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एमएलसी चुनाव : कर्नाटक में कांग्रेस का सूपड़ा साफ, क्या Ballot Box का इस्तीफा लेंगे राहुल गांधी ?

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कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा लगातार ईवीएम पर सवाल उठाने, ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाने, मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की जाती है। कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी द्वारा अपनी चुनावी पराजय और जनाधार में आ रही गिरावट से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा माहौल बनाया जाता है कि चुनावी मैदान में हार वैचारिक या जनसमर्थन की कमी के कारण नहीं, बल्कि सुनियोजित धांधली के कारण हुई है। लगातार चुनावी हार से हताश हो चुके पार्टी कार्यकर्ताओं और कैडर को यह यकीन दिलाना कि उनकी हार उनकी कमजोरी से नहीं, बल्कि मशीन या तंत्र की बेईमानी से हुई है। इसलिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तरफ से बीजेपी को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर पुनः बैलेट पेपर (कागजी मतदान) से चुनाव कराने की बार-बार चुनौती दी जाती है। लेकिन 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली से पहले बड़ा झटका लगा है।

“अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?”
कांग्रेस नेताओं की चुनौती, तमाम हथकंडों और दुष्प्रचार के बावजूद कांग्रेस की हार का सिलसिला जारी है। बुधवार 28 अक्टूबर,2026 को देश के चार बड़े राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे घोषित किए गए। दिलचस्प बात यह है कि बैलेट पेपर से हुए इस चुनाव में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया। उन्होंने अपने आधिकारिक X हैंडल पर लिखा- “4 बड़े राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में 28 सीटों पर MLC चुनाव हुए। ये चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए गए। अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?”

28 में एक सीट पर जीत, अपनी 3 सीटें हार गईं कांग्रेस
प्रधानमंत्री मोदी के सवाल का जवाब देश की जनता ने दिलचस्प तरीके से दिया। विधान परिषद के चुनाव राहुल गांधी के पसंदीदा बैलेट पेपर से हुए। इसके बावजूद कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। दरअसल, पहले इन 28 सीटों में से कांग्रेस के पास 4 सीटें थीं। इनमें से 3 सीटें कांग्रेस के हाथ से निकल गईं। कांग्रेस इन चुनावों में सिर्फ नागपुर की सीट जीत पाई, जो पहले से इसके पास थी। इस सीट पर अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। इन 28 में से 16 सीटों पर एनडीए को जीत मिली। चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को वोटिंग हुई थी।

कर्नाटक में राहुल को बड़ा झटका, एनडीए-4, कांग्रेस-0
कांग्रेस और राहुल गांधी को सबसे बड़ा झटका कर्नाटक में लगा है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री हैं। इसके बावजूद चारों सीटों पर हुए विधान परिषद के चुनाव में एनडीए उम्मीदवारों की जीत हुई और कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका। जहां बीजेपी ने अपनी तीनों सीटें बरकरार रखीं, वहीं बीजेपी की सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस ने कांग्रेस से एक सीट छीन ली। बेंगलुरु टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस उम्मीदवार पुट्टना को हराकर जीत हासिल की।पांच बार से जीत रहे कांग्रेस के एमएलसी की हुई हार
गौरतलब है कि विधान परिषद में कांग्रेस के उपनेता और पांच बार के एमएलसी पुट्टना की हार ने राहुल गांधी की फजीहत करा दी। पुट्टना पहले तीन बार जेडीएस के टिकट पर विधान परिषद पहुंचे थे। बाद में कांग्रेस में शामिल होने के बाद वह लगातार दो कार्यकाल तक पार्टी के टिकट पर एमएसली चुने गए। इस बार उनकी हार से कांग्रेस को इस सीट पर निराशा हाथ लगी। जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। पुट्टन्ना को 9,902 वोट मिले, जबकि रंगनाथ को 10,810 वोट मिले।

