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मोदी के 4 अमेरिकी दौरे से बदला 7 दशकों का इतिहास, रिश्तों का स्वर्णिम काल

भारत-अमेरिका संबंधों में आयी मजबूती पर एक विशेष रिपोर्ट

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”हमें इतिहास से निकलने में संकोच नहीं करना चाहिए। आज हमारा रिश्ता संकोच से बाहर आ चुका है। आपने हमें बैरियर को ब्रिज में बदलने में सहायता की।”

अमेरिकी संसद में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा कही गई इस बात को पीएम मोदी ने 08 जून, 2016 को अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए दुहराई थी। लेकिन इस बात की प्रासंगिकता आज हमें साफ-साफ दिखाई भी दे रही है। अमेरिका की अधिकतर नीतियों में भारत को प्राथमिकता दी जा रही है और भारत-अमेरिका के बीच आपसी विश्वास और परस्पर सहयोग नये मुकाम पर पहुंच गया है।

लेकिन, 2014 से पहले का वह दौर याद कीजिए जब भारत और अमेरिका के रिश्ते हिचकोले खा रहे थे। विदेश मामलों से लेकर घरेलू मुद्दों पर अमेरिकी थिंक टैंक भारत के साथ सहज नहीं था। कई मोर्चों पर तल्खी बढ़ रही थी और आर्थिक मोर्चे पर सहयोग में भी अस्थिरता थी। आतंकवाद के मामले में अमेरिका भारत के पक्ष को समझ तो रहा था, लेकिन खुलकर साथ नहीं आ रहा था। रूस के साथ भारत के बेहतर संबंध अमेरिका-भारत रक्षा सहयोग में आड़े आ रहा था। इसके साथ ही वैश्विक परिदृश्य में दो ध्रुवीय शक्ति के कमजोर पड़ने के साथ ही अप्रासंगिक हो चुकी भारत की ‘गुटनिरपेक्ष’ नीति भी कन्फ्यूजन के दौर से गुजर रही थी।

लेकिन 26 मई, 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभाली तो देश के विजन में भी व्यापक बदलाव देखने को मिला। पीएम मोदी ने घरेलू नीतियों के साथ फॉरेन पॉलिसी को एक नया आकार देना शुरू कर दिया। पड़ोसी देशों के साथ संबंध बेहतर करने के साथ ही पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका संबंध को नये सिरे से रेखांकित किया। विश्व के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच बराबरी के आधार पर परस्पर विश्वास और समान हितों पर साझा सहयोग की भावना को स्थान मिला, और दोनों देशों के बीच संबंध सहज होते चले गए। बदली वैश्विक परिस्थिति में कई मुद्दों पर अड़चनों के बावजूद आज भारत-अमेरिका का एक ‘विश्वस्त’ साझेदार है।

ट्रम्प ने किया ‘सच्चे मित्र’ का सत्कार
प्रधानमंत्री मोदी ने जब से देश की कमान संभाली है वे पांच बार अमेरिका के दौरे पर जा चुके हैं। हर यात्रा के साथ भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई गरमाहट देखने को मिली है, और हर यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और पीएम मोदी के सहज संबंध तो विश्व के कूटनीतिज्ञों के समझ से परे थी, अब डोनाल्ड ट्रम्प ने भी पीएम मोदी को ‘सच्चा मित्र’ बताकर भारत-अमेरिका के संबंध को एक नया आयाम देने की कोशिश की है।

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खुले दिल से ‘महान प्रधानमंत्री’ का स्वागत
सोमवार रात तकरीबन 1.30 बजे पुर्तगाल से अमेरिका पहुंचे पीएम मोदी का खुले दिल से स्वागत किया गया। यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें ‘महान प्रधानमंत्री’ तक करार दिया। पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की ये पहली मुलाकात थी। इस पहली मुलाकात में ही ट्रम्प और मोदी की जबरदस्त केमिस्ट्री दिखी। इ मुलाकात के दौरान ट्रम्पने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करना हमारे लिए सम्मान की बात है।

मोदी दौर में नयी ऊंचाई पर भारत-अमेरिका संबंध 
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि भारत और अमेरिका के रिश्ते 21वीं सदी की सबसे बड़ी घटना होगी। इस बात की सच्चाई पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात के परिदृश्य से भी उभरी है। दोनों नेताओं की बात से साफ है कि भारत व अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों में गरमाहट आगे भी बनी रहेगी।

