कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा लगातार ईवीएम पर सवाल उठाने, ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाने, मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की जाती है। कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी द्वारा अपनी चुनावी पराजय और जनाधार में आ रही गिरावट से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा माहौल बनाया जाता है कि चुनावी मैदान में हार वैचारिक या जनसमर्थन की कमी के कारण नहीं, बल्कि सुनियोजित धांधली के कारण हुई है। लगातार चुनावी हार से हताश हो चुके पार्टी कार्यकर्ताओं और कैडर को यह यकीन दिलाना कि उनकी हार उनकी कमजोरी से नहीं, बल्कि मशीन या तंत्र की बेईमानी से हुई है। इसलिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तरफ से बीजेपी को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर पुनः बैलेट पेपर (कागजी मतदान) से चुनाव कराने की बार-बार चुनौती दी जाती है। लेकिन 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली से पहले बड़ा झटका लगा है।
#NewsPunch: कर्नाटक विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की चारों सीटों पर भाजपा-JD(S) गठबंधन की जीत से सत्तारूढ़ कांग्रेस को झटका लगा है, नतीजों के बाद अधूरे वादों, शिक्षकों की पेंशन, वित्तीय प्रबंधन और सूखा राहत जैसे मुद्दे चर्चा में हैं, 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले इन नतीजों के सियासी मायने क्या हैं?
#KarnatakaPolitics #BJP #JDS #Congress #NewsPunchOnDD @aanchalgulati2
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) October 28, 2026
“अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?”
कांग्रेस नेताओं की चुनौती, तमाम हथकंडों और दुष्प्रचार के बावजूद कांग्रेस की हार का सिलसिला जारी है। बुधवार 28 अक्टूबर,2026 को देश के चार बड़े राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे घोषित किए गए। दिलचस्प बात यह है कि बैलेट पेपर से हुए इस चुनाव में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया। उन्होंने अपने आधिकारिक X हैंडल पर लिखा- “4 बड़े राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में 28 सीटों पर MLC चुनाव हुए। ये चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए गए। अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?”
MLC elections in 28 seats across 4 big states – Uttar Pradesh, Maharashtra, Bihar and Karnataka.
Elections held using ballot papers.
Guess how many seats Congress won? 🧐
— Narendra Modi (@narendramodi) October 28, 2026
28 में एक सीट पर जीत, अपनी 3 सीटें हार गईं कांग्रेस
प्रधानमंत्री मोदी के सवाल का जवाब देश की जनता ने दिलचस्प तरीके से दिया। विधान परिषद के चुनाव राहुल गांधी के पसंदीदा बैलेट पेपर से हुए। इसके बावजूद कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। दरअसल, पहले इन 28 सीटों में से कांग्रेस के पास 4 सीटें थीं। इनमें से 3 सीटें कांग्रेस के हाथ से निकल गईं। कांग्रेस इन चुनावों में सिर्फ नागपुर की सीट जीत पाई, जो पहले से इसके पास थी। इस सीट पर अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। इन 28 में से 16 सीटों पर एनडीए को जीत मिली। चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को वोटिंग हुई थी।
Maharashtra | 28 सीटों के MLC चुनाव में कांग्रेस का खाता खुला।
#ATVideo #Maharashtra #MLCElections #9bajgaye | @nehabatham03 | @journovidya https://t.co/zAwc5XtcBW
— AajTak (@aajtak) October 29, 2026
कर्नाटक में राहुल को बड़ा झटका, एनडीए-4, कांग्रेस-0
कांग्रेस और राहुल गांधी को सबसे बड़ा झटका कर्नाटक में लगा है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री हैं। इसके बावजूद चारों सीटों पर हुए विधान परिषद के चुनाव में एनडीए उम्मीदवारों की जीत हुई और कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका। जहां बीजेपी ने अपनी तीनों सीटें बरकरार रखीं, वहीं बीजेपी की सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस ने कांग्रेस से एक सीट छीन ली। बेंगलुरु टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस उम्मीदवार पुट्टना को हराकर जीत हासिल की।
पांच बार से जीत रहे कांग्रेस के एमएलसी की हुई हार
गौरतलब है कि विधान परिषद में कांग्रेस के उपनेता और पांच बार के एमएलसी पुट्टना की हार ने राहुल गांधी की फजीहत करा दी। पुट्टना पहले तीन बार जेडीएस के टिकट पर विधान परिषद पहुंचे थे। बाद में कांग्रेस में शामिल होने के बाद वह लगातार दो कार्यकाल तक पार्टी के टिकट पर एमएसली चुने गए। इस बार उनकी हार से कांग्रेस को इस सीट पर निराशा हाथ लगी। जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। पुट्टन्ना को 9,902 वोट मिले, जबकि रंगनाथ को 10,810 वोट मिले।
Congress rules Karnataka, yet couldn’t win a single MLC seat!
