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कोरोना के कहर से निपटने के लिए एक्शन में मोदी सरकार, राज्यों को मेडिकल ऑक्सीजन का बफर स्टॉक रखने का निर्देश

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक ओमिक्रॉन के रूप में कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। विश्व के कई देशों में ओमिक्रॉन कहर बरपा रहा है। इसी बीच भारत में भी कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कोरोना वायरस की चपेट में अब तक कई बड़े नेता भी आए चुके हैं। ज‍िसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उनकी सरकार पूरी तरह सतर्क है और जरूरी कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की हालात पर पैनी नजर है और वो अधिकारियों के साथ कोरोना को लेकर उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठकें कर रहे हैं।

मोदी सरकार ने राज्‍य व केंद्र शास‍ित प्रदेशों की सरकारों को पत्र ल‍िखकर क‍िसी भी आपातकालीन स्‍थ‍ित‍ि से न‍िपटने के ल‍िए तैयार रहने को कहा है। साथ ही सभी को अपने पास कम से कम 48 घंटे के ल‍िए पर्याप्‍त मेड‍िकल ऑक्‍सीजन का बफर स्‍टॉक रखने का निर्देश दिया है। मरीजों की समुचित देखभाल के लिए सभी स्वास्थ्य सुविधाएं सुन‍ि‍श्‍च‍ित करने पर जोर दिया है। सभी जिलों को अपने यहां स्थित अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरणों, जिनमें वेंटिलेटर, बाइपेप, एसपीओ2 सिस्टम शामिल हैं, को सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि जरूरत के मुताबिक उनका उपयोग किया जा सके। गौरतलब है कि रविवार ( 9 जनवरी, 2022) को एक उच्च स्तरीय बैठक में कोरोना से उत्पन्न हालात की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जिला स्तर पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने और मिशन मोड में बच्चों के वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज करने पर जोर दिया था।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश

  • मेडिकल ऑक्सीजन का 48 घंटे के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक रखें।
  • मरीजों की देखभाल के लिए सभी स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करें।
  • लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की उपलब्धता बनाये रखें।
  • पर्याप्त रूप से भरे हुए एलएमओ टैंक की निर्बाध सप्लाई होनी चाहिए।
  • पीएसए संयंत्रों को पूरी तरह फंक्शनल रखने के लिए कदम उठाए। 
  • ऑक्सीजन सिलेंडरों को भरकर रखे और उनकी पर्याप्त सूची हो।
  • ऑक्सीजन नियंत्रण कक्षों को फिर से फंक्शनल किया जाना चाहिए।
  • लाइफ सपोर्ट उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  • राज्य अपनी मेडिकल ऑक्सीजन सेवाओं-सुविधाओं का आकलन करें।
  • निजी संस्थानों की क्षमताओं का भी आकलन किया जाना चाहिए।
  • पीक के समय मांग बढ़ने पर आपूर्ति बढ़ाने की रणनीति तैयार करें।

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