प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर साबित किया है कि वो गरीबों के मसीहा हैं। उनकी सरकार की गरीब कल्याण नीतियों और योजनाओं का कमाल है कि गरीबी उन्मूलन में रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धि हासिल हुई है। योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रधानमंत्री मोदी की पैनी नजर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लाभार्थियों से सीधे संवाद की वजह से योजनाओं का पूरा लाभ गरीबों को मिल रहा है। इसका परिणाम है कि मोदी सरकार ने पिछले 12 सालों के दौरान गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। आज इस सफलता की गूंज भारत से लेकर विश्व बैंक तक सुनाई दे रही है।
#LiveAt11: भारत में तेज़ी से घटी ग़रीबी
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले 12 वर्षों में ग़रीबी में बड़ी गिरावट आई है, 49.6 करोड़ लोग ग़रीबी से बाहर आए हैं और अत्यधिक ग़रीबी दर 27.1% से घटकर 2.6% रह गई है, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम बताते हुए समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई
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— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) October 31, 2026
करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर
दरअसल, विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट ‘पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ- अक्टूबर 2026 (Poverty and Equity Brief – October 2026)’ के मुताबिक, बीते एक दशक में भारत में गरीबी घटने की रफ्तार दुनिया में सबसे तेज रही है। साल 2011 से 2023 के बीच 12 साल में देश में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। गरीबी में आई इस गिरावट को समझने के लिए 2021 की ‘परचेजिंग पावर पैरिटी’ (PPP) को आधार बनाया गया है। रोजाना 3 डॉलर (लगभग 250 रुपये), 4.2 डॉलर (लगभग 350 रुपये) और 8.3 डॉलर (लगभग 700 रुपये) की आय के तीन पैमानों का उपयोग किया है। ये तीन मानक क्रमशः अत्यधिक गरीबी, निम्न-मध्यम वर्ग और उच्च-मध्यम वर्ग की गरीबी को दर्शाती हैं।
भारत में गरीबी हटाओ का नारा दशकों तक गूंजता रहा, लेकिन गरीबी को सच में मिटाया किसने? प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने!
वर्ल्ड बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक:
➡️ वर्ल्ड बैंक के अनुसार 49.6 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से बाहर आए।
➡️ अत्यधिक गरीबी 27.1% से घटकर मात्र 2.6% रह गई।ये है मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड! जब नीयत साफ हो और नीति सही हो, तो ऐसे ही ऐतिहासिक परिणाम आते हैं।
मोदी जी चुनाव इसलिए जीतते हैं क्योंकि उनका हर फैसला देश के गरीब, वंचित और शोषित वर्ग के जीवन में सीधा और सकारात्मक बदलाव लाता है।
सशक्त गरीब, समृद्ध भारत — यही है विकसित भारत 2047 का संकल्प!@narendramodi
— Tokhan Sahu (@tokhansahu_bjp) October 30, 2026
अत्यधिक गरीबी 27.1 प्रतिशत से घटकर 2.6 तक पहुंची
रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 की ‘परचेजिंग पावर पैरिटी’ (PPP) के आधार पर अत्यधिक गरीबी यानी रोज के 3 डॉलर (लगभग 250 रुपये) से भी कम पर गुजारा करने वाले लोगों की तादाद 2011 में 27.1 प्रतिशत थी यानी इतनी आबादी अत्यधिक गरीबी रेखा से नीचे रह रही थी। वहीं साल 2023 में यह आंकड़ा घटकर महज 2.6 प्रतिशत रह गया। इससे पता चलता है कि पिछले 12 साल में देश में बेहद कम आमदनी वाले लोगों की संख्या में भी काफी कमी आई है।
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने बताई बदलते भारत की विकास गाथा!
