भारत के राजनीतिक परिदृश्य में कट्टरपंथी इस्लाम, अति-वामपंथ और सेकुलर कांग्रेस का खतरनाक गठजोड़ लोकल से लकर ग्लोबल एजेंडे तक काम कर रहा है। यह गठजोड़ अब केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर (लंदन, अमेरिका और यूरोप) तक अपना जाल फैला लिया है। इस गठजोड़ का एकमात्र ईंधन भारत विरोधी भावना और हिन्दुत्व के प्रति घृणा है। इसके लिए वे संविधान विरोधी, हिन्दू विरोधी और देश विरोधी नारों या ताकतों का समर्थन करने से भी नहीं हिचकिचाते। हाल के दिनों में दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से लेकर लंदन की सड़कों तक इस गठजोड़ का खतरनाक एजेंडा देखने को मिला, जिसका मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश की तरह भारत में अराजकता पैदा करना और रिजीम चेंज कर इस्लामी शासन स्थापित करना है।
जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में कल मशाल यात्रा निकाल कर बांग्लादेशी उपद्रव जैसे मैसेज दिया गया है |
क्योंकि बांग्लादेश में आगजनी से पहले ऐसी ही मशाल यात्रा निकाली थी और बाद में हिंदुओं के घ! रों को ज! ला दिया था |
राष्ट्रवादी हिंदुओं अब कब एक्शन में आओगे – तो क्या भारत को बांग्लादेश बनता ही देखते रहोगे |
@HMOIndia देश जलने से बेहतर है कि कार्यवाही ऐसी हो जिससे भारत को बांग्लादेश बनाने की सोचने वालों की जमीन बंजर हो जाए |
— THE JAT ASSOCIATION (@Jatassociation) October 26, 2026
जामिया प्रशासन ने मानी छात्रों की मांग, जल्द होगा छात्रसंघ चुनाव
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र पिछले 15 दिनों से यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी में चल रहे हंगामे के बीच 26 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सहमति बन गई। रजिस्ट्रार प्रो. मेहताब आलम रिजवी द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, छात्रों की प्रमुख मांगें मान ली गईं, जिसमें कहा गया कि छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। इसके बाद छात्र संघ चुनाव का रास्ता साफ हो गया। इसके साथ ही हालिया आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन छात्रों को सस्पेंड किया गया था या जिन्हें शो-कॉज नोटिस दिए गए थे, उन सभी को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पूरी तरह से रद्द कर दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान यूनिवर्सिटी के सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा की गई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा।
जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में होंगे चुनाव
पिछले कई दिनों से जामिया में छात्र संघ चुनावों की बहाली के लिए प्रदर्शन हो रहे थे, कई छात्र भूख हड़ताल पर भी थे, पुलिस भी तैनाती थी। दीवारों पर गलत नारे भी लिखे गए।
लेकिन अब यूनिवर्सिटी ने 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने की आदेश दिए हैं। https://t.co/VDdXaYsMxj
— Hardik Arya (@HardikArya2576) October 26, 2026
छात्रों को भी कुछ शर्तों का करना होगा पालन
छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच हुए समझौते के अनुसार, छात्रों को भी कुछ शर्तों का पालन करना होगा:
1. छात्र प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ दिए गए किसी भी मानहानिकारक बयान या पोस्ट के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे।
2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से प्रशासन के खिलाफ किए गए ऐसे सभी आपत्तिजनक पोस्ट तुरंत हटाए जाएंगे।
3. इस आदेश के जारी होते ही भूख हड़ताल और सभी विरोध प्रदर्शनों को तुरंत प्रभाव से समाप्त माना जाएगा।
Office of the Chief Public Relations Officer, JMI https://t.co/S0ydd6j8xo
— Jamia Millia Islamia (NAAC A++ Grade Central Univ) (@jmiu_official) October 26, 2026
भूख हड़ताल जारी, छात्र के बयान से बढ़ा सस्पेंस
इस समझौते के कुछ ही देर बाद छात्रों के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन के नोटिस की भाषा और उसके वास्तविक अर्थ को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। आंदोलन के आगे जारी रहने या समाप्त होने को लेकर छात्रों के बीच चर्चा शुरू हो गई। भूख हड़ताल खत्म करने वाले एक छात्र का कहना है, “समझौता जल्दबाजी में हुआ। बहुत सारी चीजें ऐसी हैं कि जिन सामान्य मांगों को लेकर हम बैठे थे, वो सभी छात्रों को समझ में नहीं आ रही हैं। हमने गलतफहमी में भूख हड़ताल खत्म कर दी। लेकिन जो छात्र अभी भूख हड़ताल पर है, उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। हम लोग उनका समर्थन करेंगे।” इस छात्र के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि मांगें मानी जाने के बावजूद हड़ताल जारी रखने का मकसद इससे बड़ा है, जो जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि छात्र, निर्वाचित छात्र संघ को फिर से बहाल करने की मांग कर रहे थे, जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने 2006 में भंग कर दिया था।
