उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी सरगर्मियां तेज होते ही कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। बीजेपी की डबल इंजन सरकार द्वारा माफिया तंत्र की कमर तोड़ने और कानून का राज स्थापित करने की निरंतर कार्रवाई की जा रही है, वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के हालिया हमलों ने उनकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठित गिरोहों, कुख्यात बाहुबलियों और अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलने और अदालतों से सजा मिलने पर सपा का आक्रोश प्रदेश की जनता के सामने यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का असली मकसद वास्तव में अपराधियों को राजनीतिक कवच देना ही है? जिस दौर में आम नागरिक दंगा-मुक्त माहौल और भयमुक्त व्यापार की खुली सांस ले रहा है, उस दौर में दुर्दांतों के आर्थिक साम्राज्य के ध्वस्त होने पर विलाप करना यह स्पष्ट करता है कि सपा विकास की नहीं, बल्कि उसी पुराने गुंडाराज की वापसी की छटपटाहट में है। अदालतों के कड़े फैसलों और निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई को सियासी चश्मे से देखकर अखिलेश यादव ने साबित कर दिया है कि उनकी हमदर्दी पीड़ित जनता के साथ नहीं, बल्कि कानून को चुनौती देने वाले सिंडिकेट के साथ खड़ी है।
माफियाओं पर 15,233 करोड़ की कानूनी चोट बनाम सपा का संरक्षणवादी रवैया
उत्तर प्रदेश पुलिस और गृह विभाग के वर्ष 2026 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ और गैंगस्टर एक्ट के तहत प्रदेश भर में 23 हजार से अधिक अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए 15,233 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियों को जब्त, कुर्क या ध्वस्त किया जा चुका है। अतीक और मुख्तार जैसे माफिया गिरोहों के अवैध कब्जों से खाली कराई गई जमीनों पर गरीबों के लिए पक्के मकान बनाकर सौंपे गए। 2017 से पहले दिनदहाड़े रंगदारी, हत्या और जमीनों पर अवैध कब्जे झेलने वाले प्रदेश में जब कानून निष्पक्षता और कड़ाई से लागू हो रहा है, तब अखिलेश यादव इसे सरकारी प्रताड़ना बताकर विलाप कर रहे हैं। कानूनी कार्रवाई को जाति और मजहब के तराजू में तौलने की यह कवायद सपा के पुराने शासनकाल के अराजक तंत्र की याद दिलाती है।
Ordinary people have often felt the land mafia’s grip most sharply. Here’s what has changed for them in UP:
• 4,31,697 complaints against land mafia have been resolved
• 84,005+ hectares of government land have been freed, about 2.08 lakh acres
• ₹15,233 crore of illegal assets have been seizedBehind each complaint is a farmer, a widow or a small shopkeeper whose land was at risk. Yogi ji’s government has made it harder for land-grabbers to operate and easier for ordinary owners to get their land back.
#Mafia_Par_Prahaar https://t.co/BF4jQOz2PN
— Saffron Chargers (@SaffronChargers) October 15, 2026
‘जाति देखकर एनकाउंटर’ का फर्जी नैरेटिव: 17,043 ऑपरेशंस और 34 हजार गिरफ्तारियां
अखिलेश यादव का सबसे प्रिय चुनावी पैंतरा मुठभेड़ों में जाति और सरनेम ढूंढकर तुष्टीकरण की जमीन तलाशना रहा है। हालांकि, उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशालय द्वारा वर्ष 2026 में जारी आधिकारिक आंकड़ों ने सपा के इस षड्यंत्र को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। 