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कोरोना काल में अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए संजीवनी बना कृषि क्षेत्र, खाद्यान्न की रिकार्ड पैदावार के साथ ही कृषि निर्यात में बढ़ोतरी

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कोरोना की दूसरी घातक लहर से निर्मित हुई आर्थिक और औद्योगिक चुनौतियों के बीच जहां मोदी सरकार ने देश के कृषि क्षेत्र और किसानों को हर तरह से मदद की, वहीं किसानों ने भी पूरी मेहनत की। इसका नतीजा है कि फसल वर्ष 2020-21 से संबंधित तीसरे अग्रिम अनुमान में खाद्यान्न की रिकॉर्ड पैदावार बताई गई है। उधर खाद्यान्न और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई हैं। इस दौरान जहां कृषि क्षेत्र ने भरपूर खाद्यान्न भंडार से देश के लोगों को भोजन की चिंता से बचाया, वहीं अर्थव्यवस्था को ढहने से भी बचाया। 

कृषि विकास दर में 3.4 फीसदी की वृद्धि

कोरोना के कारण आर्थिक मुश्किलों और गिरती विकास दर के बीच कृषि क्षेत्र संजीवनी की तरह उपयोगी दिखाई दे रहा है। कोविड की पहली लहर की चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था में कृषि ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा, जिसने वृद्धि की। कृषि की विकास दर में करीब 3.4 फीसदी की वृद्धि होने से जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी 17.8 फीसदी से बढ़कर 19.9 फीसदी के स्तर पर पहुंचते हुए दिखाई दे सकती है। 

रिकार्ड स्तर पर पहुंची खाद्यान्न की कुल पैदावार 

कृषि मंत्रालय की ओर से जारी चालू फसल वर्ष 2020-21 के लिए मुख्य फसलों के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक कोरोना की आपदा के बावजूद देश में खाद्यान्न की कुल पैदावार रिकार्ड स्तर पर पहुंचते हुए 30.54 करोड़ टन अनुमानित है। इस बार की अनुमानित खाद्यान्न पैदावार पिछले वर्ष की कुल पैदावार 29.75 करोड़ टन के मुकाबले 79.4 लाख टन अधिक है।

2.74 लाख करोड़ रुपये के कृषि उत्पादों का निर्यात

पिछले वित्त वर्ष के अप्रैल से फरवरी के 11 महीनों के दौरान देश से 2.74 लाख करोड़ रुपये के कृषि उत्पादों का निर्यात किया गया। यह साल भर पहले की इसी अवधि के 2.31 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 16.88 फीसद ज्यादा रहा। इसके साथ-साथ प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल-फरवरी के दौरान 26.51 प्रतिशत बढ़कर 43,798 करोड़ रुपये का हो गया। 

भारत ने कई नए बाजारों में पकड़ बनाई

भारत के कृषिगत निर्यात पश्चिम एशिया, अमेरिका, ब्रिटेन यूरोपीय संघ, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, इजरायल, दक्षिण कोरिया सहित विभिन्न परंपरागत और नए देशों के बाजारों में अपनी पहचान बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं। भारत ने ब्राजील, चिली जैसे कई नए बाजारों में पकड़ बनाई है। खास बात यह भी है कि चीन ने भी भारत से बासमती चावल खरीदना शुरू किया है।

2.5 लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना 

अच्छे मानसून की संभावना के कारण आगामी फसल वर्ष में भी अधिक खाद्यान्न उत्पादन होने की संभावना दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार के उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआइ) योजना से देश में मूल्यर्विधत खाद्य उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। इससे विदेशी निवेश और निर्यात में बढ़ोतरी होगी। किसानों को उनकी पैदावार के बेहतर दाम मिलने के साथ ही कृषि उपज की बर्बादी को भी कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही इससे 2026-27 तक करीब ढाई लाख रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है।

 

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