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देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से सभी सेक्टर्स में सुधार, NBFC की एसेट ग्रोथ चार साल में सबसे ज्यादा, वाहनों की खरीद के लिए लोन की मांग में वृद्धि

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था तेजी के साथ आगे बढ़ रही है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रोत्साहन की वजह से अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) के ग्रोथ में भी तेजी दिखाई दे रही है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों की एसेट्स ग्रोथ इस वित्त वर्ष में चार साल के उच्चतम स्तर 11-12 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में यह 5 प्रतिशत रही थी।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार (12 सितंबर, 2022) को जारी रिपोर्ट में बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 में एनबीएफसी कंपनियों की एसेट्स ग्रोथ 11-12 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसमें सबसे बड़ा योगदान वाहन सेगमेंट का हो सकता है। वाहनों के फाइनेंस पर एनबीएफसी ने अपनी आधी पूंजी खर्च की है। वित्त वर्ष 2022-23 में वाहन सेगमेंट में 11-13 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है, यह वित्त वर्ष 2020-21 और वित्त वर्ष 2021-22 में 3 से 4 प्रतिशत थी।

क्रिसिल के डायरेक्टर अजित वेलोनी ने कहा कि वाहनों के बाद एनबीएफसी के लिए दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट असुरक्षित लोन है। इस वित्त वर्ष में यह प्री- कोविड स्तर की ग्रोथ रेट 20-22 प्रतिशत को पार कर सकता है। असुरक्षित लोन एनबीएफसी की कुल एसेट्स बुक का 20 प्रतिशत है। क्रिसिल की रिपोर्ट में उम्मीद जतायी गई है कि एनबीएफसी कंपनियों से प्रॉपर्टी लोन की मांग में 10-12 प्रतिशत और गोल्ड लोन की मांग में 10-12 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है। क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था इस वित्त वर्ष में 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इस वजह से ग्राहकों से आने वाली लोन की मांग में भी वृद्धि हो रही है।

गौरतलब है कि नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) देश के बैंक और बाजार से पैसा उधार लेकर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र में छोटा व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को कर्ज उपलब्ध कराती है। हाला्ंकि NBFC की ब्याज दर बैंक की अपेक्षा थोड़ी ज्यादा होती है। लेकिन NBFC से कर्ज लेने के लिए लोगों को ज्यादा कागजी कार्रवाई नहीं करनी होती। ऐसे में ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आसानी से कर्ज मिल जाता है।

आइए देखते हैं देश की अर्थव्यवस्था और विकास पर विभिन्न रेटिंग एजेंसियों का क्या कहना है…

चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 13.5 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ
कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-ताइवान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने शानदार प्रदर्शन किया है। मोदी सरकार की नीतियों के समर्थन से अर्थव्यवस्था में तेजी जारी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा बुधवार (31 अगस्त, 2022) को जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में एक साल में सबसे तेज वार्षिक वृद्धि दर्ज की। वित्त वर्ष 2022-2023 की पहली तिमाही मतलब 30 जून 2022 तक के 3 महीनों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 13.5 प्रतिशत रहा। इस तरह कोरोना पूर्व काल यानी वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही के मुकाबले जीडीपी में 3.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि 13.5 प्रतिशत की ग्रोथ अनुमान से कम है, लेकिन भारतीय इकॉनमी की यह दूसरी सबसे ज्यादा ग्रोथ है। इससे पहले पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 20.1 प्रतिशत थी। पहली तिमाही में खपत और निवेश दोनों ही स्तर पर मजबूती से दहाई अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारतीय अर्थव्यवस्था को पिछले साल के कमजोर आधार और महामारी का असर कम होने के बाद उपभोग में सुधार से मदद मिली है। इसके अलावा काबू में आती महंगाई ने भी राहत दी है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में निजी खपत में अच्छी बढ़ोतरी रही। आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी में निजी खपत की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत थी जो चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 59.9 प्रतिशत हो गई। लेकिन फिक्स्ड कैपिटल फारमेशन (सकल स्थायी पूंजी निर्माण) के मद में बढ़ोतरी भविष्य में भी औद्योगिक उत्पादन को लेकर अच्छे संकेत दे रहा है। फिक्स्ड कैपिटल की हिस्सेदारी इस साल अप्रैल-जून में 34.7 प्रतिशत रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह हिस्सेदारी 32.8 प्रतिशत थी।

पहली तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग के जीवीए (ग्रास वैल्यू एडेड) में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 4.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन सेवा सेक्टर में भी पहली तिमाही में दहाई अंक में वृद्धि दर्ज की गई। संपर्क से चलने वाले सेक्टर जैसे कि होटल, ट्रांसपोर्ट, मनोरंजन जैसे सेक्टर में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले खासी बढ़ोतरी रही। पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था के जिन क्षेत्रों में बढ़ोतरी हुई, उनमें कृषि और फिशिंग में 4.8 प्रतिशत, माइनिंग में 6.5 प्रतिशत, मैन्यूफैक्चरिंग में 4.8 प्रतिशत, बिजली, गैस अन्य उपयोगी सेवा में 14.7 प्रतिशत, व्यापार, होटल, संचार, ट्रांसपोर्ट इत्यादि में 25.7 प्रतिशत, रियल एस्टेट व वित्तीय सेवा में 9.2 प्रतिशत और अन्य सेवा (शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन) सुरक्षा में 26.3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।

