उत्तर प्रदेश की धरती पर जब माफिया राज और अपराधियों के हौसले बुलंद थे, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘बुलडोजर’ को न्याय और कानून-व्यवस्था के एक ऐसे अचूक हथियार के रूप में बदला, जिसने अपराधियों के मन में खौफ पैदा कर दिया। इसी कड़े और आक्रामक रुख के कारण योगी आदित्यनाथ देश भर में ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से मशहूर हो गए। आज अपराधियों की रीढ़ तोड़ने और अवैध संपत्तियों को मिट्टी में मिलाने की यह प्रशासनिक नीति उत्तर भारत से निकलकर सुदूर पूर्वोत्तर के राज्य असम में अपनी धमक जमा चुकी है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर चलते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अब एक ऐसे ‘सिंघम अवतार’ में अवतरित हुए हैं, जिसने अपराध और अपराधियों के पूरे तंत्र को हिलाकर रख दिया है। हाल ही में असम के नलबाड़ी जिले में जब मुख्यमंत्री सरमा ने खुद स्टेयरिंग थामकर एक भारी-भरकम रोड रोलर चलाया। सीएम बिस्वा ने 472 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थों (ड्रग्स) के विशाल जखीरे को ही नहीं कुचला, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अब अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ केवल कागजी नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो गया है, जहां जनता मुख्यमंत्री के इस निर्भीक रूप को देखकर उनकी जमकर प्रशंसा कर रही है।
असम का नशा विरोधी मॉडल देश के लिए नई मिसाल
असम के नलबाड़ी जिले में राज्य स्तरीय ड्रग्स डिस्पोजल कार्यक्रम का वह दृश्य केवल एक सरकारी आयोजन नहीं था, बल्कि शासन की सख्त राजनीतिक और प्रशासनिक शैली का प्रतीक भी बन गया। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा स्वयं रोड रोलर चलाकर जब्त किए गए मादक पदार्थों को नष्ट करते दिखाई दिए। कुछ ही घंटों में यह वीडियो देशभर में वायरल हो गया। समर्थकों ने इसे अपराध और नशे के कारोबार के विरुद्ध सरकार के कठोर संदेश के रूप में देखा। दरअसल, यह तथ्य निर्विवाद है कि असम सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में नशे के खिलाफ लगातार बड़े स्तर पर अभियान चलाया है और इस विषय को कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा के सवाल के रूप में प्रस्तुत किया है।
#WATCH | Nalbari: Assam Chief Minister Dr Himanta Biswa Sarma drove a roll roller as he attended the state level drugs disposal programme at 14th Assam Police Battalion, Daulasal in Nalbari district today.
Seized drugs worth over Rs 472 crore will be destroyed today. pic.twitter.com/kNCZthAmTl
— ANI (@ANI) July 12, 2026

आइए, अब जानते हैं कि असम की सरकार ने पिछले कुछ सालों में क्या एक्शन लिए, जिसके चलते सीएम हिमंता का नाम सुर्खियों में है…
एक्शन नंबर-1: ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति से नशे के खिलाफ प्रहार
असम सरकार ने सीएम सरमा के सत्ता संभालने के बाद नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार सार्वजनिक मंचों से यह संदेश देते आ रहे हैं कि नशा केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज और युवाओं के भविष्य का प्रश्न है। नलबाड़ी में उन्होंने खुद रोड रोलर चलाकर 472.51 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थों को नष्ट किया। इनमें लगभग 60 किलोग्राम हेरोइन, 39 किलोग्राम मॉर्फिन, लगभग 4.97 लाख प्रतिबंधित टैबलेट, 3.2 किलोग्राम अफीम तथा बड़ी मात्रा में पोस्त शामिल था। इतनी बड़ी मात्रा में जब्त ड्रग्स को वैज्ञानिक प्रक्रिया से नष्ट करने में कई दिन लगने की बात भी उन्होंने कही। इस आयोजन ने सरकार के अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया।
₹472 करोड़ के ड्रग्स का अंतिम संस्कार 🔥
Taking our fight against drugs to the next level, today we have destroyed ₹472cr of drugs, which could have destroyed precious lives.