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मोदी की पहल से चीन-पाकिस्तान में खलबली
दोनों देशों के संयुक्त बयान में पहली बार भारत और अमेरिका ने सीधे तौर पर पाकिस्तान को आगाह किया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों में आतंकी घटनाओं को अंजाम दिलाने के लिए नहीं करे। साथ ही पाकिस्तान से यह भी कहा गया है कि वह मुंबई हमले और इस तरह के अन्य हमलों के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए कदम उठाये। दोनों देशों ने चीन को भी अपरोक्ष रूप से चेतवानी देते हुए कहा है कि समुद्री विवादों में संयुक्त राष्ट्र की तरफ से तय नियमों और अन्य अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन करना आवश्यक है।

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OBOR पर चीन को लताड़
भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में चीन की महात्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड (OBOR) की तरफ भी इशारा किया गया है। इसमें कहा गया है कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के विकास को लेकर ज्यादा पारदर्शी योजना बनाने की जरूरत है और इसके लिए कर्ज देने या वित्तीय संसाधन देने की नीति भी ज्यादा उत्तरादायी होनी चाहिए। इसमें दूसरे देशों की संप्रभुत, कानून व पर्यावरण का भी ध्यान रखना चाहिए। जाहिर है दोनों देशों के संयुक्त बयान चीन और पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी है।

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पाकिस्तान को झटके पे झटका
पाकिस्तान को दी गई भारत-अमेरिका की चेतावानी उसके लिए कुछ ही घंटों के भीतर दूसरा बड़ा झटका है। सोमवार को ट्रंप-मोदी मुलाकात से कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी सरकार ने हिज्बुल आतंकी सैयद सलाहुद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया। भारत और अमेरिका ने अल कायदा, हिज्बुल, डी-कंपनी, लश्कर, जैश जैसे खूंखार आतंकी संगठनों के खिलाफ भी अपने सहयोग को लगातार मजबूत करने की बात कही है। इसमें से चार आतंकी सगंठन पाकिस्तान आधारित ही हैं।

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कई क्षेत्रों में बढ़ रहा सहयोग
पिछले चार सालों के दौरान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर हितों के बढ़ते समन्वय पर आधारित एक ‘वैश्विक रणनीतिक साझीदारी’ में तबदील हो गए हैं। आज, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय सहयोग व्यापार से लेकर निवेश, रक्षा और प्रतिरक्षा, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, उच्च प्रौद्योगिकी, नागरिक नाभिकीय ऊर्जा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण, कृषि एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को नया आधार मिला है।

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‘इतिहास की हिचकिचाहट’ हुई खत्म
वर्ष 2016 में 8 जून को जब पीएम मोदी ने अमेरिकी संसद को संबोधित किया था तो उन्होंने साफ कहा था कि भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों ने ‘इतिहास के संकोच’ को खत्म कर दिया है। यानि पीएम मोदी ने यह साफ किया कि भारत और अमेरिका के बीच परस्पर विश्वास और सहयोग का एक नया वातावरण बना है जिसपर अतीत के ‘अविश्वास’ की परछाइयां नहीं हैं।

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पीएम मोदी ने बदल दी अमेरिका की सोच
2014 से पहले अमेरिका भारत को एक बाजार के तौर पर तो जरूर देखता था, लेकिन उसकी सामरिक नीतियां पाकिस्तान परस्त थीं। सैन्य सहायता का मामला हो या फिर हथियारों की खरीद का मामला, पाकिस्तान हमेशा से अमेरिका की प्राथमिकता में था। लेकिन बीते तीन सालों में पीएम मोदी की कोशिशों से पाकिस्तान एक आतंकवादी राष्ट्र के तौर पर दुनिया में जाना जाने लगा है। आज आलम ये है कि अमेरिका ने पाकिस्तान की आधी से ज्यादा सहायता भी बन कर दी है। साफ है कि पीएम मोदी अमेरिका को भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों  और आतंकवाद के कारणों को समझा पाने में सफल रहे।

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‘मोदी सिद्धांत’ को मिली मान्यता
पीएम मोदी अपनी नीतियों को लेकर इतने स्पष्ट हैं कि अमेरिका में भी ‘मोदी सिद्धांत’ का लोहा माना जाने लगा। दरअसल इस सिद्धांत का आधार बराबरी है जिसे अमेरिकी थिंक टैंक ने भी सराहा है। अमेरिकी थिंक टैंक का मानना है कि मोदी की विदेश नीति में दोनों देशों के साझा हित को स्थान दिया गया है। इस साझा हित के कारण ही किसी भी देश को यह न लगे कि वह उससे कुछ ले रहा है, या कोई किसी को कुछ दे रहा है। अमेरिकी थिंक ने इसी बराबरी के व्यवहार और साझा हितों को मोदी सिद्धांत कहा है।