A humiliating 0-4 wipeout for Rahul Gandhi’s Congress, with even five-time MLC Puttanna losing in Bengaluru Teachers’ constituency!
The verdict from graduates and teachers says it all!
#ModiKahinNahiJayega https://t.co/mWGtBoeLtz
— Zubin Ashara (@zubinashara) October 28, 2026
मल्लिकार्जुन खरगे के घर में बीजेपी एमएलसी की जीत
नॉर्थ ईस्ट टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के मौजूदा एमएलसी शशिल नमोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मट्टूर को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। नमोशी ने इस सीट पर अपनी पांचवीं जीत दर्ज की। इस चुनाव क्षेत्र में कलबुर्गी भी शामिल है, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र भी है। बीजेपी की इस जीत को खरगे के क्षेत्र में पार्टी की पकड़ कमजोर होने का संकेत माना जा रहा है। वहीं, वेस्ट ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के एसवी संकनूर ने कांग्रेस के पूर्व एमएलसी मोहन लिम्बिकायी को पराजित किया। इस जीत के साथ संकनूर ने भी अपना दबदबा कायम रखा।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे के गृह राज्य कर्नाटक में कांग्रेस ज़ीरो पर आउट हो गई।
कमाल के करिश्माई नेता हैं खरगे जी !
#MLCElections— Sanjay Nirupam (@sanjaynirupam) October 28, 2026
उम्मीदवार बदलने पर भी बीजेपी को मिली जीत
साउथ ईस्ट ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी ने इस बार अपने मौजूदा एमएलसी चिदानंद गौड़ा को उम्मीदवार नहीं बनाया। पार्टी ने उनकी जगह केएम सुरेश को मैदान में उतारा। कांग्रेस को इस सीट पर जीत की उम्मीद थी, लेकिन मतदाताओं ने कांग्रेस उम्मीदवार एच. शशि के बजाय बीजेपी के केएम सुरेश को चुना। दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार के. एम. सुरेश ने कांग्रेस के उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मट्ट को बड़े अंतर से हराया। उन्होंने 23,098 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। सुरेश को 66,020 मत मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 42,922 मत प्राप्त हुए।
ಆಗ್ನೇಯ ಪದವೀಧರರ ಕ್ಷೇತ್ರದಿಂದ ವಿಧಾನ ಪರಿಷತ್ತಿಗೆ ನಡೆದ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ವಿಜಯಶಾಲಿಯಾದ ಎನ್ಡಿಎ ಅಭ್ಯರ್ಥಿಯಾದ ಶ್ರೀ ಕೆ. ಎಂ. ಸುರೇಶ್ ಅವರಿಗೆ ಹಾರ್ದಿಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು.
ಬಿಜೆಪಿ ಮೇಲೆ ವಿಶ್ವಾಸವಿರಿಸಿ ಗೆಲುವಿಗೆ ಸಹಕರಿಸಿದ ಮತದಾರರಿಗೆ ಮತ್ತು ಶ್ರಮಿಸಿದ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರಿಗೆ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.
#MLCElection #BJP4Karnataka #KMSuresh https://t.co/XZg0aWndHc
— Roopali Naik (@RoopaliNaikBJP) October 27, 2026
बीजेपी का मुख्यमंत्री पर तंज- DK, it’s done, bro!
