कार्नेगी एंडोमेंट के ‘ग्लोबल प्रोटेस्ट ट्रैकर’ के अनुसार, अक्टूबर 2026 में 8 से 13 देशों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, हिंसा और आगजनी की घटनाएं दर्ज की गईं। शुरुआत में ये प्रदर्शन शिक्षा और महंगाई जैसे आम आदमी के बुनियादी मुद्दों से जुड़े प्रतीत होते थे, लेकिन अब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मीडिया (विशेष तौर पर फॉक्स न्यूज) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे इन हिंसक प्रदर्शनों के पीछे एक बड़े वैश्विक नेटवर्क की साजिश है। इस रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली से लेकर पेरिस तक फैले इन आंदोलनों और प्रदर्शनों के बीच एक गहरा ‘सीक्रेट नेटवर्क’ और वैचारिक तालमेल काम कर रहा है।
‘CHAOS INC’: Fox News Digital investigation identifies 101 organizations across 9 countries coordinating a growing protest network that has already put 500,000 demonstrators in the streets of France.
Activists are calling supporters back to the streets Saturday for “Acte II,” with 212 mobilizations planned and a coordinated European youth strike set for Nov. 20.
The network spans communist, socialist, Antifa and Islamist groups in what investigators describe as a “red-green” alliance, with U.S.-based amplifiers including CodePink and organizations funded by American tech tycoon Neville Roy Singham.
Full story here https://t.co/aQNg3EZ2uW
— Fox News Politics (@foxnewspolitics) October 20, 2026
13 देशों के 101 संगठनों का ‘सीक्रेट ग्लोबल नेटवर्क’
फॉक्स न्यूज डिजिटल की एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 13 देशों के 101 संगठन मिलकर एक ‘सीक्रेट ग्लोबल नेटवर्क’ चला रहे हैं। शुरुआती दौर में फ्रांस के छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़े लगभग 50 संगठनों की पहचान की गई थी, जो बढ़कर 54 और हालिया जांच रिपोर्ट में विभिन्न देशों में फैले 101 संगठनों तक पहुंच गई है। इस सीक्रेट संगठनों को ‘रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम’ नाम दिया गया है। इस खुलासे के मुताबिक फ्रांस की सड़कों पर मचे बवाल से लेकर भारत और अन्य मुल्कों में युवाओं के नेतृत्व में होने वाले बड़े आंदोलनों के तार आपस में सीधे जुड़े हुए हैं। यह नेटवर्क स्थानीय मुद्दों और जनआक्रोश को हवा देकर सीमाओं के पार अराजकता फैलाने और उसका दायरा बढ़ाने का काम कर रहा है।
CHAOS INC: A Fox News Digital investigation by @FoxNews Digital’s senior editor of investigations @AsraNomani has identified 54 organizations behind France’s escalating protests — a sprawling network of communist parties, revolutionary socialist groups, labor unions, Palestine-solidarity organizations and international media outlets working to transform grievances into a full-blown revolt against capitalism, government austerity and military spending.
Now, 28 communist and socialist youth organizations across 12 European countries are mobilizing for a coordinated November 20 strike under the slogan “Fight for Our Future, Not Their Wars,” calling for walkouts, blockades, occupations and mass demonstrations.
Among the international amplifiers: organizations tied to Neville Roy Singham, a Marxist tech tycoon living in Shanghai, whose network includes Tricontinental and BreakThrough News, a New York-based outlet that published advance coverage of the weekend’s mayhem in France.
Full story here https://t.co/a70dnRs1Nb
— Fox News Politics (@foxnewspolitics) October 19, 2026
क्या है रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम ?
हालिया खुफिया खुलासों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में ‘रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम’ (Red-Green Protest Ecosystem) शब्द का इस्तेमाल दुनिया भर में हो रहे उग्र प्रदर्शनों, दंगों और छात्र आंदोलनों के पीछे सक्रिय एक वैचारिक और सामरिक गठजोड़ को समझाने के लिए किया गया है। इस इकोसिस्टम में मुस्लिम, वामपंथी, समाजवादी संगठन, ट्रेड यूनियनें, छात्र संगठन, एडवोकेसी नेटवर्क और कुछ मीडिया संस्थान सक्रिय रूप से शामिल हैं। आइए जानते हैं, इसमें ‘रेड’ और ‘ग्रीन’ शब्द का इस्तेमाल क्यों किया गया है…
‘रेड’ (लाल): इसका संबंध पारंपरिक रूप से वामपंथी (Left-wing), कम्युनिस्ट, मार्क्सवादी और समाजवादी संगठनों से है। ये समूह पूंजीवादी व्यवस्था के विरोध, आर्थिक असमानता, मजदूरों के अधिकारों और सरकार विरोधी नीतियों को लेकर मुखर रहते हैं।
‘ग्रीन’ (हरा): इस विशेष संदर्भ में ‘ग्रीन’ का प्रयोग पर्यावरणविदों के लिए नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा इस्लामी संगठनों के वैचारिक नेटवर्क को दर्शाने के लिए किया गया है, जो दुनिया के कई देशों में खास मुद्दों पर आंदोलनों के दौरान इन वामपंथी समूहों के साथ तालमेल बिठाते हैं।
Biggest Expose on CJP/Marxist protest in India.
