता या दिखावटी कार्यों से। अभियान के नाम से युद्ध नहीं जीता जा सकता। अभियान का नाम ठीक है, भारत सरकार ने सोचा होगा कि अभियान को यह नाम देने से उन्हें कुछ भावनात्मक लाभ मिल सकता है।
VIDEO | Operation Sindoor: Here’s what Senior Congress leader Prithviraj Chavan (@prithvrj) said:
“Yes, there are a lot of sentiments attached to the word ‘sindoor’, but a war cannot be won by emotions. It is won with arms and ammunition. The name ‘Operation Sindoor’ was picked… pic.twitter.com/H8qBGqwKPz
— Press Trust of India (@PTI_News) May 7, 2025
उदित राज ने भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम पर उठाए सवाल
महाराष्ट्र में कांग्रेस के सीनियर लीडर पृथ्वीराज चव्हाण के साथ ही दिल्ली कांग्रेस के बड़े नेता उदित राज ने भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम पर सवाल उठाए हैं। दरअसल में सत्ता से दूर रहने के बाद कांग्रेस इतनी हताश हो गई है कि वो मोदी विरोध में देश विरोध पर उतर जाती है। पार्टी सत्ता के लिए अब देशहित के बारे में सोचती ही नहीं। राहुल गांधी के करीबी इस नेता ने कहा कि बुद्धिजीवियों के साथ चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि सिंदूर एक खास धर्म से जुड़ा है और अगर इसका कोई दूसरा नाम रखा जाता तो बेहतर होता। हालांकि, यह बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि पाकिस्तान को सबक सिखाया गया है।
Delhi: When asked about the name “Operation Sindoor” for the operation targeting terrorists
Congress leader Udit Raj says, “During discussions with intellectuals, it was pointed out that Sindoor is associated with a specific religion, and it would have been better if a different… pic.twitter.com/ef58ZH3mph
— IANS (@ians_india) May 8, 2025
पाक मीडिया में चहेते बने यूपी कांग्रेस अध्यक्ष
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के करीबी और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय का एक वीडियो काफी वायरल हुआ। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान राफेल का जिस तरह से मजाक उड़ाया, उसे पाकिस्तानी मीडिया प्रोपगेंडा के तौर पर इस्तेमाल करने लगा। अजय राय ने राफेल का मजाक उड़ाते हुए कहा कि इस पर नींबू-मिर्ची लटकाकर हवाई अड्डे पर खड़ा कर दिया गया हैं। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने एक खिलौना राफेल विमान को दिखाते हुए कहा कि सरकार सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करती है।
#WATCH वाराणसी: उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने एक ‘खिलौना विमान’ दिखाया, जिस पर राफेल लिखा हुआ है और उसमें नींबू-मिर्च लटकी हुई है।
अजय राय ने कहा, “देश में आतंकवादी गतिविधियां बढ़ गई हैं और इससे पूरा देश परेशान है। पहलगाम आतंकी हमले में हमारे नौजवानों की जान चली… pic.twitter.com/xBlJET5o41
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 4, 2025
हिंदुस्तान का अपमान और सेना का अपमान करने और करवाने में काँग्रेस सबसे आगे है
ऐसा लगता है जैसे स्क्रिप्ट पाकिस्तान से आ रही है और उसको काँग्रेस के नेता अप्लाई कर रहे हों
अजय राय भी पाकिस्तान के हीरो बन गए हैं
अगला चुनाव इस्लामाबाद से लड़ेंगे
— Shivam Tyagi (Modi Ka Parivar) (@ShivamSanghi12) May 4, 2025
मुसलमान कमजोर महसूस कर रहा है इसलिए मारा- रॉबर्ट वाड्रा
हमले को लेकर कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने भी विवादित बयान दिया। राहुल गांधी के बहनोई ने कहा है कि यह हमला प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक संदेश है, क्योंकि मुसलमान कमजोर महसूस कर रहे हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा के पति ने आगे कहा कि यही कारण है कि आतंकियों ने धर्म पूछकर लोगों को मारा। वाड्रा ने यह भी कहा कि यह सरकार हमेशा हिंदुत्व की बात करती है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय को परेशानी होती है। इसके साथ ही वाड्रा यह कहना नहीं भूले कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।