मल्लिकार्जुन खरगे के घर में बीजेपी एमएलसी की जीत
नॉर्थ ईस्ट टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के मौजूदा एमएलसी शशिल नमोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मट्टूर को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। नमोशी ने इस सीट पर अपनी पांचवीं जीत दर्ज की। इस चुनाव क्षेत्र में कलबुर्गी भी शामिल है, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र भी है। बीजेपी की इस जीत को खरगे के क्षेत्र में पार्टी की पकड़ कमजोर होने का संकेत माना जा रहा है। वहीं, वेस्ट ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के एसवी संकनूर ने कांग्रेस के पूर्व एमएलसी मोहन लिम्बिकायी को पराजित किया। इस जीत के साथ संकनूर ने भी अपना दबदबा कायम रखा।

उम्मीदवार बदलने पर भी बीजेपी को मिली जीत
साउथ ईस्ट ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी ने इस बार अपने मौजूदा एमएलसी चिदानंद गौड़ा को उम्मीदवार नहीं बनाया। पार्टी ने उनकी जगह केएम सुरेश को मैदान में उतारा। कांग्रेस को इस सीट पर जीत की उम्मीद थी, लेकिन मतदाताओं ने कांग्रेस उम्मीदवार एच. शशि के बजाय बीजेपी के केएम सुरेश को चुना। दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार के. एम. सुरेश ने कांग्रेस के उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मट्ट को बड़े अंतर से हराया। उन्होंने 23,098 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। सुरेश को 66,020 मत मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 42,922 मत प्राप्त हुए।

बीजेपी का मुख्यमंत्री पर तंज- DK, it’s done, bro!
कर्नाटक में चारों सीटों पर जीत के बाद एनडीए गठबंधन में शामिल बीजेपी और जेडीएस ने जीत का जश्न मनाया। बीजेपी ने इस जीत का इस्तेमाल मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर तंज कसने के लिए किया। पार्टी की कर्नाटक इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- डीके, हो गया भाई! इस पोस्ट के साथ बीजेपी ने मुख्यमंत्री की एक पुरानी तस्वीर भी लगाई है। फोटो में उनके सिर पर गेंदे के फूल लगे हुए हैं। यह तस्वीर फरवरी 2023 की है। उस समय डीके शिवकुमार विपक्ष में थे और उन्होंने तब के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के पेश किए गए राज्य बजट के खिलाफ विधानसभा के अंदर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया था। बीजेपी ने अब इसी फोटो का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस नेताओं पर ‘लीपापोती’ का आरोप लगाया और कहा कि सत्ता में आने के बाद भी उनकी हालत ऐसी ही है।

जीत के लिए एचडी कुमारस्वामी ने पीएम मोदी को दिया श्रेय
कर्नाटक में एनडीए की जीत पर केंद्र की मोदी सरकार में भारी उद्योग मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा, “विधान परिषद के चारों चुनावों में एनडीए (NDA) उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। इस परिणाम के लिए मैं प्रधानमंत्री जी को अपनी शुभकामनाएं और बधाई देता हूं। देश के विकास के लिए उनके कड़े परिश्रम के कारण ही कर्नाटक के शिक्षित स्नातकों और शिक्षकों ने प्रधानमंत्री द्वारा किए गए कार्यों के पक्ष में मतदान किया है। बीजेपी और जेडी(एस) कार्यकर्ताओं ने भी बहुत मेहनत की। मतदाताओं का यह जनादेश दर्शाता है कि वर्तमान मुख्यमंत्री सिर्फ आश्वासन देते हैं, उन्हें लागू नहीं करते। इससे यह भी साफ है कि 2028 (के विधानसभा चुनावों) में भी मतदाता एनडीए गठबंधन को ही अपना आशीर्वाद देंगे।”

