भारत ने विश्व के सबसे शक्तिशाली मंच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का सदस्य बनने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। दरअसल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 13 जुलाई, 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता हासिल करने के अभियान की औपचारिक शुरुआत की। भारत एशिया-प्रशांत समूह की एक सीट के लिए चुनाव मैदान में है, जहां उसका मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा। इस मौके पर जयशंकर ने कहा कि अगर भारत सुरक्षा परिषद का सदस्य चुना जाता है तो उसकी छह प्राथमिकताएं होंंगी और भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बनेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि UNSC में भारत की रणनीति SHANTI (सिक्योरिंग होलिस्टिक एडवांसमेंट थ्रू नॉर्म्स, ट्रस्ट एंड इंटीग्रिटी) के सिद्धांतों पर होगी।
Pleased to launch India’s campaign for the @UN Security Council 2028-29.
Underlined 🇮🇳’s approach rooted in SHANTI – Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity.
We will prioritise :
➡️ Strengthening the Voice of Global South, and factoring its concerns… pic.twitter.com/pGOHJho5fC
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 13, 2026
भारत की सुरक्षा परिषद में होंगी 6 प्राथमिकताएं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में कैम्पेन लॉन्च करते हुए कहा कि भारत की 6 प्राथमिकताएं सुरक्षा परिषद में होंगी: 1. ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूत करना, 2. बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार, 3. शांति स्थापना अभियानों को आधुनिक बनाना, 4. सुरक्षित और जिम्मेदार AI को बढ़ावा देना, 5. समुद्री सुरक्षा और निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करना, 6. आतंकवाद के वित्तपोषण पर सख्त कार्रवाई। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बना हुआ है। इसके फाइनेंशियल नेटवर्क को खत्म करने पर ज़्यादा इंटरनेशनल फोकस करने की अपील की। जयशंकर ने कहा कि भारत टेरर फाइनेंसिंग का मुकाबला करने के लिए कमिटेड है और टेररिस्ट ग्रुप्स की लिस्टिंग के लिए ऑब्जेक्टिव और सबूत-आधारित प्रस्तावों को बढ़ावा देगा।
India formally launches its campaign for United Nations Security Council 2028-2029. pic.twitter.com/RUnu1akAYe
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 13, 2026
भारत ने UNSC रिफॉर्म पर दिया जोर
न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में उम्मीदवारी पेश करते हुए जयशंकर ने कहा, “आज दोपहर आपके साथ मिलकर 2028-29 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर भारत की उम्मीदवारी पेश करना खुशी की बात है। हम यह कदम ऐसे समय में उठा रहे हैं जब दुनिया एक गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है।” उन्होंने आगे कहा, “साथ ही, हम टकराव, हिंसा और अस्थिरता का ऐसा स्तर देख रहे हैं जो उन लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है जो शायद बहुत दूर हैं।” जयशंकर ने कहा कि भारत रिफॉर्म को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेगा। विदेश मंत्री ने कहा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की जरूरत है। भारत का दृष्टिकोण संवाद, सहयोग और मतभेदों को दूर करने पर आधारित रहेगा।
Speaking at the launch of India’s campaign for the @UN Security Council 2028-29.#SHANTI
🇮🇳 🇺🇳 https://t.co/u9ub8cTom9
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 13, 2026
भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुख्य मुकाबला
वर्ष 2028-29 में एशिया-प्रशांत ग्रुप के खाते में सिर्फ एक सीट है, जिसके लिए भारत और ताजिकिस्तान आमने-सामने हैं। ताजिकिस्तान को 57 इस्लामिक देशों के संगठन ‘ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन’ (OIC) का समर्थन प्राप्त है। OIC का समर्थन मिलने के बाद ताजिकिस्तान एक बेहद मजबूत दावेदार बन गया है। इसके कारण भारत ने इस सीट के लिए अपना कूटनीतिक अभियान शुरू कर दिया है। भारत को ज्यादातर यूरोपीय देश, अपने पड़ोसी देशों, कैरिबियाई और द्वीपीय देशों, दक्षिण अमेरिकी देशों, खाड़ी देशों और कई अफ्रीकी देशों का समर्थन मिलने की भी उम्मीद है।

