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कोरोना संकट : पीएम मोदी ने विश्व में बढ़ाई भारत की साख, विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने का सुनहरा मौका

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि आज जब भारत लोगों की जान बचा सकता है, तो हम इस मौके को जाने नहीं दे सकते। भारत में मांग और बफर स्टॉक में कमी न हो यह सुनिश्चित करने के बाद हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वाइन के निर्यात का फैसला लिया गया है। भारत दुनिया में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वाइन का 70 प्रतिशत उत्पादन करता है। ऐसे समय में दवा के निर्यात का फैसला लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने जहां पूरे विश्व में अपने नेतृत्व का लोहा मनवाया है, वहीं भारत की साख को भी बढ़ाया है। इससे अमेरिका, जापान समेत अन्य देशों की कंपनियों को भारत की तरफ आकर्षित करने में मदद मिल सकती है, जो अपने कारखानों को चीन से बाहर लाने की तैयारी कर रही है।  

इस गहन संकट के समय विश्व भारत की ओर उम्मीदों से देख रहा है। इसका कारण प्रधानमंत्री मोदी की ओर से पहले सार्क और फिर जी-20 के जरिये यह दिखाना रहा है कि कोरोना के कहर से मिलकर कैसे निपटा जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं से संवाद किया है, उससे काफी सकारात्मक संदेश गया है।

विश्व समुदाय भारत की सराहना करने के साथ इस पर भी निगाह लगाए है कि वह कोरोना संकट से कैसे पार पाता है? स्पष्ट है कि कोरोना के कहर को थामकर भारत एक मिसाल कायम करने के साथ उन उम्मीदों को पूरा कर सकता है जो विश्व समुदाय उससे लगाए हुए है। प्रधानमंत्री मोदी विश्व समुदाय की इस भावना को पहचान चुके हैं। इसलिए कोरोना के संक्रमण को थामने के लिए युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं। चूंकि यह एक कठिन लड़ाई है इसलिए मोदी सरकार भी हर मुमकिन कोशिश कर रही है।

आज जब विश्व भारत की ओर निहार रहा है तब वह चीन के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन को कठघरे में भी खड़ा कर रहा है, क्योंकि इस संगठन ने चीन के सुर में सुर मिलाकर दुनिया को समय रहते चेताया नहीं। उसने चीन की गोद में बैठने का जो काम किया, उसके कारण ही उसकी फजीहत हो रही है।

हालांकि चीन ने कोरोना वायरस के गढ़ वुहान के लॉकडाउन को खत्म करने की घोषणा कर दी है, लेकिन इसमें संदेह है कि उसने महामारी बन गई कोविड-19 बीमारी पर वास्तव में काबू पा लिया है। इन दिनों तमाम वैज्ञानिक इसकी पुष्टि कर रहे हैं कि कोरोना वायरस चमगादड़ या फिर पैंगोलिन के जरिये वुहान के लोगों के शरीर में आया और फिर वहां से दुनिया में फैला। कायदे से चीन को अपने लोगों को वन्य जीवों को खाने से रोकने के साथ कोरोना वायरस का संक्रमण फैलाने के लिए विश्व समुदाय से खेद व्यक्त करना चाहिए।

इस समय दुनिया यह स्मरण करने को विवश है कि इसके पहले किस तरह सार्स और एच-1एन-1 वायरस ने दुनिया पर कहर ढाया था। जैसे आज कोरोना के कारण विश्व अर्थव्यवस्था घुटनों के बल आ गई है वैसे ही सार्स और एच-1एन-1 के संक्रमण के दौरान भी उसे बहुत नुकसान उठाना पड़ा था।

चूंकि चीन न तो लोकतांत्रिक तौर-तरीके अपनाने को तैयार है और न ही अपने सामाजिक-राजनीतिक व्यवहार को बदलने के लिए। इसलिए अमेरिका, जापान समेत अन्य अनेक विकसित देश अपने कारखाने चीन से बाहर लाने की तैयारी कर रहे हैं। यह उचित भी है, क्योंकि इसका औचित्य नहीं कि चीन दुनिया का कारखाना बना रहे। विकसित देशों की ओर से अपने कारखाने चीन से बाहर निकालने की तैयारी भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है। इस अवसर को भुनाने के लिए हरसंभव कदम उठा रही  है। यदि विकसित देशों के चीन में स्थापित कारखाने भारत आ सकें तो इससे देश के आर्थिक भविष्य को कहीं अधिक आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है।