1. As @AsraNomani and @FoxNews found Red-Green circles behind the violent protest in France, I have dug it a bit further and found the most shocking details.
Please read and share this thread maximum.👇 https://t.co/XaEeqPYA26
— Office Of Vijay Patel (@VijayGajeraO) October 22, 2026
रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम कैसे काम कर रहा है?
वामपंथी और इस्लामिस्ट गठजोड़ वाले इस नेटवर्क की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें वैचारिक रूप से भिन्न दिखने वाली विचारधाराएं एकसाथ मिलकर काम करती हैं। यह नेटवर्क अलग-अलग देशों के स्थानीय असंतोष को एक मंच पर लाकर उसे अंतरराष्ट्रीय रंग देने की रणनीति अपनाता है। दुनिया के अलग-अलग कोनों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों के लिए यह नेटवर्क गुप्त टेलीग्राम ग्रुप्स, विशेष वेबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करता है। इसके जरिए पोस्टर, नारे और एजेंडे एक देश से दूसरे देश में तुरंत साझा किए जाते हैं। युवाओं को पूंजीवाद, युद्ध नीतियों, महंगाई और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ भड़काकर सड़कों पर उतारा जाता है।
फ्रेंच दंगों और भारत के विरोध प्रदर्शनों का एक ही नेटवर्क?
Fox News की senior editor असरा नोमानी की investigation में 9 देशों के 101 संगठनों की पहचान की है।
रिपोर्ट इस नेटवर्क को “Reg-Green protest ecosystem” कहती है, जिसमें वामपंथी और इस्लामिस्ट संगठनों के बीच कथित तालमेल की बात कही गई है।
रिपोर्ट में पेरिस की ‘इंडियन अलायंस पेरिस’ (IAP) का ज़िक्र है, जिस पर फ्रांस और भारत में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े संदेशों को जोड़ने का आरोप है।
रिपोर्ट प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल का भी ज़िक्र करती है जिसने 16 oct की एक ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में हुए विरोध प्रदर्शनों को एक साथ लाया इस सोच के साथ कि क्या इन विद्रोह से एसी political शक्ति पा सकते हैं जो सत्ता बदल सके?
https://t.co/8X0EjeBjzd
— Rubika Liyaquat (@RubikaLiyaquat) October 22, 2026
रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम का मुख्य एजेंडा क्या है?
खुफिया रिपोर्ट्स और विश्लेषकों के अनुसार, इस ‘रेड-ग्रीन’ गठजोड़ का मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक सरकारों पर दबाव बनाना और सामाजिक-राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना है। पश्चिमी देशों की नीतियों, वैश्विक पूंजीपतियों और सैन्य खर्चों के खिलाफ युवा हड़तालों का आयोजन करना। यदि किसी एक देश (जैसे फ्रांस या भारत) में कोई छात्र आंदोलन या विरोध प्रदर्शन शुरू होता है, तो यह नेटवर्क तुरंत उसे दूसरे देशों में प्रचारित कर, वैचारिक और डिजिटल समर्थन जुटाता है।
Freedom to loot!
Is this the revolution that the self styled liberal left ecosystem planned?
Destroy the nation, its rich culture, traditions & heritage?
Is there merit in claims that a RED-GREEN ECOSYSTEM is destroying France?
Radical Left-Islamist ecosystem tandem Ops.
