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2027 से पहले अखिलेश का प्रलाप: एयरपोर्ट और चढ़ावे पर सियासत क्यों?

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी की हताशा खुलकर सामने आने लगी है। पूर्वांचल दौरे के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश के आधुनिक एयरपोर्ट्स और धार्मिक स्थलों के चढ़ावे को लेकर जो अनर्गल बयानबाजी की, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सपा विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण दोनों को पचा नहीं पा रही है। कभी गड्ढायुक्त सड़कों, अंधेरे और अराजकता के पर्याय रहे उत्तर प्रदेश को जब डबल इंजन सरकार ने एक्सप्रेसवे और विश्वस्तरीय एविएशन नेटवर्क का केंद्र बना दिया, तब सपा मुखिया इसे ‘निजीकरण और बिक्री’ बताकर जनता को भ्रमित करने का विफल प्रयास कर रहे हैं। जिस प्रदेश में आज आस्था के केंद्र स्थानीय अर्थव्यवस्था के संवाहक बन चुके हैं, वहां श्रद्धालुओं के पवित्र चढ़ावे पर राजनीति करना सपा की तुष्टीकरण वाली पुरानी मानसिकता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

एविएशन क्रांति पर अनर्गल प्रहार: 21 एयरपोर्ट्स का नेटवर्क सपा को क्यों खटक रहा?
सपा शासनकाल में प्रदेश की पहचान सीमित हवाई सेवाओं और सैफई हवाई पट्टी तक सिमटी हुई थी। इसके विपरीत, आज उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक 21 एयरपोर्ट्स (घरेलू व अंतरराष्ट्रीय) के नेटवर्क के साथ एविएशन सेक्टर का राष्ट्रीय हब बन चुका है। जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार से एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश वैश्विक लॉजिस्टिक्स व निवेश का बड़ा केंद्र बन चुका है। इसके अलावा आजमगढ़, श्रावस्ती, चित्रकूट, मुरादाबाद और अलीगढ़ जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों को उड़ान योजना के तहत सीधी एयर कनेक्टिविटी मिली है। जब राज्य के सामान्य नागरिक को सस्ती और सुलभ हवाई यात्रा मिल रही है, तब सपा प्रमुख का इसे ‘हवाई अड्डों की बिक्री’ कहना सीधे तौर पर राज्य के औद्योगिक विकास और युवाओं के रोजगार पर चोट करने जैसा है।

‘हवाई चप्पल वाला भी उड़ेगा’ बनाम सपा की ‘सैफई चार्टर्ड’ मानसिकता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘उड़ान’ (UDAN) योजना ने सामान्य नागरिक के हवाई यात्रा के सपने को साकार किया है। आज आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती और मुरादाबाद के टियर-2 और टियर-3 शहरों से आम परिवारों के लोग कम खर्च में हवाई सफर कर रहे हैं। सपा के कार्यकाल में हवाई कनेक्टिविटी केवल सैफई हवाई पट्टी पर वीआईपी चार्टर्ड प्लेन उतारने तक सीमित थी। जब भाजपा सरकार ने हवाई चप्पल पहनने वाले आम नागरिक के लिए आसमान का रास्ता खोल दिया, तब सपा इसे ‘बिक्री’ बताकर उपहास उड़ा रही है। यह सीधा हमला आम जनता के सशक्तीकरण और क्षेत्रीय समानता पर है।

जेवर एयरपोर्ट के नामकरण पर कुंठा और जलभराव का फर्जी नैरेटिव
पूर्वांचल में अखिलेश यादव का यह कहना कि ‘नोएडा एयरपोर्ट का नाम बदला है, फिर नाम समेत बेच देंगे’, सपा की हताशा का जीता-जागता उदाहरण है। जिस पार्टी ने अपनी सरकार में हर सरकारी योजना, स्मारक और संस्थान का नाम केवल एक ही परिवार के नाम पर सीमित रखा, उसे आज देश के प्रधानमंत्री के नाम पर देश के सबसे बड़े एविएशन हब का नामकरण पच नहीं रहा है। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए सच्चाई उजागर की कि जिनके शासनकाल में एयरपोर्ट दशकों तक सिर्फ फाइलों और चर्चाओं में दबा रहा, उन्हें आज जमीन पर उतरता विकास हजम नहीं हो रहा। भारी बारिश के बाद एयरपोर्ट से पानी कुछ ही मिनटों में पूरी तरह निकाल दिया गया था और एक भी उड़ान प्रभावित नहीं हुई थी, लेकिन अखिलेश यादव और उनका तंत्र सोशल मीडिया पर झूठा नैरेटिव गढ़ने में जुट गया।

