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विपक्ष के मुस्लिम तुष्टिकरण से हाशिए पर हिंदू, वोटों की खातिर दिल्ली, राजस्थान, प.बंगाल समेत कई राज्यों में समुदाय विशेष को मिल रही विशेष सौगातें, हिंदुओं की अनदेखी से बढ़ रहा आक्रोश

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हिंदुस्तान के कुछ राज्यों में मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतियां जहां एक ओर समाज में खाई पैदा कर रही हैं, वहीं लोगों के बीच भेदभाव भी बढ़ा रही हैं। राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में सरकारों के तुष्टिकरण की यह हालत है कि ईद-मुहर्रम आदि पर तो पुलिस और प्रशासन के पूरे इंतजाम होते हैं, लेकिन हिंदू पर्वों की ओर इन राज्यों के जिम्मेदार नेताओं का ध्यान नहीं जाता। इसका नतीजा कई बार सांप्रदायिक हिंसा के रूप में सामने भी आ चुका है। कट्टरपंथी संगठनों पर अंकुश के अभाव में हालात यह हो रहे हैं कि पहले तो मदरसे ही कट्टरतावादी सोच को बढ़ावा दे रहे थे, लेकिन अब कर्नाटक में कुछ मुस्लिम संगठनों ने कालेजों को भी मजहबी अखाड़ा बनाने की साजिश रच डाली है।दिल्ली: केजरीवाल सरकार ने सबको पीछे छोड़ा, दंगाई रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने में लगी
देश की राजधानी दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने तुष्टिकरण की राजनीति में सबको पीछे छोड़ दिया है। केजरीवाल न सिर्फ तुष्टिकरण के लिए ऐसे लोगों को मुफ्त की रेवड़ियां बांट रहे हैं, बल्कि दिल्ली सरकार और आप के नेता रोहिंग्या मुसलमानों तक को अवैध रूप से बसा रहे हैं। कुछ माह पहले दिल्ली के जहांगीरपुरी में हनुमान जयंती की शोभा यात्रा पर पथराव में इन्हीं रोहिंग्या मुसलमानों का नाम आया। हिंसा पर उतारू भीड़ ने घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की और कई गाड़ियों को आग लगा दी। लेकिन केजरीवाल सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को दिल्ली से बाहर करने की बजाए उनके पक्ष में ही उतर आई। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता के मुताबिक आप की केजरीवाल सरकार दिल्ली में न सिर्फ अवैध रूप से रोहिंग्या मुसलमानों को बसा रही है, बल्कि उनको बिजली और पानी की मुफ्त सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही है।झारखंड: मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए जामताड़ा के 100 सरकारी स्कूलों में जुमे के दिन छुट्टी
मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए झारखंड और बिहार में दशकों पुरानी परंपरा को ही खत्म कर कई स्कूलों में नई रीत शुरू कर दी है। झारखंड के जामताड़ा में लगभग 100 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां मुस्लिम आबादी के तुष्टिकरण के लिए साप्ताहिक अवकाश रविवार से बदलकर शुक्रवार (जुमा) कर दिया गया है। ऐसा कराने के लिए मुस्लिम समुदाय ने सरकारी स्कूल के अधिकारियों और टीचरों पर बकायदा दबाव बनाया। जब उन्हें नियमों का हवाला देकर शुक्रवार को छुट्टी करने से मना कर दिया तो इस समुदाय के लोगों ने जुमे के दिन स्टूडेंट्स स्कूल भेजना ही बंद कर दिया। इनको खुश करने के लिए पहले एक-दो स्कूलों ने रविवार को स्कूल खोलने और शुक्रवार की छुट्टी का ऐलान किया।

झारखंड के ही एक स्कूल में हाथ जोड़कर प्रार्थना नहीं करने का मामला आया था
झारखंड के जामताड़ा में ऐसा आदेश होते ही दूसरे स्कूलों से भी डिमांड आने लगी और अब 100 से अधिक सरकारी स्कूल रविवार को बंद रहते हैं। याद करें कि पिछले दिनों झारखंड के ही एक स्कूल में हाथ जोड़कर प्रार्थना नहीं करने का मामला आया था।  झारखंड के गढ़वा जिले में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे हाथ जोड़कर नहीं, बल्कि हाथ बांधकर ‘तू ही राम है तू ही रहीम है’ प्रार्थना करते हैं। मुस्लिम आबादी के दबाव में उनको खुश करने के लिए प्रार्थना का नियम बदला गया था। रविवार को छुट्टी रद्द करने वाले स्कूल उर्दू विद्यालय भी नहीं हैं, लेकिन मनमाने आदेश चल रहे हैं। कई प्राथमिक स्कूलों के नाम के आगे फर्जी तरीके से उर्दू लगा दिया गया है। झारखंड में मुस्लिम तुष्टिकरण की चिंगारी बिहार में भी भड़क उठी।