Beware!! https://t.co/ENeJ3YZvZu— GAURAV C SAWANT (@gauravcsawant) October 18, 2026
33 संगठन युवाओं द्वारा सीधे तौर पर संचालित
13 देशों के 101 संगठनों में से कम से कम 33 संगठन सीधे तौर पर छात्र या युवा समूहों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। युवा पीढ़ी मुख्य रूप से इंस्टाग्राम, टिकटॉक, टेलीग्राम और एक्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रहती है। यह नेटवर्क आकर्षक ग्राफिक्स, छोटे वीडियो और भड़काऊ रील्स के जरिए युवाओं तक अपनी पहुंच बनाता है। विरोध प्रदर्शनों की रणनीति तैयार करने, भड़काने वाले नारे देने और पुलिस या प्रशासन की नजरों से बचने के लिए गुप्त टेलीग्राम चैनलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे युवा आसानी से जुड़ जाते हैं।
🚨 HUGE! Foreign report LINKS French riots to Delhi Gen Z protests demanding CEC Gyanesh Kumar’s resignation.
Reports: 101 groups tied to the protest network.
BJP calls it proof of a “REGIME CHANGE”, citing Rahul & Sonia Gandhi’s April 2025 meeting with Progressive International Organisation representatives. https://t.co/v5S9GUgS5e
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) October 22, 2026
Gen-Z के नाम पर युवाओं को भड़काने की रणनीति
युवाओं को जेनरेशन-Z (Gen-Z) के नाम पर लामबंद किया जा रहा है। युवाओं को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे दुनिया के किसी एक कोने में खड़े होकर वैश्विक अन्याय (जैसे युद्ध, असमानता या पुलिस कार्रवाई) के खिलाफ एक बड़ी ऐतिहासिक क्रांति का हिस्सा बन रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों या हिंसक झड़पों के दौरान इन युवा समूहों को अक्सर ‘अग्रिम मोर्चे’ पर रखा जाता है। गिरफ्तारी देने, पुलिस बैरिकेड तोड़ने या नारेबाजी करने के लिए छात्रों और युवाओं को आगे किया जाता है, ताकि पर्दे के पीछे बैठे वैचारिक और रणनीतिक संचालक सुरक्षित रहें। सोशल मीडिया पर ‘विद्रोही’ या ‘क्रांतिकारी’ छवि पेश करके युवाओं के मन में यह भावना भरी जाती है कि वे किसी बड़े बदलाव के नायक हैं, जिससे वे बिना परिणामों की परवाह किए आंदोलनों में कूद पड़ते हैं।
Gen Z is rising up worldwide
Eight major protests are unfolding right now — driven largely by cost-of-living pressures, education funding cuts, and housing crises https://t.co/znB4BEzo1L
— RT (@RT_com) October 19, 2026
देशों की समस्याएं भिन्न, विरोध का तरीका व नैरेटिव समान
जांच में यह भी रेखांकित किया गया है कि अलग-अलग देशों की समस्याएं भले ही भिन्न हों, लेकिन उनके विरोध का तरीका, नैरेटिव और टाइमिंग बिल्कुल एक जैसी नजर आती है। यह पूरा ढांचा किसी सीमा में बंधा नहीं है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की तरह काम करता है जो दुनिया भर में सरकारों के खिलाफ असंतोष भड़काने और विरोध को खाद-पानी देने के लिए तालमेल बिठाता है। वैश्विक सुरक्षा और आंतरिक शांति के लिहाज से इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है।
🚨 GEN Z PROTESTS HIT 12 EUROPEAN COUNTRIES IN 48 HOURS. HERE’S WHAT HAPPENED TO EACH:
🇬🇷 Greece — about 10,000 MARCHED through Athens: “From Greece to France, we want public, free education”
🇬🇷 Greece — students CAMPED outside Parliament, marches in Thessaloniki, Patras and Larissa
🇦🇱 Albania — government buildings and banks set ON FIRE, tear gas and water cannon for an 8th straight day
🇫🇷 France — Paris police BANNED today’s student march, Lyon banned its marches too
🇫🇷 Marseille — a CURFEW on minors every night until Friday
🇮🇹 Italy — Meloni’s EMERGENCY decree lowers the presumed age of criminal responsibility to 14 (Irish Times)
🇮🇹 Italy — Naples’ Federico II university OCCUPIED, 10+ Florence high schools taken over
🇵🇹 Portugal — police CLEARED the Lisbon and Porto camps, 55 arrested (home prices more than doubled since 2017)
🇪🇸 Spain — Madrid teachers on strike 6 days, Ayuso’s government REFUSES to negotiate
🇧🇪 Belgium — 250+ ARRESTED at Brussels youth protests in two weeks
🇦🇹 Austria — Vienna students MARCH today against a 10% university cut
🇩🇪 Germany — Gen Z protests called in 21 cities
🇨🇭 Switzerland — student groups call a national strike
🇷🇸 Serbia — students run for power on Sunday
🇮🇪 Ireland — Cork student housing protests “far from done”AFTERMATH:
550,000 marched in France in ONE DAY last weekend
2,400+ arrested in France that same weekend
295 injured in Albania (63% of them police)
Rallies planned across 50 Greek cities
12 countries in revolt in 48 hoursEurope’s governments bet on curfews, bans and tear gas.
