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MODI@72 : पीएम मोदी मिटा रहे हैं गुलामी के निशान, देशवासियों में भर रहे गौरवबोध

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राष्ट्रीयता का भाव मानव उन्नति की एक सीढ़ी है। यानी देश की उन्नति के लिए राष्ट्रीयता का भाव जरूरी है। यह राष्ट्रीयता का भाव हमारे मन मस्तिष्क में तभी रच-बस सकता है जब हम गुलामी की मानसिकता अपने भीतर से निकालकर फेंक दें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बात को अच्छी तरह समझते हैं और इसीलिए वह देश की सत्ता संभालने के साथ गुलामी की मानसिकता को, गुलामी के प्रतीक चिन्हों को खत्म कर रहे हैं और देशवासियों में गौरवबोध भर रहे हैं। अभी हाल ही में राजपथ का अस्तित्व समाप्त कर कर्तव्यपथ किया गया है और इंडिया गेट के ग्रैंड कैनोपी में जहां कभी जार्ज पंचम की मूर्ति लगी थी वहां नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा लगाई गई। गुलामी की मानसिकता से मुक्ति के बारे में पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि ये न शुरुआत है ना ही अंत है, ये मन और मानस की आजादी का लक्ष्य हासिल करने तक निरंतर चलने वाली संकल्प यात्रा है। मोदी सरकार ने पिछले 8 सालों में गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति के कई कदम उठाए हैं। पीएम मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर को है। इस अवसर पर आइए नजर डालते हैं कि कब-कब पीएम मोदी ने औपनिवेशिक गुलामी के प्रतीकों को खत्म किया।

राजपथ का नाम अब कर्तव्यपथ

ऐतिहासिक राजपथ का नाम अब कर्तव्य पथ हो गया है। पहले राजपथ का नाम किंग्सवे यानी राजा का पथ था। 1911 में लगे ऐतिहासिक ‘दिल्ली दरबार’ के बाद ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम के सम्मान में इस सड़क को किंग्सवे नाम दिया गया था। आजादी के बाद उसका हिंदी अनुवाद करके उसको नया नाम ‘राजपथ’ दिया गया। लेकिन अब कर्तव्यपथ नाम कर दिया गया है जो कि औपनिवेशिक गुलामी के प्रतीक से मुक्ति है।

इंडिया गेट के ग्रैंड कैनोपी में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा

इस साल 23 जनवरी को महान बलिदानी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के मौके पर इंडिया गेट की ग्रैंड कैनोपी में नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का उद्घाटन हुआ था। अब उसकी जगह पर ग्रेनाइट से बनी 28 फीट ऊंची नेताजी की भव्य प्रतिमा है। किसी जमाने में इस कैनोपी में जॉर्ज पंचम की प्रतिमा लगी थी जिसे आजादी के 21 साल बाद 1968 में हटाया गया था। देश के लिए विरासत पर गर्व करने का इससे अच्छा उदाहरण क्या हो सकता है।

नौसेना को मिला नया ध्वज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 सितंबर 2022 को इंडियन नेवी के ध्वज से गुलामी के प्रतीक को हटाया। नेवी के ध्वज में औपनिवेशिक अतीत की छाप दिखती थी। नए ध्वज में लाल रंग के सेंट जॉर्ज क्रॉस को हटा दिया गया। उसकी जगह पर छत्रपति शिवाजी महाराज की शाही मुहर से प्रेरित चिह्न लगाया गया है। ऊपर बाईं ओर तिरंगा बना है। दाहिनी ओर नीले रंग की पृष्ठभूमि वाले एक अष्टकोण में सुनहरे रंग का राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चिह्न बना है। सबसे नीचे संस्कृत में ‘शं नो वरुण:’ लिखा है जिसका अर्थ है ‘जल के देवता वरुण हमारे लिए शुभ हों।’ इंडियन नेवी का नया ध्वज गुलामी के प्रतीक से मुक्ति और विरासत पर गर्व का एक शानदार उदाहरण है।

रेस कोर्स रोड हुआ लोक कल्याण मार्ग

मोदी सरकार ने 2016 में ही रेस कोर्स रोड का नाम लोक कल्याण मार्ग कर दिया था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास का पता 7, रेस कोर्स मार्ग से बदलकर 7, लोक कल्याण मार्ग हो गया। रेस कोर्स नाम अंग्रेजों का दिया हुआ था।

आम बजट में रेलवे बजट का विलय

2017 में सरकार ने 92 साल पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए रेल बजट का आम बजट में विलय कर दिया। इसके अलावा बजट पेश करने की तारीख में भी बदलाव किया गया। औपनिवेशिक काल से ही बजट फरवरी महीने के आखिरी दिन पेश किया जाता था। अब पहली फरवरी को पेश किया जाता है। गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति के संदर्भ में यह बदलाव बहुत महत्वपूर्ण है।

अंग्रेजों के जमाने के 1500 कानूनों से मुक्ति

2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने 1500 से भी ज्यादा पुराने कानूनों को खत्म कर दिया है। अंग्रेजों के जमाने के ये कानून अप्रासंगिक हो चुके थे लेकिन उन्हें ढोया जा रहा था। इनमें से कई कानून तो ब्रिटिश राज में भारतीयों के शोषण के औजार थे।

