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मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि: 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर, गरीबी में तेज गिरावट का वर्ल्ड रिकॉर्ड

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर साबित किया है कि वो गरीबों के मसीहा हैं। उनकी सरकार की गरीब कल्याण नीतियों और योजनाओं का कमाल है कि गरीबी उन्मूलन में रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धि हासिल हुई है। योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रधानमंत्री मोदी की पैनी नजर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लाभार्थियों से सीधे संवाद की वजह से योजनाओं का पूरा लाभ गरीबों को मिल रहा है। इसका परिणाम है कि मोदी सरकार ने पिछले 12 सालों के दौरान गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। आज इस सफलता की गूंज भारत से लेकर विश्व बैंक तक सुनाई दे रही है।

करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर
दरअसल, विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट ‘पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ- अक्टूबर 2026 (Poverty and Equity Brief – October 2026)’ के मुताबिक, बीते एक दशक में भारत में गरीबी घटने की रफ्तार दुनिया में सबसे तेज रही है। साल 2011 से 2023 के बीच 12 साल में देश में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। गरीबी में आई इस गिरावट को समझने के लिए 2021 की ‘परचेजिंग पावर पैरिटी’ (PPP) को आधार बनाया गया है। रोजाना 3 डॉलर (लगभग 250 रुपये), 4.2 डॉलर (लगभग 350 रुपये) और 8.3 डॉलर (लगभग 700 रुपये) की आय के तीन पैमानों का उपयोग किया है। ये तीन मानक क्रमशः अत्यधिक गरीबी, निम्न-मध्यम वर्ग और उच्च-मध्यम वर्ग की गरीबी को दर्शाती हैं।

अत्यधिक गरीबी 27.1 प्रतिशत से घटकर 2.6 तक पहुंची
रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 की ‘परचेजिंग पावर पैरिटी’ (PPP) के आधार पर अत्यधिक गरीबी यानी रोज के 3 डॉलर (लगभग 250 रुपये) से भी कम पर गुजारा करने वाले लोगों की तादाद 2011 में 27.1 प्रतिशत थी यानी इतनी आबादी अत्यधिक गरीबी रेखा से नीचे रह रही थी। वहीं साल 2023 में यह आंकड़ा घटकर महज 2.6 प्रतिशत रह गया। इससे पता चलता है कि पिछले 12 साल में देश में बेहद कम आमदनी वाले लोगों की संख्या में भी काफी कमी आई है।

BPL आबादी 57.7 से घटकर 16.1 प्रतिशत
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 की ‘परचेजिंग पावर पैरिटी’ (PPP) के आधार पर 4.20 डॉलर (लगभग 350 रुपये) प्रतिदिन की ‘लोअर-मिडल-इनकम’ यानी कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले भारतीयों के अनुपात में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। साल 2011 में देश की 57.7 प्रतिशत आबादी लोअर मिडिल इनकम यानी गरीबी रेखा से नीचे रह रही थी। वहीं, साल 2023 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 16.1 प्रतिशत रह गया। इसका सीधा मतलब यह है कि देश की आधे से अधिक आबादी (लगभग 41.6%) अब इस आय सीमा को पार करते हुए बेहतर और सुरक्षित वित्तीय स्थिति में पहुंच चुकी है।

भारत की उपभोग असमानता में सुधार
विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, उपभोग के आधार पर भारत में असमानता और गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 2023 में भारत का गिनी सूचकांक 23.0 दर्ज किया गया है, जो उपभोग असमानता में सुधार को दर्शाता है। इससे भारत वैश्विक स्तर पर कम असमानता वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।

भारत में गरीबी घटने का सिलसिला जारी रहेगा
विश्व बैंकी की रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि गरीबी में गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा। हालांकि, इसकी रफ्तार अब थोड़ी धीमी पड़ सकती है। विश्व बैंक के अनुमानों के मुताबिक, 4.20 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन की सीमा के आधार पर गरीबी दर 2026 के 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये माइक्रोसिमुलेशन पर आधारित इंडिकेटिव अनुमान हैं और नए लेबर मार्केट और मैक्रोइकोनॉमिक डेटा के उपलब्ध होने पर बदल सकते हैं।

