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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन: 93 करोड़ ‘आभा’ खातों के साथ भारत ने रची विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति

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भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और सस्ती स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। लेकिन तकनीक के इस दौर में भारत ने एक ऐसा रास्ता चुना है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) ने देश में एक ऐसे डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम की नींव रख दी है, जो न केवल इलाज को आसान बना रहा है बल्कि मरीजों को डॉक्टरों, अस्पतालों और बीमा कंपनियों से सीधे एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ रहा है। सितंबर 2021 में शुरू किया गया यह मिशन आज दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल हो चुका है। मई 2026 तक 93 करोड़ से अधिक आभा (ABHA) खातों से 104 करोड़ से ज्यादा डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड जोड़े जा चुके हैं। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में स्वास्थ्य सेवाओं को आसान, तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। कागजी पर्चियों और फाइलों के बोझ से मुक्ति मिलकर अब मरीजों का पूरा मेडिकल इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध हो रहा है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि कैसे यह मिशन काम कर रहा है और इसके मुख्य स्तंभ क्या हैं-

‘आभा’ बनी स्वास्थ्य व्यवस्था की डिजिटल पहचान
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आभा (Ayushman Bharat Health Account) है। यह 14 अंकों की एक यूनिक हेल्थ आईडी है, जो बिल्कुल आधार की तरह काम करती है, लेकिन इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किया जाता है। इस एक पहचान संख्या के जरिए मरीज अपने सभी मेडिकल रिकॉर्ड, लैब रिपोर्ट, अस्पताल में भर्ती होने का इतिहास, दवाइयों की जानकारी और बीमा संबंधी विवरण सुरक्षित रख सकता है। सबसे अहम बात यह है कि मरीज की अनुमति के बिना कोई भी उसके रिकॉर्ड नहीं देख सकता।

104 करोड़ डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का बड़ा मुकाम
मई 2026 तक आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। देशभर में 104 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड 93 करोड़ से ज्यादा आभा खातों से लिंक किए जा चुके हैं। इसका मतलब है कि करोड़ों भारतीय अब डिजिटल मेडिकल इतिहास के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। इससे इलाज के दौरान डॉक्टर मरीज की पुरानी रिपोर्ट देखकर बेहतर निर्णय ले सकते हैं। वहीं मरीजों को भी हर बार नई फाइलें बनवाने की परेशानी नहीं होती।

सिर्फ आभा नहीं, पूरा डिजिटल हेल्थ नेटवर्क
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन केवल एक हेल्थ आईडी तक सीमित नहीं है। इसके तहत पूरा डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम विकसित किया गया है। इसमें हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री के जरिए देशभर के डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों का सत्यापित डिजिटल रजिस्टर बनाया गया है। वहीं हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में सरकारी और निजी अस्पताल, क्लीनिक, लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर और फार्मेसी का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया गया है। इसके अलावा यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI) स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए यूपीआई की तरह काम करता है, जिससे किसी भी ऐप के जरिए डॉक्टर खोजने, अपॉइंटमेंट बुक करने और टेली-कंसल्टेशन जैसी सेवाएं मिलती हैं।

आरोग्य सेतु 2.0 बना डिजिटल हेल्थ का नया गेटवे
कोविड-19 महामारी के दौरान चर्चा में आया आरोग्य सेतु ऐप अब पूरी तरह नए रूप में सामने आया है। 29 जून 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने आरोग्य सेतु 2.0 लॉन्च किया। अब यह सिर्फ कोविड ट्रैकिंग ऐप नहीं बल्कि एक व्यापक डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म बन चुका है। इसके जरिए नागरिक आभा आईडी बना सकते हैं, मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रख सकते हैं, अस्पतालों में डिजिटल रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच बना सकते हैं।

स्मार्ट रिपोर्ट्स और एआई की ताकत
आरोग्य सेतु 2.0 में OCR तकनीक आधारित स्मार्ट रिपोर्ट्स की सुविधा दी गई है, जिससे कागजी दस्तावेज भी डिजिटल रूप में आसानी से पढ़े जा सकते हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हेल्थ इनसाइट्स मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण कर स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराते हैं। इससे भविष्य में बीमारी की पहचान और स्वास्थ्य प्रबंधन पहले से ज्यादा प्रभावी बनने की उम्मीद है।

घर बैठे डॉक्टर से सलाह और अस्पताल की बुकिंग
आरोग्य सेतु 2.0 के जरिए मरीज ऑनलाइन डॉक्टर से परामर्श लेने के साथ-साथ अस्पताल जाकर दिखाने के लिए भी अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा मरीज ब्लड बैंक खोज सकते हैं, पास के अस्पतालों की जानकारी ले सकते हैं, ई-रक्तकोष के जरिए रक्त की उपलब्धता देख सकते हैं और अपने फिटनेस बैंड या स्मार्टवॉच को भी ऐप से जोड़ सकते हैं।