2017 से 2026 के बीच पुलिस ने संगठित गिरोहों के विरुद्ध 17,043 मुठभेड़ अभियान संचालित किए, जिनमें 34,253 दुर्दांत अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और आत्मरक्षा में हुई जवाबी कार्रवाई में 289 इनामी अपराधी ढेर हुए। कानून के दायरे में हुई इन कार्रवाइयों में विकास दुबे से लेकर अतीक और मुख्तार सिंडिकेट के हर जाति-वर्ग के शार्पशूटर शामिल रहे हैं। अपराध की कोई जाति नहीं होती, लेकिन दुर्दांतों की गोलियों का शिकार होने वाले 18 बलिदानी पुलिसकर्मियों और 1,852 घायल जवानों के त्याग को नकारते हुए अपराधियों का जातिगत बचाव करना सपा के वास्तविक चरित्र को उजागर करता है।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपराध को बिल्कुल बर्दाश्त न करने (जीरो टॉलरेंस) की नीति के तहत सतत कार्रवाई करते हुए पिछले 9 वर्षों में 289 दुर्दांत अपरधियों को मुठभेड़ में ढेर किया है, एक आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी गई
इस अवधि में पुलिस के साथ मुठभेड़ की कुल 17,043 घटनाएं हुईं, जिनमें 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया
#UPPolice #Encounter #UttarPradesh
— Times Now Navbharat (@TNNavbharat) May 18, 2026
एनसीआरबी की रिपोर्ट: 180.2 अपराध दर के साथ देश में 18वें स्थान पर यूपी
सपा द्वारा फैलाई जा रही अपराध वृद्धि की भ्रामक राजनीति पर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की आधिकारिक रिपोर्ट ने पूर्ण विराम लगा दिया है। देश की कुल आबादी का 17 प्रतिशत हिस्सा समेटने वाले उत्तर प्रदेश की कुल अपराध दर (क्राइम रेट) महज 180.2 दर्ज की गई है, जो कि 252.3 के राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। देश के राज्यों में यूपी अपराध के मामले में 18वें स्थान पर, लूट की घटनाओं में 28वें और बलवा के मामलों में 19वें पायदान पर है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में तय समय पर चार्जशीट दाखिल कर त्वरित न्याय दिलाने में कानपुर 84.4 प्रतिशत और लखनऊ 83.7 प्रतिशत के साथ पूरे देश में शीर्ष पर हैं। यह आधिकारिक आंकड़े अखिलेश यादव के नकारात्मक प्रचार की हवा निकालते हैं।
🚨 NCRB रिपोर्ट के अनुसार यूपी में 2024 में 4,30,552 संज्ञेय अपराध दर्ज हुए।
▶️ अपराध दर 180.2 प्रति लाख रही।
▶️ हत्या की अपराध दर के मामले में यूपी 29वें और बलात्कार में 24वें स्थान पर रहा।
@myogiadityanath
@UPGovt
@myogioffice
@CMOfficeUP @samajwadiparty @INCIndia @ANI— ए पी सिंह (@AIMEANEWDELHI) September 23, 2026
35 लाख गरीबों को पक्के आवास: ‘सपा का पीडीए’ बनाम ‘भाजपा का लाभार्थी वर्ग’
सपा का ‘पीडीए’ केवल चुनावी जोड़-तोड़ और बाहुबलियों के बचाव का राजनीतिक मुखौटा बनकर रह गया है, जबकि भाजपा सरकार ने बिना किसी भेदभाव के दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों का वास्तविक सशक्तीकरण किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी एवं ग्रामीण) के अंतर्गत प्रदेश में वर्ष 2026 तक 35 लाख से अधिक गरीबों को पक्के आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग से आते हैं। अतीक अहमद जैसे माफियाओं से खाली कराई गई लूकरगंज (प्रयागराज) की कीमती जमीनों पर गरीबों को आशियाना मिलना इस बात का प्रमाण है कि भाजपा का मॉडल वंचितों को उनका हक दिलाना है, जबकि सपा का मॉडल बाहुबलियों का साम्राज्य बचाना रहा है।
84 हजार हेक्टेयर जमीन कब्जा मुक्त: एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स का 99% निस्तारण
सपा शासनकाल में प्रदेश भर में तालाबों, चरागाहों, ग्राम समाज और गरीब-मझोले किसानों की उपजाऊ जमीनों पर बाहुबली भू-माफियाओं का अवैध कब्जा एक आम बात बन चुकी थी। राजस्व विभाग के वर्ष 2026 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स ने अब तक 84 हजार हेक्टेयर (लगभग 2.08 लाख एकड़) जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त करा लिया है। एंटी-भूमाफिया पोर्टल पर आई 4.34 लाख शिकायतों में से 99 प्रतिशत से अधिक (4.31 लाख से ज्यादा) शिकायतों का समय पर समाधान किया गया और 1,413 बड़े भू-माफियाओं को चिह्नित कर जेल भेजा गया। अखिलेश यादव का प्रशासनिक तंत्र पर हमला वास्तव में इसी 84 हजार हेक्टेयर वाले अवैध जमीन कब्जा सिंडिकेट के ध्वस्त होने की छटपटाहट है।