कर्नाटक में चारों सीटों पर जीत के बाद एनडीए गठबंधन में शामिल बीजेपी और जेडीएस ने जीत का जश्न मनाया। बीजेपी ने इस जीत का इस्तेमाल मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर तंज कसने के लिए किया। पार्टी की कर्नाटक इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- डीके, हो गया भाई! इस पोस्ट के साथ बीजेपी ने मुख्यमंत्री की एक पुरानी तस्वीर भी लगाई है। फोटो में उनके सिर पर गेंदे के फूल लगे हुए हैं। यह तस्वीर फरवरी 2023 की है। उस समय डीके शिवकुमार विपक्ष में थे और उन्होंने तब के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के पेश किए गए राज्य बजट के खिलाफ विधानसभा के अंदर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया था। बीजेपी ने अब इसी फोटो का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस नेताओं पर ‘लीपापोती’ का आरोप लगाया और कहा कि सत्ता में आने के बाद भी उनकी हालत ऐसी ही है।
DK, it’s done, bro! 😂
NDA SWEEPS 4/4 Teachers’ and Graduates’ constituencies in the MLC elections! ✌️🪷 https://t.co/RD8lDwpE3e
— BJP Karnataka (@BJP4Karnataka) October 28, 2026
जीत के लिए एचडी कुमारस्वामी ने पीएम मोदी को दिया श्रेय
कर्नाटक में एनडीए की जीत पर केंद्र की मोदी सरकार में भारी उद्योग मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा, “विधान परिषद के चारों चुनावों में एनडीए (NDA) उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। इस परिणाम के लिए मैं प्रधानमंत्री जी को अपनी शुभकामनाएं और बधाई देता हूं। देश के विकास के लिए उनके कड़े परिश्रम के कारण ही कर्नाटक के शिक्षित स्नातकों और शिक्षकों ने प्रधानमंत्री द्वारा किए गए कार्यों के पक्ष में मतदान किया है। बीजेपी और जेडी(एस) कार्यकर्ताओं ने भी बहुत मेहनत की। मतदाताओं का यह जनादेश दर्शाता है कि वर्तमान मुख्यमंत्री सिर्फ आश्वासन देते हैं, उन्हें लागू नहीं करते। इससे यह भी साफ है कि 2028 (के विधानसभा चुनावों) में भी मतदाता एनडीए गठबंधन को ही अपना आशीर्वाद देंगे।”
#WATCH | NDA sweeps Karnataka Legislative Council polls, wins All 4 Seats
JD(S) leader and Union Minister HD Kumaraswamy says, “In all the four legislature council elections, NDA candidates have won with a big margin. I extend my best wishes and congratulations to the Prime Minister for this result. It is becasue his hard work for the development of the country, Karnataka’s educated graduates and teachers, they voted in favour of the work done by the Prime Minister. The BJP and JD(S) workers also worked hard. The verdict given by the voters suggests that they do not that the present Chief Minister only gives assurances but does not implement. It is also clear that the voters will bless NDA alliance in 2028.”
— ANI (@ANI) October 28, 2026
क्या कांग्रेस अब ‘पेपर चोरी’ का आरोप लगाएगी? -जेडीएस
कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जेडीएस युवा विंग के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस बार EVM को दोष न दें, क्योंकि सरकारी मशीनरी कांग्रेस के हाथ में है और चुनाव बैलेट पेपर से हुआ है। उन्होंने पूछा कि अब क्या पार्टी अपनी हार के लिए ‘पेपर चोरी’ का आरोप लगाएगी। गौरतलब है कि यह चुनाव कर्नाटक में बीजेपी और जेडीएस के बीच तालमेल का लिटमस टेस्ट थे। दोनों दल विपक्ष में हैं और उन्होंने एक-दूसरे के उम्मीदवारों का समर्थन किया। नतीजों से साफ हुआ कि गठबंधन एक-दूसरे के उम्मीदवारों को वोट ट्रांसफर करने में सफल रहा। एनडीए की इस जीत से सत्ताधारी कांग्रेस पर दबाव बनाने का नया मौका मिल गया है।
Dear @RahulGandhi Sir,
No EVMs to blame, state machinery in your hands, and election conducted via paper ballots.
Yet, NDA’s Shri A.P. Ranganath wins the Bengaluru Teachers’ Constituency MLC election!
Now that educated teachers voted on paper right under your government’s nose, what’s today’s excuse, “Paper Chori”?Congratulations to A.P. Ranganath and all NDA leaders and Karyakarthas of @BJP4Karnataka and @JanataDal_S !