क्या कांग्रेस अब ‘पेपर चोरी’ का आरोप लगाएगी? -जेडीएस
कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जेडीएस युवा विंग के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस बार EVM को दोष न दें, क्योंकि सरकारी मशीनरी कांग्रेस के हाथ में है और चुनाव बैलेट पेपर से हुआ है। उन्होंने पूछा कि अब क्या पार्टी अपनी हार के लिए ‘पेपर चोरी’ का आरोप लगाएगी। गौरतलब है कि यह चुनाव कर्नाटक में बीजेपी और जेडीएस के बीच तालमेल का लिटमस टेस्ट थे। दोनों दल विपक्ष में हैं और उन्होंने एक-दूसरे के उम्मीदवारों का समर्थन किया। नतीजों से साफ हुआ कि गठबंधन एक-दूसरे के उम्मीदवारों को वोट ट्रांसफर करने में सफल रहा। एनडीए की इस जीत से सत्ताधारी कांग्रेस पर दबाव बनाने का नया मौका मिल गया है।

आइए जानते हैं, विधान परिषद के इस चुनाव से पहले किन किन राज्यों में बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा…

असम की जनता ने बैलेट पेपर से कांग्रेस को दिया जवाब
देश की जागरूक जनता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रोपेगैंडा को भलीभांति समझ रही है। इसलिए SIR के खिलाफ प्रदर्शन के बीच असम की जनता ने कांग्रेस नेताओं को बैलेट पेपर से करारा जवाब दिया। सिलचर नगर निगम के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से नहीं, बल्कि बैलट पेपर से कराए गए थे। सिलचर नगर निगम को 42 वार्डों वाले म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में अपग्रेड किए जाने के बाद यह पहला निकाय चुनाव था। कॉर्पोरेशन जून 2025 में काम करने लगा था।

एनडीए को 42 में से 34 और कांग्रेस को 2 सीटें
एनडीए ने सिलचर नगर निगम के पहले चुनाव में 42 में से 34 सीटों पर जीत हासिल की। अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार 6 अक्टूबर को सामने आए परिणाम में कांग्रेस ने 2 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 6 सीटों पर जीत हासिल की। कुल 42 वार्ड में से 40 वार्ड के लिए तीन अक्टूबर को मतदान हुआ था, जबकि वार्ड संख्या 9 और 20 से भाजपा उम्मीदवार बिजेंद्र प्रसाद सिंह व भक्ति सेन तालुकदार निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। इस चुनाव में कुल 133 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। चुनाव में 70.22 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।

बैलेट पेपर पर कांग्रेस और बुरी तरह हारती है-सीएम सरमा
अब इस हार पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तंज कसा कि कांग्रेस बैलेट पेपर पर भी नहीं जीत सकती। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, ‘आप देखिए कि बैलेट पेपर पर भी कांग्रेस हार गई। बैलेट पेपर पर कांग्रेस थोड़ा ज्यादा ही हार गई। इसलिए EVM में लोग नोटा भी दबा देते हैं। मशीन देखकर कुछ लोग घबरा जाते हैं और कभी गलत जगह पर वोट मार देते हैं, लेकिन बैलेट में तो वोट देने के बारे में लोग जानते हैं। तो जब तक बैलेट पेपर में वोट होते हैं, तब कांग्रेस और ज्यादा हारती है।’ इस चुनाव में मिली जीत से भाजपा में जश्न का माहौल है। मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “असम में हम लोग दिवाली इस बार advance में मना रहे हैं । रुको जरा”

अल्पसंख्यक सीटों पर भी हारी कांग्रेस- सीएम सरमा
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, ‘आज आप देखिए कि सिलचर इलाका में 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों की ही सीटें थीं। मतलब 10 सीट ऐसी थी, जहां कांग्रेस अल्पसंख्यकों के वोट से जीत सकती थी। लेकिन वहां भी कांग्रेस को वोट नहीं मिला और बस दो सीटें मिलीं और निर्दलीय को 5 सीटें मिलीं। तो पहला हुआ भाजपा-एजेपी, दूसरे हुए निर्दलीय और तीसरे पर कांग्रेस और बैलेट पेपर पर। आज के लिए हम लोग नारा दिए हैं कि आप मशीन पर भी हारने वाले हैं और बैलेट पर भी हारने वाले हैं।’