बीटिंग रीट्रीट में ‘अबाइड विद मी’ की जगह ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’

गणतंत्र दिवस समारोह के बाद होने वाले बीटिंद रीट्रीट सेरिमनी से चर्चित क्रिश्चियन प्रेयर गीत ‘अबाइड विद मी’ को इस साल हटा दिया गया। उसकी जगह पर कवि प्रदीप के मशहूर गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ को शामिल किया गया। 2015 में भी बीटिंग रीट्रीट समारोह में कुछ बड़े बदलाव किए गए थे। भारतीय वाद्ययंत्रों सितार, संतूर और तबला को पहली बार इसमें शामिल किया गया।

सड़कों के बदले गए नाम

2015 में दिल्ली स्थित औरंगजेब रोड का नाम बदल दिया गया। सबसे क्रूर मुगल शासक के नाम की जगह इस रोड का नाम महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर कर दिया गया। 2017 में डलहौजी रोड का नाम बदलकर दारा शिकोह रोड कर दिया गया। 2018 में तीन मूर्ति चौक का नाम तीन मूर्ति हाइफा चौक कर दिया गया। कर्जन रोड को बदलकर कस्तूरबा रोड कर दिया गया।

अमर जवान ज्योति का नैशनल वॉर मेमोरियल में विलय

इसी साल जनवरी में अमर जवान ज्योति की लौ का नैशनल वॉर मेमोरियल में विलय कर दिया गया। 1950 में भारत एक गणतंत्र बना और राजपथ में परेड की शुरुआत हुई, तब से केवल उन्हीं भारतीय शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी जिन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटेन की ओर से लड़ाई की थी। तब से यह महसूस होता रहा कि उन सैनिकों को पर्याप्त रूप से श्रद्धांजलि नहीं मिल रही है जिन्होंने आजादी के बाद अपने प्राणों की आहुति दी है।

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के द्वीपों का नाम बदला

दिसंबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की भावनाओं के अनुरूप अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के तीन द्वीपों के नाम बदल दिए। नेताजी ने तो 1943 में पूरे अंडमान और निकोबार द्वीप का नाम बदलकर शहीद और स्वराज द्वीप करने का सुझाव दिया था। मोदी सरकार ने रॉस आइलैंड का नाम नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वीप कर दिया। नील आइलैंड को शहीद द्वीप और हैवलॉक आइलैंड को स्वराज द्वीप का नाम मिला।

विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में बिप्लोबी भारत गैलरी 

इस साल 23 मार्च को भगत सिंह के बलिदान दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में बिप्लोबी भारत गैलरी का उद्घाटन किया। गैलरी में भारत के महान क्रांतिकारियों के योगदान को दिखाया गया है।

नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा पर जोर

नैशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 में मातृभाषा में पढ़ाई पर जोर दिया गया है। वैसे लंबे समय से शुरुआती पढ़ाई-लिखाई मातृ-भाषा में किए जाने पर जोर दिया जाता रहा है लेकिन अब सरकार इस पर खास जोर दे रही है। 1850 तक भारत में गुरुकुल की प्रथा चलती आ रही थी परन्तु अंग्रेज मैकाले द्वारा अंग्रेजी शिक्षा पर जोर के कारण भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का अन्त हुआ और भारत में कई गुरुकुल बंद हुए और उनके स्थान पर कान्वेंट और पब्लिक स्कूल खुल गए। नई शिक्षा नीति में गुलामी की इस मानसिकता से भी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया गया है।

पीएम मोदी का दस्तावेजों के स्वप्रमाणीकरण पर जोर

पीएम मोदी ने 2014 में दस्तावेजों के स्व-प्रमाणन पर जोर दिया। पहले नौकरी, पढ़ाई के लिए दाखिला जैसे आवेदनों के साथ किसी राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित कराई हुईं सर्टिफिकेट की कॉपी को जमा करना होता था। अंग्रेजों के समय से चली आ रही इस परंपरा पर रोक से युवाओं को अनावश्यक तौर पर अधिकारियों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिली।

गुलाम मानसिकता का एक छोटा सा कण भी अब हमारे भीतर नहीं रहना चाहिए : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से दिए अपने ऐतिहासिक भाषण में पांच प्राणों को पूरा करने आह्वान किया था। इसमें भारत के पुनर्जागरण का दूसरा प्राण था- गुलामी की मानसिकता का संपूर्ण त्याग! पीएम मोदी ने कहा कि हमने सन सैंतालीस में गुलामी की बेड़िया भले तोड़ दीं, लेकिन पराधीनता की अनेक बेड़ियां आज भी भारतीय समाज को जकड़े हुए है। विकसित राष्ट्र बनने के लिए हमें सबसे पहले अपनी गुलामी की मानसिकता को छोड़ना होगा, अपने आप पर विश्वास करना होगा। गुलामी की मानसिकता का एक छोटा सा भी अंश हमारे भीतर नहीं होना चाहिए। हम आत्मविश्वास से भरे हों, भारत को लेकर स्वाभिमान से भरे हों। हमें उस आत्मविश्वास को फिर से जिंदा करने की जरूरत है।

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