बिहार: सरकार से अनुमति लिए बगैर 37 सरकारी स्कूलों में रविवार की छुट्टी रद्द
झारखंड के बाद बिहार के किशनगंज जिले में भी स्कूलों में साप्ताहिक छुट्टी शुक्रवार को और रविवार को पढ़ाई होने लगी है। अब तक ऐसे 37 सरकारी स्कूल सामने आ चुके हैं, जिनमें शुक्रवार को छुट्टी हो रही है। रविवार को क्लास लगती है। बिहार सरकार का कहना है कि यह आदेश सरकारी स्तर पर नहीं हुआ है। ऐसे स्कूलों ने अपने स्तर पर ही नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब सरकार पता कर रही है कि किसके आदेश पर यह नियम चल रहा है। शिक्षा विभाग ने किशनगंज के डीईओ को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। इसमें पूछा गया है कि ये 37 स्कूल किसके आदेश पर रविवार को खुलते हैं और शुक्रवार को छुट्टी का आदेश कब और किसने जारी किया।राजस्थान: तुष्टिकरण और मुस्लिमों को शह का नतीजा, दंगे और सर तन से जुदा जैसी बर्बरता
इधर राजस्थान में तो खुलेआम मुस्लिम तुष्टिकरण की गंगा बह रही है। हालात यह हैं कि मुख्यमंत्री की रोजा इफ्तार पार्टी तक में बारां सांप्रदायिक हिंसा का आरोपी न सिर्फ बेखौफ पहुंचता है, बल्कि कांग्रेस नेताओं से साथ फोटो लेकर सोशल मीडिया तक पर डालता है। हालात यह भी हैं कि हिंदू पर्वों पर शहरों में दंगे हो रहे हैं, लेकिन समाजकंटकों को पुलिस की जरा भी परवाह नहीं है। हालात इतने बदतर हैं कि हिंदू मंदिरों, राम दरबार को तोड़ा जा रहा है। हाल ही में गहलोत सरकार ने भरतपुर के एक साधु की बलि ले ली। हालात इतने खौफनाक हैं कि उदयपुर में वीडियो बनाकर कट्टर आतंकी सर तन से जूदा कर देते हैं और अजमेर दरगाह का खादिम सरेआम हिंदूओं के खिलाफ, उनके देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं।कर्नाटक: मुस्लिमों ने 13 कालेजों के लिए किया आवेदन, इनमें हिजाब पर बैन नहीं होगा
मुस्लिमों के हौंसलों को ऐसी ही तुष्टिकरण की नीतियों से बढ़ावा मिलता है। सभी को याद है कि कर्नाटक में पीएफआई और उसकी सहयोगी कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) ने हिजाब विवाद कैसे खड़ा किया। कर्नाटक में हिजाब को लेकर विवाद 1 जनवरी को शुरू हुआ था। यहां उडुपी में 6 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कॉलेज में क्लास रूम में बैठने से रोक दिया गया था। कॉलेज मैनेजमेंट ने नई यूनिफॉर्म पॉलिसी को इसकी वजह बताया था। ऐसे मुस्लिम संगठनों की कट्टर सोच को हिजाब विवाद में हाईकोर्ट से झटका मिलने के बाद अब इन्होंने नया पैंतरा दिखाना शुरू किया है। इसके चलते कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से पहले हिजाब विवाद फिर से भड़कने के हालात बन गए हैं। कर्नाटक के दक्षिणी जिलों के मुस्लिम संगठनों ने राज्य में 13 नए निजी कॉलेज खोलने के आवेदन किए हैं। सबसे खास बात यह है कि इन कॉलेजों में हिजाब पर पाबंदी नहीं होगी।

मुस्लिम संगठन कालेज बनाना चाहते हैं या फिर हिजाब के लिए मजहबी अखाड़ा?
मुस्लिम संगठनों की ओर से निजी कॉलेज खोलने के एक साथ इतने आवेदन पहले कभी नहीं मिले थे। पिछले 5 साल में मुस्लिम संगठनों ने एक भी आवेदन नहीं किया था। अभी कर्नाटक के सभी शासकीय शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर पाबंदी है। निजी स्कूलों को अपना ड्रेस कोड तय करने की छूट है। अब सरकारी स्कूल-कॉलेजों में धार्मिक चिह्नों पर प्रतिबंध लग गया है, ऐसे में निजी शिक्षण संस्थानों पर निर्भर करता है कि वे अपने यहां हिजाब की अनुमति दें या नहीं। इसलिए मुस्लिम संगठनों ने अपने कॉलेज खोलने का फैसला किया है। बड़ा सवाल यही है कि मुस्लिम संगठन कालेज बनाना चाहते हैं या फिर हिजाब के लिए मजहबी अखाड़ा?हिजाब के समर्थन में आंदोलन करने वाले संगठनों ने संघर्ष फिर तेज किया
कर्नाटक में हिजाब विवाद हिंसक रूप लेने के बाद थमने लगा था। स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने की अनुमति की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी और फिर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया था। अब हिजाब के समर्थन में आंदोलन करने वाले PFI जैसे संगठनों ने संघर्ष तेज कर दिया है। लड़कियों का स्कूल नहीं आना और बिना हिजाब परीक्षा देने से इनकार करना भी आंदोलन का हिस्सा है। इसकी अगुआई कर रहे कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) ने हाल ही में एक रैली की थी।पश्चिम बंगाल: ममता खुद लगा रहीं अल्लाह-हू-अकबर का नारा, जय श्रीराम कहने पर भड़कीं
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो हिंदुओं की खिलाफत और मुस्लिम तुष्टिकरण की सारी हदें ही पार कर दीं। खुद जनसभाओं में अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाने वाली ममता बनर्जी जय श्रीराम का नारा लगाने वालों पर ही भड़क गईं थीं। तुष्टिकरण की इंतेहा यह कि ममता बनर्जी ने 2017 में मोहर्रम के लिए दुर्गा पूजा के दौरान विसर्जन पर रोक लगा दी थी। इतना ही नहीं 125 हिंदू स्कूलों पर गाज गिराने वाली ममता ने मुस्लिम छात्रों के लिए अलग खाना देने के लिए सर्कुलर जारी किया। ममता बनर्जी की वोट बैंक की राजनीति के कारण बंगाल के कई इलाके मुस्लिम बहुल हो गए हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुस्लिमों को तमाम सुविधाएं देने के साथ ही हिंदुओं के खिलाफ कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे लगता है कि वे पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बनाने पर तुली हुई हैं। राज्य में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या एक करोड़ से भी ज्यादा हो चुकी है।

 

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