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खुद को देश का मजदूर नंबर वन बताने वाले पीएम मोदी ने दिया ‘लेबर्स यूनाइट द वर्ल्ड’ का नारा

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आज अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस है। इस अवसर पर पूरा विश्व मजदूरों के परिश्रम और उनके वैश्विक विकास में योगदान को याद कर रहा है। कोरोना संकट के समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से नेत़ृत्व किया है और दूसरे देशों के साथ ही प्रवासी मजदूरों की मदद की है, उसकी प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है। इसी तरह श्रमिकों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण भी काफी व्यापक है।

2016 में यूपी के बलिया में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने 21वीं सदी की आवश्यकताओं के संदर्भ में विश्व के श्रमिकों से दुनिया को जोड़ने की अपील की। खुद परिश्रम की पराकाष्ठा करने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने को देश का मजदूर नंबर वन बताते हुए ‘लेबर्स यूनाइट द वर्ल्ड’ का नारा दिया।

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज पहली मई है। पूरे विश्व में आज मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। देश का ये ‘मजदूर नम्बर वन’ सभी श्रमिकों को, उनके पुरुषार्थ को, उनके परिश्रम को और राष्ट्र को आगे बढ़ाने में उनके अनवरत योगदान को कोटि-कोटि अभिनंदन करता है तथा उस महान परम्परा को प्रणाम करता है।“

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “21वीं सदी की आवश्यकताएं और स्थितियां अलग-अलग हैं लेकिन मंत्र एक हो सकता है… ‘विश्व के श्रमिकों, आओ हम दुनिया को एक करें, दुनिया को जोड़ दें’। 21वीं सदी का यही मंत्र होना चाहिए।”

श्रमिकों को लेकर दुनिया में प्रचलित एक नारे का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के मजदूर एक हो जाओ और वर्ग संघर्ष के लिए मजदूरों को एक करने के आह्वान हुआ करते थे। जो लोग इस विचार को लेकर के चले थे, आज दुनिया के राजनीतिक नक्शे पर धीरे-धीरे करके वो अपनी जगह खोते चले जा रहे हैं। 21वीं सदी में दुनिया के मजदूर एक हो,  इतनी बात से चलने वाला नहीं है। 21वीं सदी की आवश्यकताएं अलग हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने 21वीं सदी की आवश्यकताओें के संदर्भ में मजदूरों के श्रम कानूनों और श्रमिकों की सरकार के साथ संबंधों में एक आमूलचूल परिवर्तन लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस देश में तीस लाख से ज्यादा श्रमिक ऐसे थे, जिनमें से किसी को 15 रुपये, किसी को 100 रुपये, किसी को 50 रुपये महीने पेंशन मिलते थे। जो आज की आवश्यकता को देखते हुए काफी कम है। लेकिन हमने आकर इन तीस लाख से ज्यादा श्रमिकों को न्यूनतम 1000 रुपये पेंशन देने का निर्णय कर लिया और लागू कर दिया। अब उन गरीब श्रमिकों वो पेंशन मिलने लगा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हित में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर बल दिया। कार्यस्थलों में कामकाज की बेहतर स्थितियां सुनिश्चित कीं, ताकि देश का स्वस्थ कार्यबल ज्यादा उत्पादक हो सके। प्रधानमंत्री मोदी ‘श्रमेव जयते’ अभियान की शुरुआत की। इसके तहत श्रमिकों की सुविधा के लिए कई पहल की, जिसका लाभ आज श्रमिकों को मिल रहा है। इससे उनके जीवन में खुशहालियां आई हैं।  

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