त्रिपुरा विलेज कमेटी चुनाव में एनडीए की बंपर जीत
त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के अंतर्गत हाल ही में संपन्न हुए ग्राम समिति चुनावों में बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान हुआ था, जिसके परिणाम अक्टूबर 2026 में घोषित किए गए। इस चुनावों में एनडीए ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की। त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद के तहत हुए इन चुनावों में जनता ने मतपत्रों के माध्यम से विकास और सुशासन की राजनीति के पक्ष में अपना स्पष्ट जनादेश दिया। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) और भारतीय जनता पार्टी ने मिलकर शानदार प्रदर्शन किया। 587 विलेज कमेटियों की कुल 4,594 सीटों में से टीएमपी ने 3,428 सीटें (74.61 प्रतिशत) जीती, जबकि भाजपा को 859 सीटें (18.70 प्रतिशत) मिलीं। उनके आदिवासी-आधारित सहयोगी, इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने 33 सीटें (0.72 प्रतिशत) हासिल की। विपक्षी सीपीआई (एम) को 87 सीटें (1.89 प्रतिशत) और कांग्रेस को 14 सीटें (0.30 प्रतिशत) मिली, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 173 सीटें (3.77 प्रतिशत) जीती।

पंजाब यूनिवर्सिटी में बैलेट पेपर से चुनाव में ABVP की जीत
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने लगातार दूसरी बार धमाकेदार अंदाज में अध्यक्ष पद जीतकर कैंपस की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत बना ली। जीत के बाद अध्यक्ष बने अंकित बिधान ने इसे Gen-Z की जीत बताया। दरअसल, यह चुनाव परिणाम केवल कैंपस के भीतर छात्र प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश और विशेष रूप से पंजाब की मुख्यधारा की राजनीति में आ रहे एक गहरे रणनीतिक बदलाव का स्पष्ट संकेत है। इस चुनाव में जिस प्रकार आरएसएस और शिरोमणि अकाली दल की छात्र विंग ने गठबंधन कर जीत का परचम लहराया, उसने पारंपरिक समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यह परिणाम सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह जीत विधानसभा चुनाव से ठीक छह महीने पहले सामने आई है। सबसे खास बात यह है कि पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव बैलेट पेपर से कराया गया था।

आइए जानते हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे किस तरह समय-समय पर ईवीएम पर सवाल उठाने के साथ ही बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करते रहे हैं…

ईवीएम छोड़ दो, सिर्फ बैलेट पेपर से चुनाव कराओ – खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ईवीएम के खिलाफ जहर उगलते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की वकालत की थी। उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था,”एक बात तो जरूर करूंगा। हमारे प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी जी भी इसको मानेंगे। हमने जितनी भी शक्ति लगाकर, एससी, एसटी, ओबीसी, गरीब तबके के लोग, छोटे समुदाय के लोग, ये लोग जो अपना वोट दे रहे हैं, वो वोट फिजूल जा रहा है। ईवीएम छोड़ दो, ईवीएम, बीवीएम कुछ नहीं…चुनाव सिर्फ बैलेट पेपर से हो बस…वो मशीन उनके घर में रख लेने दो…या मोदी साहब के घर में रहने दो या शाह के घर में रहने दो। अहमदाबाद में बहुत से गोडाउन बने हैं, वहां ले जाकर रख लेने दो। चुनाव बस पेपर पर कराओ। और आपको मालूम होगा। उस वक्त तुम्हारा हाल क्या है? कहां खड़े हो? उस वक्त आपको मालूम होगा।”