इस तरह भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकॉनमी का ताज पहने हुए है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 13.5 प्रतिशत की ग्रोथ ऐसे वक्त आई है, जब चीन अपनी इकॉनमी को गिरावट से बचाने के लिए जी-तोड़ प्रयास कर रहा है। अगर बाकी दूसरे देशों की वृद्धि‍ दर के लिहाज से देखें तो पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में दुनिया की शीर्ष 20 अर्थव्यवस्था के मुकाबले भारत की विकास दर सबसे अधिक रही।

दरअसल वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं मंदी और महंगाई का सामना कर रही हैं। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका की बात करें तो वह औपचारिक रूप से मंदी की चपेट में आ चुका है। जीडीपी में 0.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे पहले मार्च तिमाही में अमेरिकी इकोनॉमी का साइज 1.6 प्रतिशत कम हो गया था। अगर कोई इकोनॉमी लगातार दो तिमाही में गिरावट का शिकार होती है, तो कहा जाता है कि वह अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ चुकी है। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था भी मंदी में गिरने की कगार पर है। जनवरी तिमाही में ब्रिटिश इकोनॉमी में 0.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी। सभी मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स से जून तिमाही में भी जीडीपी में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं। 

तेल के दाम में गिरावट और अच्छे मानसून से मिला बुस्टोर डोज
मोदी सरकार अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए लगातार कदम उठा रही है, वहीं कच्चे तेल, खाद्य तेल, फर्टिलाइजर और मानसून अर्थव्यवस्था के लिए बुस्टोर डोज के रूप में काम कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों और अर्थशास्त्रियों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ेगी। मोदी सरकार मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिए रिजर्व बैंक के साथ मिलकर काम कर रही है। दरअसल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बीते दिनों कच्चे तेल की कीमतों में जो आग लगी हुई थी, उसमें अब गिरावट आ रही है। वहीं सरकार से मिल रहे संकेतों से पता चलता है कि खाद्य तेल और कच्चे तेल के दाम नरम हुए है। आने वाले समय में खाद्य और कच्चे तेल के दाम और घट सकते हैं। इसके अलावा उर्वरक के दाम कम हुए हैं और इस साल मानसून के अच्छे रहने की उम्मीद जतायी जा रही है। इन सबको दुखते हुए मुद्रास्फीति को लेकर दबाव कम होने की बात कही जा रही है। 

विकास दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान : ब्रोकरेज फर्म मार्गन स्टेनली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था यूक्रेन और कोरोना संकट काल में भी तेजी से आगे बढ़ रही है। तमाम वैश्विक रुकावटों के बीच भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि ब्रोकरेज फर्म मार्गन स्टेनली के अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि 2022-23 में भारत एशिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बनकर उभर सकता है। मार्गन स्टेनली के अनुसार 2022-23 में भारत की विकास दर का औसत सात प्रतिशत रह सकता है। मोदी सरकार की और से पिछले कुछ सालों में की गई आर्थिक नीति सुधारों, युवा कार्यबल और कारोबारी निवेश से भारत मजबूत घरेलू मांग उत्पन्न करने की स्थिति में है। इससे अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। मार्गन स्टेनली ने अनुमान जताया है कि 2022-23 में एशियाई और वैश्विक विकास में भारत का योगदान 28 प्रतिशत और 22 प्रतिशत रह सकता है।

7.1 प्रतिशत रह सकती है जीडीपी ग्रोथ- केयरएज रेटिंग्‍स
मोदी सरकार की नीतियों के कारण वित्त वर्ष 2022-23 में अर्थव्‍यवस्‍था की विकास दर 7.1 प्रतिशत रह सकती है। केयरएज रेटिंग्‍स की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते वित्तवर्ष 2023 की शुरुआत बेहतर हुई है। जीएसटी कलेक्‍शन, ई-वे बिल रजिस्‍ट्रेशन और क्रेडिट ग्रोथ जैसे कई हाई फ्रिक्‍वेंसी इकोनॉमिक इंडिकेटर्स का पहले चार महीने में प्रदर्शन दमदार रहा है। इससे 2022-23 में अर्थव्‍यवस्‍था की विकास दर 7.1 प्रतिशत रह सकती है।

पहली छमाही में जीडीपी ग्रोथ 7-8 प्रतिशत रहने का अनुमान
मोदी सरकार की नीतियों की वजह से वित्त वर्ष 23 की पहली छमाही में जीडीपी ग्रोथ 7-8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। देश के ज्यादातर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (CEO) का मानना है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में अर्थव्यवस्था 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक सर्वे के अनुसार 57 प्रतिशत CEO का मानना है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 7 से 8 प्रतिशत के बीच रहेगी। CII के सर्वे में देशभर के 136 CEO ने भाग लिया। CII CEOs पोल नतीजे स्पष्ट रूप से भारतीय उद्योग के लचीलेपन के साथ घरेलू और निर्यात दोनों पर सकारात्मक व्यावसायिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करते हैं। सर्वे के दौरान इंडिया इंक के सीईओ का यह भी मानना था कि इस दौरान उनकी कंपनी में रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बेहतर रहेंगी।

