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राहुल गांधी को पूर्वजों से विरासत में मिली है ”I am the congress” की भाषा!

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11 जुलाई को राहुल गांधी ने स्वीकार किया था कि ‘कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी’ है। इस विवाद के बीच मंगलवार को राहुल गांधी ने आज कहा, ”I am the congress’’ यानि ”मैं ही कांग्रेस हूं।” राहुल गांधी के इस बयान से स्पष्ट है कि वे खुद को ‘सर्वशक्तिमान’ मानते हैं और अपनी पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को ‘तुच्छ’ समझते हैं।

दरअसल राहुल गांधी उसी भाषा में बात कर रहे हैं जो उन्हें अपने ही पूर्वजों से विरासत के रूप में मिली हैं। देश की सत्ता पर 38 वर्षों तक प्रत्यक्ष रूप से जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी और सोनिया गांधी ने अप्रत्यक्ष रूप से 10 वर्षों तक शासन किया है। इस दौरान कई ऐसे अवसर आए हैं जब राहुल के पूर्वजों ने भी ‘’मैं ही कांग्रेस हूं’’ के भाव को साबित किया है।    

अवहेलना से आहत बाबा साहेब को देना पड़ा इस्तीफा

बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर अर्थव्यवस्था के बहुत बड़े जानकार थे, लेकिन बाबासाहेब को नीचा दिखाने के लिए तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू ने किसी भी कमेटी में उन्हें जगह ही नहीं दी। अपने तिरस्कार और अपमान से आहत होकर बाबासाहेब ने 27 सितंबर 1951 को सरकार से इस्तीफा दे दिया।

नीलम संजीव रेड्डी को इंदिरा गांधी ने हरवाया

जुलाई, 1969 में राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार होने के बावजूद नीलम संजीव रेड्डी चुनाव हार गए। वजह थी इंदिरा गांधी की नापसंदगी। दरअसल इंदिरा गांधी ने खुद को ‘सर्वेसर्वा’ बताने के लिए वीवी गिरि को निर्दलीय खड़ा करवाया और तमाम तिकड़म कर उन्हें जितवा भी दिया। इसके बाद ही नवंबर 1969 में पार्टी को दो भागों में विभाजित कर दिया।

सोनिया गांधी के इशारे पर सीताराम केसरी का अपमान

सोनिया गांधी 1997 में कांग्रेस में शामिल हुईं थी। इसके एक साल बाद ही वह पार्टी का अध्यक्ष बनने को आतुर हो गईं। आरोप है कि सत्ता को ‘जहर’ मानने वाली सोनिया गांधी ने साजिश कर 14 मार्च 1998 को सीताराम केसरी से जबरन इस्तीफा ले लिया। जब इस बुजुर्ग नेता ने विरोध किया तो सोनिया गांधी के इशारे पर ही उनकी धोती तक खोल दी गई और अपमानित किया गया।

सोनिया गांधी ने नरसिम्हा राव के शव को भी नहीं दिया सम्मान

भूतपूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव का 2004 में देहांत दिल्ली में हुआ था, लेकिन उनके शव को कांग्रेस मुख्यालय में सिर्फ इसलिए नहीं रखने दिया गया क्योंकि उन्हें सोनिया गांधी नापसंद करती थीं। दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से बोफोर्स मामले को खारिज किए जाने के खिलाफ राव सरकार ने अपील कर दी थी।

बिना किसी योग्यता के कांग्रेस अध्यक्ष बन गए राहुल गांधी

12 सितंबर, 2017 को अमेरिका में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ”भारत की प्रकृति वंशवाद की है।” 13 अक्टूबर, 2017 को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा, ”अब समय आ गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी राहुल गांधी को सौंप दी जाए।” और, 11 दिसंबर, 2017 को राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष घोषित कर दिए गए। गौरतलब है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी अब तक पांच वर्षों में 34 चुनाव हार चुकी है।

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