📍अपडेट । जामिया । 26 Oct
जामिया छात्र संघ बहाली को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में से दो छात्र एबिन और रेहान आगे भी भूख हड़ताल जारी रखेंगे।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर जारी आंदोलन ने अब फिर से एक नया मोड़ ले लिया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मेहताब आलम रिजवी, असिस्टेंट रजिस्ट्रार अमान अली शाह के साथ बातचीत के बाद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने हड़ताल समाप्त कर दी और विक्ट्री मार्च निकाला।
हालांकि, इसके बाद प्रशासन के नोटिस की भाषा को लेकर छात्रों के बीच असमंजस पैदा हो गया। छात्र छात्रसंघ बहाली की स्पष्ट घोषणा नहीं होने पर सवाल उठा रहे हैं।
नोटिस में छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद चुनाव कराने की बात कही गई थी।
#JamiaMilliaIslamia #PoojaMathur #JamiaStudents #StudentUnion #JamiaProtest #RedChilliLive
— Pooja Mathur (@PoojaMathur01) October 26, 2026
‘फ्री कश्मीर’ ‘Bring Back Islam’, ‘फ्री शरजील इमाम’ के नारे
जामिया यूनिवर्सिटी में छात्रों की आड़ में हिन्दू और देश विरोधी ताकतें सक्रिय हैं, जो प्रदर्शन को जारी रखना चाहती है। उनका मकसद छात्रों को भड़का कर अराजकता पैदा करना है। इसका प्रमाण यूनिवर्सिटी के दीवारों पर लिखे विवादित और आपत्तिजनक नारों से मिलता है। 22 अक्टूबर को जामिया मिलिया इस्लामिया की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’, ‘फ्री फिलिस्तीन’, ‘फ्री शरजील इमाम’ और ‘Bring Back Islam’ के नारे लिखे दिखाई दिए। हैरानी की बात यह है कि दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड होने के आरोपी शरजील इमाम को जेल से आजादी देने की मांग की गई है और उसके नाम के साथ दिल बनाकर प्यार जाहिर किया गया है। हालांकि दीवारों पर लिखे गए नारों को बाद में हटा दिया गया, लेकिन नारे किसने लिखे और इस मामले में किसी की पहचान हुई है या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
जामिया में फिर राष्ट्र विरोधी गतिविधि….
दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर के अंदर लिखे गए राष्ट्र विरोधी नारे-
– फ्री कश्मीर
– Bring Back Islam
– फ्री शारजील इमाममतलब – कश्मीर अलग करने, इस्लामी शासन की चाहत और देश तोड़ने का बयान देने वाले शारजील की रिहाई की मांग।
समर्थन देने दिवाल फांदकर पहुंचे थे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद। बाद में आक्रोश होने पर सफाई देकर झाड़ा पल्ला
— Panchjanya (@epanchjanya) October 24, 2026
जामिया की दीवारों पर ‘Death to RSS/ABVP’ के नारे
जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और एबीवीपी के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखे होने की तस्वीरें सामने आई हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जामिया इकाई ने ‘Death to RSS/ABVP’ जैसे नारे लगाए जाने और देशविरोधी लेखन की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एबीवीपी जामिया इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने तथा उनके विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की मांग की है। एबीवीपी ने इन नारों को लेकर आपत्ति जाहिर करते हुए सख्त एक्शन लिए जाने की मांग की है।

मुस्लिम लड़कियों को चाहिए ब्राह्मणवाद-मनुवाद से आजादी
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्यों ने ‘आज़ादी’ के नारे लगाए, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि जामिया यूनिवर्सिटी जैसे अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान, जहां बहुसंख्यक मुस्लिम छात्र और छात्राएं हैं। उसमें छात्राओं को बीजेपी, आरएसएस, मनुवाद और ब्राह्मणवाद से आजादी चाहिए। छात्राएं नारा लगा रही हैं, “अगर तुम नहीं दोंगे आजादी, तो हम छिनकर लेंगे आजादी…ब्राह्मणवाद से आजादी…मनुवाद से आजादी…आरएसएस से आजादी…हम क्या चाहते आजादी…।
इन लोगों ने कल जामिया यूनिवर्सिटी में फ्री कश्मीर के नारे दिवालों पर लिखे थे, जिसके बाद कैंपस में पुलिस तैनात की गई। आज आजादी, आजादी के नारे लगा रहे हैं।
अधिकारियों को मामले की जांच करनी चाहिए और कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। भारत में ऐसी गतिविधियों को क्यों बर्दाश्त किया जाना चाहिए? 🇮🇳
लेकिन एक बात समझ नहीं आ रही है इन्हें भी ब्राह्मणवाद और मनुवाद से आजादी चाहिए..??