गरीबी में क्यों आई तेज गिरावट ?
वर्ल्ड बैंक ने भारत में गरीबी उन्मूलन की इस रफ्तार को दुनिया में सबसे तेज कहा है। इस रफ्तार की बड़ी वजह लोगों की दैनिक मजदूरी में सुधार, मजबूत खपत, रोजगार में बढ़ोतरी (खासकर महिलाओं के बीच) और खाने-पीने की चीजों पर मिल रही सब्सिडी सहित दूसरी सामाजिक सहायताओं का बढ़ता दायरा है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि भारत ने गरीबी के मौद्रिक और गैर-मौद्रिक, दोनों पैमानों पर सुधार दर्ज किया है। यानी कि लोगों की जेबों में पैसा भी आया है और बुनियादी सुविधाओं तक उनकी पहुंच भी बढ़ी है, जिसे जीवन स्तर में सुधार आया है।

मोदी सरकार की वो पहल जिसने बदली तस्वीर
विश्व बैंक ने इस उपलब्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारकों और सरकारी नीतियों का योगदान बताया है:

पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY): 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त अनाज वितरण से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व जनधन योजना: सरकारी योजनाओं का पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे गरीबों के बैंक खातों में पहुंचा, जिससे लीकेज समाप्त हुई।

घरेलू खपत और दैनिक मजदूरी में सुधार: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में न्यूनतम दैनिक मजदूरी और प्रति व्यक्ति उपभोग खर्च (Consumption Expenditure) में वृद्धि हुई।

बुनियादी ढांचे व आवास का विस्तार:पीएम आवास योजना (पक्के मकान), उज्ज्वला योजना (एलपीजी कनेक्शन), जल जीवन मिशन (नल से जल) और स्वच्छ भारत मिशन (शौचालय) ने गैर-आय बहुआयामी गरीबी को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई।

ग्रामीण महिलाओं ने निभाई अहम भूमिका
गरीबी घटाने में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई। बड़ी संख्या में महिलाएं पैसे कमाने वाले कामों से जुड़ीं। इससे कई परिवारों में कमाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ी और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में गरीबी घटने की रफ्तार शहरों के मुकाबले तेज रही है। इससे गांव और शहर के बीच गरीबी का अंतर भी कम हुआ है। हालांकि, आज भी ग्रामीण भारत में गरीबी की समस्या ज्यादा है। रिपोर्ट में दिए गए साल 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में रोजाना 4.20 डॉलर की आय के पैमाने पर गांवों में 19.3 फीसदी लोग गरीब हैं, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 8.6 फीसदी है।

रोज़गार के अवसरों में वृद्धि
विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘Poverty & Equity Brief’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 से 2023 के बीच भारत में लगभग 13.4 करोड़ अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से 2023 के दौरान रोजगार में हुई यह वृद्धि कामकाजी उम्र की आबादी में हुई बढ़ोतरी से लगभग दोगुनी है। इस रोजगार वृद्धि में ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और वेतन वाले कार्यों में उनका आना एक मुख्य कारण रहा है। इसके अलावा श्रम मंत्रालय के आंकड़ों में 2017-18 से 2023-24 के बीच कुल 16.83 करोड़ रोजगार जोड़ा गया है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने पीएम मोदी के नेतृत्व को दिया श्रेय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किए जा रहे कल्याणकारी प्रयासों को दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार के निरंतर नीतिगत प्रयास ठोस परिणाम ला रहे हैं, जिससे समावेशी विकास और बेहतर आर्थिक अवसरों की नींव मजबूत हो रही है। यही कारण है कि एनडीए सरकार लोगों का विश्वास और हमारे नागरिकों का जनादेश हासिल करती है। उन्होंने कहा कि हम उत्पादक रोजगार, परिवारों की मजबूत आय और सार्वजनिक सेवाओं के प्रभावी वितरण के माध्यम से इस प्रगति को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि हमारे देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके।

ग्रामीण और शहरी जीवन स्तर में सुधार- वित्त मंत्री सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के परिवारों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है। इतना ही नहीं, ग्रामीण भारत में सुधार की रफ्तार अधिक रहने से गांवों और शहरों के बीच कल्याण संबंधी अंतर कम हुआ है। रिपोर्ट के 2022 के सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार देश की 90 प्रतिशत आबादी तक बिजली की पहुंच हो चुकी थी।

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