— Nikhil Kumar (@Nikhil_Kumar_k) October 27, 2026
आइए जानते हैं, विधान परिषद के इस चुनाव से पहले किन किन राज्यों में बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा…
असम की जनता ने बैलेट पेपर से कांग्रेस को दिया जवाब
देश की जागरूक जनता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रोपेगैंडा को भलीभांति समझ रही है। इसलिए SIR के खिलाफ प्रदर्शन के बीच असम की जनता ने कांग्रेस नेताओं को बैलेट पेपर से करारा जवाब दिया। सिलचर नगर निगम के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से नहीं, बल्कि बैलट पेपर से कराए गए थे। सिलचर नगर निगम को 42 वार्डों वाले म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में अपग्रेड किए जाने के बाद यह पहला निकाय चुनाव था। कॉर्पोरेशन जून 2025 में काम करने लगा था।
कांग्रेस के लिए अच्छी और बुरी खबर दोनों है।
अच्छी खबर यह है कि असम (सिलचर नगर निगम) में EVM की बजाय बैलेट पेपर से चुनाव हुए।
दूसरी, बुरी खबर यह है कि कांग्रेस बैलेट पेपर के चुनाव में भी हार गई और निर्दलीयों से भी पीछे तीसरे नंबर पर रही।
भाजपा-एनडीए को प्रचण्ड बहुमत मिला 😅😎😎 https://t.co/YRTVPnPDex
— 🇮🇳 सुमन मीना 🇮🇳 (@weet_poison) October 6, 2026
एनडीए को 42 में से 34 और कांग्रेस को 2 सीटें
एनडीए ने सिलचर नगर निगम के पहले चुनाव में 42 में से 34 सीटों पर जीत हासिल की। अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार 6 अक्टूबर को सामने आए परिणाम में कांग्रेस ने 2 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 6 सीटों पर जीत हासिल की। कुल 42 वार्ड में से 40 वार्ड के लिए तीन अक्टूबर को मतदान हुआ था, जबकि वार्ड संख्या 9 और 20 से भाजपा उम्मीदवार बिजेंद्र प्रसाद सिंह व भक्ति सेन तालुकदार निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। इस चुनाव में कुल 133 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। चुनाव में 70.22 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।

बैलेट पेपर पर कांग्रेस और बुरी तरह हारती है-सीएम सरमा
अब इस हार पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तंज कसा कि कांग्रेस बैलेट पेपर पर भी नहीं जीत सकती। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, ‘आप देखिए कि बैलेट पेपर पर भी कांग्रेस हार गई। बैलेट पेपर पर कांग्रेस थोड़ा ज्यादा ही हार गई। इसलिए EVM में लोग नोटा भी दबा देते हैं। मशीन देखकर कुछ लोग घबरा जाते हैं और कभी गलत जगह पर वोट मार देते हैं, लेकिन बैलेट में तो वोट देने के बारे में लोग जानते हैं। तो जब तक बैलेट पेपर में वोट होते हैं, तब कांग्रेस और ज्यादा हारती है।’ इस चुनाव में मिली जीत से भाजपा में जश्न का माहौल है। मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “असम में हम लोग दिवाली इस बार advance में मना रहे हैं । रुको जरा”
अब तो ballot paper में भी Congress हार चुकी है।
असम के दूसरे सबसे बड़े शहर सिलचर के नगर निगम चुनाव में BJP और NDA की जबरदस्त जीत। https://t.co/NjDhclDSMI
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) October 6, 2026
अल्पसंख्यक सीटों पर भी हारी कांग्रेस- सीएम सरमा
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, ‘आज आप देखिए कि सिलचर इलाका में 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों की ही सीटें थीं। मतलब 10 सीट ऐसी थी, जहां कांग्रेस अल्पसंख्यकों के वोट से जीत सकती थी। लेकिन वहां भी कांग्रेस को वोट नहीं मिला और बस दो सीटें मिलीं और निर्दलीय को 5 सीटें मिलीं। तो पहला हुआ भाजपा-एजेपी, दूसरे हुए निर्दलीय और तीसरे पर कांग्रेस और बैलेट पेपर पर। आज के लिए हम लोग नारा दिए हैं कि आप मशीन पर भी हारने वाले हैं और बैलेट पर भी हारने वाले हैं।’

त्रिपुरा विलेज कमेटी चुनाव में एनडीए की बंपर जीत