Biggest Criminal family of the nation
Rajiv Gandhi justified Anti Sikh riot
His Son in Law justifies Anti Hindu Terrorism #PahalgamTerroristAttack pic.twitter.com/I4SZoGsoEe
— Lala (@FabulasGuy) April 23, 2025
पूर्व सीएम चन्नी ने मांगे सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पाकिस्तान के खिलाफ की गई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी के करीबी चन्नी ने 2 अप्रैल, 2025 को पुलवामा हमले का जिक्र करते हुए कहा कि 40 भारतीय सैनिक मारे गए थे और जब चुनाव हुए, तो सरकार ने कार्रवाई का दावा किया। लेकिन हमने कभी नहीं देखा कि पाकिस्तान में कहां हमले किए गए और कहां लोग मारे गए। अगर कोई हमारे देश में बम फेंके, तो क्या लोगों को पता नहीं चलेगा? उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सर्जिकल स्ट्राइक कहीं नहीं देखी गई और किसी को उसके बारे में पता भी नहीं था। मैं हमेशा से इसकी (सबूत की) मांग करता रहा हूं।
कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई, कोई बम नहीं गिरा
अगर यहाँ बम गिरेगा तो हमें पता नहीं चलेगा — चरणजीत सिंह चन्नी काँग्रेस
बिना सेना पर शक किए सेना का अपमान किए इनको शांति नहीं मिलती क्या इन काँग्रेसियों को ???
— Shivam Tyagi (Modi Ka Parivar) (@ShivamSanghi12) May 2, 2025
पाक के खिलाफ युद्ध छेड़ने की जरूरत नहीं- सिद्धारमैया
इसके पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कड़े सुरक्षा उपाय तुरंत किए जाने चाहिए। हम युद्ध छेड़ने के पक्ष में नहीं हैं। शांति होनी चाहिए, लोगों को सुरक्षित महसूस होना चाहिए और केंद्र सरकार को प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। सिद्धारमैया के इस बयान को पाकिस्तानी चैनलों और अखबारों ने तुरंत लपक लिया और इसे भारत के भीतर से युद्ध के खिलाफ आवाज बताया।
Congress rushes to Pakistan’s rescue. Karnataka Chief Minister Siddaramaiah, who owes his position to Muslim votes, is being quoted across Pakistan for suggesting that we focus on security measures in Kashmir instead of confronting Pakistan, despite them murdering Indian Hindus… pic.twitter.com/YKvVoGN3UE
— Amit Malviya (@amitmalviya) April 26, 2025
आतंकियों ने गोली चलाने से पहले धर्म नहीं पूछा होगा- तिम्मापुर
आंतकियों का पक्ष लेने वालों में वे अकेले नहीं हैं। कांग्रेस के कई नेता पाक आतंकियों के प्रति हमदर्दी जता चुके हैं। पाकिस्तानी मीडिया में वाहवाही पाने वाले कांग्रेसी नेताओं में कर्नाटक के आबकारी मंत्री आरबी तिम्मापुर भी शामिल हैं। तिम्मापुर ने यह जोर देकर कहा कि उन्हें नहीं लगता कि आतंकियों ने लोगों पर गोली चलाने से पहले धर्म नहीं पूछा होगा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गोली चला रहा है, क्या वह जाति या धर्म पूछेगा? वह बस गोली चलाकर चला जाएगा। वह वहां खड़ा होकर ये नहीं पूछेगा और फिर गोली चलाएगा।
“आतंकियों ने पहलगाम में पर्यटकों को गोली मारने से पहले उनका धर्म नहीं पूछा था”
◆ कर्नाटक सरकार में मंत्री आरबी तिम्मापुर ने कहा #Timmapur | #PehalgamTerroristAttack | RB Timmapur pic.twitter.com/4pVMGe1UxZ
— News24 (@news24tvchannel) April 28, 2025
ऐसे कैसे पानी रोक सकते हो- मणिशंकर अय्यर
इतना ही नहीं राहुल गांधी के पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी मणिशंकर अय्यर ने आतंकी हमले के बाद भारत के सिंधु जल संधि निलंबित करने के फैसले पर कहा कि आप ऐसे कैसे पानी रोक सकते हो।
बाहरी आतंकवादियों से निपटने से पहले अंदर के आतंकवादियों से निपटना जरूरी हैं ..
