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राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइट कार्यक्रम से रोशन हो रहा न्यू इंडिया, अब तक 1.25 करोड़ लाइट लगाई गई, 6800 करोड़ रुपये बचेगा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर भारत की तस्वीर ऊर्जा क्षेत्र में पूरी तरह बदल गई है। आज भारत ऊर्जा सेक्टर में न केवल आत्मनिर्भर है बल्कि निर्यातक देश में शामिल हो गया है। ऊर्जा क्षेत्र में किए गए कार्यों की वजह से ही भारत ने शहरी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों में 1.25 करोड़ एलईडी स्ट्रीट लाइट स्थापित करने का कीर्तिमान हासिल कर लिया है। इससे 8.5 अरब यूनिट बिजली की वार्षिक बचत का अनुमान है जो 6800 करोड़ रुपए के बराबर है। पीएम मोदी के आठ साल के कार्यकाल में ऊर्जा अथवा बिजली के क्षेत्र में किए गए सुधारों का ही परिणाम है कि देश में बिजली उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। गांवों तक बिजली कनेक्शन पहुंचाने की दर और देश में कुल बिजली उत्पादन क्षमता के मामले में देश ने तेज प्रगति की है। साल 2012 में 200 गीगावाट की बिजली उत्‍पादन क्षमता थी। अब देश में बिजली उत्‍पादन की क्षमता 400 गीगावाट पर पहुंच गई है। प्रतिव्‍यक्ति बिजली खपत पर नजर डालें तो 2012 में यह 884 यूनिट प्रतिव्‍यक्ति थी, अब ये आंकड़ा 1210 यूनिट पहुंच गई है। इसके साथ ही देश के सभी गांवों में बिजली पहुंच गई है। देश अक्षय ऊर्जा स्रोतों से एक लाख 63 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है। 2014 में उत्पादन क्षमता 2,48,554 मेगावाट से बढ़कर वर्तमान में चार लाख मेगावाट हो गई है, जो मांग से 185000 मेगावाट अधिक है। इस कारण भारत अब अपने पड़ोसी देशों को बिजली निर्यात कर रहा है।

यह पीएम मोदी की पहल का असर है कि एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल-EESL) ने पूरे भारत में शहरी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों में 1.25 करोड़ एलईडी स्ट्रीट लाइट स्थापित की है। इससे 8.5 अरब यूनिट बिजली की वार्षिक बचत का अनुमान है जो 6800 करोड़ रुपए के बराबर है। यही नहीं वर्ष 2015 में ग्रामीण क्षेत्रों में 12.5 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही थी, अब मई 2022 में बढ़कर औसतन 22.5 घंटे हो गई है।

23 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में स्ट्रीट लाइट कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जनवरी, 2015 को राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइट कार्यक्रम (एसएलएनपी-SLNP) का शुभारंभ किया था। इस कार्यक्रम के तहत पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को ऊर्जा कुशल एलईडी स्ट्रीट लाइटों से बदलने के लिए तैयार किया गया था। एसएलएनपी उन राज्यों/शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में कार्यान्वित किया जा रहा है जिन्होंने ईईएसएल के साथ कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। वर्तमान में ईईएसएल 23 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में स्ट्रीट लाइट राष्ट्रीय कार्यक्रम लागू कर रहा है। ईईएसएल ने सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को प्रस्ताव दिए हैं और जब भी संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन इसे मंजूरी देता है और यूएलबी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए जाते हैं, स्ट्रीट लाइटों को बदलने का काम ईईएसएल द्वारा किया जाता है। वर्तमान में 1,615 यूएलबी ने एसएलएनपी के तहत पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को एलईडी स्ट्रीट लाइटों से बदलने के लिए ईईएसएल के साथ अनुबंध किया है। राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइट कार्यक्रम (एसएलएनपी) जनवरी 2015 में सरकार द्वारा शुरू किया गया था ताकि पूरे देश में नगरपालिका क्षेत्र में पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट और ऊर्जा कुशल एलईडी स्ट्रीट लाइट से बदल दिया जा सके। इसके साथ ही अटल ज्योति योजना (अजय) चरण- II, दिसंबर, 2018 में शुरू किया गया था जो दूरस्थ, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सौर स्ट्रीट लाइट की स्थापना के लिए प्रदान करता है।