त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के अंतर्गत हाल ही में संपन्न हुए ग्राम समिति चुनावों में बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान हुआ था, जिसके परिणाम अक्टूबर 2026 में घोषित किए गए। इस चुनावों में एनडीए ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की। त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद के तहत हुए इन चुनावों में जनता ने मतपत्रों के माध्यम से विकास और सुशासन की राजनीति के पक्ष में अपना स्पष्ट जनादेश दिया। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) और भारतीय जनता पार्टी ने मिलकर शानदार प्रदर्शन किया। 587 विलेज कमेटियों की कुल 4,594 सीटों में से टीएमपी ने 3,428 सीटें (74.61 प्रतिशत) जीती, जबकि भाजपा को 859 सीटें (18.70 प्रतिशत) मिलीं। उनके आदिवासी-आधारित सहयोगी, इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने 33 सीटें (0.72 प्रतिशत) हासिल की। विपक्षी सीपीआई (एम) को 87 सीटें (1.89 प्रतिशत) और कांग्रेस को 14 सीटें (0.30 प्रतिशत) मिली, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 173 सीटें (3.77 प्रतिशत) जीती।

पंजाब यूनिवर्सिटी में बैलेट पेपर से चुनाव में ABVP की जीत
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने लगातार दूसरी बार धमाकेदार अंदाज में अध्यक्ष पद जीतकर कैंपस की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत बना ली। जीत के बाद अध्यक्ष बने अंकित बिधान ने इसे Gen-Z की जीत बताया। दरअसल, यह चुनाव परिणाम केवल कैंपस के भीतर छात्र प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश और विशेष रूप से पंजाब की मुख्यधारा की राजनीति में आ रहे एक गहरे रणनीतिक बदलाव का स्पष्ट संकेत है। इस चुनाव में जिस प्रकार आरएसएस और शिरोमणि अकाली दल की छात्र विंग ने गठबंधन कर जीत का परचम लहराया, उसने पारंपरिक समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यह परिणाम सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह जीत विधानसभा चुनाव से ठीक छह महीने पहले सामने आई है। सबसे खास बात यह है कि पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव बैलेट पेपर से कराया गया था।
ABVP ने पंजाब विश्वविद्यालय कैंपस छात्र परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद जीतकर इतिहास रच दिया।
पंजाब में राजनीतिक हवाएं स्पष्ट रूप से बदल रही हैं।
क्या यह पंजाब में भाजपा के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है? 🚩🔥 https://t.co/guPbC04sTU
— Anant (@singh31919) August 31, 2026
आइए जानते हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे किस तरह समय-समय पर ईवीएम पर सवाल उठाने के साथ ही बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करते रहे हैं…
ईवीएम छोड़ दो, सिर्फ बैलेट पेपर से चुनाव कराओ – खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ईवीएम के खिलाफ जहर उगलते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की वकालत की थी। उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था,”एक बात तो जरूर करूंगा। हमारे प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी जी भी इसको मानेंगे। हमने जितनी भी शक्ति लगाकर, एससी, एसटी, ओबीसी, गरीब तबके के लोग, छोटे समुदाय के लोग, ये लोग जो अपना वोट दे रहे हैं, वो वोट फिजूल जा रहा है। ईवीएम छोड़ दो, ईवीएम, बीवीएम कुछ नहीं…चुनाव सिर्फ बैलेट पेपर से हो बस…वो मशीन उनके घर में रख लेने दो…या मोदी साहब के घर में रहने दो या शाह के घर में रहने दो। अहमदाबाद में बहुत से गोडाउन बने हैं, वहां ले जाकर रख लेने दो। चुनाव बस पेपर पर कराओ। और आपको मालूम होगा। उस वक्त तुम्हारा हाल क्या है? कहां खड़े हो? उस वक्त आपको मालूम होगा।”
ईवीएम के बिना मोदी चुनाव नहीं जीत सकते- राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तमाम विपक्षी नेताओं ने ईवीएम को एक ‘ब्लैक बॉक्स’ करार देते हुए इसकी निष्पक्षता पर संदेह जताया और कई बार चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराने की मांग की। विपक्षी दलों का यह तर्क रहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए मतपत्र प्रणाली को दोबारा लाया जाना चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो सके। विपक्ष समय-समय पर यह दावा करता आया है कि यदि चुनाव पूरी तरह से बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएं और चुनावी तंत्र निष्पक्ष रूप से काम करे, तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए चुनाव जीतना कठिन हो जाएगा, क्योंकि जनता के वास्तविक मुद्दे (जैसे बेरोजगारी और महंगाई) उनके खिलाफ जाते हैं। राहुल गांधी ने बैलेट पेपर की वकालत करते हुए कहा था, “राजा की आत्मा ईवीएम में हैं। ईवीएम के बिना नरेन्द्र मोदी चुनाव नहीं जीत सकते। वोट मशीन में नहीं है, कागज में है।”