‘ऑपरेशन दहन’: 418 करोड़ के नशीले पदार्थ नष्ट, ड्रग सिंडिकेट पर कड़ा वार
सपा के दौर में प्रदेश के युवाओं को नशे के अंधकार में धकेलने वाले अंतरराज्यीय ड्रग माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। योगी सरकार की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने ‘ऑपरेशन दहन’ चलाकर इस सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ दी है। वर्ष 2026 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पुलिस ने 418 करोड़ रुपये मूल्य के 1.72 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट किया है। वर्ष 2026 में ही एनडीपीएस एक्ट के तहत 4,197 मामले दर्ज कर 6,076 नशा तस्करों को जेल भेजा गया और 26 बड़े ड्रग नेटवर्क ध्वस्त किए गए। नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों को जब्त करने में उत्तर प्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। युवा पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने की इस मुहिम पर सपा का मौन उसके दोहरे चरित्र को उजागर करता है।
जेलों में वीआईपी कल्चर का अंत: 360-डिग्री सर्विलांस से टूटा समानांतर दरबार
सपा शासनकाल में प्रदेश की जेलें दुर्दांत माफियाओं के लिए ऐशो-आराम के विश्राम गृह और आपराधिक नेटवर्क चलाने के समानांतर दफ्तर बनी हुई थीं। जेल के भीतर से रंगदारी मांगना, गवाहों को धमकाना और हत्याओं की साजिश रचना आम बात थी। वर्तमान सरकार ने जेल प्रशासन में बड़ा सुधार करते हुए हाई-सिक्योरिटी बैरकों, 360-डिग्री सीसीटीवी निगरानी, बॉडी-वॉर्न कैमरों और आधुनिक मोबाइल जैमर्स के जरिए बाहुबलियों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। कुख्यात बंदियों को राज्य की अलग-अलग दूरस्थ जेलों में भेजकर उनके राजनीतिक और आपराधिक तंत्र की कमर तोड़ दी गई। जेलों को अपराध मुक्त सुधार गृह में बदलने से सपा के वे समर्थक वर्ग बेचैन हैं जो जेलों से अपनी सरकार चलाते थे।
दंगा क्षति वसूली कानून: उपद्रवियों की संपत्ति से पाई-पाई की भरपाई
सपा के कार्यकाल में विरोध प्रदर्शनों के नाम पर तोड़फोड़, आगजनी, रोडवेज बसों को फूंकना और सरकारी व निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना आम बात थी, क्योंकि उपद्रवियों को नेताओं का खुला संरक्षण मिलता था। योगी सरकार ने देश में पहली बार ‘उत्तर प्रदेश लोक एवं निजी संपत्ति क्षति वसूली कानून’ लागू कर एक मिसाल पेश की। इसके तहत क्लेम ट्रिब्यूनल बनाकर उपद्रवियों और दंगाइयों की सीधी जिम्मेदारी तय की गई और नुकसान की पाई-पाई उनकी संपत्तियों को जब्त कर वसूली गई। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के पोस्टर चौराहों पर लगाने और हर्जाना उपद्रवियों की जेब से वसूलने की इस सख्त नीति ने प्रदेश में उपद्रव और पत्थरबाजी की आदत पर हमेशा के लिए ताला लगा दिया है।
माफिया की जमीन पर अब जनता का अधिकार, यही है नए उत्तर प्रदेश की पहचान!
जहाँ कभी अवैध कब्जों और डर का राज था, वहाँ आज गरीबों के लिए आवास, युवाओं के लिए संस्थान और आम जनता के लिए जनसुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
लूकरगंज से डालीबाग और चकिया तक, माफिया से मुक्त कराई गई जमीन का इस्तेमाल जनहित में करने का संकल्प जमीन पर दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में संदेश स्पष्ट है: कानून से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई और जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता!
