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केजरीवाल सरकार का जारी है मुस्लिम तुष्टीकरण, डिप्टी सीएम सिसोदिया ने स्कूल में हिजाब पहनने का किया समर्थन, कहा- स्कूल में हिजाब पर नहीं है प्रतिबंध

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दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सत्ता में बने रहने के लिए शुरू से मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करते आ रहे हैं। पिछले सात साल में केजरीवाल सरकार ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए कई फैसले किए हैं। वहीं स्कूलों में यूनिफॉर्म की जगह हिजाब पहनने को लेकर देशभर में जारी विवाद के बीच दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने फिर मुस्लिमों को खुश करने की कोशिश की है। उन्होंने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हिजाब पहनने का खुलकर समर्थन किया है।

कर्नाटक के उडुपी से शुरू हुआ हिजाब विवाद अब दिल्ली पहुंच चुका है। मुस्तफाबाद के तुख्मीरपुर स्थित सरकारी स्कूल की एक नाबालिग छात्रा ने शिक्षक पर हिजाब उतरवाने का आरोप लगाया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में लड़की को यह आरोप लगाते सुना जा सकता है।  गुरुवार (24 फरवरी, 2022) को उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि स्कूलों में इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और कुछ लोग इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ”मैंने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि यह घटना कैसे हुई, लेकिन अभी तक मुझे नहीं लगता कि कोई समस्या है। हमारी स्कूल व्यवस्था और शिक्षा विभाग ने इस संबंध में कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।”

वहीं, स्थानीय विधायक हाजी यूनुस ने छात्रा के अभिभावक और विद्यालय प्रमुख से मुलाकात की और इस पूरे मामले की जानकारी ली। इस मामले पर हाजी यूनुस का कहना है कि स्कूल में ऐसा कोई विवाद नहीं है। यहां पहले से ही 20 से 25 प्रतिशत छात्राएं हिजाब पहनकर आ रही हैं। यह कोई नई बात नहीं है और न ही दिल्ली सरकार, शिक्षा विभाग या स्कूल की तरफ से हिजाब पर कोई प्रतिबंध है।

स्कूल छात्रा ने जिस शिक्षिका पर आरोप लगाया था, उन्हें स्कूल की ओर से चेतावनी भी दी गई है। इस मामले की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि अगर शिक्षिका की गलती निकलती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। उधर, राजकीय कन्या विद्यालय की प्रमुख सुशीला ने बताया कि इस तरह का स्कूल में कोई मामला नहीं है। एक अभिभावक जरूर शिक्षक की शिकायत लेकर आए थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। उनको लगा था कि कुछ गलत है, लेकिन अभिभावक संतुष्ट होकर गए थे। शिकायत दूसरी थी, जिसे गलत तरीके से लिया गया।

गौरतलब है कि पिछले कई दशकों से दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में मौजूदा प्रथा यह रही है कि अगर लड़कियां स्कूल जाने के रास्ते में हिजाब या स्कार्फ पहनती हैं, तो वे कक्षा में जाने से पहले स्कूल परिसर में प्रवेश करने पर इसे उतार देती हैं। इस मामले में एक बार जब लड़की ने स्कूल परिसर में प्रवेश किया, तो उसके शिक्षकों ने उससे मौजूदा प्रथा के अनुसार दुपट्टा उतारने का अनुरोध किया। बाद में, स्कूल के अधिकारियों ने उसके माता-पिता के साथ इस मामले पर चर्चा की और मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया।

आइए देखते हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कब-कब तुष्टीकरण के जरिए मुस्लिमों को खुश करने की कोशिश की है…

ईद मनाने की छूट, लेकिन छठ के आयोजन पर प्रतिबंध

पिछले साल दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने छठ महापर्व के आयोजन पर प्रतिबंध लगाकर पूर्वांचल के लोगों के साथ सौतेला और अपमानजनक व्यवहार किया था। हालांकि काफी विरोध के बाद लोग यमुना घाट पर छठ पूजा कर सके। तब सवाल उठ थे कि जब कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे थे, तब केजरीवाल सरकार ने बकरीद और ईद मनाने की छूट दी, अब मामले कम हो रहे हैं, तो छठ पूजा करने पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है ?

अखलाक के परिजनों से मिले केजरीवाल

साल 2015 में जब उत्तर प्रदेश में अखलाक की मौत हो गई तो अरविंद केजरीवाल दौड़ कर राजनीति करने पहुंच गए थे। अरविंद केजरीवाल ने 3 अक्टूबर, 2015 को ट्वीट कर लिखा था कि मैं रास्ते में हूं और अखलाक के परिजनों से मिलने जा रहा हूं। लेकिन फरवरी 2021 में जब उनके घर के पास ही दिल्ली के मंगोलपुरी में रिंकू शर्मा की हत्या मुस्लिम लड़कों ने कर दी तो वे चुप्पी साधे हुए थे।