सच्चाई ये है कि ईवीएम के बिना नरेन्द्र मोदी चुनाव नहीं जीत सकते।
अगर मोदी जी को लगता है कि ईडी सीबीआई का डर दिखाकर वो राहुल गांधी को दबा सकते हैं, तो ये उनकी सबसे बड़ी ग़लतफहमी है।
#GoBackModi https://t.co/etz3bD5nkR
— Rigwasim (@Rigwasim3) March 18, 2024
राहुल गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त और आयुक्तों को धमकी
दिसंबर 2025 में दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘वोट चोरी रैली’ में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों को धमकी देते हुए कहा था,”ज्ञानेश कुमार, डॉक्टर सुखबीर सिंह सांधू, डॉ. विवेक जोशी… याद रखिए, याद रखिए। ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह सांधू, विवेक जोशी। ये जो सत्य और असत्य की लड़ाई हो रही है, इलेक्शन कमीशन बीजेपी के सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। और इनको जितनी भी इम्यूनिटी देनी है दे दो। नरेन्द्र मोदी जी ने इलेक्शन कमिश्नर्स के लिए कानून बदला। नया कानून लाए, कहा कि इलेक्शन कमिश्नर कुछ भी करें उन पर एक्शन नहीं लिया जा सकता है। उन पर कार्रवाई नहीं ली जा सकती है। मैं स्टेज से आपको कह रहा हूं। कांग्रेस पार्टी आपको कह रही है। आप मत भूलिए। आप हिंदुस्तान के इलेक्शन कमिश्नर हो, आप नरेंद्र मोदी के इलेक्शन कमिश्नर नहीं हो।”
प्रियंका गांधी की बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की तरह कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी बैलेट पेपर चुनाव कराने की चुनौती दी थी। उन्होंने 14 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ रैली में भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा था, “मैं चुनौती देती हूं कि बीजेपी एक बार बैलेट पेपर पर निष्पक्ष चुनाव लड़ ले। ये कभी नहीं जीत पाएंगे और ये बात बीजेपी भी जानती है।” उन्होंने अपनी इस रैली के दौरान ईवीएम (EVM) और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।
प्रियंका गांधी का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह बैलेट पेपर से चुनाव की चुनौती दे रही हैं। यह वीडियो हाल ही में 4 राज्यों की 28 MLC सीटों पर हुए बैलेट पेपर चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद चर्चा में है, जहां पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। https://t.co/5jELdmEPyL
— Pratyek News Live (@PratyekL) October 29, 2026
प्रियंका गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को धमकी
प्रियंका गांधी वाड्रा ने बिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को धमकी देते हुए कहा था, “सुन लीजिए कौन है ये लोग…सुन लीजिए कभी ज्ञानेश कुमार नाम सुना है। नहीं सुना होगा। कभी आपने एसएस सांधु का नाम सुना है, नहीं सुना होगा। कभी विवेक जोशी का नाम सुना है, नहीं सुना होगा। क्योंकि अपने पद और आयोग के पीछे छिपे हुए हैं। लेकिन यहीं है चुनाव आयोग के सबसे ऊंचे अधिकारी, जो इस देश के संविधान के साथ, देश के लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। याद कर लो इनके नाम, क्योंकि आप देश की जनता हो। आपके खून और पसीने से इस धरती को सिंची गई है। हमारी मातृभूमि के साथ, हमारे संविधान के साथ आज खिलवाड़ हो रहा है। आपके अधिकारों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आपके अधिकारों को छीना जा रहा है। और यही तीन लोग छीन रहे हैं। इनके नाम मत भूलो…और इस देश के साथ जो विश्वासघात करेगा उसे ये देश भूलेगा नहीं। आप सोचते हो कि आप रिटायर कर लोंगे, चैन का जीवन जीओंगे इस तरह का घोटाला करके…तो याद रखो। ये देश आपको नहीं भूलेगा। अब मैं हर सभा में इनके नाम सुनाऊंगी।”
1. ज्ञानेश कुमार
2. एस. एस. संधू
3. विवेक जोशीये चुनाव आयोग के सबसे ऊंचे अधिकारी हैं, जो देश के संविधान और लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
ये तीन लोग आपके अधिकार छीन रहे हैं। इनके नाम याद कर लीजिए। इनको पद और आयोग के पीछे छिपने मत दीजिए।
जो लोग देश के साथ विश्वासघात कर रहे हैं, उन्हें देश भूलेगा नहीं।
: कांग्रेस महासचिव व सांसद श्रीमती @priyankagandhi जी
📍 रीगा, बिहार
— Congress (@INCIndia) November 6, 2025









