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अब बुके नहीं, बुक या फूल स्वीकार करेंगे पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बुके की बजाय बुक’ देने की अपनी अपील पर खुद अमल करना शुरू कर दिया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से प्रधानमंत्री की इस इच्छा के अनुरूप ही उनका स्वागत करने के लिए अनुरोध किया है। गृह मंत्रलाय ने 12 जुलाई को सभी राज्य सरकारों को एक पत्र लिखा है और अनुरोध किया है कि प्रधानमंत्री की इच्छा के अनुरूप ही उनका स्वागत किया जाए। गृह मंत्रालय ने यह पत्र सभी राज्य सरकारों के मुख्य सचिव और संघशासित क्षेत्र के प्रशासकों को लिखा है और इसका पालन सुनिश्चित कराने को कहा है।

गृह मंत्रालय ने पत्र में कहा है कि देश के किसी भी राज्य के दौरे पर प्रधानमंत्री के स्वागत में राज्य सरकार के प्रतिनिधि उन्हें गुलदस्ता (बुके) भेंट स्वरूप न दें। अच्छा तो यही होगा कि प्रधानमंत्री को गुलदस्ते के बजाय महज एक फूल ही दिया जाए। इतना ही नहीं मंत्रालय ने राज्य सरकारों से यह भी कहा है कि स्वागत के दौरान पीएम मोदी को फूल के साथ खादी का एक रुमाल या कोई एक पुस्तक भी अगर भेंट स्वरूप दी जाती है, तो इसमें कोई हर्ज नहीं होगा। प्रधानमंत्री की 19 जून को केरल में की गई अपील के बावजूद उन्हें गुलदस्ता देने की परंपरा बंद न होने के कारण गृह मंत्रालय को राज्यों को यह पत्र लिखना पड़ा है।

प्रधानमंत्री की इच्छा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल 19 जून को केरल में ‘पी. एन. पनिक्कर नेशनल रीडिंग डे’ समारोह के दौरान लोगों से तोहफे में ‘बुके की बजाय बुक’ देने का नया शिष्टाचार शुरू करने की अपील की थी। कोच्चि में हर साल एक महीने तक चलने वाले इस आयोजन में उन्होंने कहा था कि पढ़ने से बेहतर कोई दूसरा आनंददायक काम नहीं है और पढ़ने से मिले ज्ञान से बढ़कर दूसरी कोई शक्ति नहीं है।

अब प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी 19 जून की अपील पर स्वयं अमल करना शुरू कर दिया है। अब प्रधानमंत्री मोदी जिस किसी भी राज्य के दौरे पर जाएंगे वहां अपने स्वागत में कीमती फूलों के गुलदस्ते या अन्य उपहार लेने की जगह पुस्तक या खादी के रुमाल में लिपटा हुआ एक फूल लेना पसंद करेंगे।

गुलदस्ते के फूलों की कोमलता, रंग और महक से प्रसन्नता एवं सकारात्मकता का माहौल ही नहीं बनता, बल्कि किसी के प्रति सम्मान भी व्यक्त होता है। लेकिन गुलदस्ते के फूलों की एक समय-सीमा होती है। अगर, जीवन में प्रसन्नता और सकारात्मकता के प्रभाव को लंबे समय तक बनाए रखना है, तो पुस्तकें ही इसे संभव कर सकती हैं। गुलदस्ते की जगह पुस्तकों का वही व्यक्ति चुनाव कर सकता है, जो जीवन में स्थायी रूप से प्रसन्नता और सकारात्मकता को बनाए रखना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी हैं, जो ऐसे ही उपायों को अपनाते हैं और लोगों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

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