भारत के चुनावी मैदान में लगातार मिल रही पराजय के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हताश और निराश हो चुके है। तीन आम चुनाव में जनता द्वारा ठुकराये जाने के बाद राहुल गांधी की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं। इसलिए विदेशी ताकतों से मदद पाने के लिए अलग-अलग देशों का दौरा किया। मार्च 2023 में लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि भारतीय लोकतंत्र के ढांचे पर बर्बर हमला हो रहा है। उन्होंने अफसोस जताया था कि अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के लोकतांत्रिक देश इस पर ध्यान देने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने खुलेआम भारत में दखल देने की अपील की थी। अब उस अपील का असर भारत से लेकर लंदन तक दिखाई देने लगा है। राहुल गांधी के लगातार विदेशी दौरों की सच्चाई अब सामने आने लगी है।
लेकिन राहुल गांधी के विदेश दौरों से क्या हासिल होता है?
2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले राहुल गांधी लंदन में थे और वहां वे अमेरिका और यूरोप जैसी विदेशी ताकतों से भारत के लोकंतत्र में हस्तक्षेप करने की अपील कर रहे थे। https://t.co/eQMDOeRnRT— Hardik Bhavsar (@Bitt2DA) December 10, 2025
ध्रुव राठी की अपील के बाद लंदन में प्रदर्शन
जो लोग कल तक बोल रहे थे कि भारत में हो रहे प्रदर्शन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ नहीं है, वो अब देख सकते हैं कि कैसे विदेशी ताकतें लंदन की सड़कों पर अपनी भागीदारी का परिचय दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और हिन्दू विरोधी ताकतों का पोस्टर ब्वॉय और यूट्यूबर ध्रुव राठी की सक्रियता बता रही है कि विदेशी टूलकिट किस तरह काम कर रहा है। ध्रुव राठी की अपील के बाद 17 अक्टूबर को लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया गया। नई दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में ब्रिटेन के कई संगठनों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसफआई) के बैनर तले आयोजित किया गया।
INDIAN YOUTH TAKE THE PROTEST TO LONDON!
Outside the Indian High Commission, diaspora members led by SFI Britain unit comrades raised their voices for democracy. From Delhi to London, the demand for accountability crosses borders.
#LondonProtest #Democracy
@seekingsrishti https://t.co/LVe25B3khm— Subhankar Bera (@subhankar_org) October 17, 2026
लंदन में लगे भारत से आजादी-आजादी के नारे
जहां भारत में प्रशांत भूषण जैसे देश विरोधी खुलकर रिजीम चेंज की बात कर रहे हैं, वहीं विदेशों में बैठे इनके समर्थक भी अब खुलकर मैदान में आ चुके हैं। लंदन में हुए प्रदर्शन में जिस तरह आजादी…आजादी के नारे लगाए गए, उससे पता चलता है कि इसका आयोजन भारत के टुकड़े-टुकड़े गैंग ने किया था। इस गैंग को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन हासिल है। इस प्रदर्शन में लंदन में रहने वाले पाकिस्तानी भी शामिल थे, जिन्होंने भारतीय छात्र संगठन एसएफआई का छात्र बनकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
जो लोग कल तक बोल रहे थे कि इसमें विदेशी ताकतों का हाथ नहीं है, वो अपने दीदे खोल के देख लो।
ये लंदन की गालिया है जहां आजादी मांगी जा रही है और मांग कौन रहा है भारत से आजादी ये मजेदार बात है — पाकिस्तानी जिह!दी।
रक्षा मंत्री जी फिर पाकिस्तान को दे दो आजादी।
😜😂🤗🔥 https://t.co/AVhAEyunzL
— FIGHTER 3.0 🚩 (@AAjju_33) October 17, 2026
सर पर उजली टोपी और मुंह पर मास्क लगाकर फोटो खींचते नजर आया ध्रुव राठी
एसएफआई के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन में यूट्यूबर ध्रुव राठी सर पर उजली टोपी और मुंह पर मास्क लगाकर फोटो खींचते नजर आया। बता दें कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की ब्रिटेन इकाई ने भी इसी सप्ताह कार्डिफ, लीड्स और एडिनबर्ग में सभाएं आयोजित कीं। इसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया और मतदान के अधिकार तथा विरोध करने की स्वतंत्रता की रक्षा की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करने की मांग का समर्थन किया।
लंदन में SFI के मुट्ठी भर वामपंथी छात्रों का फ्लॉप शो! “हजारों” नहीं, बस कुछ लोग CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शोर मचा रहे थे।
उधर मोदी समर्थकों ने काउंटर प्रोटेस्ट किया और प्रधानमंत्री का पुतला लगाकर जवाब दिया। ध्रुव राठी दीवार के पीछे छुपकर वीडियो बना रहा था।
विदेश में भी मोदी जी का डंका बज रहा है, भारत विरोधी एजेंडा फेल हो गया। 🇮🇳
— कल्पना श्रीवास्तव 🇮🇳 (@Lawyer_Kalpana) October 17, 2026
ध्रुव राठी ने लंदन पहुंच कर किया था प्रदर्शन का ऐलान