ईवीएम के बिना मोदी चुनाव नहीं जीत सकते- राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तमाम विपक्षी नेताओं ने ईवीएम को एक ‘ब्लैक बॉक्स’ करार देते हुए इसकी निष्पक्षता पर संदेह जताया और कई बार चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराने की मांग की। विपक्षी दलों का यह तर्क रहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए मतपत्र प्रणाली को दोबारा लाया जाना चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो सके। विपक्ष समय-समय पर यह दावा करता आया है कि यदि चुनाव पूरी तरह से बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएं और चुनावी तंत्र निष्पक्ष रूप से काम करे, तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए चुनाव जीतना कठिन हो जाएगा, क्योंकि जनता के वास्तविक मुद्दे (जैसे बेरोजगारी और महंगाई) उनके खिलाफ जाते हैं। राहुल गांधी ने बैलेट पेपर की वकालत करते हुए कहा था, “राजा की आत्मा ईवीएम में हैं। ईवीएम के बिना नरेन्द्र मोदी चुनाव नहीं जीत सकते। वोट मशीन में नहीं है, कागज में है।”

राहुल गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त और आयुक्तों को धमकी
दिसंबर 2025 में दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘वोट चोरी रैली’ में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों को धमकी देते हुए कहा था,”ज्ञानेश कुमार, डॉक्टर सुखबीर सिंह सांधू, डॉ. विवेक जोशी… याद रखिए, याद रखिए। ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह सांधू, विवेक जोशी। ये जो सत्य और असत्य की लड़ाई हो रही है, इलेक्शन कमीशन बीजेपी के सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। और इनको जितनी भी इम्यूनिटी देनी है दे दो। नरेन्द्र मोदी जी ने इलेक्शन कमिश्नर्स के लिए कानून बदला। नया कानून लाए, कहा कि इलेक्शन कमिश्नर कुछ भी करें उन पर एक्शन नहीं लिया जा सकता है। उन पर कार्रवाई नहीं ली जा सकती है। मैं स्टेज से आपको कह रहा हूं। कांग्रेस पार्टी आपको कह रही है। आप मत भूलिए। आप हिंदुस्तान के इलेक्शन कमिश्नर हो, आप नरेंद्र मोदी के इलेक्शन कमिश्नर नहीं हो।”

प्रियंका गांधी की बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की तरह कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी बैलेट पेपर चुनाव कराने की चुनौती दी थी। उन्होंने 14 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ रैली में भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा था, “मैं चुनौती देती हूं कि बीजेपी एक बार बैलेट पेपर पर निष्पक्ष चुनाव लड़ ले। ये कभी नहीं जीत पाएंगे और ये बात बीजेपी भी जानती है।” उन्होंने अपनी इस रैली के दौरान ईवीएम (EVM) और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।

प्रियंका गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को धमकी
प्रियंका गांधी वाड्रा ने बिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को धमकी देते हुए कहा था, “सुन लीजिए कौन है ये लोग…सुन लीजिए कभी ज्ञानेश कुमार नाम सुना है। नहीं सुना होगा। कभी आपने एसएस सांधु का नाम सुना है, नहीं सुना होगा। कभी विवेक जोशी का नाम सुना है, नहीं सुना होगा। क्योंकि अपने पद और आयोग के पीछे छिपे हुए हैं। लेकिन यहीं है चुनाव आयोग के सबसे ऊंचे अधिकारी, जो इस देश के संविधान के साथ, देश के लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। याद कर लो इनके नाम, क्योंकि आप देश की जनता हो। आपके खून और पसीने से इस धरती को सिंची गई है। हमारी मातृभूमि के साथ, हमारे संविधान के साथ आज खिलवाड़ हो रहा है। आपके अधिकारों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आपके अधिकारों को छीना जा रहा है। और यही तीन लोग छीन रहे हैं। इनके नाम मत भूलो…और इस देश के साथ जो विश्वासघात करेगा उसे ये देश भूलेगा नहीं। आप सोचते हो कि आप रिटायर कर लोंगे, चैन का जीवन जीओंगे इस तरह का घोटाला करके…तो याद रखो। ये देश आपको नहीं भूलेगा। अब मैं हर सभा में इनके नाम सुनाऊंगी।”

 

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