‘काम न करने का सपा मॉडल’ बनाम डबल इंजन की विकास नीति
अखिलेश यादव का आरोप है कि ‘योगी जी ने एयरपोर्ट बनाए तो पानी भर गया और एक्सप्रेसवे बनाए तो गड्ढे हो गए’। असल में यह अखिलेश यादव के उसी पुराने मॉडल को दर्शाता है कि ‘कुछ बनाओ ही मत, तो सवाल ही नहीं उठेगा’। अपने पांच साल के कार्यकाल में सपा सरकार ने बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने के बजाय केवल इफ्तार पार्टियों और सैफई में नर्तकियों के आयोजनों तक अपनी प्राथमिकताएं सीमित रखी थीं। जब जमीन पर कोई बड़ा प्रोजेक्ट तैयार ही नहीं किया गया, तो न वहां पानी भरने की बात थी और न गड्ढों की। आज जब डबल इंजन सरकार में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है, तो प्राकृतिक आपदाओं या सामान्य रख-रखाव की चुनौतियों को लेकर सपा केवल नकारात्मक राजनीति चमकाने में लगी है।

यूपी की अस्मिता और मातृशक्ति पर प्रहार: जनता को बदनाम करने की सपा मानसिकता
विकास परियोजनाओं पर अनर्गल प्रलाप करने के साथ-साथ सपा प्रमुख का यह बयान कि ‘यूपी के लोग लड़कियां छेड़ते हैं और बदसलूकी करते हैं’, पूरे प्रदेश की अस्मिता पर सीधा कुठाराघात है। जिस पार्टी के शासनकाल में ‘लड़कों से गलतियां हो जाती हैं’ कहकर शोहदों और अपराधियों को खुला संरक्षण दिया जाता था, वही आज उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ सम्मानित नागरिकों और युवाओं के चरित्र पर लांछन लगा रही है। आज योगी सरकार में मिशन शक्ति और एंटी रोमियो स्क्वॉड के जरिए मातृशक्ति सुरक्षित है और मनचलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है, लेकिन सपा प्रमुख प्रदेश की जनता को देश भर में बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

पूर्वांचल के स्वाभिमान पर प्रहार: विकास की मुख्यधारा से सपा को चिढ़ क्यों?
दशकों तक पूर्वांचल को सपा सरकारों ने केवल माफियाराज, जातिवादी संघर्ष और उपेक्षा के अंधेरे में धकेल कर रखा था। आज जब योगी सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, आजमगढ़ एयरपोर्ट और वाराणसी के आधुनिक विस्तार के जरिए पूर्वांचल को विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर दिया है, तब अखिलेश यादव पूर्वांचल की ही पावन धरती पर खड़े होकर इन परियोजनाओं को बदनाम कर रहे हैं। कनेक्टिविटी को ‘बिक्री’ बताकर वे असल में पूर्वांचल के स्वाभिमान और यहां के युवाओं की तरक्की पर आघात कर रहे हैं। पूर्वांचल का सजग नागरिक यह देख रहा है कि जिसे उन्होंने कभी विकास से वंचित रखा, आज उसी के उत्थान पर वे बौखलाहट में अनर्गल बयान दे रहे हैं।

अयोध्या के विकास पर मिथ्या प्रलाप: विस्थापितों के ऐतिहासिक पुनर्वास का सच
सपा प्रमुख का यह आरोप कि अयोध्या में लोगों की दुकानें और मकान छीन लिए गए और उचित मुआवजा नहीं मिला, सरासर सफेद झूठ है। अयोध्या धाम के नवसृजन के दौरान डबल इंजन सरकार ने एक-एक प्रभावित नागरिक, व्यापारी और भूस्वामी को सर्किल रेट से कई गुना अधिक पारदर्शी मुआवजा सीधे बैंक खातों में डीबीटी के जरिए दिया। राम पथ और भक्ति पथ के निर्माण से प्रभावित व्यापारियों के लिए आधुनिक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाए गए। जिस सपा ने अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं, वह आज अयोध्या को मिल रही वैश्विक भव्यता और स्थानीय नागरिकों की समृद्धि को पचा नहीं पा रही है।

आस्था और अर्थव्यवस्था का संगम: पावन चढ़ावे पर बेतुकी राजनीति का सच
अयोध्या धाम में भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और मथुरा-वृंदावन का अभूतपूर्व कायाकल्प आज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। अकेले धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को नई संजीवनी मिली है। धार्मिक न्यासों और तीर्थ क्षेत्रों में आने वाला चढ़ावा पूरी तरह पारदर्शी और प्रमाणित ट्रस्ट व्यवस्था के अंतर्गत मंदिर प्रबंधन, जनकल्याण, चिकित्सा और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं में प्रयुक्त होता है। इसके बावजूद सपा नेतृत्व द्वारा चढ़ावे पर संकीर्ण टिप्पणियां करना केवल तुष्टीकरण के पुराने वोटबैंक को साधने का प्रयास है। जिस दल की सरकारों में सांस्कृतिक विरासत की घोर उपेक्षा की गई, उससे सांस्कृतिक पुनरुत्थान के सम्मान की अपेक्षा वैसे भी नहीं की जा सकती।