#Mafia_Par_Prahaar
— VIKRAM VEDHA (@VIKRAMVEDHA_007) October 15, 2026
अवैध बूचड़खानों की तालाबंदी: गो-तस्करी गिरोहों पर गैंगस्टर व रासुका का वार
2017 से पहले पूरे उत्तर प्रदेश में बेखौफ चलने वाले अवैध बूचड़खाने और अंतरराज्यीय गो-तस्करी गिरोह कानून-व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ा सिरदर्द बने हुए थे। भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही अवैध स्लॉटर हाउसों पर पूर्ण ताला लगाया और गो-तस्करी में लिप्त आपराधिक गिरोहों पर उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कड़े कानूनी प्रहार किए। गो-तस्करों की करोड़ों रुपये की काली कमाई और गाड़ियां जब्त की गईं। इसके साथ ही हजारों गो-आश्रय स्थलों की स्थापना कर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों और किसानों की आजीविका को सुरक्षित किया गया। इस अवैध धंधे के खात्मे पर सपा की खामोशी उसकी तुष्टीकरण की पुरानी नीति को उजागर करती है।
आतंकी मुकदमों की वापसी की सपा परंपरा बनाम देश की सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस
अपराध और देशविरोधी तत्वों पर सपा की नरम नीति का सबसे बड़ा प्रमाण उसका वह इतिहास है जब अखिलेश सरकार के दौरान लखनऊ, फैजाबाद, वाराणसी और गोरखपुर कचहरी विस्फोटों के संदिग्ध आतंकियों पर दर्ज गंभीर मुकदमों को ‘जनहित’ बताकर वापस लेने की सरकारी कोशिश की गई थी। उस समय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकार के इस कदम पर सख्त एतराज जताते हुए रोक लगा दी थी। आज जब भाजपा सरकार आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी ताकतों पर कड़ा शिकंजा कस रही है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी स्वतंत्रता से देश की सुरक्षा में जुटी हैं, तब सपा का सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठाना उसकी पुरानी तुष्टीकरण की सोच को ही दर्शाता है।
पुलिस शहादत का इतिहास: जब सपा राज में खाकी पर भारी पड़े थे बाहुबली
अखिलेश यादव जब आज पुलिस बल की कार्यप्रणाली और एनकाउंटर नीति पर उंगली उठाते हैं, तो वे अपनी सरकार का वह दौर भूल जाते हैं जब कानून के रखवाले ही अपराधियों के निशाने पर थे। प्रतापगढ़ के कुंडा में सीओ जिया उल हक की नृशंस हत्या और मथुरा के जवाहर बाग में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने गए एसपी मुकुल द्विवेदी व एसएचओ संतोष यादव की शहादत सपा के उस जंगलराज की गवाही देती है। उस समय पुलिसकर्मी खुद को लाचार महसूस करते थे और अपराधियों के आगे झुकने को मजबूर थे। आज योगी सरकार में पुलिस बल को अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की पूरी कानूनी छूट दी गई है, जिससे खाकी का सम्मान और जनता का भरोसा दोनों वापस लौटे हैं।
93 प्रतिशत रिकॉर्ड सजा दर: ‘गलती हो जाती है’ सोच पर कड़ा कानूनी प्रहार
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सपा का नैतिक धरातल हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। सपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा दुष्कर्म जैसे घिनौने अपराधों पर ‘लड़के हैं, लड़कों से गलती हो जाती है’ जैसी गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां करना उनके महिला विरोधी नजरिए का पक्का सबूत बन चुका है। इसके उलट, वर्ष 2026 में पुलिस महानिदेशक द्वारा जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ के मजबूत अमल से जघन्य अपराधों में राज्य की सजा दिलाने की दर (कनविक्शन रेट) 93 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है। मिशन शक्ति, पिंक बूथ और सेफ सिटी प्रोजेक्ट के जरिए त्वरित कानूनी सजा दिलाकर सरकार ने अपराधियों के मन में कानून का वास्तविक डर पैदा किया है।
