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प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट ने खोली केजरीवाल के दिल्ली मॉडल की पोल, दिल्ली जल बोर्ड से लोगों की सबसे अधिक शिकायतें, पानी की कमी और गंदे पानी की आपूर्ति सबसे बड़ी समस्या

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अगले साल पंजाब सहित कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इस लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आजकल चुनावी पर्यटन पर निकले हैं। जिस राज्य में जाते हैं, वहां मुफ्त बिजली, पानी और विकास के दिल्ली मॉडल की चर्चा कर लोगों को सपने दिखाने का कोई मौका नहीं चूकते हैं। लेकिन प्रजा फाउंडेशन ने ‘दिल्ली में नागरिक मुद्दों की स्थिति’ संबंधी एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसने केजरीवाल के दिल्ली मॉडल की हवा निकाल दी है।

दावा प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट विभिन्न सरकारी एजेंसियों को 2020 में अलग-अलग माध्यमों से मिली कुल तीन लाख 36 हजार 868 शिकायतों पर आधारित है। इनमें सबसे अधिक दो लाख 27 हजार 973 शिकायतें दिल्ली जल बोर्ड से संबंधित है। इनमें भी गंदे पानी की आपूर्ति सबसे बड़ी समस्या है। इसके अलावा एक लाख 45 हजार 316 शिकायतों को डीजेबी द्वारा अन्य में वर्गीकृत किया गया है ।

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली वालों की कुल शिकायतों में 47 प्रतिशत ‘पानी की कमी’ और ‘पानी की आपूर्ति नहीं होने’ से संबंधित थीं, यानि हर पांच में से तीन शिकायतें पेयजल से जुड़ी हैं। वहीं, 27 प्रतिशत यानि 38 हजार 663 शिकायतें गंदे पानी की आपूर्ति से संबंधित थीं। इनके अलावा पानी की लाइन में लीकेज, कम दबाव वाला पानी, पानी की आपूर्ति नहीं होने, पानी की बर्बादी जैसी शिकायतें आम हैं। पानी की मांग और आपूर्ति के बीच काफी अंतर है।

दिल्ली में गंदे पानी की समस्या कभी खत्म न होने वाला मुद्दा है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में टाइफाइड के 20 हजार 370 मामले और दस्त दो लाख 39 हजार 575 मामले सामने आए थे। इसमें बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने की वजह दूषित पानी था। यही नहीं, कोरोना महामारी के दौरान पानी और साफ जैसी मूलभूत नागरिक सेवाओं के प्रति राज्य सरकार द्वारा ध्यान भी नहीं दिया गया।

दिल्ली के साथ व्यावहारिक दिक्कत यह है कि यहां एक साथ एक ही स्थान पर कई एजेंसियां काम करती हैं। उनके क्षेत्राधिकार को लेकर लोगों में काफी भ्रम है। इसके बाद भी दूसरे विभाग से संबंधित शिकायतों को साझा करने की कोई परस्पर और आसान व्यवस्था नहीं है। इसके चलते नागरिकों की न तो शिकायतें सुनी जाती हैं और न ही लंबे समय तक समस्याएं दूर होती हैं।

पानी को लेकर केजरीवाल के झूठे दावे

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की तीसरी बार सरकार बनने के बाद अरंविद केजरीवाल ने दिल्ली जल बोर्ड की जिम्मेदारी सत्येंद्र जैन को सौंप दिया था।राजेंद्र नगर विधानसभा से पहली बार विधायक बने राघव चड्ढ़ा को दिल्ली जल बोर्ड का वाइस चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा बुराड़ी के संजीव झा और देवली से विधायक प्रकाश जरवाल को सदस्य बनाया गया है। सत्येंद्र जैन से पहले जल बोर्ड की जिम्मेदारी अरविंद केजरीवाल के पास ही थी। इस दौरान केजरीवाल ने कई झूठे दावे किए, जिसका नतीजा है कि दिल्ली की जनता को आज भी पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। आइए देखते केजरीवाल ने कब-कब पानी को लेकर झूठे वादे किए…

2014 : पांच साल के अंदर पूरी दिल्ली में पानी की पाइप लाइन बिछायेंगे।

2015 : दिल्ली के लिए शर्म की बात है कि देश की राजधानी के हर घर में पानी नहीं आता। पांच साल में पाइप लाइन बिछायेंगे। हर घर की टोटी में पानी आएगा।

2016 : दिसंबर 2017 तक यानि 22 महीने के अंदर दिल्ली की हर कॉलोनी के सभी घरों के अंदर पाइप से पानी पहुंच जाएगा। जो पानी आएगा वो पीने वाला होगा। आप सीधे जल बोर्ड का पानी पी सकते हैं। आरो से ज्यादा अच्छा पानी आएगा।

2019 : हमें उम्मीद है कि 2024 तक दिल्ली के हर नागरिक को 24 घंटे पानी उनकी टोटी में मुहैया कराने में कामयाब होंगे।

आइए देखते हैं पानी को लेकर स्थानीय लोगों को लोगों किस तरह मुश्किलों का सामना करना पड़ता है…

  • महिलाओं को पानी के लिए 5 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है।
  • पानी का टैंकर आने का कोई एक निश्चित समय नहीं है।
  • 5 मिनट भी लेट होने का मतलब है कि उन्हें पानी नहीं मिलेगा।
  • 15,000 की आबादी के लिए केवल 4-5 पानी के टैंकर ही आते हैं।
  • स्थानीय लोगों का कहना है कि वाटर टैंकर दिन में दो बार आता हैं।

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