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अमेरिकी दौरे से क्या हुआ हासिल?
पहली यात्रा- 26-30 सितंबर, 2014
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार 26 से 30 सितंबर, 2014 तक अमेरिका के दौरे पर रहे। इस दौरे में पीएम मोदी और तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्‍ट के लिए संयुक्‍त संपादकीय लिखा। इस संपादकीय का मूल उद्देश्य दोनों देशों के लोगों को दोनों ही राष्ट्राध्यक्षों की दृष्टि से अवगत कराना था। इस यात्रा में पीएम मोदी ने न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वॉयर में अप्रवासी भारतीयों को अलग से संबोधित किया।

पीएम मोदी की पहली यात्रा की उपलब्धियां

  • अमेरिकी डिफेंस कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग (Make in India) का प्रस्ताव
  • अमेरिका से विशाखापट्टनम, इलाहाबाद, अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए समझौता
  • डब्ल्यूटीओ में व्यापार सरलीकरण के मुद्दे और खाद्य सुरक्षा पर बात आगे बढ़ी
  • भारतीय सर्विस कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार को खोलने पर बात आगे बढ़ी
  • आतंकवाद की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा और आतंकवाद से लड़ाई में सहयोग
  • इंटेलीजेंस में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी
  • अमेरिका-भारत असैन्य परमाणु सहयोग समझौता लागू करने के लिए प्रतिबद्धता

जलवायु परिवर्तन को लेकर समझौते

  • कम कार्बन और जलवायु- अक्षय ऊर्जा के लिए 1 अरब डॉलर तक का निवेश प्रस्ताव
  • असैनिक परमाणु ऊर्जा सहयोग के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने पर एक संपर्क समूह की स्थापना
  • वेस्टिंग हाउस और GE-हिटाची प्रौद्योगिकी वाले बिजली संयंत्रों सहित परमाणु पार्कों की स्थापना
  • पावर ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को विकसित करने के लिए कार्यक्रम
  • स्वच्छ ऊर्जा (पीएसीईई) कार्यक्रम के माध्यम से प्रचार ऊर्जा पहुंच का विस्तार
  • स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक नया स्वच्छ ऊर्जा वित्त मंच का गठन।
  • जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र ढांचा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के प्रति प्रतिबद्धता
  • एचएफसी के खपत और उत्पादन में कमी को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के महत्व को स्वीकार किया गया
  • जलवायु अनुकूलन योजना के लिए नया यूएस-भारत भागीदारी 
  • जलवायु परिवर्तन और हवा की गुणवत्ता पर कार्य का एक नया कार्यक्रम
  • यू.एस.-भारत जलवायु फैलोशिप कार्यक्रम

आर्थिक और व्यापारिक विकास

  • विकास और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण पर निवेश की पहल
  • भारत में इंफ्रास्टक्चर विकास के लिए आधारभूत सहयोग सहयोग मंच की स्थापना

रक्षा और मातृभूमि सुरक्षा सहयोग

  • राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रक्षा सहयोग का विस्तार करने पर समझौता
  • भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका एक स्थायी भागीदारी का निर्माण करेगा जिसमें दोनों पक्ष प्रत्येक

दूसरी अमेरिका यात्रा- 23-28 सितंबर, 2015
सितंबर 2015 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के लिए न्यूयॉर्क का दौरा किया। इस दौरान वे तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिले और द्विपक्षीय संबंधों पर भी बात की। इस दौरे की सबसे बड़ी खासियत रही उनका सेन जोंस, कैलिफोर्निया का दौरा, जहां वे शीर्ष कंपनियों के 500 सीईओ से मिले।

इस यात्रा के दौरान एप्पल के सीईओ टिम कुक ने डिजिटल इंडिया पहल में भागीदार बनने की इच्छा व्यक्त की। इसी यात्रा में माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नाडेला, गूगल के सुंदर पिचाई, क्वालकॉम के पॉल जैकब्स, सिस्को के जॉन चैम्बर्स से डिजिटल इंडिया पर चर्चा की।