LED बल्ब के लाभ

ये साधारण बल्ब की तुलना में 50 गुना अधिक समय तक चलते हैं। CFL की तुलना में 8 से 10 गुना अधिक टिकाऊ होते हैं। कम बिजली की खपत में अधिक रोशनी देते हैं। इसीलिये इनसे बिजली और पैसे दोनों की बचत होती है। इनमें मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिये कोई हानिकारक पदार्थ नहीं होता है। शीघ्रता से चालू और बंद होते हैं। अत: बार–बार ON-OFF से इनके जीवनकाल पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। कम वोल्टेज पर भी बेहतर तरीके से काम करते हैं।

बिजली की कमी से बिजली की अधिकता वाला देश बना भारत

भारत पिछले आठ वर्षों में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अधिशेष बिजली वाला देश बन गया है। भारत दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा में उच्चतम वृद्धि दर भी दर्ज कर रहा है। अब देश में बिजली की कोई कमी नहीं है। पहले देश में बिजली की कमी थी, लेकिन 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश को बिजली उत्पादन में अधिशेष वाला बनाने के लिये बिजली उत्पादन को दोगुना कर दिया है। बिजली के उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र के बजाय निजी क्षेत्र से अधिक निवेश है।

देश का हर घर होगा रौशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के गरीब नागरिकों की बिजली की समस्या दूर करने के लिए सौभाग्य बिजली योजना शुरू की। पीएम मोदी ने 25 सितंबर, 2017 को प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य’ की शुरुआत की। सौभाग्य योजना का लक्ष्य 2021-22 तक 4 करोड़ गरीब परिवारों तक बिजली पहुंचाना है। इस योजना के द्वारा उन गांवों के लोगों को बिजली मिलेगी जो गांव अभी भी बिजली के लिए तरस जाते हैं। सौभाग्य योजना के शुरू होने के बाद से 31 मार्च 2021 तक 2.82 करोड़ घरों का विद्युतीकरण किया गया है। इसके तहत देश के सभी घरों को बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का फायदा उन लोगों को मिलेगा जो पैसों की कमी के चलते अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं ले पाए हैं। इसके तहत गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना पर 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आएगा। यह उन चार करोड़ परिवारों के घर में नयी रोशनी लाने के लिए है जिनके घरों में आजादी के 70 साल के बाद भी अंधेरा है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से हर गांव में पहुंची बिजली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2015 को लाल किले की प्राचीर से 1,000 दिनों के अंदर अंधेरे में डूबे 18,452 गांवों में बिजली पहुंचाने की घोषणा की थी। आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के सैकड़ों घरों में बिजली नहीं पहुंची थी, जिसे पहुंचाने के लिए दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना शुरू की गई। तय समय से 12 दिन पहले 28 अप्रैल 2018 को यह संकल्प पूरा हुआ और देश के सभी गांव बिजली से रोशन हुए। सरकार ने इस योजना के लिए 75,893 करोड़ रुपये का आवंटन किया। इस तरह अब बिजली से रौशन होने वाले कुल गांवों की संख्या 597,464 हो गई है। इस लक्ष्य को पूरा करने में कई कठिनाइयां भी आई क्योंकि कई गांव दुर्गम इलाके में थे जहां बिजली के उपकरण पहुंचाना ही काफी कठिन था। यहां तक कि कई जगह बिजली विभाग के कर्मचारियों को सिर एवं कंधे पर बिजली उपकरण उठाकर ले जाना पड़ा और इसे इसे मिशन मोड में पूरा किया गया। मोदी सरकार ने सुदूर गांवों में हर घर बिजली पहुंचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। इससे पीएम मोदी की छवि गरीबों और वंचित लोगों के लिए सोचने वाले के तौर पर बनी।

