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इकोनॉमी, इकोलॉजी और क्लाइमेट सस्टेनेबल लाइफस्टाइल के बीच बेहतर संतुलन बनाने की जरूरत- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 अक्तूबर को वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 16वें पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन (East Asia Summit) में भाग लिया। सम्मेलन में इकोनॉमी, इकोलॉजी, आतंकवाद के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने में ईस्ट एशिया समिट के महत्‍व को दोहराते हुए कहा कि संगठन अहम रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए देशों को करीब लाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने सातवीं बार पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन में शिरकत की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वैक्सीन और चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति के जरिए कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने में भारत के प्रयासों को जिक्र किया। उन्होंने महामारी के बाद दोबारा अपने पांव पर खड़े होने में सहायक “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में उत्पादकता बढ़ाने और उसे साझा करने में लचीलेपन को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इकोनॉमी, इकोलॉजी और क्लाइमेट सस्टेनेबल लाइफस्टाइल के बीच बेहतर संतुलन बनाने की जरूरत है।

16वें ईएएस शिखर सम्मेलन में हिन्द-प्रशांत, दक्षिण चीन सागर, यूनाइटेड नेशंस कंवेन्शन ऑन द लॉ ऑफ द सी, आतंकवाद तथा कोरिया प्रायद्वीप और म्यांमार के विषय पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने हिन्द-प्रशांत में “आसियान सेंट्रेलिटी” पर बल दिया और आसियान आउटलुक ऑन इंडो-पैसेफिक और इंडो-पैसेफिक ओशंस इनीशियेटिव में भारत की सक्रियता का जिक्र किया।

शिखर सम्मेलन के राष्ट्राध्यक्षों ने मानसिक स्वास्थ्य, पर्यटन के माध्यम से अर्थव्यवस्था की बहाली और सतत बहाली पर तीन घोषणाएं अपनाईं, जिन्हें भारत ने सह-प्रायोजित किया था। कुल मिलाकर यह शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री और अन्य ईएएस राष्ट्राध्यक्षों के बीच दृष्टिकोणों के आदान-प्रदान में बहुत सफल रहा। ब्रूनेई ने ईस्ट एशिया समिट और आसियान के अध्यक्ष होने की हैसियत से इस 16वें पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। सम्मेलन में आसियान देशों और अन्य ईएएस देशों सहित ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस, अमेरिका और भारत ने भागीदारी की।

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