Home PI Special पीएम नरेन्द्र मोदी की महायात्रा की टॉप-15 उपलब्धियों से दुनिया हैरान

पीएम नरेन्द्र मोदी की महायात्रा की टॉप-15 उपलब्धियों से दुनिया हैरान

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की महायात्रा भारतीय विदेश नीति के इतिहास में एक युगांतकारी मील का पत्थर साबित हुई है। इस त्रिकोणीय दौरे ने न केवल भारत की ‘ऐक्ट ईस्ट’ नीति को नई ऊर्जा दी है, बल्कि वैश्विक मंच पर देश को एक अपरिहार्य शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है। इंडोनेशिया में ऑपरेशन सिंदूर की नायक ब्रह्मोस मिसाइल का ऐतिहासिक सौदा, ऑस्ट्रेलिया से बहुप्रतीक्षित यूरेनियम आपूर्ति और न्यूजीलैंड के साथ रिकॉर्ड समय में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) तथा $20 बिलियन डॉलर का निवेश संकल्प, ये केवल द्विपक्षीय उपलब्धियां नहीं हैं। यह पीएम मोदी की उस कूटनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है, जिसने आर्थिक, रणनीतिक और रक्षा मोर्चों पर देश के हितों को सर्वोपरि रखा है। तीन महत्वपूर्ण देशों की इस शृंखला ने दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर चीन और अमेरिका तक में भारत की मजबूती और भरोसेमंद रणनीतिक छाप छोड़ी है। यह दौरा एक ऐसे नाजुक भू-राजनीतिक मोड़ पर हुआ है, जब पूरी दुनिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन और सप्लाई चेन की सुदृढ़ता को लेकर चिंतित है। इन तीनों देशों के साथ हुए समझौतों ने बीजिंग की विस्तारवादी नीतियों और रणनीतिक आक्रामकता को कड़ा संदेश दिया है। इंडोनेशिया द्वारा भारत के रक्षा तंत्र पर भरोसा जताना, ऑस्ट्रेलिया का भारत के असैन्य परमाणु कार्यक्रम में दीर्घकालिक साझेदार बनना और न्यूजीलैंड का भारतीय बाजार के लिए अपने द्वार खोलना यह दर्शाता है कि दुनिया अब भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि एक सुरक्षा प्रदाता और आर्थिक इंजन के रूप में देखती है।

आइए, जानते हैं कि तीन देशों की छह दिन की इस ऐतिहासिक यात्रा में पीएम मोदी ने किन अहम कदमों से भारत का दुनियाभर में मान बढ़ाया है….

अहम कदम-1: ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल का ऐतिहासिक सौदा
प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने लगभग $630 मिलियन (₹5,400 करोड़) के बहुस्तरीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत इंडोनेशिया भारत से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ खरीदेगा। इसके साथ ही, इंडोनेशिया भारत की स्वदेशी हवा-से-हवा में मार करने वाली ‘अस्त्र’ (Astra BVR) मिसाइल का पहला वैश्विक खरीदार बन गया है। यह सौदा इंडोनेशिया के साथ-साथ भारतीय रक्षा उद्योग की तकनीकी श्रेष्ठता पर वैश्विक मोहर है।

अहम कदम-2: यूरेनियम महाडील और परमाणु ऊर्जा का मार्ग प्रशस्त
आपको शायद याद हो कि देश में मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से साफ इनकार कर दिया था। आज मोदी सरकार में खुद ऑस्ट्रेलिया ने इस दिशा में कदम आगे किए हैं। 2010 तब से लेकर वर्ष 2026 तक की कूटनीतिक यात्रा भारत की बहुत बड़ी सफलता है। मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों ने असैन्य परमाणु सहयोग समझौते के तहत यूरेनियम निर्यात की सभी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया। दुनिया के कुल यूरेनियम भंडार का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा अकेले ऑस्ट्रेलिया के पास है। इस समझौते के बाद अब ऑस्ट्रेलियाई निजी कंपनियां सीधे भारतीय परमाणु रिएक्टरों के लिए यूरेनियम की आपूर्ति कर सकेंगी।

अहम कदम-3: क्लीन एनर्जी और क्रिटिकल मिनरल्स पार्टनरशिप
पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ बैठक में स्वच्छ ऊर्जा, लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की निर्बाध आपूर्ति के लिए $500 मिलियन के निवेश फ्रेमवर्क को मजबूत किया गया। भारत की विनिर्माण क्रांति (विशेषकर सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा क्षेत्र) को इसके जरिए आवश्यक कच्चे माल की दीर्घकालिक सुरक्षा मिल गई है।

अहम कदम-4: भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक समझौता
इस दौरे की एक और बेहद अभूतपूर्व उपलब्धि भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मात्र 9 महीने के रिकॉर्ड समय में संपन्न हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है। इस ऐतिहासिक आर्थिक समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने अपनी उदारता दिखाते हुए समझौते के पहले ही दिन से अपने 57प्रतिशत निर्यात को भारत के लिए पूरी तरह से शुल्क-मुक्त (Tariff-free) कर दिया है। यह कदम दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है।

अहम कदम-5: न्यूजीलैंड का 20 बिलियन डॉलर का निवेश
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफ़र लक्सन ने अगले 15 वर्षों में भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनते हुए 20 बिलियन डॉलर (लगभग ₹1.72 लाख करोड़) के निवेश का औपचारिक संकल्प लिया है। यह भारी-भरकम पूंजी निवेश भारत के बुनियादी ढांचे, तकनीकी स्टार्ट-अप्स, और लॉजिस्टिक्स के आधुनिकीकरण में इस्तेमाल किया जाएगा। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