अब घर बैठे बिजली कनेक्शन

मोदी सरकार ने बिजली के क्षेत्र में एक और बड़ा फैसला किया है। बिजली क्षेत्र में दी जाने वाली अलग-अलग सेवाओं के लिए पहली बार सरकार ने समय सीमा तय की है। समय सीमा में काम नहीं करने पर बिजली वितरण कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाएगा, जो कम से कम एक लाख रुपये तय किया गया है। अब बिजली कनेक्शन के लिए बिजली विभाग के चक्कर नहीं लगाने होंगे बल्कि घर बैठे नया बिजली कनेक्शन मिल जाएगा। अब महानगरों में नया बिजली कनेक्शन 7 दिनों में, अन्य शहरों में 15 दिनों में, जबकि ग्रामीण इलाकों में 30 दिनों में देना अनिवार्य बनाया गया है। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी रहेगी और आवेदन करने के साथ ही समयसीमा की गिनती भी शुरू हो जाएगी। सरकार के इस फैसले पर केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने कहा, “लोगों को चक्कर काटना पड़ता है। चूंकि बिजली वितरण के क्षेत्र में एकाधिकार है। यानी उपभोक्ताओं के पास वितरण कंपनी चुनने का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए ये बेहद जरूरी है।” मीटर में खराबी आने, बिजली लोड में परिवर्तन कराने, लोड शेडिंग और खराब ट्रांसफॉर्मर बदलने जैसी सेवाओं को भी इस आदेश में शामिल किया गया है। इन सेवाओं के लिए समयसीमा तय करने की ज़िम्मेदारी राज्य बिजली नियामक आयोग को सौंपी गई है। आयोग को ये काम 60 दिनों के भीतर करने को कहा गया है। तय समयसीमा के भीतर काम नहीं करने पर बिजली वितरण कंपनी को कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा।

2030 तक 4,50,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन लक्ष्य

ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के बिना परंपरागत स्त्रोतों पर हम कब तक आधारित रह सकेंगे, पेट्रोल-डीजल के लिए देश कब तक दुनिया के दूसरे देशों पर निर्भर रहेगा। जैसे-जैसे विकास की रफ्तार तेज हो रही है, भारत की उर्जा जरूरतें भी बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने का फैसला लिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत में 2030 तक 4,50,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता हासिल करने के लिए तैयार है।

2030 तक देश में सभी इलेक्ट्रिक वाहन होंगे

पर्यावरण की रक्षा के लिए मोदी सरकार काम कर रही है और 2030 तक देश के सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदल देने का लक्ष्य लेकर काम में जुटी है। इससे सालाना 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक fossil fuels (जीवाश्म ईंधन) की बचत होगी। सरकार की ओर से कराए गए एक रिसर्च के अनुसार 2030 तक राजस्थान की केवल एक प्रतिशत भूमि से पैदा हुई सौर ऊर्जा से देशभर के सभी वाहनों के लिए पर्याप्त ईंधन का इंतजाम हो सकता है।

सौर ऊर्जा से चलने वाला पहला हवाई अड्डा

भारत में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। जहां कुछ सालों पहले बहुत कम लोगों को सौर ऊर्जा के बारे में जानकारी थी, वहीं पीएम मोदी के प्रयासों के चलते अब काफी लोग सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के प्रति सजग हो पाए हैं और अब देश भर में गांवों से शहरों तक में सौर ऊर्जा के प्रयोग में बढ़ोत्तरी हो रही है। दक्षिण भारत में दुनिया का ऐसा पहला हवाई अड्डा है जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चल रहा है। केरल का कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पूरी से सौर ऊर्जा से चलने वाला पहला हवाई अड्डा है।