We are relentless in our pursuit against drugs and have adopted a ZERO TOLERANCE policy towards it. pic.twitter.com/Dq3mlxRsh9
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 12, 2026
एक्शन नंबर-2: गोवंश तस्करी के सिंडिकेट का खात्मा
असम में दशकों से चल रहे अंतरराष्ट्रीय गोवंश तस्करी के काले साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विधायी और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर आक्रामक प्रहार किए हैं। ‘असम मवेशी संरक्षण कानून’ को लागू कर सरमा सरकार ने मवेशियों के अवैध परिवहन, वध और सीमाओं के पार होने वाली तस्करी पर पूरी तरह से नकेल कस दी। इस कानून के तहत मंदिर परिसरों और सत्रों के पांच किलोमीटर के दायरे में गोमांस की बिक्री और वध को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया। असम पुलिस ने बांग्लादेश सीमा से जुड़े धुबरी और कछार जैसे संवेदनशील जिलों में तस्करों के खिलाफ आधी रात को अभियान चलाकर हजारों गायों को मुक्त कराया और इस धंधे में शामिल बड़े-बड़े सिंडिकेट सरगनाओं को जेल भेजा या मुठभेड़ों में ढेर कर दिया। गोवंश की रक्षा को अपनी सरकार का सर्वोपरि कर्तव्य मानकर सीएम सरमा ने तस्करों को यह कड़ा संदेश दिया कि असम के रास्ते सनातन आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
एक्शन नंबर-3: सीमावर्ती राज्य की चुनौती और सुरक्षा का नया दृष्टिकोण
असम की भौगोलिक स्थिति इसे सामान्य राज्यों से अलग बनाती है। म्यांमार, बांग्लादेश और पूर्वोत्तर के कई राज्यों से जुड़ी सीमाएं तस्करी के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां पैदा करती हैं। सरकार का दावा है कि सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, खुफिया तंत्र को मजबूत करने तथा अंतरराज्यीय समन्वय से नशे की बड़ी खेपों को पकड़ा गया है। ड्रोन निगरानी, तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय पुलिस की सक्रियता पर भी जोर दिया गया। यह रणनीति केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि मादक पदार्थों की तस्करी का संबंध कई बार अवैध हथियारों और संगठित अपराध से भी होता है।
एक्शन नंबर-4: अपराधियों के विरुद्ध ‘दृश्य संदेश’ की राजनीति
मुख्यमंत्री का स्वयं रोड रोलर चलाकर ड्रग्स नष्ट करना प्रशासनिक कार्रवाई जितना ही एक राजनीतिक संदेश भी रहा। उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई ने जिस प्रकार एक प्रतीकात्मक पहचान बनाई, उसी तरह असम में यह दृश्य कठोर शासन की छवि के रूप में प्रस्तुत हो गया। यह साफ संकेत गया कि असम सरकार नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपना रही है और इसमें किसी को बख्शा नहीं जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधियों और तस्करों तक यह संदेश पहुंचना जरूरी भी है कि सरकार केवल कागजी कार्रवाई नहीं करेगी, बल्कि ऐसी प्रतीकात्मक कार्रवाइयों के साथ न्यायिक प्रक्रिया, दोषसिद्धि दर, पुनर्वास नीति और संस्थागत सुधार के कदम भी उठाएगा। किसी भी अभियान की स्थायी सफलता प्रतीकों के साथ-साथ मजबूत संस्थागत ढांचे से सुनिश्चित होती है।
That’s Awesome! The CM is himself crushing all those Drugs & destroying them!
— Nandan 🇮🇳 (@questionsaglore) July 12, 2026
एक्शन नंबर-5: केवल नशा नहीं, संगठित अपराध पर भी कार्रवाई
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने नशे के साथ-साथ अवैध घुसपैठ, भूमि माफिया, वन अतिक्रमण और संगठित अपराध के विरुद्ध भी अनेक अभियान चलाए हैं। कई जिलों में अवैध कब्जों को हटाने, तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई तथा अपराधियों की संपत्तियों की जांच जैसे कदमों ने सरकार की ‘कठोर प्रशासन’ वाली छवि को मजबूत किया। हालांकि इन अभियानों को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुए और विपक्ष ने अनर्गल आरोप लगाने की कोशिश दोहराई, लेकिन असम सरकार अपने ठोस इरादों से तस से मस भी नहीं हुई। सरकार का तर्क रहा कि कानून का शासन स्थापित करने के लिए कठोर निर्णय आवश्यक हैं।
एक्शन नंबर-6: प्रशासनिक छवि के साथ सांस्कृतिक विरासत का विकास
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रशासनिक अभियानों के समानांतर असम की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी अपनी राजनीति का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। कामाख्या धाम के विकास, विभिन्न मंदिरों के संरक्षण, स्थानीय परंपराओं के संवर्धन तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें एक ऐसे नेता की छवि दी है जो विकास और सांस्कृतिक पहचान दोनों को साथ लेकर चलने का प्रयास करता है। समर्थक इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण मानते हैं, जबकि विपक्षी इसे राजनीतिक रणनीति बताते हैं। लेकिन इसमें संदेह नहीं कि इस छवि ने राज्य की राजनीति में उन्हें अलग पहचान दी है।