अहम कदम-6: सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास से रणनीतिक बढ़त
रणनीतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि मलक्का जलडमरूमनध्य (Strait of Malacca) के मुहाने पर स्थित इंडोनेशिया के सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास को लेकर बनी सहमति है। मलक्का दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्ग है, जहां से चीन का अधिकांश तेल आयात गुजरता है। सबांग में भारत की मौजूदगी से भारतीय नौसेना को इस चैक पॉइंट पर सीधी निगरानी और रणनीतिक बढ़त हासिल हो जाएगी।

अहम कदम-7 : निकल समेत महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा निकल उत्पादक देश है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरियों के लिए एक अनिवार्य घटक है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने निकल और अन्य दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग और औद्योगिक साझेदारी पर सहमति जताई है। वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए मोदी सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। इंडोनेशिया में इस अहम कदम से भारत के उभरते ईवी इको सिस्टम और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को बड़ी मजबूती मिलेगी।अहम कदम-8: डिजिटल वित्तीय एकीकरण और UPI-QR का विस्तार
भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की सफलता को आगे बढ़ाते हुए इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली को भारत के UPI के साथ जोड़ने का करार हुआ है। इससे दोनों देशों के बीच पर्यटन, व्यापार और प्रवासियों के लिए पैसों का लेनदेन बेहद सस्ता और त्वरित हो जाएगा, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा। बता दें कि यूपीआई के मामले में भारत ने अपनी श्रेष्ठता दुनियाभर में पहले ही कायम कर ली है।

अहम कदम-9: समुद्री डोमेन जागरूकता और सैन्य सहयोग
हिंद महासागर में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी लॉजिस्टिक सपोर्ट और हाइड्रोग्राफिक सहयोग को नए स्तर पर ले जाया गया है। दोनों देशों ने साझा समुद्री सुरक्षा ग्रिड बनाने पर सहमति व्यक्त की है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी अवांछित चीनी पनडुब्बी की गतिविधि को तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा।

अहम कदम-10: भारतीय के लिए ऑस्ट्रेलियाई रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या और शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने डिग्री की पारस्परिक मान्यता देने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही कार्य वीजा प्रक्रियाओं को और अधिक लचीला बनाने का निर्णय लिया है। इससे भारतीय पेशेवरों के लिए ऑस्ट्रेलियाई बाजार में रोजगार के अवसर काफी बढ़ जाएंगे।

अहम कदम-11: कृषि, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण में तकनीकी सहयोग
न्यूजीलैंड अपनी उन्नत डेयरी प्रौद्योगिकियों और कृषि प्रबंधन के लिए विश्व विख्यात है। इस समझौते के माध्यम से भारतीय किसानों और पशुपालकों को न्यूजीलैंड की आधुनिक तकनीकों, कोल्ड स्टोरेज चेन और खाद्य प्रसंस्करण पद्धतियों का सीधा लाभ मिलेगा। इससे भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और खाद्यान्न की बर्बादी कम होगी।

अहम कदम-12: ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस और फिनटेक में भागीदारी
न्यूजीलैंड ने आधिकारिक तौर पर भारत के नेतृत्व वाले ‘ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस’ में शामिल होने की घोषणा की है। इसके साथ ही ऑकलैंड में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए भारत के UPI और न्यूजीलैंड की भुगतान प्रणाली को एकीकृत करने का ब्लूप्रिंट भी तैयार किया गया है, जो दोनों देशों के तकनीकी सहयोग को एक नई ऊंचाई प्रदान करता है।

अहम कदम-13: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नया त्रिकोणीय सुरक्षा ढांचा
पीएम मोदी के इस ऐतिहासिक दौरे का सबसे बड़ा कूटनीतिक हासिल यह रहा कि भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा और समुद्री सुरक्षा की एक ऐसी त्रिकोणीय धुरी खड़ी कर दी है, जिसे नजरअंदाज करना किसी भी वैश्विक महाशक्ति के लिए नामुमकिन होगा। तीनों देशों के साथ सुरक्षा संवाद को अपग्रेड कर भारत ने वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा में अपनी केंद्रीय भूमिका तय कर ली है। मेलबर्न और ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत और प्रवासी भारतीयों का अभूतपूर्व उत्साह इन देशों की घरेलू राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। इस सॉफ्ट पावर ने भारत की राजनीतिक कूटनीति को विदेशी सरकारों के सामने और अधिक वजनदार बना दिया है।

अहम कदम-14: ‘मेक इन इंडिया’ की वैश्विक स्वीकार्यता
इंडोनेशिया को ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों की बिक्री ने भारत को दुनिया के अग्रणी रक्षा निर्यातकों की कतार में ला खड़ा किया है। इससे रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को वैश्विक विश्वसनीयता मिली है, जो भविष्य में अन्य देशों के साथ बड़े रक्षा करारों का मार्ग प्रशस्त करेगी। ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति की प्रशासनिक बाधाएं दूर होने से भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को एक नया जीवन मिला है।

अहम कदम-15: चीन की घेराबंदी और रणनीतिक संतुलन
बीजिंग की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ नीति को काउंटर करने के लिए भारत ने इस दौरे के जरिए ‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’ की रणनीति को बेहद मजबूत किया है। इंडोनेशिया के सामरिक बंदरगाहों तक पहुंच और ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड के साथ गहरे रक्षा सहयोग ने कम्युनिस्ट चीन के रणनीतिक दबाव को काफी हद तक कम कर दिया है। इस दौरे से मिलने वाले ये तमाम रणनीतिक और आर्थिक लाभ सीधे तौर पर बीजिंग की भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को चोट पहुंचाते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया (इंडोनेशिया) से लेकर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक भारत का यह आक्रामक कूटनीतिक उभार इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अब चीन की दादागीरी के सामने मूकदर्शक बने रहने के मूड में नहीं है।

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