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प्रधानमंत्री का किसानों से संवाद, कहा 4 वर्षों में हुई अभूतपूर्व प्रगति, 2022 तक आय दोगुनी करने का लक्ष्य

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को एप के माध्यम से देशभर के किसानों से संवाद किया। इस दौरान श्री मोदी ने कहा कि सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। पिछले चार वर्षों में सरकार ने जमीन के रखरखाव से लेकर, अच्छी क्वालिटी के बीज, बिजली-पानी से लेकर बाजार उपलब्ध कराने तक एक संतुलित और व्यापक योजना के तहत कार्य करने का भरकस प्रयास किया है। इस मौके पर श्री मोदी ने खेती से जुड़े किसानों के अनुभव सुने और कहा कि किसान जिस तरह से आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं और प्रगति कर रहे हैं, इसे देखकर काफी गर्व होता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “किसान हमारे अन्नदाता है। किसान लोगों को भोजन देते हैं, पशुओं को चारा देते हैं, उद्योगों के लिए कच्चा सामान देते हैं। पूरे देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और अर्थव्यवस्था को बदलने का पूरा श्रेय किसानों को जाता है। देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों ने खून पसीना एक कर दिया, लेकिन शुरू से ही किसान की चिंता किसी ने नहीं की और उन्हें उनके नसीब पर छोड़ दिया गया।”

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने 2022 तक देश के किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। किसानों को साथ लेकर, नीतियों को बदल कर आगे बढ़ना है, रुकावटों को खत्म कर आगे बढ़ना है। सरकार लक्ष्य को पाने के लिए सभी किसानों साथ लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की लागत करने, उपज का उचित मूल्य दिलाने, पैदावार की बर्बादी रोकने और आमदनी के वैकल्पिक स्रोत तैयार करने के चार बिंदुओं को लेकर आगे बढ़ रही है। किसानों को फसल की उचित कीमत के लिए इस बार के बजट में सरकार ने तय किया है कि अधिसूचित फसलों के लिए एमएसपी लागत का कम से कम डेढ़ गुना घोषित किया जाएगा। इस लागत में दूसरे श्रमिको का परिश्रम, मशीन और मवेशी का खर्च, बीज व खाद का खर्च, सिंचाई का खर्च, लीज पर ली गई जमीन का किराया और किसान की मेहनत को भी जोड़ा जाएगा। कृषि विकास और किसान कल्याण के लिए सरकार ने कृषि के बजट आवंटन बढ़ाया है। श्री मोदी ने कहा कि पिछली सरकार ने पांच वर्षों में कृषि के लिए 1,21,000 करोड़ आवंटित किए थे, वहीं हमारी सरकार ने 2019 तक लगभग दोगुना 2,12,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह किसानों के कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है।

चार वर्षों में कृषि क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज सिर्फ अनाज ही नहीं बल्कि फल, सब्जी और दूध का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है, पिछले चार वर्षों में कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्ष 2017-18 में खाद्यान्न उत्पादन करीब 280 मिलियन टन से अधिक हुआ है जबकि 2010 से 2014 तक पिछली सरकार के दौरान औसत 250 मिलियन टन के आसपास रहा था। दलहन के उत्पादन में 10.5 प्रतिशत, बागवानी में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मछली पालन में 26 प्रतिशत और पशुपालन व दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार का प्रयास है कि बुआई से पहले और फसल कटाई के बाद भी किसानों को मदद मिले। बुआई से पहले मिट्टी का स्वास्थ्य पता करने के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड दिया जा रहा है। अब तक 12.5 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड दिए जा चुके हैं। किसानों को अच्छी किस्म के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यूरिया की कालाबाजारी रोकी गई है, अब देशभर में 100 प्रतिशत नीम कोटेड यूरिया उपलब्ध है। हर खेत को पानी मिली इसके लिए देश में करीब 100 सिंचाई परियोजानाएं पूरी की जा रही हैं। प्राकृतिक आपदा में फसल खराब होने पर उसकी भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना है। फसल के उचित दाम दिलाने और बिचौलियों को दूर करने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म eNAM है।

प्रधानमंत्री ने सुनीं किसानों की सफलता की कहानी
प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर के अलग-अलग जिलों में जुटे किसानों से संवाद भी किया। छत्तीसगढ़ के कांकेर की आंठवी तक पढ़ी प्रगतिशील किसान चंद्रमणि ने बताया कि कैसे उन्होंने 10-15 महिलाओं का समूह बनाकर शरीफा की खेती की और आज उनके साथ 300 महिलाएं जुड़ी हैं। आज इनकी आय दोगुनी हो गई है। कांकेर के ही आसाराम नेताम ने बताया कि कृषि विकास केंद्र के संपर्क में आकर उन्होंने खेती के साथ मछली पालन और पशुपालन शुरू किया, इससे उनकी आय 5-6 लाख रुपया सालाना हो गई। कांकेर के किसान चित्रसेन सोनकर ने प्रधानमंत्री मोदी का खासा प्रभावित किया। चित्रसेन सोनकर को प्रधानमंत्री सिंचाई योजना से ड्रिप इरीगेशन के लिए सब्सिडी मिली और उन्होंने अपने खेत पर ड्रिप सिंचाई से तरबूज की खेती शुरू की। इससे उनकी आमदनी 1 लाख बीस हजार सालाना से बढ़कर 7 लाख रुपये हो गई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कम पानी में अधिक फसल पाने के लिए ड्रिप इरिगेशन यानि टपक सिंचाई अच्छा माध्यम है। देशभर में कृषि सिंचाई योजना को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। 30 लाख हेक्टेयर जमीन इस योजना के तहत जोड़ी गई है।