जून 2027 में होगा चुनाव, भारत का पलड़ा भारी
इस अस्थायी सीट के लिए जून 2027 में चुनाव आयोजित किए जाएंगे। इस चुनाव में जीत के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के दो-तिहाई यानी कम से कम 128-129 वोटों की जरूरत होगी। वोटिंग संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में होता है। यह सीक्रेट बैलेट (गुप्त मतदान) के जरिए होता है। जीत के लिए कुल मौजूद सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत चाहिए होता है। UN में 193 सदस्य हैं, यानी जीतने के लिए कम से कम 128-129 वोटों की आवश्यकता होती है। भारत को पिछले सभी चुनावों में लगातार भारी समर्थन मिला है। भारत ने जब 2011–12 के कार्यकाल के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी उस वक्त 190 में से 187 वोट और 2021–22 के कार्यकाल के लिए 193 में से 184 वोट मिले थे। भारत के पास 8 बार यूएनएससी की अस्थाई सदस्यता रही है इस लिहाज से अनुभव के मामले में ताजिकिस्तान पर बढ़त हासिल है जबकि ताजिकिस्तान पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहा है।

भारत 8 बार बन चुका है UNSC का अस्थाई सदस्य
UNSC की अस्थायी सदस्यता हासिल करने के मामले में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। भारत को इससे पहले आठ बार दो-दो साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चुना गया है। 1950–51, 1967–68, 1972–73, 1977–78, 1984–85, 1991–92, 2011–12 और 2021–22 में भारत यूएनएससी का अस्थाई सदस्य रह चुका है। इस तरह भारत ने अस्थायी सदस्य के तौर पर कुल 16 साल काम किया है।

UNSC में मौजूदगी से भारत का बढ़ेगा दबदबा
सुरक्षा परिषद में मौजूदगी से किसी भी देश की यूएन प्रणाली में दखल और दबदबे का दायरा बढ़ जाता है। ऐसे में 5 साल बाद भारत की सुरक्षा परिषद में दो साल के लिए पहुंचना खासा अहम होगा। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस के लिए भी भारत को साधना अहम होगा। यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट और ईरान पर चल रहे तनाव के बीच भारत गुटबाजी से दूर रहा है। साथ ही भारत ने डायलॉग और डिप्लोमेसी का रास्ता सुझाया है। दुनिया में जब भी युद्ध होते हैं, तो गरीब देशों में तेल, खाने और फर्टिलाइजर का संकट आ जाता है। भारत ऐसे देशों की आवाज उठाता है। अब भारत को पाकिस्तान के झूठे प्रोपेगेंडा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर काउंटर करना आसान होगा।

कैसे काम करता है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य हैं। ये हैं- अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन। 10 देशों को अस्थाई सदस्यता दी गई है। हर साल पांच अस्थायी सदस्य चुने जाते हैं। अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल दो साल होता है। पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर होता है। यह किसी भी प्रस्ताव को रोकने की शक्ति देता है। अगर 14 सदस्य किसी प्रस्ताव के पक्ष में हों, लेकिन 5 स्थायी देशों में से कोई एक वीटो कर दे, तो प्रस्ताव रद्द हो जाता है। दुनिया के बड़े फैसले जैसे- किसी देश पर प्रतिबंध लगाना, शांति सेना भेजना या अंतरराष्ट्रीय सैन्य कार्रवाई की मंजूरी देना UNSC के प्रस्ताव से ही पास होते हैं। फैसले के लिए 9 वोट चाहिए होते हैं (जिसमें वीटो का इस्तेमाल न हुआ हो)। अस्थायी सदस्य अध्यक्षता करते हैं और प्रस्ताव ला सकते हैं, लेकिन वो वीटो का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास विटो की शक्ति नहीं होती है।