पानी रोक दिया बताओ पानी रोक दिया
ऐसे कैसे पाकिस्तान ब पानी रोक सकते हो……मणिशंकर अय्यर और कांग्रेस का र$ रोना शुरू हो गया है…..भारत से ज्यादा इन्हें पाकिस्तान की चिंता है ☹️
सोचिए कांग्रेस… pic.twitter.com/BGJIUHyM6f
— Shaurya Mishra (@shauryabjym) April 24, 2025
मणिशंकर अय्यर ने इसके बाद एक कार्यक्रम में कहा कि पहलगाम की घटना ‘विभाजन के अनसुलझे सवालों’ को दर्शाती है। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ‘बहुत से लोगों ने विभाजन को रोकने की कोशिश की, लेकिन यह इसलिए हुआ क्योंकि गांधी और पंडित नेहरू जैसे लोगों और जिन्ना और कई अन्य मुसलमानों के बीच भारत की राष्ट्रवाद की प्रकृति और इसकी सभ्यता की विरासत के बारे में मूल्यों और आकलन में अंतर था, जो जिन्ना से सहमत नहीं थे। मणिशंकर अय्यर ने यह भी कहा कि आज के भारत में, क्या एक मुसलमानों को लगता है कि उन्हें स्वीकार किया जाता है? क्या एक मुसलमान को लगता है कि उसे प्यारा माना जाता है?क्या एक मुसलमान को लगता है कि उसका सम्मान किया जाता है?
पहलगाम आतंकी हमले को कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने देश के विभाजन से जोड़ा #PahalgamAttackNewsLiveOnNN #ManishankarAyyar #Congress #IndiavsPakistan #IndiaAgainstTerror #TerroristAttack #NewsNation pic.twitter.com/W3nkPQt3rC
— News Nation (@NewsNationTV) April 28, 2025
आतंकियों के पास समय कहां होता है कि वे धर्म पूछे- विजय वडेट्टीवार
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को इस्लामी आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों के चुन-चुनकर मारा। लोगों का कहना है कि पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाया जाए कि वो हमेशा याद रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ-साफ कहा है कि ‘हमले की साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी। अब आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।’ लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेता पाकिस्तान के बचाव में जी-जान से लगे हैं। महाराष्ट्र से कांग्रेसी विधायक विजय वडेट्टीवार ने अपने बयानों से पाकिस्तान का पक्ष लिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के करीबी महाराष्ट्र के विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि आखिर आतंकियों के पास इतना समय ही कहां होता है कि वे किसी के कान में जाकर पूछें कि तुम्हारा धर्म क्या है। टेररिस्ट को पूछने का समय होता है क्या?
Shocking and shameful! Maharashtra Congress MLA Vijay Wadettiwar defends Pakistani terrorists who killed innocent Hindus in the Pahalgam terror attack. Dismisses victim families’ NIA testimonies, saying terrorists have no time to check religion before killing. pic.twitter.com/XMmzTmjNhl
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) April 28, 2025
पीएम मोदी सऊदी अरब से वापस क्यों लौटे- बीके हरिप्रसाद
कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद भी हमले पर राजनीति करने से बाज नहीं आए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि ‘कोई यह नहीं समझ सका कि पीएम मोदी सऊदी अरब से वापस क्यों लौटे? वह जम्मू-कश्मीर नहीं गए। उन्होंने ऑल पार्टी मीटिंग में भी हिस्सा नहीं लिया। हमले के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी नहीं किया। वह घायल पीड़ितों से मिलने भी नहीं गए। जिन्होंने अपने परिजनों को खोया, उनसे भी उन्होंने मुलाकात नहीं की। क्या वह केवल बिहार में चुनाव रैली करने के लिए वापस लौटे थे? क्या राष्ट्रीय शोक से राजनीति ज्यादा महत्वपूर्ण है?