एक्शन नंबर-7: युवाओं का पुनर्वास, न्यायिक प्रक्रिया में गति और सामाजिक जागरूकता
असम का अनुभव यह संकेत देता है कि यदि प्रदेश का मुखिया यानि राजनीतिक नेतृत्व स्वयं कानून-व्यवस्था के प्रश्नों को प्राथमिकता देता है तो प्रशासनिक मशीनरी अधिक सक्रिय दिखाई देती है। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर नशे की उपलब्धता में वास्तविक कमी, युवाओं के पुनर्वास, सीमावर्ती सुरक्षा, न्यायिक प्रक्रिया की गति और सामाजिक जागरूकता के प्रयास स्वत: ही तेज हो जाते हैं। यह स्वीकार करना ही होगा कि नशे के खिलाफ सार्वजनिक स्तर पर इतनी बड़ी और प्रतीकात्मक कार्रवाई ने राष्ट्रीय विमर्श में असम को सुर्खियों में ला दिया है।
एक्शन नंबर-8: ‘गोल्डन ट्रायंगल’ में मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम
पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी के मार्ग का संवेदनशील हिस्सा रहा है। म्यांमार की सीमा से लगने वाले क्षेत्रों के कारण यह इलाका तथाकथित ‘गोल्डन ट्रायंगल’ से आने वाले नशीले पदार्थों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग माना जाता है। ऐसे में असम में मुख्यमंत्री के रूप में काम संभालने के बाद से ही हिमंता बिस्वा सरमा ने केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय पूरे नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति अपनाने पर फोकस किया। करोड़ों रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थों का सार्वजनिक रूप से विनाश इसी व्यापक अभियान का नवीनतम और सबसे चर्चित अध्याय बन गया।
एक्शन नंबर-9: 3300 केस में 3227 करोड़ की जब्ती का रिकॉर्ड
असम सरकार द्वारा नशे के खिलाफ छेड़ी गई यह जंग किसी एक दिन की प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित और अनवरत चलने वाला महा-अभियान है। आंकड़ों की जुबानी कहें तो असम पुलिस ने पिछले पांच वर्षों में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) कानून के तहत 3300 से अधिक कठोर मामले दर्ज किए हैं। इन ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के दौरान असम की सुरक्षा एजेंसियों ने अपराधियों के चंगुल से कुल 3227 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि के नशीले पदार्थ जब्त किए हैं।
Over the last 5 years, we have seized over ₹3,000cr of drugs, arrested over 26,000 involved and charged them under NDPS to build a strong deterrence.
Now we are going a step ahead; with the Union Govt’s support, we are tracking down the entire chain in the Inter-State nexus. pic.twitter.com/bKiBQLul87
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 12, 2026
एक्शन नंबर-10: ‘लैंड जिहाद’ और अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर
माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ हिमंता बिस्वा सरमा का यह कठोर रवैया केवल नशीले पदार्थों के सफाए तक ही सीमित नहीं है। असम में भूमि माफियाओं और सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले घुसपैठियों के खिलाफ भी सरकार का चाबुक उतनी ही तेजी से चला है। राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के आस-पास के क्षेत्रों और ऐतिहासिक सत्रों (वैष्णव मठों) की पवित्र भूमि पर दशकों से जमे अवैध कब्जाधारियों को हटाने के लिए सरमा सरकार ने बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया। अपराधियों द्वारा कब्जाई गई सैकड़ों एकड़ सरकारी और धार्मिक भूमि को खाली कराने के लिए जब असम पुलिस और प्रशासन के बुलडोजर चले, तो उसने सीधे तौर पर अपराधियों के आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त कर दिया। अपराधियों को पनाह देने वाले राजनीतिक और सामाजिक संरक्षण को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि असम की अस्मिता, संस्कृति और संसाधनों पर पहला अधिकार यहां के मूल निवासियों का है।
Since Modi’s arrival, Congress has been reduced to just taking a breath by securing minority votes..@himantabiswa @cmpatowary #Congress_Free_Assam pic.twitter.com/GyDxQaWSeg
— CM Himanta Biswa Parody (@cmhimantabiswa) April 27, 2025









