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ट्विटर को भारी पड़ा मोदी सरकार से टकराव, 4 महीने में 25 प्रतिशत टूट गए शेयर

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मोदी सरकार की बार-बार की चेतावनी के बावजूद सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर की मनमानी जारी थी। ट्विटर ने प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी को डोनाल्ड ट्रंप समझने की भूल कर दी। उसे अंदाजा नहीं था कि मोदी सरकार उसके खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है। लेकिन खुद की नासमझी का खामियाजा ट्विटर को भुगतना पड़ रहा है। आज मोदी सरकार से टकराव ट्विटर के लिए भारी पड़ रहा है। पिछले चार महीने में इस अमेरिकी कंपनी के शयेर करीब 25 प्रतिशत टूट गए हैं।

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में बुधवार यानि 16 जून, 2021 को ट्विटर का शेयर करीब आधा प्रतिशत टूटकर 59.93 अमेरिकी डॉलर पर बंद हुआ। इस साल 26 फरवरी को ट्विटर के शेयर 52 हफ्ते की ऊंचाई 80.75 डॉलर पर पहुंच गए थे। लेकिन इसके बाद से अब तक इसमें करीब 25.75 प्रतिशत की गिरावट आई हैं। ट्विटर की बाजार पूंजी घटकर 47.64 अरब डॉलर रह गई है।

5 जून,2021 को भारत सरकार ने ट्विटर को एक फाइनल नोटिस भेज दिया था कि वह उसके नई आईटी रूल को फॉलो करे। इसके बावजूद जब ट्विटर ने अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति में देरी की तो मोदी सरकार ने ट्विटर से भारतीय आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिला सुरक्षा का अधिकार छीन लिया। इसका मतलब है कि कोई यूजर की गैर-कानूनी हरकतों और भड़काऊ पोस्ट के लिए भारत में कंपनी के प्रबंध निदेशक समेत शीर्ष अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा और पुलिस उनसे पूछताछ कर सकेगी। कानूनी संरक्षण खत्म होते ही ट्विटर के खिलाफ पहला मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में दर्ज किया गया। 

गौरतलब है कि पिछले साल 13 नवंबर को जब भारत सरकार ने ट्विटर को एक नोटिस भेजकर इस बात पर आपत्ति जतायी थी कि उसने लेह को लद्दाख की जगह जम्मू-कश्मीर का हिस्सा क्यों दिखाया। इसके बाद सोशल मीडिया पर #BanTwitter ट्रेंड होंने लगा था। इसके बावजूद इसके शेयर फरवरी तर चढ़ते रहे। इसके बाद भारत सरकार ने Twitter को एक नोटिस भेजकर किसान आंदोलन समर्थक अकाउंट को बैन करने को कहा था। सरकार ने कहा था कि आईटीएक्ट की धारा 69ए के तहत यदि ट्विटर ने मानकों का पालन नहीं किया, तो उसे इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा।

 

 

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