Gen Z made sure the next country over joined in.This is not a one-country protest.
This is the beginning of something much bigger.— 🇨🇳 Guo Shen 郭深 (@GuoShenCN7) October 22, 2026
‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ ने प्रदर्शनों को एक मंच पर लाया
फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट में ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। यह एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संगठन है, जिसने 16 अक्टूबर की एक ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को एक मंच पर लाने का काम किया। रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि क्या ये उभरते हुए विद्रोह एक संगठित राजनीतिक शक्ति का रूप ले सकते हैं, ताकि उन हालात को बदला जा सके जिनकी वजह से ये विद्रोह पैदा हुए हैं। भारत में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों में चुनाव आयोग के खिलाफ भी प्रदर्शन शामिल हैं, जहां प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
Global investigation exposes Anarchy and Regime Change Plot of Congress!
Investigation report titled “Global Chaos inc grows to 101 groups” flags how communist organization Progressive International( PI) was coordinating common messaging between protest in France, Albania and India.
Aim of the messaging was :” Acquiring organized power through new rebellion”.: Regime change!
Rahul Gandhi and Sonia Gandhi had met Progressive International at 10 Janpath on 10th April 2025!
This further proves Rahul Gandhi and Congress is in the remote control of Foreign Anti Democratic Forces!
Congress must reveal:
– Was it coordinating with Progressive International during protest
– What was messaging between Congress and this organization when protest were ongoing.
– Rahul Gandhi moving to Vietnam is it related to taking instructions from many such organization for November 1 Anarchic protest.
– Sanjay Raut posting about Albania was not a mere coincidence. Albania is the country mentioned in the report.
In India the Regime Change attempt; anarchy attempt through violence on street could fail because of Indian Democracy being protected under PM Modi’s govt.
Congress must answer!
Congress Regime Change Plot gets exposed in global investigation
https://t.co/Z1M3XHzv8H
— Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) October 22, 2026
दिल्ली-पेरिस कनेक्शन: ‘इंडियन अलायंस पेरिस’ की भूमिका
फॉक्स न्यूज़ की जांच में ‘इंडियन अलायंस पेरिस’ (IAP) का ज़िक्र है। यह फ्रांस में स्थित छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों का एक संगठन है, जो फ्रांस और भारत के विरोध-प्रदर्शनों के संदेशों को आपस में जोड़ने का काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संगठन ने फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों को बढ़ावा दिया है और इनकी तुलना भारत में युवाओं द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों से की है। इस संगठन और इससे जुड़े कुछ प्लेटफॉर्म्स ने फ्रांस और भारत (दिल्ली) में हुए युवा विरोध प्रदर्शनों के बीच समानता दिखाते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर किए थे। फॉक्स न्यूज़ द्वारा उद्धृत एक सोशल मीडिया पोस्ट में, इस संगठन ने दोनों देशों के युवा प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए लिखा: “जेन ज़ी (Gen Z) के लिए: फ्रांस में, भारत में, आज के लिए बहुत बढ़िया (Bravo)।”
एक जांच रिपोर्ट में फ्रांस में हुए दंगों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भारत में हो रहे युवा प्रदर्शनों के बीच संभावित संबंधों का दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, नौ देशों में 101 संगठनों के एक कथित ‘रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम’ की पहचान की गई है. इसमें फ्रांस स्थित संगठन इंडियन अलायंस पेरिस (IAP) का भी उल्लेख है, जिस पर फ्रांस और भारत में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े संदेशों को जोड़ने का दावा किया गया है. रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के 16 अक्टूबर के एक ब्रीफिंग का भी हवाला दिया गया है, जिसमें फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे प्रदर्शनों का एक साथ जिक्र किया गया था. हालांकि, इन प्रदर्शनों के बीच समन्वित संबंध होने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है.
