Home समाचार उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के प्रत्याशी बने वेंकैया नायडू

उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के प्रत्याशी बने वेंकैया नायडू

पीएम मोदी ने उत्तर और दक्षिण भारत में बैठाया तालमेल

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केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू एनडीए की तरफ से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे। बीजेपी संसदीय बोर्ड की सोमवार शाम को हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नायडू के नाम पर मुहर लगाई गई। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में श्री नायडू की उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए कहा कि एनडीए के सभी दलों को विश्‍वास में लेने के बाद यह फैसला किया गया।

‘जय आंध्र आंदोलन’ से सुर्खियों में आए वेंकैया
वेंकैया का जन्म 1947 में आंध्र प्रदेश में हुआ था। वेंकैया का नाम सबसे पहले 1972 के जय आंध्र आंदोलन से सुर्खियों में आया। वेंकैया ने नेल्लोर के आंदोलन में हिस्सा लेते हुए विजयवाड़ा के आंदोलन का नेतृत्व किया। 1974 में वे आंध्र विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए और सही मायने में इसी के साथ उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई। इसके बाद वह आपातकाल के दौरान जेपी आंदोलन से जुड़े। आपातकाल के बाद ही उनका जुड़ाव जनता पार्टी से हो गया। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। 2002 से 2004 तक उन्हें भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। वेंकैया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वायजेपी के करीबी थे, जिस वजह से उन्हें वाजपेयी सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री का दायित्व सौंपा गया।

पीएम मोदी और पार्टी के भरोसेमंद हैं वेंकैया
वेंकैया नायडू शुरु से ही पार्टी के भरोसेमंद रहे हैं। उन्हें 1980 में बीजेपी यूथ विंग और आंध्र प्रदेश विधानसभा का नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। शुरुआती दौर में वे आंध्र बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी के बाद पार्टी ने उनका कद बढ़ाते हुए 1988 में उन्हें आंध्र बीजेपी का अध्यक्ष बना दिया। आंध्र प्रदेश अध्यक्ष बनने के कुछ ही सालों बाद दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में उनको जगह मिल गई। 1993 से 2000 तक वेंकैया बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रहे। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए 2002 में उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कमान सौंप दी गई। उसके बाद चाहे अटल बिहारी वाजपेयी हों या आडवाणी या फिर पीएम मोदी, वेंकैया सभी की पसंद रहे हैं। केंद्र सरकार वेंकैया नायडू को कई संसदीय समितियों का सदस्य भी बना चुकी है।

राज्यसभा में अनुभव से आसान हुई राह
वेंकैया नायडू 1998 से लगातार राज्यसभा के सदस्य हैं। मौजूदा समय में वे राजस्थान से राज्यसभा के सदस्य हैं। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हैं और सदन की कार्रवाई में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में वेंकैया का अनुभव सरकार के काम आएगा। सरकार के इस फैसले से लगता है कि उत्तर भारत और दक्षिण भारत में संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। दरअसल राष्ट्रपति पद के लिए उत्तर प्रदेश से रामनाथ कोविंद एनडीए के प्रत्याशी हैं, वहीं नायडू की उम्मीदवारी दक्षिण भारत को शीर्ष पदों पर प्रतिनिधित्व देने का एक प्रयास है।

बहरहाल राष्‍ट्रपति चुनाव की तरह ही बीजेपी के उपराष्‍ट्रपति उम्‍मीदवार के चुने जाने की पूरी संभावना है। वेंकैया नायडू को दक्षिण भारत की कई पार्टियों का समर्थन मिल सकता है और इन पार्टियों के समर्थन से वेंकैया के जीतने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

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