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VAIBHAV सम्मेलन के उद्घाटन में पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों का किया आह्वान- आत्मनिर्भर भारत के लिए चाहिए आपका समर्थन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक शिखर सम्मेलन (VAIBHAV) का उद्घाटन किया। वैभव एक ऐसा मंच है, जो विदेशी और भारतीय शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों (NRI Researchers Educationalist) को एक साथ जोड़ता है। यह सम्मलेन 2 से 31 अक्टूबर, 2020 तक आयोजित किया जा रहा है।

इस सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के आह्वान में वैश्विक कल्याण की स्पष्ट दृष्टि शामिल है। इस सपने को साकार करने के लिए, मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूं और आपका समर्थन चाहता हूं। हाल ही में भारत ने अग्रणी अंतरिक्ष सुधारों की शुरुआत की। ये सुधार उद्योग और शिक्षा दोनों के लिए अवसर प्रदान करते हैं। पिछली शताब्दी में विज्ञान की मदद से प्रमुख ऐतिहासिक सवालों को हल किया गया है। वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग अब तिथियों के निर्धारण और अनुसंधान में मदद करने में किया जाता है। हमें भारतीय विज्ञान के समृद्ध इतिहास को भी बढ़ाना होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवा विज्ञान में रुचि बढाएं। उसके लिए हमें विज्ञान का इतिहास और इतिहास का विज्ञान अच्छी तरह से पता होना चाहिए। हम अपने किसानों की मदद के लिए टॉप क्लास साइंटिफिक रिसर्च चाहते हैं। हमारे कृषि अनुसंधान वैज्ञानिकों ने दालों के हमारे उत्पादन को बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत की है। आज हम अपनी दाल का बहुत ही कम हिस्सा आयात करते हैं। हमारे खाद्यान्न उत्पादन ने एक उच्च रिकॉर्ड किया है।

उन्होंने कहा कि 2014 में, हमारे टीकाकरण कार्यक्रम में चार नए वैक्सीन शामिल किए गए। इसमें स्वदेशी रूप से विकसित रोटावायरस वैक्सीन शामिल था। हम स्वदेशी वैक्सीन उत्पादन को प्रोत्साहित करते हैं। वैभव शिखर सम्मेलन भारत और दुनिया से विज्ञान और नवाचार का जश्न मनाता है। मैं इसे सच्चा ‘संगम’ कहूंगा या महान दिमागों का संगम। 

55 देशों के वैज्ञानिकों और शिक्षाविद ले रहे हिस्सा

भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के नेतृत्व में लगभग 200 शैक्षणिक संस्थान और S&T विभाग के जरिए इस शिखर सम्मलेन का आयोजन किया जा रहा है। इस शिखर सम्मलेन में 55 देशों के 3,000 से ज्यादा भारतीय मूल के शिक्षाविद और वैज्ञानिक और 10,000 से ज्यादा प्रवासी शिक्षाविद और वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं।

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