यूपी-112 का 6 मिनट रिस्पांस टाइम: थानों से सपा की ‘समानांतर सत्ता’ खत्म
सपा शासन में थानों का संचालन पार्टी के स्थानीय दफ्तरों और बाहुबलियों के इशारे पर होता था, जहां आम नागरिक की कोई सुनवाई नहीं होती थी। योगी सरकार ने पुलिस तंत्र को नेताओं के दखल से पूरी तरह मुक्त कर आधुनिक तकनीक से लैस किया है। वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार, आपातकालीन सेवा ‘यूपी-112’ का मदद पहुंचाने का औसत समय 2017 के 25-30 मिनट से घटकर महज 6 से 7 मिनट पर आ चुका है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में अत्याधुनिक फॉरेंसिक फील्ड यूनिट्स और सीसीटीएनएस नेटवर्क सक्रिय हैं। जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनिवार्य उपयोग ने पुलिस पर राजनीतिक दबाव की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
एक कॉल। आज उत्तर प्रदेश में संकट में फँसी महिला को बस इतना ही करना है। 📞
112 डायल करते ही 24×7 रिस्पॉन्स नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। यह प्रदेश भर के 3,000+ पिंक बूथ से जुड़ा है, और यूपी के सभी 1,500+ थानों में महिला हेल्प डेस्क हैं जहाँ महिला अधिकारी उसकी शिकायत गंभीरता से सुनने को तैयार हैं।
त्वरित कार्रवाई, संवेदनशील पुलिसिंग और उसकी सुरक्षा के इर्द-गिर्द बनी व्यवस्था। यही सुरक्षा कवच योगी आदित्यनाथ सरकार ने यूपी की महिलाओं के लिए तैयार किया है। #Navratri_With_Yogi
— 𝐑𝐚𝐣𝐞𝐧𝐝𝐫𝐚 𝐒𝐡𝐮𝐤𝐥𝐚 (@irajendrashukla) October 19, 2026
‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’: 10 लाख कैमरों की तीसरी आंख से अपराध पर पूर्ण विराम
सपा शासन में वारदात को अंजाम देकर अपराधी बेखौफ भाग जाते थे, क्योंकि सार्वजनिक चौराहों पर निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। योगी सरकार ने जनसहयोग और नगरीय विकास के तालमेल से ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ का बड़ा सुरक्षा घेरा तैयार किया है। इसके तहत प्रदेश भर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और संवेदनशील गलियों में 10 लाख से अधिक हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे और एआई आधारित ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा चुके हैं। आधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से जुड़े इस डिजिटल निगरानी तंत्र के कारण अब कोई भी अपराधी अपराध करके छिप नहीं सकता। पूरे राज्य को कैमरों के मजबूत पहरे में लाने से अपराधियों की धरपकड़ कुछ ही घंटों में संभव हो रही है।
75 जिलों में साइबर थाने: 325 करोड़ की ठगी रोकी और 24% तक सुधरी रिकवरी
पारंपरिक संगठित अपराधों के खात्मे के साथ-साथ वर्तमान सरकार ने आधुनिक डिजिटल और ऑनलाइन ठगी पर भी कड़ा वार किया है। सपा के पूरे शासनकाल में साइबर अपराध से निपटने के लिए न कोई ढांचा था और न ही प्रशिक्षित पुलिस बल। इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में पूरे समय काम करने वाले साइबर थानों की स्थापना कर आधुनिक डिजिटल लैब तैयार की हैं। वर्ष 2026 के आधिकारिक पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, हेल्पलाइन 1930 और बैंकों से त्वरित संपर्क के दम पर ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में 325.25 करोड़ रुपये की ठगी की रकम तुरंत फ्रीज कराई गई, जिससे साइबर रिकवरी रेट 11 प्रतिशत से छलांग लगाकर 24 प्रतिशत पर पहुंच गया।
पुलिस आधुनिकीकरण: 50 लाख का शहादत सम्मान और बहुमंजिला ट्रांजिट हॉस्टल
