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जन सेवा के 25 साल: 400 कंपनियों से 2.23 लाख से अधिक स्टार्टअप्स का सफर, भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इनोवेशन हब

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने बीते वर्षों में अभूतपूर्व आर्थिक और तकनीकी प्रगति हासिल की है। जन सेवा के 25 वर्षों के इस ऐतिहासिक पड़ाव पर जब देश के विकास मॉडल को देखा जाता है, तो उसमें ‘स्टार्टअप क्रांति’ सबसे प्रमुख आधारशिला के रूप में उभरती है। साल 2014 से पहले जहां देश का युवा सीमित अवसरों और पारंपरिक नौकरियों के भरोसे था, वहीं आज केंद्र सरकार की दूरदर्शी नीतियों ने भारतीय युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बना दिया है। वर्ष 2016 में शुरू हुए ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ अभियानों के तहत टैक्स छूट, इंसेंटिव्स और सरलीकृत नियम लागू किए गए। इसी का सुखद परिणाम है कि भारत आज अमेरिका और चीन के बाद वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।

400 से 2.23 लाख मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स का ऐतिहासिक विस्तार
साल 2014 से पहले भारत में नया उद्यम शुरू करने की राह में दर्जनों स्वीकृतियों और लालफीताशाही की बड़ी बाधाएं थीं, जिससे देश में बमुश्किल 350 से 400 स्टार्टअप्स ही सक्रिय थे। वर्ष 2016 में शुरू हुए स्टार्टअप इंडिया मिशन ने इस पूरी व्यवस्था का कायाकल्प कर दिया। आयकर छूट, स्व-प्रमाणन और नीतिगत सुधारों ने युवा उद्यमियों और निवेशकों के आत्मविश्वास को मजबूत किया। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के 2026 तक के अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की कुल संख्या 2.23 लाख से अधिक हो चुकी है। इस निरंतर विस्तार ने देश के कोने-कोने में नवोन्मेष की एक नई संस्कृति को जन्म दिया है।

110 से अधिक यूनिकॉर्न्स के साथ वैश्विक मंच पर भारत की धमक
भारत आज विश्व पटल पर इनोवेशन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है और 110 से अधिक यूनिकॉर्न्स के साथ तीसरा सबसे बड़ा यूनिकॉर्न हब बन गया है। इन कंपनियों का कुल मूल्यांकन 360 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है, जो भारतीय बाजार और तकनीकी प्रतिभा की मजबूती को प्रमाणित करता है। फिनटेक, एडटेक, हेल्थटेक, एग्रीटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक सेक्टर्स में भारतीय स्टार्टअप्स स्थापित वैश्विक कंपनियों को सीधी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं। केंद्र सरकार की ‘फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स’ (FFS) जैसी दूरगामी योजनाओं ने इन कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और टिकाऊ विकास की गति देने में निर्णायक भूमिका निभाई है।

टियर-2 और टियर-3 शहरों का उभार और 23 लाख से अधिक रोजगार
यह स्टार्टअप क्रांति केवल दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों तक सीमित न रहकर देश के छोटे शहरों में भी फैल चुकी है। डिजिटल इंडिया के विस्तार के चलते आज 45% से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से सामने आ रहे हैं। जयपुर, इंदौर, कोच्चि, लखनऊ और कोयंबटूर जैसे शहर आज देश के नए इनोवेशन हब बनकर उभर रहे हैं। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स ने देश भर में 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं। इससे स्थानीय युवाओं को अपने गृह राज्यों में ही करियर के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं और बड़े शहरों की ओर होने वाला पलायन भी थमा है।

1.07 लाख से अधिक स्टार्टअप्स में महिला निदेशकों की भागीदारी
जन सेवा के इस सफर में ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) के विजन को धरातल पर उतारने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष फंड, सब्सिडी और मेंटरशिप कार्यक्रम शुरू किए गए। वर्तमान में लगभग 48% यानी 1.07 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या पार्टनर शामिल हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि सरकार की नीतियां केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समावेशी सामाजिक सशक्तिकरण को भी गति दे रही हैं। आज छोटे शहरों और कस्बों की महिलाएं भी नए उद्यमों के जरिए आर्थिक स्वावलंबन की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

