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मलेरिया के खिलाफ जंग में भारत को मिली बड़ी कामयाबी, 2015 के बाद मलेरिया के मामलों में 86 प्रतिशत की गिरावट, मौतों में 79 प्रतिशत की कमी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व और उनकी सरकार की जनहितैषी नीतियों और कार्यक्रमों की वजह से भारत इन चुनौतियों के खिलाफ एक के बाद एक सफलताएं अर्जित कर रहा हैं। इसी क्रम में मलेरिया के खिलाफ जंग में भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है। गैर लाभकारी संगठन ‘मलेरिया नो मोर’ ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दावा किया गया है कि भारत में 2015 के बाद से मलेरिया के मामलों में 86 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही 2015 और 2021 के बीच इससे होने वाली मौतों की संख्या में 79 प्रतिशत की कमी आई है। 

मलेरिया के खिलाफ सरकार के अभियान से मिली सफलता

मलेरिया नो मोर ने ‘मलेरिया उन्मूलन की दिशा में भारत का सफर’ शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में इस सफलता के पीछे लंबे समय तक चलाया जाने वाला अभियान भी रहा है। इस दौरान नौ करोड़ से ज्यादा मूल्य के कीटनाशक वितरित किए गए। इनमें से 4.8 करोड़ रुपये के कीटनाशक 2019 और 2021 के बीच वितरित किए गए थे। 2017 से 2019 के बीच मलेरिया से लड़ने के लिए भारत सरकार द्वारा आवंटित किए जाने वाले बजट में दोगुने से ज्यादा कि बढ़ोतरी की गई। इसके साथ ही 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मलेरिया के बारे जानकारी देना जरूरी बना दिया गया।

2030 तक देश से मलेरिया को खत्म करने का लक्ष्य

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश से मलेरिया को खत्म करना है। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान किया जाना बाकी है। इसके लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं। इसमें बीमारी के खिलाफ संयुक्त लड़ाई में निजी क्षेत्र, व्यक्तियों और समुदायों की अधिक भागीदारी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना लक्षण वाले या छिपे हुए मलेरिया के मामलों का पता लगाना, बेहतर रीयल-टाइम केस रिपोर्टिंग और तकनीकी नवाचार ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें अधिक काम करने की आवश्यकता है।

2016 में ‘मलेरिया उन्मूलन’ अभियान की शुरुआत

गौरतलब है कि भारत में मलेरिया को पूरी तरह से खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने 2016 में ‘मलेरिया उन्मूलन’ अभियान की शुरुआत की थी। जो कारगर साबित हो रहा है। मलेरिया प्रभावित 11 देशों की सूची में भारत एक मात्र ऐसा देश है जहां इस बीमारी को खत्म करने के लिए फंडिंग बढ़ाई गई। भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां मलेरिया को हराने के लिए अधिकतर सरकारी फंडिंग का इस्तेमाल किया गया है जबकि अन्य 10 देशों में विदेशी फंडिंग से मलेरिया से जड़ने की जंग जारी है। मोदी सरकार ने मलेरिया के खिलाफ जंग में निजी क्षेत्र और नागरिकों को एकजुट करते हुए जागरूकता बढ़ाई।  

सामाजिक जागरूकता के साथ प्रौद्योगिकी और नवाचार पर जोर

मलेरिया के नियंत्रण और उसकी रोकथाम को लेकर मोदी सरकार न केवल निदान और उपचार बल्कि व्यक्तिगत और सामुदायिक परिवेश में स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दे रही है। सरकार प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाकर भारत की मलेरिया उन्मूलन योजना को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। भारत की “ई-संजीवनी” ने टेली-परामर्श और टेली-रेफरेंसिंग का मार्ग दिखाया है जिसका मलेरिया सहित विभिन्न स्वास्थ्य देखरेख समस्‍याओं के निदान और उपचार के लिए व्‍यापक पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। मोदी सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में सुधार और प्रयोगशाला सहायता सहित मलेरिया के बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ जमीनी स्तर पर काम कर रही है।

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