इन्हें तो हलाला,मुताह,बुर्का,तीन तलाक़ और मौलाना से आजादी मांगनी चाहिए 🙄— Anant (@singh31919) October 24, 2026
यूनिवर्सिटी में पुलिस बल तैनात, ऑनलाइन क्लास का निर्देश
यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लेखन और पोस्टर की रिपोर्ट सामने आने के बाद परिसर में तनाव फैल गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने बड़े पैमाने पर जवान तैनात किए। रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, शिक्षकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कक्षाएं संचालित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, छात्रों को जरूरी अध्ययन सामग्री और अकादमिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। ऑनलाइन कक्षाओं के शेड्यूल के अनुसार नियमित रूप से पढ़ाई में शामिल होना छात्रों के लिए जरूरी होगा। यूनिवर्सिटी ने आगे कहा कि व्यवस्था से जुड़ी जानकारी ऑफिशियल सोर्स के जरिए शेयर की जाएगी। फिलहाल ऑनलाइन कक्षाएं अगले आदेश तक जारी रहेंगी।
दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे जाने का मामला सामने आया है, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया है। दीवारों पर RSS, ABVP और विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ भी नारे लिखे गए हैं। मामले को लेकर ABVP ने आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 23, 2026
जामिया यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन के पीछे कांग्रेस का हाथ
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में कांग्रेस का छात्र संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने समझौता होने और मांगें माने जाने के बाद खुशी जाहिर की थी। लेकिन कुछ ही समय बाद एनएसयूआई ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर माफी भी मांग ली। एनएसयूआई ने कहा, “हम जश्न मनाने के लिए माफी मांगते हैं, क्योंकि प्रशासन की चालों के बीच ऐसा करना गलत था। हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे और जब तक हमारी तीनों मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे।” कांग्रेस के छात्र संगठन का यह यू-टर्न अनायास नहीं हुआ है। इसके पीछे सोची समझी रणनीति है। एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की रैली तक इस प्रदर्शन को जारी रखने की कोशिश की जा रही है।
We apologise for celebrating, as it was wrong to do so in the face of the administration’s tactics.