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बीते वर्षों में भारत ने आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया है।
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011-12 से 2023-24 के बीच भारत में लगभग 49.6 करोड़ लोग 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा से बाहर आए।
गरीबी का अनुपात 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया।
यह बदलाव केवल आँकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन में आए परिवर्तन, सामाजिक सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और विकास की प्रक्रिया को दर्शाता है।
आवास, शौचालय, स्वच्छ पेयजल, बिजली, बैंक खाते, खाद्यान्न सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच बढ़ाने के प्रयासों ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नया भारत केवल सपने नहीं देख रहा, बल्कि विकास के नए मानक भी स्थापित कर रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में विकसित भारत का संकल्प निरंतर आगे बढ़ रहा है।
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— Arbind pandey avinash (@Arbindp1) October 30, 2026
BPL आबादी 57.7 से घटकर 16.1 प्रतिशत
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 की ‘परचेजिंग पावर पैरिटी’ (PPP) के आधार पर 4.20 डॉलर (लगभग 350 रुपये) प्रतिदिन की ‘लोअर-मिडल-इनकम’ यानी कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले भारतीयों के अनुपात में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। साल 2011 में देश की 57.7 प्रतिशत आबादी लोअर मिडिल इनकम यानी गरीबी रेखा से नीचे रह रही थी। वहीं, साल 2023 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 16.1 प्रतिशत रह गया। इसका सीधा मतलब यह है कि देश की आधे से अधिक आबादी (लगभग 41.6%) अब इस आय सीमा को पार करते हुए बेहतर और सुरक्षित वित्तीय स्थिति में पहुंच चुकी है।
🚨 भारत में गरीबी का ऐतिहासिक पतन!
World Bank के ताजा आंकड़ों के मुताबिक:
📉 Extreme Poverty: 27.1% → 2.6% 📉 Poverty: 57.7% → 16.1% 📉 Inequality (Gini): 28.8 → 23.0
2011-12 से 2023-24 के बीच
लगभग 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे!
ये कोई सरकारी प्रचार नहीं — World Bank के आंकड़े हैं।जो लोग कहते थे “गरीबी बढ़ रही है”, उनके लिए ये असली जवाब है।
भारत दुनिया की सबसे तेज गरीबी घटाने वाली कहानियों में से एक बन गया है।
#PovertyCollapse #IndiaRising #WorldBank 🇮🇳— Manoj Singh (@mksanalytiq) October 30, 2026
भारत की उपभोग असमानता में सुधार
विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, उपभोग के आधार पर भारत में असमानता और गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 2023 में भारत का गिनी सूचकांक 23.0 दर्ज किया गया है, जो उपभोग असमानता में सुधार को दर्शाता है। इससे भारत वैश्विक स्तर पर कम असमानता वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।
Key takeaways from the World Bank’s Poverty and Equity Brief on India’s socio-economic trajectory:
📈 Poverty Reduction: Between 2011 and 2023, extreme poverty plunged to 2.6% (from 27.1%), while 496 million citizens successfully crossed the lower-middle-income threshold ($4.20/day). Overall poverty shrank from 57.7% to 16.1%.
💼 Employment Expansion: 134 million new jobs were created between 2017 and 2023, nearly doubling the expansion of the working-age demographic—with notable momentum in female employment.
⚡ Infrastructure Access: Household electrification reached 99%.Driven by robust consumption and expanded social safety nets, India’s structural foundation for broad-based economic mobility is stronger than ever.
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— India in ROK (@IndiainROK) October 31, 2026
भारत में गरीबी घटने का सिलसिला जारी रहेगा
विश्व बैंकी की रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि गरीबी में गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा। हालांकि, इसकी रफ्तार अब थोड़ी धीमी पड़ सकती है। विश्व बैंक के अनुमानों के मुताबिक, 4.20 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन की सीमा के आधार पर गरीबी दर 2026 के 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये माइक्रोसिमुलेशन पर आधारित इंडिकेटिव अनुमान हैं और नए लेबर मार्केट और मैक्रोइकोनॉमिक डेटा के उपलब्ध होने पर बदल सकते हैं।
#Watch | भारत में 12 साल में गरीबी से बाहर आए 50 करोड़ लोग, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में दावा
इसपर ज्यादा डिटेल्स दे रहे हैं कुलदीप
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— ET Now Swadesh (@ETNowSwadesh) October 31, 2026
गरीबी में क्यों आई तेज गिरावट ?
वर्ल्ड बैंक ने भारत में गरीबी उन्मूलन की इस रफ्तार को दुनिया में सबसे तेज कहा है। इस रफ्तार की बड़ी वजह लोगों की दैनिक मजदूरी में सुधार, मजबूत खपत, रोजगार में बढ़ोतरी (खासकर महिलाओं के बीच) और खाने-पीने की चीजों पर मिल रही सब्सिडी सहित दूसरी सामाजिक सहायताओं का बढ़ता दायरा है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि भारत ने गरीबी के मौद्रिक और गैर-मौद्रिक, दोनों पैमानों पर सुधार दर्ज किया है। यानी कि लोगों की जेबों में पैसा भी आया है और बुनियादी सुविधाओं तक उनकी पहुंच भी बढ़ी है, जिसे जीवन स्तर में सुधार आया है।
India’s development journey is often discussed through its growing economy, expanding infrastructure and increasing global influence.
