प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू की गई ‘उड़ान’ (UDAN) योजना ने अपने सफल और ऐतिहासिक 10 वर्ष पूरे कर ली है। ‘उड़े देश का आम नागरिक’ के संकल्प को साकार करते हुए, पीएम मोदी ने देश के आम आदमी के लिए हवाई यात्रा को न केवल सुलभ बनाया, बल्कि भारत के क्षेत्रीय विमानन नक्शे को भी पूरी तरह से बदल दिया। कभी देश के दूर-दराज और छोटे शहरों के लिए हवाई जहाज का सफर एक सपना हुआ करता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की इस महत्वकांक्षी पहल ने देश के छोटे कस्बों से लेकर महानगरों तक आसमान की दूरियों को समेटने का काम किया है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है, जिसके केंद्र में पीएम मोदी की यही जन-कल्याणकारी और प्रगतिशील सोच रही है।
साल 2014 में देश में चालू हवाई अड्डों की संख्या जहां महज 74 थी, वहीं 21 अक्टूबर 2016 में उड़ान योजना शुरू होने के बाद से 2026 में यह संख्या बढ़कर 166 तक पहुंच गई है। इस ऐतिहासिक उछाल के केंद्र में उड़ान योजना ही रही है, जिसने 687 क्षेत्रीय रूटों और 95 नए एयरोड्रोम (जिनमें 17 हेलीपोर्ट और 2 वाटर एयरोड्रोम शामिल हैं) को सक्रिय किया है। अप्रैल 2017 में शिमला से दिल्ली के बीच पहली उड़ान सेवा शुरू होने के बाद से अब तक 3.68 लाख से अधिक उड़ानों का संचालन किया जा चुका है। इसके जरिए करीब 1.72 करोड़ से ज्यादा यात्रियों ने पहली बार या किफायती दरों पर हवाई यात्रा का आनंद लिया है। इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 तक 5091.23 करोड़ रुपये से अधिक की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) जारी की है।
विमानन क्षेत्र के इस विस्तार ने रोजगार के मोर्चे पर भी नई क्रांति ला दी है। वर्ष 2014 में इस सेक्टर में जहां लगभग 30 लाख नौकरियां थीं, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 77 लाख हो चुकी है। अनुमान है कि 2040 तक नागरिक उड्डयन क्षेत्र में रोजगार का यह आंकड़ा 2.5 करोड़ को पार कर जाएगा।
भौगोलिक दृष्टि से कठिन और दुर्गम पूर्वोत्तर भारत के लिए यह योजना जीवनदायिनी साबित हुई है। पूर्वोत्तर राज्यों में 90 प्राथमिकता वाले आरसीएस (RCS) रूट चालू किए गए हैं। इस क्षेत्र के 52 चिन्हित हवाई ठिकानों में से 12 को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है, जिससे वहां पर्यटन, आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं और स्थानीय व्यापार को भारी रफ्तार मिली है।
देश भर में स्थापित हुए नए हवाई अड्डों ने स्थानीय स्तर पर सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिखी है। बिहार के पूर्णिया में 2025 में चालू हुए 2.8 किमी लंबे रनवे वाले हवाई अड्डे ने सीमांचल और कोसी क्षेत्र के 10 से अधिक जिलों की किस्मत बदल दी है। अब पटना और कोलकाता का सफर घंटों की जगह महज 1 से 2 घंटे में पूरा हो रहा है, जिससे स्थानीय मखाना और लीची व्यापार को नया एयर कार्गो बाजार मिला है।
इसी तरह, अरुणाचल प्रदेश का तेजू हवाई अड्डा चीन सीमा से सटे इलाकों के 2 लाख से अधिक लोगों के लिए संजीवनी बना है, जिससे गुवाहाटी का सफर 10 घंटे से घटकर 1 घंटा रह गया है। झारखंड के देवघर हवाई अड्डे ने बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले 10 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी दी है और देवघर एम्स के कारण मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिला है। वहीं राजस्थान के किशनगढ़ हवाई अड्डे ने अजमेर-पुष्कर के धार्मिक पर्यटन और स्थानीय मार्बल उद्योग के वैश्विक निर्यात को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
सफलता के इस प्रथम दशक के बाद सरकार ने 4 जुलाई 2026 को उड़ान योजना के अगले चरण यानी ‘संशोधित उड़ान’ को औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। यह नया चरण वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक यानी पूरे 10 वर्षों के लिए लागू किया जाएगा, जिसके लिए कुल 28,840 करोड़ रुपये का विशाल बजट मंजूर किया गया है। ‘संशोधित उड़ान’ का मुख्य फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और स्थायित्व पर है। इसके तहत बिना हवाई सेवा वाले इलाकों में 100 नए हवाई अड्डे विकसित करने के लिए 12,159 करोड़ रुपये और 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने के लिए 3,661 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही, 441 एयरड्रोम के संचालन और रखरखाव (O&M) के लिए 2,577 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने में भी बड़ी भूमिका निभा रही है। स्वदेशी विमान निर्माण को बढ़ावा देने के लिए पवन हंस हेतु दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और अलायंस एयर हेतु दो एचएएल डॉर्नियर विमानों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त एयरलाइंस को सहायता देने के लिए 10 वर्षों में 10,043 करोड़ रुपये का VGF फंड तय किया गया है। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के लिए 21 एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं और हवाई पट्टियों के चयन के लिए ‘चैलेंज मोड पोर्टल’ शुरू किया गया है। 10 सालों की यह यात्रा साबित करती है कि उड़ान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि भारत के आम जन-जीवन, कनेक्टिविटी और आर्थिक समृद्धि को जोड़ने वाली एक मजबूत डोर बन चुकी है।










