प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए शुरू की गई पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने पांच साल पूरे कर लिए हैं। 13 अक्टूबर 2021 को शुरू हुई यह पहल अब एक व्यापक डिजिटल नियोजन व्यवस्था के रूप में विकसित हो चुकी है। इसके जरिये केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक मंच पर लाकर सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाओं की एकीकृत योजना बनाने में मदद मिल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग परियोजनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, समय और लागत बचाना तथा मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर इस्तेमाल करना है। जीआईएस आधारित इस मंच पर विभिन्न विभागों के आंकड़ों को एक साथ देखा जा सकता है। इससे परियोजनाओं की योजना बनाते समय संपर्क सुविधाओं, भौगोलिक परिस्थितियों और आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखकर फैसले लेने में मदद मिलती है।
58 मंत्रालयों और सभी राज्यों को जोड़ने वाला मंच
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के दायरे में 58 केंद्रीय मंत्रालय और विभाग तथा सभी 36 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। 12 अक्टूबर 2026 तक इस मंच पर 23,493 से अधिक डेटा लेयर उपलब्ध थीं। इनके माध्यम से बुनियादी ढांचे और उससे जुड़ी दूसरी महत्वपूर्ण जानकारियों को साझा किया जाता है। इस योजना में सात प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्र शामिल हैं—सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा। भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, ड्राई पोर्ट और उड़ान जैसी योजनाओं से संबंधित जानकारी भी इसमें शामिल है। पीएम गतिशक्ति के छह प्रमुख सिद्धांत हैं—एकीकृत विकास, बहु-माध्यमीय बुनियादी ढांचा, अंतिम छोर तक संपर्क सुविधा, भूमि अधिग्रहण में तेजी, मंजूरियों की संख्या में कमी और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना। इनका उद्देश्य परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन को अधिक समन्वित बनाना है।
18.66 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का मूल्यांकन
पीएम गतिशक्ति के तहत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की जांच और समन्वय के लिए नेटवर्क नियोजन समूह (एनपीजी) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 11 अगस्त 2026 तक इस समूह ने लगभग 18.66 लाख करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली 396 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया था। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी थी और 198 परियोजनाएं कार्यान्वयन के चरण में थीं। इस व्यवस्था में तीन स्तरों पर काम होता है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाला अधिकार प्राप्त सचिवों का समूह मास्टर प्लान के क्रियान्वयन और उसमें बदलावों की समीक्षा करता है। नेटवर्क नियोजन समूह परियोजनाओं का मूल्यांकन कर उनके बीच तालमेल सुनिश्चित करता है। वहीं, तकनीकी सहायता इकाई विशेषज्ञों के जरिये मूल्यांकन प्रक्रिया में सहयोग देती है।
डिजिटल मंच पर उपलब्ध 230 डेटासेट
पीएम गतिशक्ति का इस्तेमाल केवल बुनियादी ढांचे का नक्शा देखने के लिए नहीं, बल्कि परियोजनाओं के लिए उपयुक्त स्थान और मार्ग चुनने में भी किया जाता है। इसके माध्यम से अलग-अलग परिवहन नेटवर्क, आर्थिक क्षेत्र, भौगोलिक विशेषताएं और संपर्क सुविधाओं की कमियां एक साथ देखी जा सकती हैं। अक्टूबर 2025 में इस मंच को निजी क्षेत्र के लिए भी नियंत्रित रूप से उपलब्ध कराया गया। फिलहाल इसके सार्वजनिक मंच पर भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़े 230 अनुमोदित डेटासेट उपलब्ध हैं। इनके आधार पर स्थल की उपयुक्तता, मार्ग निर्धारण, संपर्क सुविधाओं और अनुपालन संबंधी पहलुओं का विश्लेषण किया जा सकता है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी डिजिटल समन्वय को मजबूत किया जा रहा है। एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) सरकारी प्रणालियों के बीच आंकड़ों के आदान-प्रदान में मदद करता है, जबकि लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक आयात-निर्यात कंटेनरों की आवाजाही पर वास्तविक समय में नजर रखने की सुविधा देता है। जुलाई 2026 तक यूएलआईपी ने 142 एपीआई के जरिये 12 केंद्रीय मंत्रालयों की 46 सरकारी प्रणालियों को एकीकृत किया था।
पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे से जोगीघोपा तक
पीएम गतिशक्ति के इस्तेमाल का एक उदाहरण 699 किलोमीटर लंबा पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे है। इस परियोजना से महाराष्ट्र और कर्नाटक के औद्योगिक एवं आर्थिक क्षेत्रों को जोड़ने की योजना है। इसके 2027-28 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह परियोजना 15 राष्ट्रीय राजमार्गों, 25 राज्य राजमार्गों और छह रेलवे स्टेशनों को जोड़ेगी। पीएम गतिशक्ति मंच की मदद से इस परियोजना के मार्ग में बदलाव किया गया, जिससे वन भूमि के साथ होने वाले ओवरलैप को 19 प्रतिशत तक कम किया गया। परियोजना से यात्रा के समय में सात से आठ घंटे की कमी आने, हर साल लगभग 16 करोड़ लीटर ईंधन बचने और कार्बन उत्सर्जन में करीब 39 करोड़ किलोग्राम की कमी आने का अनुमान है। असम में जोगीघोपा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क को सड़क, रेल और अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिये माल ढुलाई बेहतर बनाने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ब्रह्मपुत्र नदी पर धुबरी और फूलबाड़ी के बीच चार लेन का पुल बनाया जा रहा है। पुल बनने के बाद दोनों स्थानों के बीच यात्रा दूरी 205 किलोमीटर से घटकर 20 किलोमीटर और यात्रा का समय लगभग सात घंटे से घटकर 30 मिनट होने की उम्मीद है।
हरित ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने की तैयारी
पीएम गतिशक्ति के तहत लद्दाख से हरियाणा तक हरित ऊर्जा गलियारे की योजना भी बनाई गई है। इसमें लद्दाख के पांग और हरियाणा के कैथल के बीच 480 किलोमीटर लंबी उच्च वोल्टेज प्रत्यक्ष धारा पारेषण लाइन शामिल है। इस परियोजना के जरिये 5 गीगावाट की पारेषण प्रणाली के माध्यम से 13 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने में मदद मिलेगी। इसे वित्त वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बिहार में खगड़िया-पूर्णिया गलियारे के उन्नयन की योजना भी इसी एकीकृत दृष्टिकोण का उदाहरण है। इसके तहत पांच आर्थिक केंद्रों और 11 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को जोड़ने का प्रस्ताव है। इनमें वस्त्र क्लस्टर, मेगा फूड पार्क और मत्स्य एवं समुद्री खाद्य पार्क शामिल हैं। इससे क्षेत्र में लोगों और वस्तुओं की आवाजाही बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

गतिशक्ति विश्वविद्यालय और नई परिवहन व्यवस्था
परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने के लिए वर्ष 2022 में गतिशक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। यह पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देता है। जुलाई 2026 तक विश्वविद्यालय के पीएम गतिशक्ति से जुड़े पाठ्यक्रमों के जरिये 2.4 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका था। इसके अलावा, एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण की स्थापना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। यह दस वर्ष या उससे अधिक की अवधि को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करेगा। साथ ही 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन और उनके क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। फास्टैग, वाहन और जीएसटीएन ई-वे बिल जैसे स्रोतों की जानकारी को जोड़कर राष्ट्रीय परिवहन डेटा रिपॉजिटरी विकसित करने की भी योजना है।
पीएम गतिशक्ति के पांच साल का सफर दिखाता है कि बुनियादी ढांचे की योजना बनाने में डिजिटल आंकड़ों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की भूमिका बढ़ी है। अब इस व्यवस्था का उद्देश्य मंत्रालयों, राज्यों और अलग-अलग परिवहन नेटवर्कों को जोड़कर परियोजनाओं की योजना को अधिक प्रभावी बनाना है। आने वाले समय में इसका महत्व इस बात से भी तय होगा कि बेहतर नियोजन से संपर्क सुविधाओं, माल ढुलाई और संसाधनों के इस्तेमाल में कितना सुधार आता है।