चढ़ावे से ‘वोट चोरी’ तक: 2027 की संभावित हार से पहले बहानेबाजी की जमीन तैयार
अखिलेश यादव का यह बेतुका दावा कि ‘जो चढ़ावा चोरी कर सकते हैं, वे वोट चोरी भी कर सकते हैं’, उनके भीतर 2027 के चुनाव को लेकर गहराते डर को उजागर करता है। हार सामने देख चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ने की यह वही पुरानी पटकथा है। पवित्र धार्मिक चढ़ावे के नाम पर जनता में भ्रम फैलाना और साथ ही लोकतांत्रिक मतदान प्रक्रिया पर अविश्वास जताना यह साबित करता है कि सपा के पास न तो कोई सकारात्मक विजन है और न ही जनता के बीच जाने का नैतिक बल।

मुख्यमंत्री को अयोध्या से लड़ने की सलाह: हताश विपक्ष की खोखली बयानबाजी
बलिया में अखिलेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की सलाह’ देना केवल अपनी चुनावी जमीन खिसकने से उपजी घबराहट है। जो दल 2022 के चुनाव में अपने सुरक्षित गढ़ों को बचाने के लिए जूझ रहा था, वह आज प्रदेश के सर्वमान्य नेता को नसीहत दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे उत्तर प्रदेश, चाहे वह अयोध्या हो, गोरखपुर हो या बुंदेलखंड, को अपना परिवार मानकर विकास किया है। सपा नेतृत्व को चुनौती देने से पहले यह सोचना चाहिए कि 2027 में जनता उनके तुष्टीकरण और परिवारवाद का हमेशा के लिए सफाया करने का मन बना चुकी है।

गो-सेवा और ग्रामीण स्वावलंबन का उपहास: सपा की संकीर्ण मानसिकता
दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने गोवंश, गोबर और गौमूत्र आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजाक उड़ाकर किसानों और पशुपालकों की भावनाओं को आहत किया है। योगी सरकार की गो-आश्रय योजनाएं, गोबरधन प्रोजेक्ट्स और बायो-सीएनजी संयंत्र आज ग्रामीण युवाओं को रोजगार और किसानों को जैविक खाद व अतिरिक्त आय दे रहे हैं। जिस पार्टी की सरकार में पशु तस्करों और अवैध बूचड़खानों को संरक्षण मिलता था, वह आज गाय आधारित स्वावलंबी अर्थव्यवस्था का उपहास उड़ाकर अपनी किसान-विरोधी मानसिकता का ही प्रदर्शन कर रही है।

गन्ना किसानों की समृद्धि पर चोट: इथेनॉल मिश्रण पर सपा का संकीर्ण प्रहार
पूर्वांचल दौरे में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को ‘मिलावट’ बताकर अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों की आय पर हमला बोला है। आज उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा इथेनॉल उत्पादक राज्य बन चुका है, जिससे गन्ना मिलों की माली हालत सुधरी है और किसानों को रिकॉर्ड समय में गन्ना मूल्य का भुगतान हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की इस किसान-हितैषी नीति से जहां एक ओर विदेशी तेल आयात पर निर्भरता कम हुई है, वहीं दूसरी ओर किसानों की जेब में सीधा पैसा पहुंच रहा है। सपा का इसका विरोध करना उनके किसान-विरोधी चरित्र को दर्शाता है।

शोक सभाओं को चुनावी अखाड़ा बनाना: सपा की संवेदनहीन राजनीति का चेहरा
यह कितनी बड़ी विडंबना है कि सपा प्रमुख पूर्वांचल में अपने ही दिवंगत वरिष्ठ नेताओं, बलिया के सिकंदरपुर स्थित गोसाईंपुर में पूर्व कैबिनेट मंत्री व पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्व. रामगोविंद चौधरी के तेरहवीं संस्कार तथा देवरिया के लार (रक्सा) में पूर्व विधायक स्व. सुरेश यादव की श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने पहुंचे थे। जहां परिवारजनों से मिलकर दिवंगत विभूतियों के प्रति नमन, संवेदना और कृतज्ञता व्यक्त की जानी चाहिए थी, वहां अखिलेश यादव ने माइक थामकर एयरपोर्ट ‘बेचने’, मंदिर के चढ़ावे पर आक्षेप लगाने और ‘वोट चोरी’ की सस्ती चुनावी बयानबाजी शुरू कर दी। अपने ही समर्पित बुजुर्ग साथियों के शोक कार्यक्रमों को संकीर्ण सियासी मंच बना देना सपा नेतृत्व की संवेदनहीनता और हताशा को पूरी तरह बेनकाब करता है।

