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राहुल गांधी की भी नहीं सुन रही गहलोत सरकार, राष्ट्रपति से सम्मानित यूथ आइकॉन को ही भुला दिया, राजस्थान में इनको सम्मान न सुविधाएं, पहचान-पत्र तक नहीं

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कांग्रेस के पचास साल के युवा राहुल गांधी युवाओं को आगे लाने की बात तो कहते हैं, लेकिन उनकी बात दूसरों की जानें दें, उनकी अपनी पार्टी की सरकारें ही नहीं सुन रहीं हैं। राजस्थान की गहलोत सरकार में आम युवा की ही नहीं, राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय युवा पुरुस्कार से सम्मानित युवाओं की ही अनदेखी की जा रही है। जबकि अन्य राज्य सरकारें ऐसे युवाओं को सम्मान और सुविधाएं दे रही हैं। राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने तो राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित यूथ आइकॉन को भुला ही दिया है। यूथ ब्रांड एम्बेसेडर की स्पष्ट व्याख्या न होने से जनसेवा में नाम रोशन करने वाले युवाओं को खिलाड़ियों के कमतर आंका जा रहा है।

यूथ एम्बेसेडर कौन, राजस्थान में अब तक इसकी स्पष्ट व्याख्या तक तय नहीं
राजस्थान में हालात यह हैं कि युवाओं को उनकी सेवा पर प्रोत्साहित करने वाला सरकारी सिस्टम ही उनको हतोत्साहित करने में लगा है। राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित यूथ आइकॉन को सरकार भूल गई है। इनको सुविधाएं मुहैया कराना तो दूर, पहचान पत्र भी नहीं दिया जा रहा है। दरअसल, युवा दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा पर साल 15 से 29 वर्ष युवाओं को राष्ट्रीय युवा सम्मान दिया जाता है। सम्मानजनक शब्दों से प्रोत्साहित किया जाता है। राज्य सरकारें इन्हें विशेष पहचान पत्र देती हैं। सुविधाओं के साथ नौकरी में भी प्राथमिकता देती हैं।

 

युवा अवार्डियों के लिए सरकार ने अभी तक कोई विचार नहीं किया
राजस्थान में ऐसा नहीं हो रहा है। यहां के 48 यूथ आइकॉन पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है और उन्हों कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। युवा दिवस पर सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में काम कर राष्ट्रीय युवा पुरुस्कार पाने वालों की स्थिति की पड़ताल की तो पता चला कि खिलाड़ियों को तो सरकार सपोर्ट करती है, उन्हें रोजगार भी मिल जाता है और स्पांसर भी, लेकिन समाज सेवा करने वाले युवा अवार्डियों के लिए सरकार ने अभी तक कोई विचार ही नहीं किया है।

राजस्थान में राष्ट्रीय स्तर की जनसेवा, राज्य स्तरीय खेल प्रतिभाओं से भी कमतर

ऐसा भी तब हो रहा है, जबकि खिलाड़ी और सेवाभावी युवा दोनों एक ही मंत्रालय के तहत आते हैं। हैरानी की बात यह है कि युवा मामले एवं खेल विभाग ने पिछले दो सालों से बजट का एक प्रतिशत हिस्सा भी युवा मामलों के लिए सुरक्षित नहीं रखा है। क्योंकि खेल से राष्ट्रीय स्तर की जनसेवा को राज्य स्तरीय खेल प्रतिभाओं से भी कमतर माना जा रहा है। यूथ आइकॉन को अपनी पहचान और सुविधाओं में प्राथमिकता केलिए सरकार की ओर देखना पड़ रहा है।

पिछले दो साल से युवाओं के लिए बजट आवंटित ही नहीं
यूथ अवार्डी फेडरेशन राजस्थान चैप्टर के अध्यक्ष सुरेश शर्मा के मुताबिक सालों से अब तक किसी भी अवार्डी का न तो पहचान पत्र बना है और न ही सरकार द्वारा सुविधा या योजना मे जोड़ा गया। आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार 2018-19 में युवा मामलों को 242 लाख का बजट मिला था, लेकिन 2019 से लेकर 2021 तक बजट आवंटित ही नहीं किया गया। राजस्थान सरकार द्ववारा पहचान पत्र और रोडवेज के फ्री पास जारी करने के लिए फेडरेशन के स्टेट कार्डिनेटर अनुज विलियम्स ने उप सचिव को पत्र लिखा, लेकिन जवाब तक नहीं दिया गया।

मुख्यमंत्री गहलोत ने सिर्फ घोषणाएं कीं, पूरी एक भी नहीं
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले साल नवम्बर में राज्य के स्काउट-गाइड और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों को राजकीय नौकरियों में प्राथमिकता देने की घोषणा की थी, ये घोषणा पूरी नहीं हुई। सीएम द्वारा बजट घोषणा में राज्य के यूथ ब्रांड एम्बेसडर के लिए निशुल्क बस पास की घोषणा की गई थी, लेकिन यूथ एम्बेसेडर की व्याख्या ही नहीं की गई और न ही परिवहन विभाग के पास ऐसी सूची भिजवाई गई।

अन्य राज्यों में सम्मान भी और सुविधाएं भी
हरियाणा सरकार द्वारा अर्जुन पुरुस्कार और युवा पुरुस्कार विजेताओं को एक जैसे बस पास जारी किये जाते हैं।
कर्नाटक सरकार द्वारा रियायती दरों पर हाउसिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय युवा पुरुस्कार विजेताओं को रियायती दर पर सर्किट हाउस की सुविधा दी गई है।
आंध्र प्रदेश में इन विजेताओं को रक्तदान, नेत्रदान, सरकारी स्कीम के जागरुकता शिविर आदि आयोजित करने के लिए खास रेजिडेंशिल साइट उपलब्ध कराई गई है।

 

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