वित्तीय संबल: FFS और ₹20 करोड़ की क्रेडिट गारंटी सीमा
सरकार ने केवल नीतियां बनाने तक सीमित न रहकर शुरुआती दौर में युवा उद्यमियों के वित्तीय जोखिम को भी साझा किया है। ‘फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स’ (FFS) के अंतर्गत 135 से अधिक अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये की पूंजी नवोन्मेषी उद्यमों तक पहुंचाई गई है। इसके साथ ही, क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (CGSS) के तहत प्रति पात्र उधारकर्ता गारंटी सीमा को बढ़ाकर ₹20 करोड़ किया गया है। गारंटी कवरेज बढ़ने के चलते अब बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए बिना किसी संपत्ति या जमानत (कोलैटरल) के उभरते हुए स्टार्टअप्स को पर्याप्त लोन देना बेहद सुगम हो गया है।

विनियामक सरलीकरण और डीप-टेक पर विशेष ध्यान
उद्यमियों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने स्टार्टअप पात्रता नियमों को अधिक व्यावहारिक और भविष्योन्मुखी बनाया है। ₹100 करोड़ तक के वार्षिक टर्नओवर और स्थापना के 10 वर्ष तक की अवधि वाले पात्र उद्यमों को स्टार्टअप मान्यता और उससे जुड़े लाभ निर्बाध रूप से मिल रहे हैं। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, बायोटेक और स्पेस-टेक जैसे लंबे शोध एवं विकास (R&D) वाले डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए नियमों में विशेष लचीलापन लाया जा रहा है। इस दीर्घकालिक सहयोग ने गंभीर और जटिल तकनीकों पर काम करने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को सुरक्षित रनवे और आत्मविश्वास प्रदान किया है।

अनुपालनों की समाप्ति और एंजेल टैक्स से मिली बड़ी राहत
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को वास्तविक रूप देने के लिए स्टार्टअप्स के सिर से लालफीताशाही और कागजी औपचारिकताओं का भारी बोझ हटाया गया है। श्रम और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न कानूनों में 3 से 5 साल तक सेल्फ-सर्टिफिकेशन की सुविधा दी गई है, जिससे शुरुआती दिनों में उद्यमियों का समय नष्‍ट न हो। 47,000 से अधिक अनावश्यक कानूनी नियमों और अनुपालनों को या तो पूरी तरह समाप्त किया गया है या उन्हें गैर-आपराधिक बना दिया गया है। इसके अलावा, बजट में एंजेल टैक्स के प्रावधानों की पूर्ण समाप्ति ने घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए निवेश की राह को पारदर्शी और बाधा-रहित बना दिया है।

ग्रामीण सहकारिता और सस्टेनेबल यूनिट इकोनॉमिक्स का नया मॉडल
स्टार्टअप्स का प्रभाव अब केवल सॉफ्टवेयर या शहरी सेवाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता से भी मजबूती से जुड़ गया है। नए नीतिगत ढांचे के तहत सहकारी समितियों और ग्रामीण इनक्यूबेटर्स को भी स्टार्टअप पहलों से जोड़ा गया है, जिससे कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और स्थानीय आजीविका को नई ताकत मिली है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय स्टार्टअप्स अब केवल कागजी मूल्यांकन (वैल्यूएशन) की होड़ से आगे बढ़कर वास्तविक लाभप्रदता और यूनिट इकोनॉमिक्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस संतुलित दृष्टिकोण के चलते वैश्विक फंडिंग दबावों के बीच भी भारतीय इकोसिस्टम मजबूती से टिका हुआ है।

₹10,300 करोड़ का ‘इंडिया एआई’ और सेमीकंडक्टर मिशन
भारतीय उद्यम अब केवल उपभोक्ता सेवाओं तक सीमित न रहकर भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों और हार्डवेयर के विकास में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ₹10,300 करोड़ से अधिक के इंडिया एआई मिशन के तहत रियायती दरों पर जीपीयू कंप्यूटिंग क्षमता और विशाल डेटासेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सेमीकॉन इंडिया पहल और डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव्स की मदद से युवा इंजीनियर स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल और माइक्रोचिप्स डिजाइन करने में जुटे हैं। इस रणनीतिक पहल ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम और डीप-टेक के वैश्विक मानचित्र पर एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

मिशन LiFE और ग्रीन-टेक से 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य की ओर कदम
प्रधानमंत्री के ‘मिशन लाइफ’ (Mission LiFE) और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में देश के ग्रीन स्टार्टअप्स रीढ़ बनकर उभरे हैं। इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण, बैटरी-स्वापिंग, सोलर-टेक, बायो-प्लास्टिक और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में हजारों नए उद्यम सामने आए हैं। सरकार की पीएलआई (PLI) योजनाओं और राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के प्रोत्साहन से ये स्टार्टअप्स पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बड़े पैमाने पर ग्रीन जॉब्स का सृजन कर रहे हैं। कचरे से कंचन (वेस्ट-टू-वेल्थ) के सिद्धांत पर काम करते हुए ये उद्यम सतत विकास का नया वैश्विक मानक तय कर रहे हैं।