टूरिज्म इकोनॉमी से पिछड़े और वंचित वर्गों का आर्थिक सशक्तीकरण
धार्मिक स्थलों के कायाकल्प और बढ़ते पर्यटन का सबसे बड़ा लाभ समाज के वंचित, पिछड़े और कामगार वर्गों को मिला है। अयोध्या, काशी और मथुरा में श्रद्धालुओं की आमद बढ़ने से ई-रिक्शा चालकों, नाविकों (मल्लाह समाज), फूल-प्रसाद के छोटे दुकानदारों और स्थानीय हस्तशिल्पियों की दैनिक आय में कई गुना वृद्धि हुई है। सपा नेतृत्व का चढ़ावे पर अनर्गल प्रहार असल में उन्हीं लाखों छोटे व्यापारियों, कारीगरों और वंचित वर्ग के परिवारों की आजीविका पर प्रहार है, जो इस सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था के मुख्य स्तंभ हैं।

एयर कार्गो से वैश्विक बाजार: पूर्वांचल के किसानों और एमएसएमई को सीधा लाभ
हवाई अड्डों का यह नेटवर्क केवल यात्री उड़ानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के किसानों और एमएसएमई उद्यमियों के लिए वैश्विक बाजार का प्रवेश द्वार बन चुका है। वाराणसी, कुशीनगर और जेवर जैसे एयरपोर्ट्स पर एयर कार्गो सुविधाओं से पूर्वांचल की हरी मिर्च, बनारसी लंगड़ा आम, भदोही के कालीन और मुरादाबाद के पीतल उत्पाद सीधे खाड़ी देशों और पश्चिमी बाजारों तक निर्यात हो रहे हैं। सपा नेतृत्व का इसे ‘निजी हाथों में बेचना’ कहना असल में यूपी के मेहनतकश किसानों और छोटे उद्यमियों के बढ़ते निर्यात कारोबार को बाधित करने की मानसिकता है।

पीपीपी मॉडल की समझ का अभाव: निजीकरण नहीं, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की विश्वस्तरीय तकनीक
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर बन रहे आधुनिक एयरपोर्ट्स को लेकर सपा नेतृत्व की बयानबाजी नीतिगत अज्ञानता को दर्शाती है। पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत भूमि और आधारभूत संरचना का पूर्ण स्वामित्व सरकार व एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास ही सुरक्षित रहता है, जबकि निजी कंपनियां केवल संचालन, निवेश और विश्वस्तरीय यात्री सुविधाएं सुनिश्चित करती हैं। इससे सरकार पर वित्तीय भार नहीं पड़ता और भारी राजस्व भी प्राप्त होता है। सपा जानबूझकर ‘बिक्री’ शब्द का भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि दुनिया भर के अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर इसी मॉडल पर तैयार होते हैं।

सैफई महोत्सव बनाम आधुनिक उत्तर प्रदेश: विजन के अभाव में छटपटाता विपक्ष
अखिलेश यादव का यह प्रलाप असल में विजन के पूर्ण अभाव को दर्शाता है। 2017 से पहले समाजवादी पार्टी का विकास मॉडल केवल एक परिवार और सैफई महोत्सव के आयोजनों तक सीमित था। आज योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और डिफेंस कॉरिडोर के जरिए प्रदेश के कोने-कोने को आर्थिक रूप से सशक्त किया है। उत्तर प्रदेश आज देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। जब माफियाराज समाप्त हो चुका है और कानून का राज स्थापित है, तब सपा के पास विकास का मुकाबला करने के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं बचा है।

2027 में नकारात्मक राजनीति को फिर धूल चटाएगी जनता
पूर्वांचल से लेकर पश्चिमांचल तक उत्तर प्रदेश की जनता यह भली-भांति समझती है कि सपा का यह विरोध विकास के खिलाफ हताशा का परिणाम है। आधुनिक एयरपोर्ट, विश्वस्तरीय सड़कें, निर्बाध बिजली और सांस्कृतिक गौरव आज नए उत्तर प्रदेश की पहचान हैं। अखिलेश यादव चाहे विकास के हर प्रतीक को लांछित करने का कितना भी षड्यंत्र रच लें, 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश का प्रबुद्ध मतदाता सपा के इस नकारात्मक, तुष्टीकरण-युक्त और विकास-विरोधी एजेंडे को पूरी तरह दरकिनार कर विकास और सुशासन की नीति पर ही मुहर लगाएगा।

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