We will continue our protest, and we will not leave until all three of our demands are fulfilled
#restoreJMISU
— NSUI Jamia Millia Islamia (@nsui_jamia) October 26, 2026
सांसद इमरान मसूद, इमरान प्रतापगढ़ी, मोहिबुल्ला नदवी पर FIR
यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने कांग्रेस के लोकसभा सांसद इमरान मसूद, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, सपा सांसद मोहिबुल्ला नदवी और दूसरों के खिलाफ दिल्ली पुलिस में फॉर्मल शिकायत दर्ज कराई है। इससे पहले शुक्रवार को भी कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी छात्रों का समर्थन पहुंचे जामिया पहुंचे थे। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया था। दोनों पर आंदोलनकारी छात्रों को भड़काकर माहौल बिगाड़ने और आपराधिक षड्यंत्र रचने की धाराएं लगाई गई हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से साक्ष्य के तौर पर वीडियो व कुछ फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराए गए हैं। साक्ष्यों की विवेचना करने के बाद एफआईआर दर्ज करते हुए पुलिस अब दोनों पर कानूनी शिकांजा कसेगी।
इमरान मसूद, इमरान प्रतापगढ़ी और मोहिबुल्ला नदवी के खिलाफ केस दर्ज, जामिया मामले में एक्शन
https://t.co/gBZAQBhk2x— India TV (@indiatvnews) October 25, 2026
FIR पर भड़के इमरान मसूद, दीवार फांदकर परिसर में घुसे
एफआईआर दर्ज होने के बाद इमरान मसूद ने साफ कहा कि वे छात्रों से मिलने जामिया जाएंगे, फिर चाहे उनके ऊपर कितनी भी FIR क्यों न दर्ज हो। उन्होंने कहा, ‘जामिया क्या उनके बाप की यूनिवर्सिटी है? कैसे नहीं जाने देंगे मुझे, मिलने नहीं देंगे हमें अपने बच्चों से। जितनी मर्जी FIR कर लो। हम जाएंगे।’ गौरतलब है कि छात्रों के प्रदर्शन और उनकी मांगों की जानकारी मिलने के बाद शुक्रवार को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद जामिया यूनिवर्सिटी पहुंचे। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यूनिवर्सिटी परिसर की दीवार फांद कर उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की। मसूद ने छात्रों से कहा, “पूरे देश में इस वक्त जो माहौल बना हुआ है। जरूरी है कि संविधान की रक्षा के लिए हम सब साथ खड़े हों। और ये भी हमारा संवैधानिक अधिकार है कि जिस मांग को लेकर आप लोग बैठे हो। मैं आज आपको पूरा समर्थन, अपनी पार्टी का समर्थन, चूंकि सभी साथी एनएसयूआई के भी लगे हुए हैं। हम सब लोग आपके साथ है। इस बात से निश्चिंत रहें कि आपकी इस लाड़ाई में हम आपको हारने नहीं देंगे।”
@Imranmasood_Inc @nsui @nsui_jamia This is how @INCIndia MP Imran Masood reached inside the Jamia campus.
He said that he will the the VC and Police administration tomorrow.
#JMI #jmisu #jamia https://t.co/hAHXXI5lW9
— Sherlock Holmes (@sherlock_hoIme) October 23, 2026
ताला और दीवार तोड़कर घुसे कांग्रेसी सांसद- यूनिवर्सिटी प्रशासन
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कांग्रेसी सांसदों इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी पर परिसर में जबरन घुसने का आरोप लगाया। जामिया मिलिया इस्लामिया में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के मामले पर जामिया मिलिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार, प्रो. महताब आलम रिज़वी ने कहा, ‘मैंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि हम इन कार्रवाइयों की समीक्षा करेंगे, मामले को अनुशासनात्मक समिति के सामने रखेंगे और जो छात्र निर्दोष पाए जाएंगे, उन्हें बहाल कर दिया जाएगा। कुछ ऐसे लोग जो हमारे छात्र भी नहीं थे पिछले गेट से अंदर आ गए। कल जो दीवार पर ‘फ्री कश्मीर’ (आज़ाद कश्मीर) का नारा लिखा गया था, हम उसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। हम किसी भी हाल में इसका समर्थन नहीं करेंगे। कल इमरान मसूद आए थे, वे दीवार तोड़कर अंदर घुसे। इमरान प्रतापगढ़ी भी आए थे उन्होंने ताला तोड़कर प्रवेश किया। ये लोग बिना अनुमति के अंदर आए हैं। हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और उनसे कार्रवाई करने को कहा है। AIMIM के कुछ और लोग भी यहां अंदर आए थे।”