सपा काल में पुलिसकर्मियों को टूटी-फूटी बैरकों में बुनियादी सुविधाओं के बिना रहना पड़ता था और हथियारों के नाम पर पुरानी 303 राइफलें दी जाती थीं। योगी सरकार ने पुलिस आधुनिकीकरण पर बड़ा बजट खर्च कर पुलिस बल को ऑटोमैटिक हथियारों, बुलेटप्रूफ जैकेट्स और नाइट विजन उपकरणों से लैस किया है। प्रदेश के थानों और पुलिस लाइन में बहुमंजिला आधुनिक ट्रांजिट हॉस्टल और रिहायशी कॉलोनियों का निर्माण कराया गया है। साथ ही ड्यूटी के दौरान बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों के परिजनों को मिलने वाली आर्थिक मदद को बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने के साथ-साथ परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी की पक्की गारंटी दी गई है। इस कल्याणकारी नीति ने पुलिस बल के हौसले को नई ऊंचाई दी है।
गवाह सुरक्षा योजना: बाहुबलियों के खौफ का अंत और अदालतों से सख्त सजाएं
सपा के दौर में माफियाओं का आतंक इस कदर हावी रहता था कि अदालतों में गवाह डर के साए में मुकर जाते थे और संगीन मुकदमों के आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो जाते थे। वर्तमान सरकार ने ‘विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम’ (गवाह सुरक्षा योजना) को जमीन पर पूरी कड़ाई से लागू किया है। पीड़ितों और गवाहों को चौबीसों घंटे पुलिस सुरक्षा, बंद कमरों में गवाही और जेलों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की पुख्ता व्यवस्था की गई। इस मजबूत पैरवी का नतीजा है कि संगठित गिरोहों के सरगनाओं को विभिन्न अदालतों द्वारा दर्जनों मुकदमों में उम्रकैद और कठोर सजाएं सुनाई जा चुकी हैं। सपा का दर्द यह है कि अब अदालतों के सामने बाहुबलियों को बचाने के उनके सारे पुराने पैंतरे बेकार हो चुके हैं।
मंडियों से ‘गुंडा टैक्स’ और अवैध वसूली सिंडिकेट का समूल नाश
सपा शासनकाल में प्रदेश की अनाज, फल, सब्जी मंडियों से लेकर प्रमुख व्यापारिक बाजारों तक ‘गुंडा टैक्स’ की पर्चियां कटती थीं और इनकार करने पर व्यापारियों की हत्या या अपहरण आम बात थी। योगी सरकार ने संगठित रंगदारी और अवैध वसूली के इस तंत्र को जड़ से खत्म कर दिया है। प्रदेश की प्रमुख मंडियों और व्यापारिक बाजारों को सीसीटीवी निगरानी और विशेष पुलिस दस्तों से सुरक्षित किया गया है। व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन और भयमुक्त माहौल के कारण छोटे दुकानदारों और थोक व्यापारियों को बेखौफ व्यापार करने की खुली आजादी मिली है, जिससे स्थानीय व्यापार में बड़ा उछाल आया है।
6.5 लाख पारदर्शी नौकरियां: ‘पर्ची-खर्ची’ तंत्र का अंत और 60 हजार सिपाही भर्ती
सपा शासनकाल में राज्य की भर्ती संस्थाएं भ्रष्टाचार, घूसखोरी और ‘एक ही परिवार व जाति विशेष’ के संरक्षण की शिकार थीं, जिससे सामान्य दलित और पिछड़े युवाओं का हक मारा जाता था। योगी सरकार में बिना किसी सिफारिश और रिश्वत के अब तक 6.5 लाख से अधिक युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। पुलिस विभाग में 60 हजार से अधिक पदों पर आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा को आधुनिक बायोमेट्रिक चेकिंग और डिजिटल निगरानी के साथ संपन्न कराकर सरकार ने व्यवस्था पर युवाओं का भरोसा बहाल किया है। योग्यता के दम पर मिल रहे इन अवसरों से सपा की पुरानी ‘पर्ची-खर्ची’ संस्कृति पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
कैराना से बुंदेलखंड तक पलायन का खात्मा: व्यापारियों को भयमुक्त माहौल