आइए, आपको बताते हैं कि इस संकट में कैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरे विश्व के लिए संकटमोचक बनकर उभरे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को थैंक्स कहा

कोरोना वायरस संकट पर भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा मिलने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने थैंक्यू इंडिया कहा। इसपर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं कि इस तरह के समय में दोस्त और करीब आते हैं। भारत और अमेरिका की साझेदारी पहले से ज्यादा मजबूत है। भारत कोरोना महामारी के खिलाफ मानवता की लड़ाई में हरसंभव मदद करेगा। हम लोग मिलकर इस लड़ाई को जीतेंगे। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ट्वीट संदेश में भारत और प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद कहा था।

‘प्रभु हनुमान की तरह पहुंचाई संजीवनी बूटी’

ब्राजील के राष्‍ट्रपति जायर एम बोल्‍सोनारो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना भगवान हनुमान से की करते हुए हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवा को संजीवनी बूटी बताया है। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से दी गई इस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से लोगों के प्राण बचेंगे और इस संकट की घड़ी में भारत और ब्राजील मिलकर कामयाब होंगे। प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में राष्‍ट्रपति बोल्‍सोनारो ने लिखा है कि जिस तरह हनुमान जी ने हिमालय से पवित्र दवा (संजीवनी बूटी) लाकर भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण की जान बचाई थी, उसी तरह भारत और ब्राजील एक साथ मिलकर इस वैश्विक संकट का सामना कर लोगों के प्राण को बचा सकते हैं।

इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने जताया भारत का आभार

कोरोना वायरस महामारी को खत्म करने के लिए फिलहाल सबसे अहम दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन है। भारत ने इस दवा की खेप इजरायल को भिजवाई है। दवा मिलने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शुक्रिया अदा किया। इसके जवाब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें साथ मिलकर इस महामारी से लड़ना होगा। भारत अपने मित्रों के लिए जो संभव है, वह करने को तैयार है। इजरायल के लोगों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

अमेरिका इजरायल और ब्राजील के अलावा भारत ने स्पेन, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव समेत कई देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा समेत दूसरी सहायता देने का फैसला किया है।

पीएम मोदी की पहल पर वर्चुअल जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन

वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ के लिए 26 मार्च को वर्चुअल जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस वर्चुअल मीटिंग के आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी भूमिका रही है। इस वीडियो संवाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वैश्विक समृद्धि, सहयोग के लिए हमारे दृष्टिकोण के केंद्र बिंदु में आर्थिक लक्ष्यों के स्थान पर मानवता को रखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके साथ ही दुनिया भर में कहीं अधिक अनुकूल, प्रतिक्रियात्मक और सस्ती मानव स्वास्थ्य सुविधा प्रणाली का विकास करने की वकालत की। सऊदी अरब की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में कोरोना वायरस महामारी को रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए G-20 नेताओं ने सभी आवश्यक उपाय करने पर सहमति व्यक्त की। बैठक के दौरान, जी20 के नेताओं ने महामारी को रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करने पर सहमति जताई। उन्होंने चिकित्सा आपूर्तियों की पहुंच, डायग्नोस्टिक उपकरण, इलाज, दवाएं और टीके समेत महामारी के खिलाफ लड़ाई में डब्लूएचओ को और मजबूत करने का समर्थन किया।

कोविड महामारी के मद्देजनर सार्क देशों की वर्चुअल मीटिंग

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर कोरोना वायरस को लेकर सार्क देशों के नेताओं की वर्चुअल मीटिंग बुलाई गई। इस बैठक में श्रीलंका, मालदीव, नेपाल और भूटान के अलावा पाकिस्तान ने भी भाग लिया और कोरोना से लड़ने के लिए विचार विमर्श और मिलकर लड़ने का फैसला किया। कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन (SAARC) ने आपातकालीन फंड बनाने के घोषणा की है। इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि हम इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं, मैं इस वायरस के प्रसार से निपटने के भारत के अनुभव को संक्षेप में साझा करना चाहूंगा। हमारा मार्गदर्शक मंत्र है- ‘तैयार रहें, मगर घबराएं नहीं।’

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