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के 10 अक्टूबर वाले प्रदर्शन में सीजेपी का साथ देने भारत आए ध्रुव राठी अब लंदन पहुंच गए हैं। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने शनिवार 17 अक्टूबर को ब्रिटेन की राजधानी लंदन में संसद चौक पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लंदन में मौजूद लोगों से दोपहर 12 बजे प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। राठी ने कहा कि अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का समय आ गया है।
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने वोट चोरी के आरोपों के मुद्दे पर लंदन में विरोध प्रदर्शन के लिए लोगों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने लोगों से कल दोपहर 12 बजे पार्लियामेंट स्क्वायर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास पहुँचने का आह्वान किया है।
#DhruvRathee #GyaneshKumar #VoteChori #LondonProtest #ParliamentSquare
— NBT Hindi News (@NavbharatTimes) October 17, 2026
ध्रुव राठी के साथ लंदन से उठेगी लोकतंत्र की आवाज़! 🇮🇳✊
📍Saturday, 17 Oct (12 pm) at Parliament Square, London🇬🇧
Save Democracy, Save India’s Electoral Process! https://t.co/c8R1WkQLOS— Sandeep Bisht (@iSandeepBisht) October 16, 2026
जवाब में लगे ‘मोदी- मोदी’ और ‘जय श्री राम’ नारे
लंदन में प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने तिरंगा लहराया और प्रधानमंत्री के पक्ष में नारे लगाए। ‘भारत माता की जय’, ‘मोदी- मोदी’ और ‘जय श्री राम’ नारे लगा प्रधानमंत्री और भारत सरकार के प्रति अपना समर्थन जताया। प्रधानमंत्री मोदी समर्थक प्रवासी भारतियों ने कॉकरोचों के खिलाफ भी नारा लगाया। उन्होंने कहा, “एक-दो कॉकरोच को फेंक दो।” मौजूद लोगों ने कहा कि वो विदेशों में भारत की छवि बचाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। उनका मानना है कि कुछ प्रदर्शन ऐसे हैं, जिनका मकसद देश की साख को नुकसान पहुंचाना है।
लंदन में लगे नारे, एक दो कॉकरोच को फेंक दो
#London #LondonProtest #LondonNews #SFI #SFIProtest #DhruvRathee #IndianPolitics #ProtestSlogans #viralvideoシ #CapitalTV https://t.co/hgmgHPM4uj
— Capital TV (@capitaltvindia) October 17, 2026
भारत को बदनाम करने की हो रही है कोशिश
लंदन में रहने वाले एक भारतीय ने बताया कि इस सभा का उद्देश्य उन कोशिशों का विरोध करना था, जिन्हें वे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की कोशिश मानते हैं। उन्होंने कहा, “आज हम लंदन के भारत भवन में उन लोगों का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए हैं, जो हमारी नजर में भारत को बदनाम कर रहे हैं। भारतीय राष्ट्रवादी होने के नाते, हम उनके कामों का जवाब देने और अपने देश के बचाव में आवाज उठाने के लिए एक साथ आए हैं।”
इंग्लैंड : लंदन में PM मोदी के समर्थन में उतरे भारतीय प्रवासी
◆ उन्होंने भारतीय उच्चायोग के बाहर कांग्रेस समर्थित NSUI और इसी तरह के अन्य समूहों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों के जवाब में एक जवाबी प्रदर्शन किया
#London | London | England | #England https://t.co/t6cYU2SokP
— News24 (@news24tvchannel) October 17, 2026
अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल की दखलंदाजी
वॉशिंगटन राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल ने बुधवार 14 अक्टूबर को भारत में वोटर लिस्ट से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर चिंता जताई थी। उन्होंने इसे मतदाताओं के नामों की ‘सफाई’ या बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कार्रवाई बताते हुए सवाल उठाए। जयपाल ने भारत की स्थिति की तुलना अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की उन कार्रवाइयों से की, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे लोकतंत्र में मतदान के अधिकार को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोकतंत्रों की रक्षा करना जरूरी है और भारतीयों को भी अमेरिकियों की तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव मिलने चाहिए। प्रमिला जयपाल डेमोक्रेटिक सांसद है, जबकि ट्रंप रिपब्लिकन हैं। प्रमिला जयपाल ने भारत में कथित लोकतंत्र-विरोधी प्रयासों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों का समर्थन भी किया।
I am deeply concerned about the actions of the Indian government to purge 130 million people from the voting rolls. This appears to be a similar playbook to what the Trump Administration is doing here at home to undermine voting rights in a democracy.