#GyaneshKumar #FranceRiots #IndianPolitics #Protests #ProgressiveInternational #GlobalPolitics #ABPNews
— ABP News (@ABPNews) October 22, 2026
ब्रेकथ्रू न्यूज़, भारत-फ्रंस और नेविल रॉय सिंघम का कनेक्शन
फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक ‘ब्रेकथ्रू न्यूज़’ ने फ्रांस और भारत में हुए विरोध प्रदर्शनों को कवर किया, और इन्हें सरकारी नीतियों के खिलाफ चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आंदोलन के हिस्से के रूप में पेश किया। इसने सोशल मीडिया अभियानों और राजनीतिक संदेशों के जरिए विरोध प्रदर्शनों को और व्यापक बनाने में मदद की। यह कम्युनिस्ट और समाजवादी समूहों से जुड़ा संगठन है, जिसका संबध नेविल रॉय सिंघम से बताया गया है। नेविल रॉय सिंघम एक अमेरिकी व्यवसायी, टेक अरबपति और वामपंथी विचारधारा के समर्थक हैं। फिलहाल सिंघम चीन के शंघाई में रहते हैं। उन पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के प्रचार तंत्र से जुड़े होने और विभिन्न देशों के वामपंथी संगठनों, कार्यकर्ताओं और मीडिया पोर्टल्स को करोड़ों डॉलर की फंडिंग करने का आरोप है। भारत में उन पर चीनी प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप वाले न्यूज पोर्टल ‘न्यूज़क्लिक’ (NewsClick) को फंडिंग करने का आरोप है, जिसकी जांच भारत की प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दिल्ली पुलिस द्वारा की गई है।
Here is the report by @FoxNews and @AsraNomani, in which they found that China funded protests with the help of Singham, which turned into riots in France.
Just like in India, local Marxist unions also played their role. https://t.co/uDIt98yxT1
— Office Of Vijay Patel (@VijayGajeraO) October 21, 2026
विजय प्रसाद का “पेरिस-नई दिल्ली-ब्यूनस आयर्स” और सिंघम कनेक्शन
फॉक्स न्यूज के खुलासों में दिल्ली से लेकर पेरिस तक सक्रिय कथित ‘सीक्रेट नेटवर्क’ की चर्चा के दौरान ‘ट्राइकॉन्टिनेंटल’ (Tricontinental: Institute for Social Research) और इसके कार्यकारी निदेशक विजय प्रसाद का नाम प्रमुखता से सामने आया है। ट्राइकॉन्टिनेंटल एक अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान है, जो मुख्य रूप से वामपंथी, समाजवादी और वैचारिक मुद्दों पर अध्ययन, लेख और रिपोर्ट प्रकाशित करता है। भारतीय मार्क्सवादी इतिहासकार, लेखक और राजनीतिक विचारक विजय प्रसाद इस संस्था के कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि इस एनजीओ को नेविल रॉय सिंघम द्वारा फंडिंग की जाती है। विजय प्रसाद ने 18 अक्टूबर को ‘X’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट में पेरिस, नई दिल्ली और ब्यूनस आयर्स में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच समानताएं बताईं। उन्होंने लिखा: “पेरिस-नई दिल्ली-ब्यूनस आयर्स” और आगे जोड़ा, “गुस्से को अपना समय लेने दें, क्योंकि गुस्सा एक ताकत बन सकता है।”
Paris-New Delhi-Buenos Aires
Let fury have the hour, anger can be power.
(The Clash, Clampdown, London Calling, 1979). https://t.co/UC3KyYDY8n— Vijay Prashad (@vijayprashad) October 18, 2026
SFI के निथीश, ट्राइकॉन्टिनेंटल और चीन कनेक्शन
16 अक्टूबर 2026 को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया – यूनाइटेड किंगडम (SFI-UK) के सदस्यों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में यूट्यूबर ध्रुव राठी ने हिस्सा लिया था। एसएफआई जैसे वामपंथी संगठनों और और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के कथित प्रोपेगेंडा नेटवर्क के बीच की कड़ियों को लेकर कई खुलासे हुए हैं। इसी कड़ी में एसएफआई के केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े निथीश नारायणन की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। निथीश नारायणन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के उपाध्यक्ष और इसके केंद्रीय सचिवालय के सदस्य हैं।
निथीश नारायणन केवल SFI तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय संस्थान ‘ट्राइकॉन्टिनेंटल: इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिसर्च’ के एशिया डेस्क से बतौर शोधकर्ता (Researcher) भी जुड़े हुए हैं। निथीश पर आरोप है कि वे नेविल रॉय सिंघम द्वारा फंड किए गए ‘ट्राइकॉन्टिनेंटल’ के ज़रिए चीनी सरकार के साथ काम करते हैं। निथीश नारायणन ने कई बार चीन का दौरा किया है। जांच रिपोर्ट्स में यह आशंका जताई जाती है कि ऐसे दौरों और संवादों के जरिए विदेशी जमीन से भारत विरोधी या पश्चिमी विरोधी नैरेटिव को वैचारिक खाद-पानी मिलता है, जिसका असर घरेलू राजनीति और छात्र आंदोलनों पर भी पड़ता है।
3. Now meet SFI VP, Nitheesh Narayanan. He works with the Chinese government via Nevial Roy Singham-funded Tricontinental.
