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DRDO ने बनाए दो ऐसे उपकरण, जो कोरोना से निपटने में करेंगे देशवासियों की मदद

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश कोरोना महामारी से लड़ने में जुटा है। कई सरकारी संस्थान, रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन और कंपनिया अपनी तरफ से इनोवेशन कर कोरोना से लड़ाई को आसान बनाने में जुटे हैं। अब कोरोना वायरस महामारी के संकट से निपटने के लिए भारत की क्षमता में वृद्धि करते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 2 नए उपकरणों का निर्माण किया है। पहला उपकरण है ऑटोमेटिक सैनेटाइजर मशीन और दूसरा है अल्ट्रावायलेट सैनेटाइजेशन बॉक्स। डीआरडीओ ने एक वक्तव्य में कहा कि कोविड-19 महामारी से लड़ने की दिशा में डीआरडीओ ने अपनी तकनीकी दक्षता और अनुभव से कई उपकरणों का निर्माण किया है और इसी क्रम में सार्वजनिक स्थलों पर संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दो और उत्पाद बनाए गए हैं।

बिना छुए झाग से सैनेटाइज होगा हाथ
डीआरडीओ के मुताबिक दिल्ली स्थित डीआरडीओ के विस्फोटक एवं पर्यावरण सुरक्षा केंद्र (सीएफईईएस) ने एक ऑटोमेटिक झाग आधारित सैनेटाइजर मशीन बनाई है, जिसे छूने की आवश्यकता नहीं होगी। मशीन से अपने आप अल्कोहल आधारित सैनेटाइजर निकलेगा, जिसे हाथ पर लगाया जा सकेगा। इस मशीन का इस्तेमाल कार्यालय परिसरों और इमारतों में प्रवेश करने से पहले किया जा सकेगा।

अल्ट्रावायलेट बॉक्स से सैनेटाइज  होंगे मोबाइल, पर्स और रुपये
डीआरडीओ की दो अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से पराबैंगनी प्रकाश से सैनेटाइज करने वाला उपकरण बनाया गया है। इस बक्से के प्रयोग से मोबाइल फोन, टैबलेट, बटुआ, मुद्रा, फाइल के कवर इत्यादि जैसी छोटे सामान को सैनेटाइज किया जा सकेगा।

इससे पहले भी डीआरडीओ कोरोना से निपटने के लिए कई उपकरणों की खोज कर चुका है। डालते हैं एक नजर-

डीआरडीओ ने विकसित की सैनेटाइज करने की तकनीक
इससे पहले कोरोना वायरस से लड़ने की भारत की क्षमता को बढ़ाते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विभिन्न क्षेत्रों को सैनेटाइज करने की तकनीक विकसित की थी। डीआरडीओ ने बताया था दिल्ली स्थित विस्फोटक एवं पर्यावरण सुरक्षा केंद्र (सीएफईईएस) ने सैनेटाइजिंग उपकरण के दो प्रकार विकसित किए हैं। आग बुझाने की तकनीकों के विकास पर काम करने के दौरान यह तकनीक विकसित हुई। सैनेटाइजिंग उपकरण के दो प्रकार विकसित किए गए हैं- एक पीठ पर लेकर चला जा सकता है और दूसरे उपकरण को ट्रॉली का आकार दिया गया है।

पीठ पर ले जा सकने वाले उपकरण को सैनेटाइज करने वाले कर्मी कहीं भी ले जा सकते हैं और इससे 300 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को संक्रमण मुक्त किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से अस्पताल, डॉक्टर के कक्ष, कार्यालय, गलियारे, मेट्रो, रेलवे स्टेशनों इत्यादि पर छिड़काव किया जा सकता है। डीआरडीओ ने कहा कि ट्रॉली के आकार वाले उपकरण की सहायता से 3000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को संक्रमण मुक्त किया जा सकता है। वक्तव्य में कहा गया कि इन उपकरणों को तत्काल प्रयोग में लाने के लिए दिल्ली पुलिस को उपलब्ध कराया जा रहा है। जल्दी ही निजी क्षेत्र के सहयोग से इन्हें अन्य एजेंसियों को भी मुहैया कराया जाएगा।

आपको बता दें कि इससे पहले भी डीआरडीओ ने कोरोना मरीजों के इलाज में काम आने वाले सेफ्टी सूट, वेंटिलेटर और विशेष प्रकार के मास्क का निर्माण करने में सफलता अर्जित की थी।

 

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