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एक दलित प्रोफेसर ने खोली जेएनयू के राष्ट्र विरोधी गैंग की पोल, जानिए क्या है सच्चाई

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दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सिर्फ पढ़ाई नहीं होती है, यहां राष्ट्र विरोधी विचारधारा को खाद-पानी भी मिलता है। इस काम में सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि जेएनयू के प्रोफेसर भी संलिप्त है। यह सनसनीखेज खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि जेएनयू के ही एक दलित प्रोफेसर ने किया है। जाहिर है कि दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय 2016 में भारत विरोधी गतिविधियों और नारेबाजी के बाद सुर्खियों में आया था। 2016 में पूरे देश को पता चला की इस विश्वविद्यालय में छात्रों के भविष्य के साथ ही राष्ट्रविरोधी ताकतें भी पनपती हैं। जेएनयू में एक भारत विरोधी गैंग सक्रिय है। ये भारत विरोधी गैंग कभी सेना को गालियां देता रहा है, तो कभी प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में बोलता रहा है। इसी विश्वविद्यालय के टुकड़े-टुकड़े गैंग के कन्हैया कुमार, उमर खालिद और शेहला रशीद पूरे देश में घूम-घूम कर राष्ट्रविरोधी माहौल बनाने और दलितों, अल्पसंख्यकों को उकसाने में लगे हैं। अब जेएनयू के एक दलित प्रोफेसर ने खुलासा किया है कि क्यों जेएनयू की भारत विरोधी लॉबी प्रधानमंत्री मोदी से घृणा करती है।

डॉ. प्रवेश कुमार, प्रोफेसर, जेएनयू

सोशल जस्टिस का ढोंग करती है एंटी इंडिया लॉबी
संडे गार्जियन अखबार में छपी एक खबर के अनुसार जेएनयू के दलित प्रोफेसर डॉ. प्रवेश कुमार ने खुलासा किया है जेएनयू से संचालित होने वाले एंटी इंडिया गैंग के लोग इसलिए परेशान हैं, क्योंकि मोदी सरकार ने इनकी विदेशी फंडिंग पर लगाम लगा दी है। डॉ. कुमार ने हाल ही में जेएनयू के पूर्व छात्र रोना विल्सन की महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का उदाहरण देते हुए कहा है कि दशकों से इस तरह के लोग जेएनयू कैंपस से सोशल जस्टिस के नाम पर अपनी दुकान चलाते रहे हैं। जाहिर है कि रोना विल्सन को माओवादी संगठनों के साथ कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

डॉ. कुमार ने जेएनयू के एंटी इंडिया लॉबी की पोल खोलते हुए कहा है कि ये लोग सामाजिक न्याय की बातें करते हैं और खुद ब्रांडेड कपड़े पहनते हैं, विदेशों में छुट्टियां मनाते हैं। उन्होंने कहा कि जेएनयू में एक प्रोफेसर को इतना पैसा नहीं मिलता है कि वो इतनी लक्जरी लाइफ जी सके। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों को मोदी सरकार का विरोध करने वाले एनजीओ और दूसरे संगठनों से विदेशों के जरिए फंडिंग होती है।

मोदी सरकार में मिला दलितों को सम्मान
जेएनयू के प्रोफेसर डॉ. कुमार ने कहा कि ये टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग आरोप लगाते हैं कि मोदी सरकार दलित विरोधी है, जबकि सच्चाई यह है कि दलितों के लिए जितना काम इस सरकार ने किया है, उतना कभी नहीं हुआ। इस दलित प्रोफेसर का कहना है कि इतिहास में भुला दिए गए लोगों को मोदी सरकार ने सम्मान दिया है, जेएनयू में कई सड़कों का नाम ऐसे लोगों के नाम पर रखा गया है।

डॉ. कुमार ने कहा कि अब जेएनयू का माहौल बदल रहा है। पहले इस विश्वविद्यालय में लेफ्ट मानसिकता वाले छात्रों का दबदबा था और दक्षिणपंथी विचारधारा के छात्रों को परेशान किया जाता था। अब ऐसा नहीं है, मोदी सरकार की नीतियों की वजह से यहां लेफ्ट विचारधारा और राष्ट्र विरोधी लोगों का प्रभाव कम हुआ है और देशहित के बारे में सोचने वालों को जगह मिल रही है।

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