मुर्गीपालक चंपा के काम से प्रभावित हुए प्रधानमंत्री
मध्यप्रदेश के झाबुआ में मुर्गी पालक चंपा निनामा की सफलता की कहानी से प्रधानमंत्री काफी प्रभावित दिखे। चंपा ने कड़कनाथ किस्म के मुर्गे का पालन शुरू किया है और एक साल में उनकी एक लाख रुपये की आमदनी हो गई है। चंपा अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी कड़कनाथ पालन के लिए प्रेरित कर रही हैं। झाबुआ की ही युवा महिला किसान नेहा ने बताया कि उन्होंने ड्रिप सिंचाई से टमाटर की खेती को बढ़ाया है, अब उनके खेत में 500 क्विंटल की जगह 800 क्विंटल की पैदावार होती है। झाबुआ के ही आदिवासी युवा किसान राजू हतीला और मुकेश ने बताया कि उन्होंने सरकारी योजना की मदद से आधुनिक कृषि यंत्र खरीदे और आस-पास के किसानों को आधुनिक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए उन्हें किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए। इससे इन युवा किसानों को 8 से 10 लाख रुपये की कमाई हो रही है।

प्रधानमंत्री से अपने अनुभव साझा करते हुए महाराष्ट्र के शोलापुर की किसान अनीता ने बताया कि उन्होंने किसान उत्पादक समूह बनाकर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी बनाई। अनीता अपने क्षेत्र में तूर दाल के किसानों की फसल लेकर उसकी पॉलिशिंग कर सीधे उपभोक्ताओं को बेचती हैं। इससे इलाके के किसानों को काफी फायदा हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि देश में 4 वर्ष में 500 से अधिक किसान उत्पादक संगठनों का गठन हुआ है। बजट में सरकार ने किसान उत्पादक कंपनी को इनकम टैक्स में छूट प्रदान की है।

सॉयल हेल्थ कार्ड बना वरदान
कर्नाटक के रामनगर जिले के किसानों ने बताया कि किस तरह सॉयल हेल्थ कार्ड उनके लिए वरदान साबित हो रहा है। किसान जयराम ने बताया कि वो 6 एकड़ की जमीन पर फल-सब्जी की खेती करते थे लेकिन सॉयल हेल्थ कार्ड बनवाने पता कि जमीन में कई पोषक तत्वों की कमी है। अब सही मात्रा में उर्वरक के इस्तेमाल से उपज बढ़ गई है। यानि पहले जहां 4 लाख के खर्च पर 5 लाख की आय होती थी, अब 7 लाख रुपये सालाना की आय होती है। रामनगर जिले की ही महिला किसान कमलम्मा ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि सॉयल टेस्टिंग के बाद खेती की तरीका बदलने और जैविक खाद के इस्तेमाल से आय 10 लाख रुपये तक बढ़ गई है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से मिल रही है मदद
प्रधानमंत्री मोदी से संवाद के दौरान कर्नाटक के किसान ज्ञानमूर्ति ने बताया कि 2016 में उनकी फसल खराब हो गई थी। उन्होंने 600 रुपये का प्रीमियम देकर फसल बीमा कराया था और फसल खराब होने पर 2017 में उन्हें बीमा का 30,500 रुपया मिला। इसी प्रकार किसान जयशंकर ने बताया कि उन्हें भी फसल खराब होने पर 2017 में 20,000 रुपये का फसल बीमा मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले फसल बीमा की हालत खराब थी, लेकिन किसानों की चिंता खत्म करने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत न सिर्फ प्रीमियम कम किया है, बल्कि इसका दायरा भी बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में क्लेम राशि दोगुने से अधिक हो गई है।

पशुपालन, मछली पालन पर सरकार का जोर
प्रधानमंत्री ने सिक्किम, पश्चिम बंगाल, राजस्थान के जोधपुर, ओडिशा के अंगुल और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के किसानों के अनुभव भी सुने। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार खेती के अलावा आय के वैकल्पिक साधनों जैसे मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, पशुपालन पर भी जोर दे रही है। सरकार की नीतियों की वजह से तीन वर्षों के दौरान मछली उत्पादन में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बार के बजट में सरकार ने पशुपालन और मछली पालन के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यूपीए सरकार के आखिर चार वर्षों में 850 करोड़ रुपये की तुलना में, केंद्र सरकार ने पिछले 4 वर्षों में 3,000 करोड़ रुपये मधुमक्खी पालन के लिए दिए हैं। अब पहले की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक शहद पैदा हो रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि किसानों को फसल की उचित कीमत मिले, इसके लिए पौने दो लाख मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार यानि ईनैम से जोड़ा गया है। सरकार 22,000 ग्रामीण हाटों को अपग्रेड करने का भी काम कर रही है। देशभर में 600 जिलों के कृषि विकास केंद्रों और दो लाख कॉमन सर्विस सेंटर्स में जुटे किसानों के साथ संवाद के दौरान श्री मोदी ने कहा, “जब देश के गांवों का, किसानों का उदय होगा तब ही भारत का भी उदय होगा। जब हमारा किसान सशक्त होगा, तब ही देश सशक्त होगा।”

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