भारत बना दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा पनबिजली उत्पादक

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा पनबिजली उत्पादक बन गया है। इंटरनेशनल हाइड्रोपॉवर एसोसिएशन (आईएचए ) के लंदन स्थित वैश्विक जल विद्युत व्यापार निकाय ने 2020 पनबिजली स्थिति रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक पनबिजली परियोजनाओं की क्षमता 2019 में 1308 गीगावॉट तक पहुंच गई। पनबिजली उत्पादन में भारत ने जापान को पीछे छोड़ दिया है। इंटरनेशनल हाइड्रोपॉवर एसोसिएशन के अनुसार कनाडा, अमेरिका, ब्राजील और चीन के बाद भारत का कुल स्थापित आधार 50 गीगावॉट है। आईएचए के अनुसार स्वच्छ, विश्वसनीय और सस्ती ऊर्जा पहुंचाने में महामारी ने जलविद्युत के लचीलापन और महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है।

परमाणु बिजली उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता

मोदी सरकार ने 10 नए Pressurized Heavy-Water Reactors (PHWR) के निर्माण का फैसला किया है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये काम अपने वैज्ञानिक करेंगे और कोई भी विदेशी मदद नहीं ली जाएगी। इन दस नए स्वदेशी न्यूक्लियर पावर प्लांट से 7,000 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकेगी। इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि भारत भी विश्व के अन्य देशों को Pressurized Heavy-Water Reactors की तकनीक देने वाला देश बन जायेगा, जो मेक इन इंडिया योजना को बहुत अधिक सशक्त करेगा। इसके अतिरिक्त 2022 तक 6,700 मेगावाट परमाणु ऊर्जा पैदा करने के लिए अन्य न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण का भी काम चल रहा है।

‘एक ग्रिड-एक देश’ की योजना से तस्वीर बदली

बिजली मंत्री आरके सिंह का कहना है कि हम देश को एक ग्रिड में पिरोने में सफल रहे हैं। हम पूरे देश में कहीं और कहीं से भी बिजली को ला और ले जा सकते हैं। कश्मीर में पैदा होने वाली हाईड्रो पावर को कन्याकुमारी भेज सकते हैं। इस वक्त हम कच्छ में सौर या पवन उर्जा पैदा करे और उसका इस्तेमाल अरुणाचल प्रदेश में कर सकते हैं। क्योंकि, पूरा देश एक ग्रिड से जुड़ चुका है। हमारे पास बिजली को लाने और ले जाने के लिए मजबूत नेटवर्क है। जहां 2014-15 से 2018-19 तक 1,11,433 सीकेएम संचरण ग्रिड का विस्तार हुआ, वहीं अब 163000 सीकेएम पारेषण लाइनें जोड़ी गई, जो पूरे देश को एक फ्रीक्वेंसी पर चलने वाले ग्रिड से जोड़ती है। लद्दाख से कन्याकुमारी तक और कच्छ से म्यांमार सीमा तक यह दुनिया में सबसे बड़े एकीकृत ग्रिड के रूप में उभरा है। इसका उपयोग करके देश के एक कोने से दूसरे कोने तक 1,12,000 मेगावाट बिजली पहुंचाने में किया जा सकता है। दो लाख 1722 करोड़ रुपये के व्यय के साथ देश में पिछले पांच वर्ष में वितरण बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया। इसके अंतर्गत 2921 नए सब स्टेशन का निर्माण, 3926 सब स्टेशनों का विस्तार, छह लाख 4465 सीकेएम एलटी लाइन स्थापित करना, 122123 सीकेएम कृषि फीडर के फीडर पृथक्करण और स्थापना शामिल है।

कार्बन मुक्त स्रोतों से 50% बिजली आपूर्ति

मोदी सरकार ने 2022 तक 175 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया है, जो वर्तमान में 100 गीगावॉट से बढ़कर 2030 तक 500 गीगावॉट हो जाएगा। अध्ययन से पता चलता है कि यदि भारत 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करता है, तो उसकी बिजली आपूर्ति का 50 प्रतिशत कार्बन मुक्त स्रोतों से आ सकता है, जबकि 2020 में यह केवल 25 प्रतिशत था। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के गठन में भारत की अहम भूमिका है। इसमें सम्मिलित करीब 121 देश जीवाश्म ईंधनों से इतर अक्ष्य ऊर्जा के विकल्पों को अपनाने के लिए एकजुट हुए हैं।

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