One cannot understand why PM @narendramodi came back from Saudi Arabia.
He hasn’t visited Jammu & Kashmir
He didn’t attend the crucial all-party meeting
He didn’t hold a press conference after the attack.
He didn’t visit the injured victims.
He didn’t meet the families who lost…— Hariprasad.B.K. (@HariprasadBK2) April 26, 2025
पानी- बिजली रोककर बदला थोड़े लिया जाता है- चंद्र कुमार
पहलगाम हमले के बाद देश पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहा है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के कांग्रेसी सरकार के मंत्री चंद्र कुमार मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वक्त पूरा विश्व हम पर थूक रहा है कि हमारे देश में कैसी सुरक्षा व्यवस्था है? पानी और बिजली रोककर किसी से बदला थोड़ी लिया जाता है।
Congress ka Haath
Hamesha Pakistan aur Aatank ke
Saath ?Vijay Wadettiwar
Robert Vadra
Thimmapur
Siddharamiah
Irfan Ansari
Mani Shankar Aiyyar
Tariq karraAll speaking language of Pak Parasti and Prem
White washing terror
Clean chit to Pakistan pic.twitter.com/YjBfIeOKZg— Shehzad Jai Hind (Modi Ka Parivar) (@Shehzad_Ind) April 28, 2025
पाक को और बर्बाद नहीं करना चाहिए- तारिक अहमद कर्रा
जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रमुख तारिक अहमद कर्रा ने तो यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान को और बर्बाद नहीं करना चाहिए, सबको शांति से बैठकर बातचीत करनी चाहिए।
कांग्रेस के जम्मू-कश्मीर प्रमुख तारिक अहमद कर्रा का शर्मनाक बयान — कहते हैं पाकिस्तान को और बर्बाद नहीं करना चाहिए, सबको शांति से बैठकर बातचीत करनी चाहिए।
अब ये कहना गलत नहीं होगा की, पाकिस्तान प्रेम कांग्रेस के खून में दौड़ रहा है।#CongressExposed #PahelgamTerroristattack pic.twitter.com/JSYWAiZb4Z
— लक्ष्य 2047 (@Lakshya2019) April 28, 2025
इस सब को लेकर राहुल गांधी की देशभर में थू-थू तो हो ही रही है, कांग्रेस के कुछ नेताओं में भी अंदरखाते राहुल के बयान को लेकर मतभेद है। उन्हें देश की राजनीति को विश्व पटल पर नहीं खींचना चाहिए, बल्कि यदि वे मस्क को करारा जवाब देते तो यह देशहित में होता। इससे उनकी भी छवि बनती। दरअसल, उपग्रह इंटरनेट के मामले में सुरक्षा संबंधी चिंताएं काल्पनिक नहीं हैं। ऐसे नेटवर्क में डेटा की सुरक्षा, संचार व्यवस्था पर नियंत्रण, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग और संवेदनशील क्षेत्रों में तकनीक के इस्तेमाल जैसे प्रश्न महत्वपूर्ण होते हैं। अक्टूबर 2024 में अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में मादक पदार्थों की एक बड़ी जब्ती के दौरान स्टारलिंक उपकरण मिलने और मणिपुर में सैन्य अभियान से जुड़े एक अन्य मामले में ऐसे उपकरण का उल्लेख होने के बाद इन चिंताओं पर चर्चा बढ़ी थी। इसका अर्थ यह नहीं कि स्टारलिंक को स्वतः दोषी माना जाए, बल्कि यह कि सुरक्षा संबंधी जांच को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। भारतीय संचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित कंपनियों को नियामकीय और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं पूरी करनी ही होंगी।