But there’s another set of numbers that deserves an equally prominent place in that conversation.
57.7% in 2011.
16.1% in 2023.
These represent India’s poverty rates at the World Bank’s $4.20/day lower-middle-income threshold.
In just twelve years, an estimated 496 million people moved above this poverty line.
During the same period, extreme poverty declined from 27.1% to just 2.6%, marking a reduction of more than tenfold.
The World Bank’s October 2026 Poverty & Equity Brief recognises India as having achieved one of the fastest poverty reductions globally.
What makes this achievement especially meaningful is that it reflects more than a single economic indicator.
Employment opportunities expanded, household consumption strengthened and social transfers supported vulnerable families.
India’s growing economic importance is significant. But the improvement in living standards across hundreds of millions of people makes its development story even more compelling.
— Saumya Singh (@saumya1singh) October 31, 2026
मोदी सरकार की वो पहल जिसने बदली तस्वीर
विश्व बैंक ने इस उपलब्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारकों और सरकारी नीतियों का योगदान बताया है:
पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY): 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त अनाज वितरण से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व जनधन योजना: सरकारी योजनाओं का पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे गरीबों के बैंक खातों में पहुंचा, जिससे लीकेज समाप्त हुई।
घरेलू खपत और दैनिक मजदूरी में सुधार: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में न्यूनतम दैनिक मजदूरी और प्रति व्यक्ति उपभोग खर्च (Consumption Expenditure) में वृद्धि हुई।
बुनियादी ढांचे व आवास का विस्तार:पीएम आवास योजना (पक्के मकान), उज्ज्वला योजना (एलपीजी कनेक्शन), जल जीवन मिशन (नल से जल) और स्वच्छ भारत मिशन (शौचालय) ने गैर-आय बहुआयामी गरीबी को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई।
70 साल के खोखले नारे vs 12 साल का पक्का विकास!
दशकों तक गरीबी हटाओ के खोखले नारे देने वाली कांग्रेस ने गरीबों, किसानों और मजदूरों को सिर्फ वोट बैंक समझा। पुरानी सरकारों में करोड़ों लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे, जबकि भ्रष्टाचार और सियासी ड्रामेबाजी हावी रही।
लेकिन प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में 12 साल के सुशासन और सेवा ने देश की तस्वीर बदल दी है!
वर्ल्ड बैंक के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं :-
🔹 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए
🔹 अत्यधिक गरीबी दर 2011 में 27.1% से घटकर 2023 में मात्र 2.6% रह गई
🔹 आवास, उज्ज्वला, हर घर जल और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने करोड़ों परिवारों के जीवन में बदलाव लायादेश अब खोखले वादे नहीं, बल्कि ठोस काम और परिणाम चाहता है।
सबका साथ, सबका विकास के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री जी ने सिद्ध किया है कि स्पष्ट नीयत और दृढ़ नेतृत्व से देश की तस्वीर बदली जा सकती है!
— Dr. Virendra Kumar (@Drvirendrakum13) October 31, 2026
ग्रामीण महिलाओं ने निभाई अहम भूमिका
गरीबी घटाने में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई। बड़ी संख्या में महिलाएं पैसे कमाने वाले कामों से जुड़ीं। इससे कई परिवारों में कमाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ी और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में गरीबी घटने की रफ्तार शहरों के मुकाबले तेज रही है। इससे गांव और शहर के बीच गरीबी का अंतर भी कम हुआ है। हालांकि, आज भी ग्रामीण भारत में गरीबी की समस्या ज्यादा है। रिपोर्ट में दिए गए साल 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में रोजाना 4.20 डॉलर की आय के पैमाने पर गांवों में 19.3 फीसदी लोग गरीब हैं, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 8.6 फीसदी है।
भारत में 2011 से 2023 के बीच करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए – World Bank Report
🔴वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, तेजी से घटती गरीबी के बावजूद अमीरों और गरीबों के बीच कमाई में 13 गुना का अंतर बना हुआ है.