— Rep. Pramila Jayapal (@RepJayapal) October 14, 2026
भारत ने प्रमिला जयपाल को दिया दो टूक जवाब
प्रमिला जयपाल की टिप्पणी पर अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने गुरुवार 15 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब दिया। उन्होंने कहा किभारत की चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर जयपाल की टिप्पणियां देश के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां स्वतंत्र और मजबूत संवैधानिक संस्थाएं हैं तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का लंबा इतिहास रहा है। क्वात्रा ने यह भी कहा कि वे प्रमिला जयपाल के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं, ताकि उनकी गलतफहमियों को दूर किया जा सके।
The remarks by @RepJayapal on India’s electoral and political processes are unacceptable interference in India’s internal affairs.
India is a vibrant democracy, with robust, independent constitutional institutions and a longstanding record of free and fair elections. Always open to constructive conversation with the Congresswoman to dispel her misconceptions.
— Amb Vinay Mohan Kwatra (@AmbVMKwatra) October 15, 2026
UN मानवाधिकार संगठन द्वारा सीजेपी प्रदर्शन पर टिप्पणी
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने शनिवार 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों को बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई थी। साथ ही, उसने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार का सम्मान करने और बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करने की अपील की थी।
The Delhi authorities must immediately release Cockroach Janta Party leaders Saurav Das and Ashutosh Ranka. https://t.co/EGlMSWJZ9t
— Amnesty International USA (@amnestyusa) October 14, 2026
प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पर जतायी थी चिंता
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता थमीन अल-खीतान ने कहा कि कार्यालय “दिल्ली में आज हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को भारत में बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने की खबरों से चिंतित है। हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार का पूरा सम्मान करें और उसे सुनिश्चित करें। शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों पर लगाई जाने वाली पाबंदियां जरूरत और आनुपातिकता की कड़ी कसौटी पर खरी उतरनी चाहिए।”
— UN Human Rights (@UNHumanRights) October 10, 2026
भारत का मानवाधिकार संगठन को जवाब
भारत ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर अपने ‘India at UN’ अकाउंट से कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि OHCHR की चिंताएं गलत हैं। भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था को दुनिया के दूसरे हिस्सों में हो रहे बड़े पैमाने के विरोध-प्रदर्शनों पर ध्यान देना चाहिए। भारत ने कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। हमारे संविधान में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और विरोध जताने का अधिकार दिया गया है। इस अधिकार की रक्षा मजबूत संस्थाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया करते हैं। हर लोकतंत्र की तरह भारत में भी लोग सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान रखते हुए और तय नियमों के तहत इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं। अधिकारी कानून के मुताबिक काम करते हैं और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए देश की अदालतें सभी के लिए खुली हैं।”
We have seen the OHCHR’s remarks about today’s events in New Delhi. India is the world’s largest democracy, where the right to peaceful assembly is guaranteed by our Constitution and safeguarded by robust institutions, an independent judiciary and a free media. As in every democracy, Indian citizens exercise this right subject to reasonable restrictions in the interest of public order. The authorities, for their part, act in accordance with the law, and our courts remain available to all for redressal of any grievances. The OHCHR’s concerns are therefore misplaced and constitute an unwarranted interference in the internal affairs of India. In this context, OHCHR would also do well to devote comparable attention to large-scale protests elsewhere, consistent with its mandate of impartiality and non-selectivity. @MEAIndia @IndianDiplomacy @PMOIndia @DrSJaishankar @abagchimea
— India at UN, Geneva (@IndiaUNGeneva) October 10, 2026
भारत ने OHCHR के दोहरे मापदंड की पोल खोली
भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की मानवाधिकार संस्थाओं के दोहरे मापदंडों, राजनीतिक पक्षपात और बिना सबूतों के रिपोर्ट तैयार करने के रवैये को लेकर उनकी कड़े शब्दों में आलोचना की है। भारत ने OHCHR पर ‘चयनात्मक रवैया’ (Extreme Selectivity) अपनाने का आरोप लगाया। भारत ने साफ कहा कि यूएन की यह संस्था दुनिया के अन्य हिस्सों और भारत के पड़ोसी देशों में होने वाले हिंसक प्रदर्शनों या उन पर की जाने वाली पुलिसिया कार्रवाई पर पूरी तरह चुप रहती है, लेकिन भारत के मामलों में तुरंत टिप्पणी करती है। ऐसे दोहरे मापदंडों से इस वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता खत्म होती है।
MUST WATCH VIDEO! India exposes OHCHR’s double standards on Pakistan’s human rights record #india #pakistan #ohchr #humanrights #unitednations #indianews #diplomacy #humanrightsviolations #globalaffairs #mustwatch #ddnews https://t.co/kyGAxJBsup
— DD NEWS CHHATTISGARH (@ddnewsraipur) October 15, 2026
बांग्लादेशी छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने दिया CJP प्रदर्शन को समर्थन
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के नेता नाहिद इस्लाम ने भारत में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में बयान जारी किया। उन्होंने चुनावी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे भारतीय युवाओं के साथ एकजुटता जताई। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के आयोजकों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई। साथ ही, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियों को बुनियादी स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की। साथ ही हिंदुत्व आधारित बहुसंख्यकवाद पर सवाल उठाते हुए भारतीय युवाओं से अपील की।
STATEMENT OF SOLIDARITY WITH THE YOUTH OF INDIA
Dhaka, Bangladesh | 10 October 2026
To the youth and democratic forces of India,
We stand in firm solidarity with the young people of India demanding electoral accountability and defending their democratic rights. Recent detentions of peaceful protesters, organizers, and journalists in New Delhi, alongside internet suspensions and restrictions at Jantar Mantar, directly threaten fundamental freedoms. Concerns regarding electoral integrity and institutional independence require transparent answers, not barricades and censorship.
This struggle is not yours alone. From Dhaka, we stand with you as friends bound by a common demand for accountable power, democratic institutions, and human dignity.
We know this struggle intimately, because we have lived it. In July 2024, our student led movement against recruitment quotas transformed into a nationwide uprising against 15 years of authoritarian rule. The state responded with live ammunition. The United Nations later estimated that as many as 1,400 people were killed during the uprising and its suppression. We deeply remember and honor the solidarity shown by Indian students, writers, and independent voices during our uprising.
We recognize India’s rich traditions of democratic resistance. The women of Shaheen Bagh defended equal citizenship through a Delhi winter, while generations of students at JNU and Jadavpur University have sustained organised dissent. These remain invaluable democratic inheritances. Today, we once again see the courage of young Indian women on the streets. In Bangladesh, women were also at the forefront of the July Revolution; their courage and sacrifices helped secure our victory.
Hindutva majoritarianism, fascism, and every form of religious supremacy must not define the future of South Asia. We reject authoritarianism, communal hatred, and political intolerance in India just as we reject them in Bangladesh. Our shared future must rest on communal harmony and social justice, irrespective of religion, caste, gender, or class. No society is truly democratic while minorities live in fear, dissent is criminalized, and citizenship is conditional on identity.
We call upon Indian authorities to respect the right to peaceful assembly, disclose the whereabouts and legal grounds for detaining protest organizers, immediately release those held for exercising their rights, and ensure journalists can report without intimidation or equipment seizure.
Today, many young leaders have been unjustly detained. Sharjeel Imam and Umar Khalid continue to be kept behind bars for years without trial. We regard all of India’s young protesters and prisoners of conscience as comrades. Their courage inspires young people across South Asia.