#WATCH दिल्ली: जामिया मिलिया इस्लामिया में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के मामले पर जामिया मिलिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार, प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने कहा, “मैं खुद उन छात्रों से बात करने गया जो भूख हड़ताल पर बैठे थे। यूनियन चुनाव कराने की उनकी मांग पर, मैंने उन्हें बताया कि हमने पहले ही एक ड्राफ्ट कमेटी बना दी है, जिसका काम संविधान का मसौदा तैयार करना है। फिर उन्होंने एक समय-सीमा (डेडलाइन) मांगी। मैंने उनसे कहा कि वे जितनी जल्दी संविधान का मसौदा तैयार कर लेंगे, हम उतनी ही जल्दी चुनाव करा देंगे, इस प्रस्ताव पर वे सहमत हो गए। फिर उन्होंने पूछा, ‘सर, चुनाव कब होंगे?’ मैंने जवाब दिया, ‘चूंकि आपने खुद संविधान का मसौदा तैयार करने की पेशकश की है और इस कमेटी में आपके अपने प्रतिनिधि भी शामिल हैं इसलिए जैसे ही आप मसौदा सौंप देंगे, हम चुनाव की घोषणा कर देंगे।’ उनकी एक और मांग कुछ छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर थी; मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि हम इन कार्रवाइयों की समीक्षा करेंगे, मामले को अनुशासनात्मक समिति (DC) के सामने रखेंगे और जो छात्र निर्दोष पाए जाएंगे, उन्हें बहाल कर दिया जाएगा… कुछ ऐसे लोग जो हमारे छात्र भी नहीं थे पिछले गेट से अंदर आ गए… कल जो दीवार पर ‘फ्री कश्मीर’ (आज़ाद कश्मीर) का नारा लिखा गया था, हम उसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। हम किसी भी हाल में इसका समर्थन नहीं करेंगे… कल इमरान मसूद आए थे, वे दीवार तोड़कर अंदर घुसे। इमरान प्रतापगढ़ी भी आए थे उन्होंने ताला तोड़कर प्रवेश किया। ये लोग बिना अनुमति के अंदर आए हैं… हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और उनसे कार्रवाई करने को कहा है… AIMIM के कुछ और लोग भी यहां अंदर आए थे…”
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 24, 2026
JNU में ‘फ्री उमर खालिद’, ‘लॉन्ग लिव नक्सलबाड़ी’ के नारे
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में चल रहे आंदोलन के बीच जेएनयू परिसर में वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा विश्वविद्यालय के शांतिपूर्ण एवं शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की। यूनिवर्सिटी परिसर की दीवारों पर ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लिव नक्सलबाड़ी’ जैसे नारे लिखे गए हैं। इसके अलावा, सामने आई तस्वीरों में आइसा के कैडर द्वारा वीर सावरकर के चित्र के साथ आपत्तिजनक लेखन किए जाने का मामला भी प्रकाश में आया है। एबीवीपी और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इसका कड़ा विरोध जताया है। एबीवीपी का आरोप है कि वामपंथी संगठनों ने शैक्षणिक माहौल खराब करने के लिए यह हरकत की है। विहिप ने कहा कि देश-विरोधी गिरोह शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। दोनों संगठनों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
#UNREST
#JNU
#LEFT
#DELHI
*Slogans like “Free Umar Khalid” (demanding the release of an individual involved in anti-national activities) and “Long Live Naxalbari” found on campus walls in #JNUIn Jawaharlal Nehru University (JNU) campus have repeatedly come to light. In recent incidents, objectionable and provocative political graffiti has appeared on campus walls and in public spaces. Images that have surfaced show offensive text alongside a portrait of Veer Savarkar, as well as slogans such as “FREE UMAR KHALID” and “LONG LIVE NAXALBARI,” written by left wing . These incidents raise serious concerns about how ideological disagreement within the university is being steered toward provocation and confrontation, rather than healthy democratic debate. It is a direct consequence of the slogans raised in support of Umar Khalid by left wing.
— Amit Bhardwaj (@AmmyBhardwaj) October 25, 2026
आइए देखते हैं कि कट्टरपंथी इस्लाम, अति-वामपंथ और सेकुलर कांग्रेस का खतरनाक गठजोड़ किस तरह विदेशों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रवादी सरकार, आरएसएस और हिन्दुत्व को खत्म करने के लिए मुहिम चला रहे हैं…
RSS और BJP के साथ ही हिंदुत्व के खिलाफ जंग का ऐलान
लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में 23 अक्टूबर 2026 को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की यूके इकाई द्वारा एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। यह प्रदर्शन भारत में मतदाता सूची में संशोधन और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। इस प्रदर्शन के दौरान SFI की सदस्य कॉमरेड राधिका ने अपने संबोधन में कहा कि केवल भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि “हिंदुत्व को पूरी तरह खत्म करना” और “हिंदुत्व से आजादी” चाहिए। SFI और इसके समर्थकों का कहना है कि उनका विरोध सांप्रदायिकता, सत्तावाद और दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाफ है, जिसे वे धर्मनिरपेक्षता की रक्षा से जोड़ते हैं।
सुनिए तथाकथित आंदोलनकारियों का सनातन व देश विरोधी भाषण!