मजबूत DPI और ‘रिवर्स ब्रेन ड्रेन’ का नया दौर
भारत के व्यापारिक माहौल में आए क्रांतिकारी बदलाव और सुदृढ़ आर्थिक नीतियों का सबसे बड़ा प्रमाण ‘रिवर्स ब्रेन ड्रेन’ के रूप में सामने आ रहा है। सिलिकॉन वैली और यूरोप के प्रमुख तकनीकी केंद्रों में काम करने वाले शीर्ष भारतीय विशेषज्ञ अब स्वदेश लौटकर नए स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। यूपीआई और आधार जैसे मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) तथा भारत के विशाल घरेलू बाजार ने विश्व भर के निवेशकों को आकर्षित किया है। वैश्विक मंदी और अनिश्चितता के दौर में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाएं और पूंजी भारत को सबसे सुरक्षित और आशाजनक केंद्र मान रही हैं।

ONDC के डिजिटल लोकतंत्रीकरण से छोटे ब्रांड्स को व्यापक बाजार
ई-कॉमर्स क्षेत्र में बड़े विदेशी प्लेटफॉर्म्स के प्रभुत्व को संतुलित करने और छोटे उद्यमियों को निष्पक्ष बाजार देने के लिए ओएनडीसी (ONDC) की शुरुआत की गई। ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से स्थानीय शिल्पकार, छोटे ब्रांड्स और किराना कारोबारी बिना भारी कमीशन दिए सीधे करोड़ों उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे हैं। डिजिटल भुगतान (UPI) और ONDC के तालमेल ने व्यापारिक परिदृश्य का लोकतंत्रीकरण कर दिया है। अब दूरदराज के छोटे कस्बों में तैयार होने वाले विशिष्ट उत्पाद भी बिना किसी मध्यस्थ के राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

बौद्धिक संपदा और पेटेंट फाइलिंग में भारतीय युवाओं का दबदबा
भारत का स्टार्टअप परिदृश्य अब केवल सेवा-आधारित मॉडल से आगे बढ़कर गहन बौद्धिक संपदा (IPR) और तकनीकी नवाचार के निर्माण पर केंद्रित हो चुका है। सरकार द्वारा पेटेंट आवेदन शुल्क में 80% तक की भारी छूट और तीव्र जांच प्रक्रियाओं के कारण युवाओं में पेटेंट फाइलिंग के प्रति भारी उत्साह देखा जा रहा है। स्टार्टअप्स द्वारा हजारों नए पेटेंट और ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं, जो देश के तकनीकी स्वामित्व को मजबूत कर रहे हैं। इसी अनुसंधान-आधारित सोच के बल पर भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) में निरंतर ऊंची छलांग लगा रहा है।

GeM पोर्टल के जरिए सार्वजनिक खरीद में स्टार्टअप्स की भागीदारी
सार्वजनिक खरीद को पारदर्शी बनाने के लिए शुरू हुआ गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) आज 350 से अधिक सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। जहां कभी इस प्लेटफॉर्म पर एक वर्ष में केवल 11,000 ऑर्डर आते थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 4.3 लाख ऑर्डर तक पहुंच चुकी है। इनमें से लगभग ₹4.1 लाख करोड़ के ऑर्डर सीधे MSME सेक्टर से जुड़े हैं। इसी मंच पर नियमों को सरल बनाकर 38,600 से अधिक स्टार्टअप्स को भी जोड़ा गया है, जिन्हें बिना पूर्व अनुभव या टर्नओवर की कठिन शर्तों के ₹19,000 करोड़ से अधिक के सरकारी क्रय आदेश प्राप्त हुए हैं। इस सीधी सार्वजनिक खरीद व्यवस्था ने देश के छोटे उद्यमियों और स्टार्टअप्स को शुरुआती स्तर पर ही एक बड़ा, सुरक्षित और पारदर्शी घरेलू बाजार उपलब्ध कराया है।

iDEX और IN-SPACe: रक्षा व अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक क्रांति
पूर्व में जो संवेदनशील क्षेत्र केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित थे, उनके द्वार अब निजी क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए पूरी तरह खोल दिए गए हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में ‘IN-SPACe’ के गठन और रक्षा क्षेत्र में ‘iDEX’ जैसी पहलों ने निजी उद्यमों को रॉकेट, सैटेलाइट, डिफेंस ड्रोन और अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियां विकसित करने का मंच दिया है। आज सैकड़ों स्पेस-टेक और डिफेंस-टेक स्टार्टअप्स सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अंतरिक्ष अभियानों में ऐतिहासिक योगदान दे रहे हैं। यह बदलाव रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता घटाकर आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहा है।