Our struggles are interconnected, extending to unresolved issues of border killings, water sharing, environmental protection, and national sovereignty. We seek a South Asia where nations treat each other as equals, governments remain accountable, and sovereignty is never an excuse for domination.
To the democratic people of India: from Dhaka, and from the unfinished democratic aspirations of our July generation, we stand with you. Stand firm, protect one another, reject communal hatred, and refuse to surrender the future of South Asia to fascism and division.
Inqilab Zindabad.
— Nahid Islam (@NahidIslam_24) October 10, 2026
नाहिद इस्लाम ने की शाहीन बाग की महिलाओं की तारीफ
नाहिद इस्लाम आगे कहा, यह संघर्ष केवल आपका नहीं है। ढाका से हम आपके साथ दोस्तों की तरह खड़े हैं। हम जवाबदेह सत्ता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मानवीय गरिमा की साझा मांग से जुड़े हैं। नाहिद इस्लाम ने भारत में लोकतांत्रिक विरोध की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा, हम भारत में लोकतांत्रिक प्रतिरोध की समृद्ध परंपराओं को पहचानते हैं। शाहीन बाग की महिलाओं ने दिल्ली की सर्दियों में समान नागरिकता के अधिकार की रक्षा की। वहीं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और जादवपुर विश्वविद्यालय में कई पीढ़ियों के छात्रों ने संगठित विरोध की परंपरा को बनाए रखा है। ये लोकतंत्र की अनमोल विरासत हैं।
Now Dhruv Rathee and CJP have received support from Bangladesh as well.🚨
After his release from jail, Dhruv Rathee made a video showing his passport and urging the youth to fight against the BJP.
https://t.co/UlAOVLEUdm
— TEJBAL SINGH (@thetbsje) October 12, 2026
हिंदुत्व और अल्पसंख्यकों पर क्या कहा?
नाहिद इस्लाम ने कहा कि दक्षिण एशिया का भविष्य हिंदुत्व के नाम पर बहुसंख्यकों के दबदबे, फासीवाद और किसी एक धर्म को दूसरों से ऊपर रखने की सोच से तय नहीं होना चाहिए। हम भारत में ठीक उसी तरह सत्तावाद, सांप्रदायिक नफरत और राजनीतिक असहिष्णुता को खारिज करते हैं, जैसे हम बांग्लादेश में करते हैं। उन्होंने कहा, हमारा साझा भविष्य सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक न्याय पर आधारित होना चाहिए। इसमें धर्म, जाति, लिंग या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। कोई भी समाज वास्तव में लोकतांत्रिक नहीं हो सकता, जहां अल्पसंख्यक डर में रहते हों, असहमति जताने को अपराध बना दिया जाता हो और नागरिकता किसी की पहचान पर निर्भर करती हो।
Nahid Islam, the Bangladeshi opposition leader who helped lead the 2024 student uprising that forced Sheikh Hasina from power, expresses concerns over detentions of protesters, internet suspensions in Delhi.
— Divyansh Dubey दिव्यांश दुबे דיוויאנש דובאי (@divyanshd______) October 11, 2026
पित्रोदा की सोरोस से 10 अरब डॉलर के निवेश की अपील
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा है कि यदि अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस भारत में अच्छे काम के लिए 10 अरब डॉलर का निवेश करना चाहते हैं, तो उस प्रस्ताव पर नीति और उद्देश्यों के आधार पर विचार किया जा सकता है। हालांकि पित्रोदा ने कहा कि ऐसे निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन करना और इस पर अंतिम निर्णय लेना सत्ता में बैठे लोगों या सरकार का काम है। जॉर्ज सोरोस के संगठन ओपन सोसाइटी फाउंडेशन और दुनियाभर में उसके निवेश को लेकर पहले भी राजनीतिक बहस होती रही है। ऐसे में पित्रोदा के इस बयान पर भी चर्चा हो रही है। सैम पित्रोदा ने यह बात मीडिया से बातचीत के दौरान कही।
कांग्रेस जॉर्ज सोरोस को लेकर आई है
राहुल गांधी के मेंटर सैम पित्रोदा कहते हैं-
“अगर जॉर्ज सोरोस कुछ अच्छा करने के लिए 10 अरब डॉलर का निवेश ला रहे हैं, तो शायद इस पर विचार किया जा सकता है। यह मुमकिन है…” https://t.co/uGij903rTJ
— Oc updates (@ocupdate) October 15, 2026