द्वारका सेक्टर 22 में हज हाउस का निर्माण

दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने अयोध्या में राम मंदिर की जगह यूनिवर्सिटी बनाने की सलाह थी। लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार 100 करोड़ रुपये लागत से  द्वारका सेक्टर 22 में हज हाउस बनाने के लिए 5,000 स्क्वॉयर मीटर का प्लॉट आवंटित किया है। दिल्ली सरकार पिछले कई वर्षो से अपने बजट प्लान में हज हाउस के लिए बजट एलोकेशन करती आ रही है। वहीं हज हाउस के खिलाफ विरोध की आवाजें उठती रही हैं और विरोध-प्रदर्शन होते रहे हैं।

रामनवमी जुलूस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश

हनुमान भक्त केजरीवाल ने अप्रैल 2018 में दिल्ली में रामनवमी जुलूस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी। 5 अप्रैल, 2018 को दिल्ली विधानसभा में रामनवमी जुलूस के नाम पर माहौल खराब करने के विषय पर चर्चा होनी थी, लेकिन विधायक कपिल मिश्रा और बीजेपी विधायकों के मुखर विरोध के कारण चर्चा नहीं हो सकी। केजरीवाल के एजेंडे में “कथित साम्प्रदायिक उपद्रव भड़काने के प्रयास” पर चर्चा कर रामनवमी जुलूस पर प्रतिबंध लगाना शामिल था। ताकि मुस्लिमों को खुश किया जा सके। 

प्रदर्शन में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए देने की घोषणा

सीएए और एनआरसी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों के लिए दिल्ली वक्फ बोर्ड ने बड़ी घोषणा की। आम आदमी पार्टी के विधायक और बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्ला ने कहा कि हर एक मृतक के परिवार को वक्फ बोर्ड की ओर से 5-5 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। अमानतुल्ला ने देशभर में हो रहे सीएए और एनआरसी के विरोध-प्रदर्शन में मारे गए 20 लोगों की एक सूची जारी की। जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा में अपनी एक आंख गंवाने वाले छात्र मिन्हाजुद्दीन को अमानतुल्ला खान ने 5 लाख रुपए की सहायता राशि का चेक और वक्फ बोर्ड में पक्की नौकरी का नियुक्ति पत्र सौंपा।

मस्जिदों के इमामों के वेतन में दोगुनी बढ़ोतरी

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले दिल्ली की केजरीवाल सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण में जुटी थी। मुसलमानों को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की मस्जिदों के इमाम और मोअज़्ज़िन का वेतन करीब दोगुना करने का एलान किया। दिल्ली के 185 मस्जिदों के इमामों को 18 हज़ार रुपये वेतन दिया, पहले ये वेतन 10 हज़ार रुपये हुआ करता था। वही मुअज़्ज़िन को अब 16 हज़ार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जबकि अब तक मुअज़्ज़िन को 9 हज़ार रुपये मिला करता था।

वक़्फ़ बोर्ड के बाहर के मस्जिदों के इमामों को वेतन देने का ऐलान

इतना ही नहीं, दिल्ली सरकार ने दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के तहत ना आने वाली मस्जिदों के इमाम और मुअज़्ज़िन को भी वेतन देने का एलान कर दिया। ऐसा देश में पहली बार हुआ है कि वक्फ़ बोर्ड के दायरे के बाहर की मस्जिदों के इमाम और मुअज़्ज़िन को भी सरकार की जेब से तनख्वाह दी जा रही है। केजरीवाल ने दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए वक़्फ़ बोर्ड के दायरे के बाहर की मस्जिदों के इमामों को 14 हज़ार और मुअज़्ज़िन को 12 रुपये महीने वेतन देने का ऐलान किया। सीएम अरविंद केजरीवाल के अलावा उनके मंत्री इमरान हुसैन और दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्य्क्ष अमनातुल्ला खान मौजूद थे।

मुस्लिम वोट बैंक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार

केजरीवाल की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर है। इस वोट बैंक को पाने के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उनका हमेशा प्रयास रहा है कि मुस्लिम वोट नहीं बंटे और पूरे वोट उसे ही मिले। लोकसभा चुनाव-2019 के दौरान केजरीवाल ने सिविल लाइन स्थित अपने निवास पर ऑल इंडिया शिया सुन्नी फ्रंट के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस मौके पर केजरीवाल ने कहा कि मुस्लिम वोट बैंक नहीं बंटे इसके लिए हम कांग्रेस से गठबंधन करना चाहते थे। गठबंधन के लिए हर संभव प्रयास किए। मगर कांग्रेस ने गठबंधन नहीं किया। 

दिल्ली में करीब 20% वोटर मुस्लिम

गौरतलब है कि दिल्ली में मुसलमानों का वोट पहले कांग्रेस को मिलता था, लेकिन 2014 के बाद कांग्रेस की हालत पतली देख मुसलमानों ने आम आदमी पार्टी को वोट देना शुरू कर दिया। इन्हीं वोटों के कारण आम आदमी पार्टी ने 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 62 सीटें और 2015 के विधानसभा चुनाव में 67 सीटें हासिल कीं। दिल्ली में करीब हर पांचवां वोटर मुसलमान है और केजरीवाल इतनी बड़ी आबादी को लुभाने के लिए सारे हथकंडे आजमा रहे हैं।

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