2022 में 8.8 प्रतिशत रह सकती है वृद्धि दर- मूडीज
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था कोरोना और यूक्रेन संकट काल में भी काफी मजबूत बनी हुई है। रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने साल 2022 में भारत की विकास दर 8.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। इसके साथ ही साल 2023 के लिए विकास दर अन्य विकसित देशों से अधिक 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, कॉर्पोरेट सेक्टर की बड़े स्तर पर निवेश की घोषणा और सरकार के पूंजी खर्च पर आवंटन बढ़ाए जाने से निवेश में मजबूती आने का संकेत मिलता है। मूडीज ने कहा है कि अगर ग्लोबल क्रुड ऑयल और फूड प्राइस में और बढ़ोतरी नहीं होती है, तो अर्थव्यवस्था में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है।

सबसे तेजी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था- यूएन
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण दुनियाभर में पड़े नकारात्मक असर के बाद भी भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख इकोनॉमी बना रहेगा। संयुक्त राष्ट्र ने ग्लोबल इकोनॉमी की स्थिति पर जारी अपनी हालिया रिपोर्ट में वर्ष 2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। जबकि रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था के वर्ष 2022 में 3.1 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस मामले में भारत कुछ बेहतर स्थिति में है।

2022 में 8.5% रहेगी विकास दर- आईएमएफ
मोदी सरकार के रणनीतिक सुधारों और कोरोना टीकाकरण अभियान में तेजी के कारण दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2022 में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। खास बात यह है कि 2022 में भारत को छोड़कर किसी भी अन्य देश में यह वृद्धि दर 6 प्रतिशत से ऊपर नहीं जाने का अनुमान जताया गया है। आर्थिक विकास दर के मामले में भारत ने चीन और अमेरिका को काफी पीछे छोड़ दिया है।

आईएमएफ को भरोसा, वैश्विक अर्थव्यवस्था की अगुवाई करेगा भारत
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा कि भारत की अगुवाई में दक्षिण एशिया वैश्विक वृद्धि का केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है और 2040 तक वृद्धि में इसका अकेले एक-तिहाई योगदान हो सकता है। आईएमएफ के हालिया शोध दस्तावेज में कहा गया कि बुनियादी ढांचे में सुधार और युवा कार्यबल का सफलतापूर्वक लाभ उठाकर यह 2040 तक वैश्विक वृद्धि में एक तिहाई योगदान दे सकता है। आईएमएफ की एशिया एवं प्रशांत विभाग की उप निदेशक एनी मेरी गुलडे वोल्फ ने कहा कि हम दक्षिण एशिया को वैश्विक वृद्धि केंद्र के रूप में आगे बढ़ता हुए देख रहे हैं।

सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा भारत- केपीएमजी
ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म केपीएमजी ने कहा कि वर्ष 2022 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में भारत शामिल रहेगा। वित्त वर्ष 2022-23 में 7.7 प्रतिशत रह सकती है। केपीएमजी का कहना है कि भारत सरकार की मौजूदा नीतियां आर्थिक रफ्तार को आगे भी बढ़ाए रखेंगी। इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस और इस क्षेत्र में किए जा रहे निवेश से न सिर्फ विकास दर में तेजी आएगी, बल्कि बेरोजगारी भी घटेगी। केपीएमजी के अुसार, कोरोना के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की रिकवरी रेट बढ़ी है। आर्थिक सुधार के मोर्चे पर आगे बढ़ने और मांग में तेजी की वजह से मोबिलिटी इंडेक्स, डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन, बिजली की मांग सभी में उछाल दर्ज किया जा रहा है।

मौजूदा वित्त वर्ष में 7.4 प्रतिशत रह सकता है भारत का जीडीपी
उद्योग संगठन फिक्की ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रह सकती है। ताजा आर्थिक परिदृश्य सर्वेक्षण रिपोर्ट में फिक्की ने चालू वित्त वर्ष में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है, लेकिन वृद्धि से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क भी किया गया है। फिक्की आर्थिक आउटलुक सर्वेक्षण ने इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर के लिए विकास दर 5.9 प्रतिशत और 8.5 प्रतिशत के साथ कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए 3.3 प्रतिशत विकास का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी लड़ाई के कारण कीमतें वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। आर्थिक परिदृश्य सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक वर्ष 2022 की दूसरी छमाही में ब्याज दरें बढ़ाने का सिलसिला शुरू कर सकता है।

9.2 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है भारतीय अर्थव्यवस्था- नीति आयोग
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 9.2 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में भी यह तेजी बरकरार रहने की उम्मीद है। ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत आज अभूतपूर्व स्तर के आर्थिक विकास और तकनीकी बदलावों को देख रहा है। अर्थव्यवस्था 9.2 प्रतिशत की द

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