🔴भारत में अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) में भी बड़ी कमी आई है. साल 2011 में देश की 27.1% आबादी रोजाना 3 डॉलर से कम पर गुजारा कर रही थी. 2023 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 2.6% रह गया
🔴2017 और 2023 के बीच रोजगार में लगभग 134 मिलियन लोगों की वृद्धि हुई, जो कामकाजी उम्र की आबादी में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी है। इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण महिलाओं के वेतन वाले रोजगार में आने से आया है।
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— Zee News (@ZeeNews) October 30, 2026
रोज़गार के अवसरों में वृद्धि
विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘Poverty & Equity Brief’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 से 2023 के बीच भारत में लगभग 13.4 करोड़ अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से 2023 के दौरान रोजगार में हुई यह वृद्धि कामकाजी उम्र की आबादी में हुई बढ़ोतरी से लगभग दोगुनी है। इस रोजगार वृद्धि में ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और वेतन वाले कार्यों में उनका आना एक मुख्य कारण रहा है। इसके अलावा श्रम मंत्रालय के आंकड़ों में 2017-18 से 2023-24 के बीच कुल 16.83 करोड़ रोजगार जोड़ा गया है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने पीएम मोदी के नेतृत्व को दिया श्रेय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किए जा रहे कल्याणकारी प्रयासों को दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार के निरंतर नीतिगत प्रयास ठोस परिणाम ला रहे हैं, जिससे समावेशी विकास और बेहतर आर्थिक अवसरों की नींव मजबूत हो रही है। यही कारण है कि एनडीए सरकार लोगों का विश्वास और हमारे नागरिकों का जनादेश हासिल करती है। उन्होंने कहा कि हम उत्पादक रोजगार, परिवारों की मजबूत आय और सार्वजनिक सेवाओं के प्रभावी वितरण के माध्यम से इस प्रगति को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि हमारे देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके।
The World Bank’s October 2026 Poverty & Equity Brief records India’s progress as one of the fastest poverty declines in the world.
The report highlights several significant gains:✅ 49.6 crore people moved above the lower-middle-income poverty line of $4.20 a day between 2011 and 2023, with the poverty rate declining from 57.7% to 16.1%.
✅ Extreme poverty declined from 27.1% to 2.6% over the same period, measured at $3 a day. Both monetary poverty thresholds use 2021 purchasing power parity.
✅ Employment increased by 13.4 crore people between 2017 and 2023, nearly twice the increase in the working-age population.
✅ Rural women accounted for much of the employment gain, entering paid work and increasing the number of earners in their households.
✅ Both rural and urban households experienced substantial welfare gains, with faster progress in rural India narrowing the rural–urban gap.
✅ Access to electricity reached 99% of the population, according to the report’s 2022 survey data.
The World Bank identifies strong consumption growth, rising employment – especially among women—and expanded social transfers, including food subsidies, as major drivers.
Under the leadership of Hon’ble PM Shri @narendramodi, the Government’s sustained policy efforts are yielding tangible results, strengthening the foundations for inclusive growth and greater economic opportunity. This is the reason why NDA govt wins people’s trust and mandate of our citizens.
We remain committed to building on this progress through productive employment, stronger household incomes and effective delivery of public services, so that aspirations of our people are met.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) October 30, 2026
ग्रामीण और शहरी जीवन स्तर में सुधार- वित्त मंत्री सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के परिवारों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है। इतना ही नहीं, ग्रामीण भारत में सुधार की रफ्तार अधिक रहने से गांवों और शहरों के बीच कल्याण संबंधी अंतर कम हुआ है। रिपोर्ट के 2022 के सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार देश की 90 प्रतिशत आबादी तक बिजली की पहुंच हो चुकी थी।
यही कारण है कि देश को केवल मोदी जी की गारंटी पर भरोसा है!
विश्व बैंक (World Bank) की ऐतिहासिक रिपोर्ट:
🔹 भारत में 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए
🔹 गरीबी दर 57.7% से घटकर 16.1% पर पहुंची
🔹 ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जीवन स्तर में अभूतपूर्व सुधार हुआ https://t.co/Ct5YUDbUvl— Mukesh Dalal (@imukeshdalal) October 31, 2026