They are also behind the riots in France. https://t.co/qKhsF4Eali
— Office Of Vijay Patel (@VijayGajeraO) October 21, 2026
SFI, AISF, AISA, PSU, AISB और CJP कनेक्शन
भारत में, Gen-Z के नेतृत्व वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने AISA और SFI जैसे वामपंथी छात्र संगठनों के साथ साझेदारी की है और मतदाता सूचियों तथा पूर्व की परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जनता की चिंताओं को हवा देते हुए सड़क पर प्रदर्शन के अवसर तलाशे। 28 जून को, AISA (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा सहित तीन कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर 23 दिनों की भूख हड़ताल शुरू की। AISA, CPI(ML) लिबरेशन का छात्र संगठन है। SFI (एसएफआई) और AISF (एआईएसएफ) जुलाई में इसमें शामिल हो गए, और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
सितंबर 2026 में, उन्हीं संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 6 अक्टूबर को, वामपंथी और कम्युनिस्ट छात्र मोर्चों SFI, AISF, AISA, PSU और AISB ने 10 अक्टूबर को CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करने की घोषणा की। जबकि ये समूह भारत में जमीनी स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं, इन्हें विदेशों से उन समूहों का समर्थन मिला है जो लंबे समय से भारत के हितों के खिलाफ काम करते रहे हैं। ऐसा ही एक समूह ‘इंडियन अलायंस पेरिस’ (IAP) है, जिसने फ्रांस और भारत के प्रदर्शनों के बीच समानताएं बताईं।
In September 2026, the same orgs turned on CEC Gyanesh Kumar. On 6 October, left & communist student fronts SFI, AISF, AISA, PSU & AISB announced joining CJP’s Oct 10 protest, demanding the CEC’s resignation & prosecution, & mobilising street protests.
5/n https://t.co/pXmoOszCAn
— DisInfo Lab (@DisinfoLab) October 17, 2026
‘ग्लोबल कैओस’ का खतरनाक प्लान और आगे की योजनाएं
‘ग्लोबल ‘केओस इंक’ (Chaos Inc) बढ़कर 101 समूहों का हो गया है और ये नए सिरे से प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। इस नेटवर्क से जुड़े संगठन केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपनी पहुंच को वैश्विक स्तर पर फैला रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल यूथ स्ट्राइक नेटवर्क यूरोप और अन्य क्षेत्रों में एक बड़ी समन्वित युवा हड़ताल की योजना बना रहा है। इसके घोषणापत्र में पूंजीवाद, युद्ध, भारी सैन्य खर्च और आर्थिक नीतियों के खिलाफ युवाओं को भड़काने का एजेंडा शामिल है। अभियानों के संचालन के लिए गुप्त टेलीग्राम ग्रुप्स, विशेष वेबसाइट्स और साझा पोस्टर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे दुनिया के एक कोने में बैठे लोग दूसरे देश के आंदोलनों से तुरंत जुड़ सकें।
‘Regime Change’ Row: Foreign Report Twist
➜ Report: 101 groups linked to protest network.
BJP’s @pradip103: “Investigation report titled “Global Chaos inc grows to 101 groups” flags how communist organization Progressive International was coordinating common messaging between protest in France, Albania & India… The aim of the messaging was: “Acquiring organized power through new rebellion”: Regime change! Rahul Gandhi and Sonia Gandhi had met Progressive International at 10 Janpath on 10th April 2025!… Congress Regime Change Plot gets exposed in global investigation”
@bhavatoshsingh, @Anchoramitaw and @HeenaGambhir explain what the report claims and detail the BJP’s allegations against the Congress.
— TIMES NOW (@TimesNow) October 22, 2026