अस्पतालों में लंबी कतारों से राहत
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत शुरू की गई स्कैन एंड शेयर सेवा मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा विकसित इस सुविधा में अस्पताल पहुंचते ही मरीज केवल क्यूआर कोड स्कैन करके डिजिटल टोकन प्राप्त कर सकता है। उसके आभा खाते से जरूरी जानकारी स्वतः भर जाती है और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। भारतीय स्वास्थ्य प्रबंधन अनुसंधान संस्थान (IIHMR) के अध्ययन के अनुसार पहले जहां मरीजों को ओपीडी पंजीकरण में लगभग एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब यह समय घटकर केवल 2 से 5 मिनट रह गया है। 18 जून 2026 तक देशभर में 23.21 करोड़ से अधिक आभा-लिंक्ड डिजिटल टोकन जारी किए जा चुके हैं।

अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से डिजिटलीकरण
सरकार सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर और फार्मेसी को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जोड़ रही है। स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री के माध्यम से मरीज किसी भी पंजीकृत अस्पताल को आसानी से खोज सकते हैं। इलाज के दौरान उनका रिकॉर्ड स्वतः लिंक हो जाता है और मरीज की सहमति मिलने पर डॉक्टर उसे देख सकते हैं।

डिजिटल हेल्थ प्रोत्साहन योजना से बढ़ रहा जुड़ाव
स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाने के लिए सरकार डिजिटल हेल्थ प्रोत्साहन योजना भी चला रही है। इस योजना के तहत अस्पतालों, लैब, फार्मेसी और डिजिटल हेल्थ कंपनियों को डिजिटलीकरण पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति और नकद प्रोत्साहन दिया जाता है। 18 जून 2026 तक अस्पतालों को 107 करोड़ रुपये से अधिक, डायग्नोस्टिक एवं फार्मेसी संस्थानों को 2.95 करोड़ रुपये और डिजिटल समाधान कंपनियों को 26 करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है।

छोटे क्लीनिकों के लिए ई-सुश्रुत@क्लिनिक
सी-डैक द्वारा विकसित ई-सुश्रुत@क्लिनिक छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए तैयार किया गया डिजिटल हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम है। यह मरीज पंजीकरण, बिलिंग, रिपोर्टिंग और रिकॉर्ड प्रबंधन जैसी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाता है। अब तक 2,200 से अधिक स्वास्थ्य संस्थान इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।

बीमा क्लेम भी होंगे आसान
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय (NHCX) बीमा दावों की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर अस्पताल, बीमा कंपनियां, मरीज और नियामक एक साथ जुड़े रहते हैं। इससे क्लेम तेजी से निपटते हैं, अस्पताल से छुट्टी मिलने में देरी नहीं होती और मरीज अपने सभी दावों की स्थिति एक ही जगह देख सकते हैं। डॉक्टर मरीज की अनुमति से उसका पूरा इलाज इतिहास देख सकते हैं, जिससे बार-बार टेस्ट कराने की जरूरत कम होती है और इलाज की गुणवत्ता बेहतर होती है।

यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस बना हेल्थ सेक्टर का UPI
यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस यानी UHI स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उसी तरह काम करता है, जैसे डिजिटल भुगतान के लिए यूपीआई। इस प्लेटफॉर्म के जरिए मरीज किसी भी UHI-सक्षम ऐप से डॉक्टर खोज सकता है, ऑनलाइन सलाह ले सकता है, एम्बुलेंस बुक कर सकता है, ब्लड बैंक और जन औषधि केंद्र खोज सकता है तथा आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों की जानकारी प्राप्त कर सकता है।

स्वास्थ्य डेटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित
सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सबसे बड़ी ताकत इसकी कंसेंट आधारित प्रणाली है। मरीज का डेटा किसी केंद्रीय सर्वर पर जमा नहीं होता। रिकॉर्ड उसी अस्पताल, लैब या संस्था के पास रहता है जिसने उसे बनाया है। रिकॉर्ड तभी साझा होता है जब मरीज इसकी अनुमति देता है और वह अनुमति भी तय समय के लिए होती है, जिसे कभी भी वापस लिया जा सकता है। नए ऐप को सीधे सिस्टम से जोड़ने की अनुमति नहीं होती। पहले उसे सुरक्षित सैंडबॉक्स वातावरण में परीक्षण और सुरक्षा ऑडिट से गुजरना पड़ता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई को मिलेगा नया आधार
सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए भी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उपयोग कर रही है। फरवरी 2026 में SAHI (Strategy for AI in Healthcare for India) और BODH (Benchmarking Open Data Platform for Health AI) लॉन्च किए गए। इनका उद्देश्य सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार को बढ़ावा देना है। गोपनीय और बिना पहचान वाले स्वास्थ्य डेटा के आधार पर बीमारी की निगरानी, स्वास्थ्य योजनाओं की तैयारी और नए एआई मॉडल विकसित किए जा सकेंगे।

स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति की मजबूत नींव बन चुका है। अस्पतालों में कम होता इंतजार, कागजरहित रिकॉर्ड, तेज बीमा क्लेम, ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित डिजिटल मेडिकल इतिहास इस बदलाव की झलक हैं।

सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में देश के सभी नागरिकों, अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को इस नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि हर भारतीय के पास सुरक्षित, पोर्टेबल और पूरी तरह डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध हो और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहले से कहीं अधिक आसान, तेज और सुलभ बन सकें।

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