इस यात्रा में उन्होंने सिख समुदाय के सदस्यों और कुछ अन्य प्रमुख प्रवासी भारतीयों के साथ भी अलग-अलग बातचीत की। इसके अलावा पीएम मोदी ने टेस्ला मोटर्स का भी दौरा किया।

तीसरी अमेरिका यात्रा – 31 मार्च- 01 अप्रैल, 2016

प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 के मार्च में परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका का तीसरा दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत की परमाणु सुरक्षा में वैश्विक साझेदारी के प्रति भारत की भूमिका और प्रतिबद्धता बताई। उन्होंने विश्व समुदाय को यह बताने में सफलता हासिल की कि परमाणु संसाधन अगर आतंकियों या नॉन स्टेट एक्टर्स के हाथ लग जाएंगे तो कितना विनाशकारी हो सकता है।

पीएम मोदी विश्व के प्रमुख देशों को यह समझा पाने में सफल रहे कि प्रौद्योगिकियों तक आतंकियों की पहुंच पर रोक लगाई जाए।

इस दौरे की खास उपलब्धियों में LIGO प्रोजेक्ट के लिए भारत में 1200 करोड़ की मंजूरी मिलनी रही। 

चौथी अमेरिका यात्रा – 6-8 जून, 2016

चौथी अमेरिका यात्रा तत्कालीन तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष आमंत्रण पर हुआ। ये आधिकारिक यात्रा उपलब्धियों से भरी रही जिसने भारत और अमेरिका के संबंधों को नया आयाम दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस यानि संसद को संबोधित किया।

अमेरिकी संसद को ऐतिहासिक संबोधन
पीएम मोदी भारत के पांचवें ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अमेरिकी संसद को संबोधित किया है। लेकिन पीएम मोदी का यह संबोधन भारत के स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा हो गया है। दरअसल जिस अमेरिकी कांग्रेस के ज्वाइंट सेशन में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की स्पीच की जमकर तारीफ हुई। जैसे ही मोदी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में आए अमेरिकी संसद के दोनों सदनों के कुल 535 सदस्यों ने चार मिनट तक खड़े होकर तालियां बजाईं। इसके बाद जब उन्होंने स्पीच शुरू की जो 48 मिनट तक चली। इस दौरान सांसदों ने करीब 66 बार जोरदार तालियां बजाईं। इतना ही नहीं उन्हें 9 बार स्टैंडिंग ओवेशन भी दिया गया।

पीएम मोदी की इस आधिकारिक यात्रा में कई ऐसे समझौते किए गए जो भारत के विकास की गति को रफ्तार दे रही है।

  • भारत में छह AP 1000 रिएक्टरों का वेस्टिंगहाउस द्वारा भारत में निर्माण करने पर समझौता
  • भारत-अमेरिका आयात-निर्यात बैंक की स्थापना को लेकर करार
    2020 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन विकास रणनीतियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता
  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन असेंबली में एक साथ काम करना
  • ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन और गैस हाइड्रेट्स में सहयोग पर समझौता
  • वन्यजीव संरक्षण और वन्यजीवन तस्करी का मुकाबला करने के लिए सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता
  • भारत में 175 जीडब्ल्यू नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित करने के लिए समझौता
  • 2020 तक संयुक्त रूप से प्रति वर्ष 100 अरब डॉलर जुटाकर विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता
  • 2020 तक 10 मिलियन घरों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पर समझौत
  • अमेरिका-भारत स्वच्छ ऊर्जा हब बनाने के लिए एक करार
  • भारतीय वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी में भारत में अक्षय ऊर्जा निवेश में वृद्धि पर करार
  • 40 मिलियन यूएस डॉलर का यूएस-इंडिया कैटलिटिक सोलर फाइनेंस प्रोग्राम
  • इनोवेशन के जरिये स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) निवेश को दोगुना करने के लिए पेरिस में सीओपी -21 के दौरान संयुक्त रूप से लॉन्च किया।
  • अनुसंधान और विकास पर सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता। इसके लिए स्मार्ट ग्रिड और ग्रिड भंडारण में आगामी 30 करोड़ डॉलर के सार्वजनिक-निजी अनुसंधान प्रयासों की घोषणा।
  • व्यापार नीति फोरम (टीपीएफ) के तहत व्यापार और निवेश के मुद्दों पर समझौता
  • भारत के स्मार्ट सिटी कार्यक्रम में यू.एस. के निजी क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी
  • पर्यटन, व्यवसाय और शिक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच समझौता

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