सपा शासन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना, कांधला जैसे कस्बों से रंगदारी, अपहरण और लूट के डर से व्यापारियों का घर-बार छोड़ना एक कड़वी सच्चाई थी। पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड तक खदान और ठेकेदारी माफिया समानांतर हुकूमत चलाते थे। वर्तमान सरकार में संगठित आपराधिक गिरोहों के खात्मे के बाद वही पलायन कर चुके व्यापारी अपने घरों को लौटकर बिना किसी डर के कारोबार कर रहे हैं। जिस सख्त कानून के राज ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक को सुरक्षा दी, उसी पुलिस तंत्र का मनोबल गिराकर अखिलेश यादव यह साबित कर रहे हैं कि उनकी संवेदना आम जनता के साथ नहीं, बल्कि अराजक तत्वों के साथ है।
भाजपा का स्पष्ट संकल्प: 2027 में तुष्टीकरण की राजनीति को फिर नकारेगी जनता
भारतीय जनता पार्टी ने दो टूक स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन ही हर नागरिक की गरिमा, सुरक्षा और विकास की गारंटी है। सपा चाहे जितने भी सियासी चोले बदल ले, उसकी मूल सहानुभूति हमेशा बाहुबलियों और दंगाइयों के साथ ही दिखाई देती है। जनता भली-भांति जानती है कि विकास और सुरक्षा केवल दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से ही संभव है, अपराधियों के आगे नतमस्तक होने से नहीं। प्रदेश की आधी आबादी, युवा और शांतिप्रिय नागरिक तुष्टीकरण और बाहुबल की इस नकारात्मक राजनीति को पहचान चुके हैं और वर्ष 2027 के चुनाव में सपा के इस एजेंडे को पूरी तरह खारिज करेंगे।
सुशासन बनाम बाहुबल की निर्णायक लड़ाई
उत्तर प्रदेश का आगामी 2027 विधानसभा चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि ‘सुशासन बनाम अराजकता’ के बुनियादी मॉडल की निर्णायक लड़ाई बन चुका है। एक ओर भाजपा सरकार का समग्र ट्रैक रिकॉर्ड है—जहां 23 हजार से अधिक अपराधियों पर नकेल कसकर माफियाओं की 15,233 करोड़ की अवैध संपत्तियों पर कानूनी चोट की गई, 17,043 ऑपरेशंस से अपराधियों के हौसले पस्त किए गए, ऑपरेशन दहन में 418 करोड़ के ड्रग सिंडिकेट का सफाया हुआ, एनसीआरबी रिपोर्ट में प्रदेश 180.2 की कम अपराध दर के साथ सुरक्षित साबित हुआ, जेलों में बाहुबलियों के समानांतर दरबार खत्म हुए, दंगा क्षति वसूली से उपद्रवियों से भरपाई कराई गई, गो-तस्करी गिरोह ध्वस्त हुए, 84 हजार हेक्टेयर जमीन कब्जा मुक्त हुई, 35 लाख से अधिक गरीबों को पक्के मकान मिले, ऑपरेशन त्रिनेत्र के 10 लाख कैमरों व 75 साइबर थानों से सुरक्षा तंत्र चाक-चौबंद हुआ, 93 प्रतिशत सजा दर व 6 मिनट के रिस्पांस टाइम से अपराधियों में खौफ पैदा हुआ और 6.5 लाख युवाओं को योग्यता के बल पर पारदर्शी नौकरियां मिलीं। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी का स्टैंड है, जो कचहरी ब्लास्ट के आरोपियों से लेकर दुर्दांत माफियाओं तक के प्रति हमदर्दी का इतिहास रखती है और अपराध पर कानूनी कार्रवाई को जाति-मजहब में बांटकर चुनावी फायदा तलाशने में जुटी है। जनता के लिए सुरक्षा, सम्मान और विकास ही सबसे पहले है; ऐसे में ‘पीडीए’ के नाम पर माफिया-परस्ती की वापसी की कोशिश सपा के लिए सियासी रूप से आत्मघाती साबित होना तय है।
सीएम योगी के बयान के मुताबिक, प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थानों की व्यवस्था और फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट का गठन अपराधों की जांच क्षमता को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
फॉरेंसिक जांच के जरिए अपराध से जुड़े वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करने में मदद मिल सकती है।
आखिर साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश में क्या-क्या कदम उठाए गए हैं? साइबर थानों और फॉरेंसिक सुविधाओं से जांच व्यवस्था को किस तरह मजबूती मिल सकती है?
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— Newstrack (@newstrackmedia) October 18, 2026









