नौकरीपेशा लोगों के लिए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 16 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि बचत के साथ पेंशन और बीमा सुरक्षा का लाभ भी मिलेगा। यानी नौकरी के साथ-साथ रिटायरमेंट और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा भी मजबूत होगी।

15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये हुई सीमा
अब तक 15,000 रुपये प्रति माह तक की वेतन सीमा EPFO के अनिवार्य कवरेज के लिए लागू थी। 15,000 रुपये से ज्यादा वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला कर्मचारी सामान्य तौर पर अनिवार्य EPF कवरेज में स्वतः शामिल नहीं होता था, हालांकि लागू वैधानिक प्रावधानों के तहत कुछ स्थितियां अलग हो सकती हैं। अब वेतन सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये किए जाने से 15,000 से 25,000 रुपये प्रति माह वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएगा। सरकार का अनुमान है कि इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO कवरेज से जुड़ सकते हैं।
Under the leadership of Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi, the Union Cabinet has approved the enhancement of the EPF wage ceiling from ₹15,000 to ₹25,000 per month.#ExpandingSocialSecurity pic.twitter.com/rWK5Fe1OGB
— Ministry of Labour & Employment, GoI (@LabourMinistry) September 16, 2026
PF के साथ पेंशन और बीमा का भी फायदा
EPFO के तहत सिर्फ भविष्य निधि यानी PF की सुविधा ही नहीं मिलती, बल्कि इसके साथ पेंशन और बीमा सुरक्षा भी जुड़ी है। बढ़ी हुई कवरेज के तहत पात्र कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) का लाभ मिलेगा। इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग के साथ पेंशन सुरक्षा और बीमा कवरेज का दायरा भी बढ़ेगा। लंबे समय में यह कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार कर सकता है।

2014 से 15 हजार रुपये पर अटकी थी सीमा
EPFO की वेतन सीमा को आखिरी बार सितंबर 2014 में बढ़ाया गया था। तब इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। इसके बाद पिछले वर्षों में वेतन, आय और औपचारिक रोजगार में लगातार बढ़ोतरी हुई, लेकिन EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा में बदलाव नहीं हुआ था। सरकार का कहना है कि कई राज्यों और अलग-अलग क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा सीमा के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में 25,000 रुपये की नई सीमा बढ़ते वेतन स्तर और बदलती रोजगार व्यवस्था के अनुरूप सामाजिक सुरक्षा ढांचे को अपडेट करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

रोजगार के औपचारीकरण को मिलेगा बढ़ावा
सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से रोजगार के औपचारीकरण को भी गति मिलेगी। ज्यादा कर्मचारियों को वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में लाने से औपचारिक रोजगार के फायदे व्यापक स्तर तक पहुंचेंगे। सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ने से कर्मचारियों को नौकरी बदलने या लंबे करियर के दौरान भी अधिक व्यवस्थित वित्तीय सुरक्षा मिल सकती है। नियोक्ताओं के लिए भी सुरक्षित और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा कार्यबल कर्मचारी प्रतिधारण, स्थिरता और मनोबल को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
EPFO की वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले का सरकार के खजाने पर भी असर पड़ेगा। आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, मौजूदा करीब 10,250 करोड़ रुपये के वार्षिक बजटीय समर्थन की तुलना में सरकारी खर्च बढ़कर लगभग 11,339 करोड़ रुपये सालाना हो सकता है। पांच साल की अवधि में इस फैसले पर अनुमानित सरकारी व्यय करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इस प्रस्ताव पर विस्तृत अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श किया गया था और व्यय वित्त समिति ने 16 जून 2026 की बैठक में इसकी सिफारिश की थी।

8 करोड़ के करीब योगदान देने वाले सदस्य
EPFO देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक का संचालन करता है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, EPFO से करीब 7.68 लाख योगदान करने वाले प्रतिष्ठान जुड़े हैं और लगभग 7.98 करोड़ योगदान करने वाले सदस्य हैं। वहीं, कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS के तहत करीब 82 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन लाभ मिल रहा है। EDLI के तहत EPF सदस्यता से जुड़ी बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध है। ऐसे में नई वेतन सीमा का असर एक बड़े मौजूदा सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क पर पड़ेगा।

कर्मचारियों की रिटायरमेंट सुरक्षा पर जोर
सरकार का कहना है कि भारत का कार्यबल देश की विकास यात्रा के केंद्र में है। जैसे-जैसे वेतन बढ़ रहा है, आय में सुधार हो रहा है और औपचारिक रोजगार का विस्तार हो रहा है, उसी के अनुरूप सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना भी जरूरी है। EPFO की वेतन सीमा बढ़ाने का फैसला इसी दिशा में उठाया गया कदम है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बढ़ते वेतन और औपचारिक रोजगार के साथ ज्यादा से ज्यादा कर्मचारी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनें।

विकसित भारत@2047 की दिशा में कदम
सरकार ने इस फैसले को एक समावेशी, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सरकार का जोर है कि आर्थिक विकास के साथ श्रमिकों की सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा भी आगे बढ़े। विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते भारत में मजबूत और सुरक्षित कार्यबल की अहम भूमिका है। EPFO की वेतन सीमा को 25,000 रुपये तक बढ़ाने से लाखों अतिरिक्त कर्मचारियों के लिए PF, पेंशन और बीमा सुरक्षा का रास्ता खुलेगा। अब श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी वैधानिक और प्रशासनिक कदम उठाएंगे। कुल मिलाकर, 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई EPFO वेतन सीमा लाखों कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने वाला बड़ा बदलाव है।