10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स से जमीनी नवाचार
स्टार्टअप और अनुसंधान की संस्कृति को उच्च शिक्षण संस्थानों से आगे बढ़ाकर स्कूली स्तर पर ले जाने का कार्य अटल इनोवेशन मिशन (AIM) ने किया है। देश भर के स्कूलों में 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स (ATLs) स्थापित की जा चुकी हैं, जहां छात्र व्यावहारिक विज्ञान सीखते हैं। 730 से अधिक जिलों के 1.1 करोड़ से ज्यादा स्कूली बच्चे 3D प्रिंटिंग, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और कोडिंग जैसी भविष्य की तकनीकों पर स्वयं काम कर रहे हैं। यह जमीनी पहल युवा पीढ़ी के भीतर समस्या समाधान की वैज्ञानिक सोच विकसित कर भविष्य के सफल इनोवेटर्स तैयार कर रही है।

एग्री-टेक स्टार्टअप्स से बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था
भारतीय कृषि को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और लाभकारी बनाने के लिए हजारों एग्री-टेक स्टार्टअप्स जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। किसान ड्रोन से कीटनाशकों का सटीक छिड़काव, एआई-आधारित मृदा परीक्षण, सटीक मौसम पूर्वानुमान और खेत से सीधे बाजार तक की डिजिटल सप्लाई चेन से किसानों की लागत घट रही है। बिचौलियों की निर्भरता खत्म होने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है और फसल बर्बादी में भारी कमी आई है। इस तकनीकी दखल ने पारंपरिक कृषि को एक उत्पादक और आधुनिक बिजनेस मॉडल में तब्दील कर दिया है।

‘रिवर्स फ्लिपिंग’ और घरेलू शेयर बाजारों में ऐतिहासिक लिस्टिंग
भारत के अनुकूल नीतिगत माहौल और मजबूत पूंजी बाजार का सबसे बड़ा प्रमाण ‘रिवर्स फ्लिपिंग’ है, जिसके तहत सिंगापुर और अमेरिका में पंजीकृत शीर्ष भारतीय स्टार्टअप्स अपनी मूल कंपनियों को वापस भारत ला रहे हैं। इसके साथ ही, विदेशी वेंचर कैपिटल पर निर्भरता कम कर दर्जनों नए दौर के स्टार्टअप्स घरेलू शेयर बाजारों (NSE/BSE) में सफलतापूर्वक लिस्ट हो रहे हैं। भारतीय खुदरा और संस्थागत निवेशकों का स्टार्टअप्स के आईपीओ (IPO) में बढ़ता भरोसा यह दर्शाता है कि अब देश के आम नागरिक भी स्टार्टअप्स की विकास यात्रा और संपत्ति निर्माण (वेल्थ क्रिएशन) के सीधे हिस्सेदार बन रहे हैं।

राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस और ‘Startup20’ से वैश्विक नेतृत्व
16 जनवरी को ‘राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस’ घोषित कर सरकार ने उद्यमिता को सामाजिक प्रतिष्ठा और युवाओं की पहली पसंद बना दिया है, जिससे जोखिम लेने की संस्कृति को नई मान्यता मिली। जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत की पहल पर पहली बार ‘Startup20’ एंगेजमेंट ग्रुप का गठन हुआ, जिसने वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नए नीतिगत मानक तय किए। ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ पहलों के साथ मिलकर भारतीय स्टार्टअप्स अब पारंपरिक हस्तशिल्प, ओडीओपी (ODOP) और जीआई-टैग उत्पादों को आधुनिक ब्रांडिंग के साथ दुनिया भर के बाजारों में पहुंचा रहे हैं।

2047 के ‘विकसित भारत’ का सशक्त आधार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के जन सेवा काल में भारत ने केवल नीतियां नहीं बदलीं, बल्कि पूरे देश की कार्यसंस्कृति और उद्यमी सोच को बदल दिया है। 400 कंपनियों के एक छोटे से दायरे से शुरू होकर 2.23 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और 110 से अधिक यूनिकॉर्न्स तक का यह सफर आत्मनिर्भर भारत की सबसे सशक्त तस्वीर पेश करता है। मजबूत डिजिटल अवसंरचना, ₹100 करोड़ तक की टर्नओवर सहूलियत, ₹20 करोड़ की क्रेडिट गारंटी और पारदर्शी नियमों ने युवाओं को निर्भीक होकर जोखिम लेने का संबल दिया है। स्पेस-टेक, डीप-टेक, एग्री-टेक और ग्रीन एनर्जी में उभरती यही नवोन्मेषी ऊर्जा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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