इन लोगों का कहना है कि,
“केवल RSS और BJP के जाने से काम नहीं होगा!
हमें हिंदुत्व से लड़ना पड़ेगा!”चप्पल कहाँ रखी है मेरी?
क्या इसलिए ही Regime Change की बातें प्रशांत भूषण, संजय सिंह, प्रकाश राज, संजय राऊत व नेहा बोरा जैसे लोगों द्वारा की जा रही हैं?
कांग्रेस, सपा व AAP के लोग इस पर जवाब देने का कष्ट करें!
🤔🤔क्या आपके हिसाब से ये भाषण देश व सनातन विरोधी नहीं है?
😠😠#Protest #AntiHindu #AntiNational #Hindutva #BJP #RSS #ModiGovernment
@BJP4India @BJP4Delhi @BJYM @narendramodi @PMOIndia @NitinNabin @AmitShah @gupta_rekha @hdmalhotra @drhemangjoshimp @deepakmhaskey
— Abhishek Tyagi (@AbhishekTyagi_) October 23, 2026
लंदन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का विरोध
सितंबर 2026 में ब्रिटेन की यात्रा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को लंदन में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सितंबर 2026 में सैकड़ों प्रदर्शनकारी लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर (संसद भवन के पास) एकत्र हुए। उन्होंने आरएसएस की विचारधारा और भारत में अल्पसंख्यकों के मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। ब्रिटेन के लगभग 15 से 20 सिविल सोसाइटी संगठनों (जैसे— हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स, यूके इंडियन मुस्लिम काउंसिल, साउथ एशिया सॉलिडेटरी ग्रुप, और इंडिया लेबर सॉलिडेटरी) ने लंदन के मेयर सादिक खान को पत्र लिखकर आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों को कोई सार्वजनिक समर्थन न देने की अपील की थी। प्रदर्शनकारियों ने ‘आरएसएस वापस जाओ’ (RSS Go Back) और फासीवाद के खिलाफ नारे लगाए। उनका आरोप था कि भागवत का दौरा प्रवासी भारतीयों के बीच ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है।
📍 लंदन, ब्रिटेन
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में लंदन के बेंटले होटल में आयोजित एक बैठक के दौरान प्रदर्शनकारियों ने विरोध-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए कहा—
“मोहन भागवत, मैं हिंदू हूं, आप फासीवादी हैं। असली हिंदू लिंचिंग नहीं करते।”
प्रदर्शनकारियों ने भागवत के खिलाफ “शर्म करो” जैसे नारे भी लगाए और मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर सवाल उठाए।
— Mazhar Khan (@Mazhar4justice) September 9, 2026
कांग्रेसियों और वामपंथियों पर ‘इस्लामी अफीम’ का असर
समकालीन भारतीय राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एक दिलचस्प और विरोधाभासी मोड़ आया है। जो कांग्रेसी खुद को सेकुलर अर्थात पंथनिरपेक्ष बताते हैं और वामपंथ कभी धर्म को ‘अफीम’ मानकर हर प्रकार के धार्मिक कर्मकांड और कट्टरता का विरोधी करते थे, वो आज ‘इस्लामी अफीम’ का सवेन कर कट्टरपंथी इस्लामी एजेंडे के साथ खड़ा नजर आ रहे हैं। दोनों पर ‘इस्लामी अफीम’ का इतना असर दिखाई दे रहा है कि जिहादी, कांग्रेसी और वामपंथी में अंतर करना मुश्किल हो गया है। इन्होंने राष्ट्रवाद, हिन्दुत्व और भारतीय राज्य व्यवस्था के विरोध में एक अघोषित गठबंधन बना रखा है। यह गठबंधन अपने अस्तित्व के लिए हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद को खतरा मानता है। इसलिए यह हिन्दुत्व को समाप्त करने के लिए बेताब है। यह गठजोड़ भारत के सामाजिक ताने-बाने और अखंडता के लिए एक गहरी चुनौती पेश कर रहा है।









